ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
HATHRAS सड़क पर वाहनों की चेकिंग के दौरान व्यवस्था बनाए रखना ट्रैफिक पुलिस की जिम्मेदारी है, लेकिन जब चेकिंग को लेकर वाहन चालक और पुलिसकर्मी आमने-सामने आ जाएं तो मामला तेजी से विवाद का रूप ले लेता है। ऐसा ही एक मामला सामने आया है, जहां चेकिंग के दौरान एक ऑटो चालक और ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के बीच कहासुनी के बाद हंगामा खड़ा हो गया। घटना का वीडियो बनाए जाने के बाद मामला सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बन गया है।
वाहन चालक ने चेकिंग के दौरान ट्रैफिक पुलिस कर्मियों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। चालक का दावा है कि वाहन चालकों से चेकिंग के नाम पर रुपये मांगने का दबाव बनाया जाता है और पैसे नहीं देने पर चालान की कार्रवाई की धमकी दी जाती है। चालक ने विरोध करने पर मारपीट किए जाने का भी आरोप लगाया है। हालांकि, ट्रैफिक पुलिस की ओर से इन आरोपों को गलत बताया गया है और पूरे मामले की जांच कराने की बात कही गई है।
चेकिंग के दौरान शुरू हुआ विवाद
बताया गया है कि मंगलवार शाम को शहर से जुड़े एक बाईपास मार्ग पर ट्रैफिक पुलिस कर्मी वाहनों की चेकिंग कर रहे थे। इसी दौरान एक ऑटो को रोक लिया गया। पुलिस कर्मियों ने ऑटो चालक को शहर की ओर जाने से रोक दिया। इसी बात को लेकर चालक और ट्रैफिक पुलिस कर्मियों के बीच कहासुनी शुरू हो गई।
देखते ही देखते बातचीत विवाद में बदल गई। मौके पर मौजूद लोगों के मुताबिक, स्थिति उस समय और बिगड़ गई जब ऑटो चालक ने अपना वाहन सड़क के बीच में खड़ा कर दिया। इससे सड़क पर वाहनों की आवाजाही प्रभावित होने लगी और पीछे की ओर जाम की स्थिति बनने लगी।
ट्रैफिक पुलिस कर्मियों ने चालक से ऑटो को सड़क के किनारे करने के लिए कहा, लेकिन इसी दौरान चालक ने मोबाइल फोन निकालकर मौके का वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
मोबाइल कैमरे में रिकॉर्ड हुआ पूरा घटनाक्रम
विवाद के बीच बनाए गए वीडियो में वाहन चालक ट्रैफिक पुलिस कर्मियों पर कई गंभीर आरोप लगाता हुआ दिखाई देता है। चालक का कहना है कि वाहन चेकिंग के दौरान उससे और अन्य वाहन चालकों से रुपये मांगने का दबाव बनाया जाता है।
वीडियो में चालक कथित तौर पर यह भी आरोप लगाता है कि ऑटो, ई-रिक्शा और दूसरे वाहन चालकों से चेकिंग के नाम पर पैसे मांगे जाते हैं। उसके अनुसार, पैसे देने से इनकार करने पर चालान काटने की धमकी दी जाती है और विरोध करने की स्थिति में कथित रूप से मारपीट तक की जाती है।
वीडियो सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगीं। कुछ लोग वाहन चालक के आरोपों को लेकर सवाल उठा रहे हैं, जबकि पुलिस की कार्रवाई और सड़क पर वाहन खड़ा करने को लेकर भी चर्चा हो रही है।
हालांकि, वायरल वीडियो अपने आप में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं करता। आरोपों की वास्तविकता जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
बीच सड़क पर ऑटो खड़ा करने से बढ़ी परेशानी
इस पूरे घटनाक्रम में सड़क पर ऑटो खड़ा करने का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है। ट्रैफिक पुलिस के अनुसार, ऑटो चालक ने वाहन को रास्ते में खड़ा कर दिया था, जिससे पीछे वाहनों की कतार लगने लगी थी।
सड़क के बीच वाहन खड़े होने से यातायात प्रभावित होने की स्थिति में पुलिस द्वारा वाहन हटाने के निर्देश दिए जाने सामान्य प्रक्रिया का हिस्सा हो सकते हैं। लेकिन इस मामले में विवाद इस बात को लेकर बढ़ गया कि चालक ने पुलिस की कार्रवाई पर आपत्ति जताई और अपने मोबाइल से वीडियो रिकॉर्ड करना शुरू कर दिया।
यही वीडियो अब मामले की चर्चा का प्रमुख आधार बना हुआ है। वीडियो में दिखाई देने वाले घटनाक्रम और उसमें लगाए गए आरोपों को लेकर जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि मौके पर वास्तव में क्या हुआ था।
पुलिस ने रिश्वत मांगने के आरोपों को बताया गलत
मामले को लेकर ट्रैफिक पुलिस इंचार्ज अनूप सिंह का कहना है कि ऑटो चालक ने रास्ते में अपना टेम्पो खड़ा कर दिया था। इससे यातायात प्रभावित हो रहा था। मौके पर मौजूद ट्रैफिक पुलिस कर्मी ने वाहन की फोटो खींचकर चालान की कार्रवाई की।
पुलिस अधिकारी के अनुसार, चालान किए जाने के बाद चालक नाराज हो गया और इसी वजह से विवाद की स्थिति बनी। उन्होंने वाहन चालक की ओर से लगाए गए रुपये मांगने के आरोपों को गलत बताया है।
हालांकि, पुलिस अधिकारी ने यह भी कहा है कि आरोपों को पूरी तरह नजरअंदाज नहीं किया जा रहा है और मामले की जांच कराई जा रही है। जांच के बाद यदि किसी स्तर पर कोई अनियमितता सामने आती है तो उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
वायरल वीडियो ने खड़े किए कई सवाल
सोशल मीडिया पर किसी घटना का वीडियो वायरल होने के बाद मामला तेजी से लोगों की नजर में आ जाता है। इस मामले में भी मोबाइल से बनाया गया वीडियो वायरल होने के बाद ट्रैफिक चेकिंग की कार्यप्रणाली को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या वाहन चालक द्वारा लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई है या फिर चालान की कार्रवाई से नाराज होकर उसने पुलिस कर्मियों पर आरोप लगाए? इसका जवाब जांच पूरी होने के बाद ही मिल सकता है।
दूसरी ओर, यह सवाल भी अहम है कि यदि वाहन चालक ने सड़क के बीच में वाहन खड़ा किया था और इससे जाम की स्थिति पैदा हो रही थी, तो क्या पुलिस द्वारा की गई चालान की कार्रवाई नियमों के अनुरूप थी? इन दोनों पक्षों की जांच जरूरी है।
जांच से सामने आएगी असली तस्वीर
मामले में फिलहाल दो अलग-अलग पक्ष सामने आए हैं। वाहन चालक ट्रैफिक पुलिस पर रुपये मांगने और विरोध करने पर मारपीट करने जैसे गंभीर आरोप लगा रहा है, जबकि ट्रैफिक पुलिस इन आरोपों को खारिज करते हुए सड़क पर वाहन खड़ा करने और उसके बाद चालान किए जाने की बात कह रही है।
ऐसे में निष्पक्ष जांच बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। यदि मौके पर लगे कैमरों की रिकॉर्डिंग, वायरल वीडियो की पूरी फुटेज, वहां मौजूद लोगों के बयान और चालान से संबंधित रिकॉर्ड की जांच की जाए तो घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति सामने आ सकती है।
वाहन चेकिंग का उद्देश्य यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाना और नियमों का पालन सुनिश्चित करना है। वहीं वाहन चालकों के लिए भी जरूरी है कि वे यातायात नियमों का पालन करें और चेकिंग के दौरान पुलिस के निर्देशों का पालन करते हुए विवाद की स्थिति से बचें। यदि किसी वाहन चालक को पुलिस कार्रवाई पर आपत्ति है तो वह निर्धारित कानूनी और शिकायत व्यवस्था के माध्यम से अपनी बात रख सकता है।
फिलहाल वायरल वीडियो और दोनों पक्षों के दावों के बीच असली सच्चाई जांच के परिणाम पर निर्भर है। पुलिस की ओर से जांच की बात कही गई है। अब देखना होगा कि जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं और क्या लगाए गए गंभीर आरोपों की पुष्टि होती है या मामला चालान की कार्रवाई से उपजे विवाद तक ही सीमित रहता है।
Author: यायावर
यायावर

























