रिपोर्ट: दुर्गा प्रसाद शुक्ला
मेरठ। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर अभी आधिकारिक चुनाव कार्यक्रम सामने नहीं आया है, लेकिन पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियां लगातार तेज होती दिखाई दे रही हैं। अलग-अलग राजनीतिक दल अपने संगठन, कार्यकर्ताओं और जनसंपर्क गतिविधियों को सक्रिय करने में जुटे हैं। इसी क्रम में 20 सितंबर को पश्चिमी यूपी के कई इलाकों में एक साथ राजनीतिक कार्यक्रम होने जा रहे हैं। मुजफ्फरनगर में राष्ट्रीय लोकदल का सामाजिक समरसता सम्मेलन होगा, जबकि मेरठ के सरधना क्षेत्र में समाजवादी पार्टी से जुड़े नेताओं की सभा प्रस्तावित है। इसी दिन किठौर क्षेत्र में पूर्व मंत्री शाहिद मंजूर की ओर से पीडीए कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किया जा रहा है।
इसके बाद 21 सितंबर को भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन के मेरठ और 22 सितंबर को सहारनपुर दौरे का कार्यक्रम है। बीजेपी की ओर से पश्चिमी यूपी की 71 विधानसभा सीटों पर संगठनात्मक तैयारियों की समीक्षा की जानी है। इस तरह लगातार तीन दिनों तक पश्चिमी उत्तर प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में प्रमुख राजनीतिक दलों की गतिविधियां दिखाई देंगी।
20 सितंबर को मुजफ्फरनगर में रालोद का सामाजिक समरसता सम्मेलन
मुजफ्फरनगर में 20 सितंबर को राष्ट्रीय लोकदल की ओर से सामाजिक समरसता सम्मेलन आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम पचेंडा रोड स्थित प्लेटिनम बैंक्वेट हॉल के मैदान में प्रस्तावित है। सम्मेलन में रालोद के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी के शामिल होने की जानकारी पार्टी की ओर से दी गई है। कार्यक्रम को लेकर पार्टी स्तर पर तैयारियां तेज हैं और कार्यकर्ताओं से अधिक संख्या में पहुंचने का आह्वान किया जा रहा है।
रालोद की स्थानीय इकाइयां सम्मेलन में कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी बढ़ाने के लिए बैठकें कर रही हैं। बुढ़ाना क्षेत्र में हुई कार्यकर्ता बैठक में सम्मेलन में लोगों को पहुंचाने के लिए बसों की व्यवस्था की चर्चा भी सामने आई है। स्थानीय नेताओं ने गांव-गांव संपर्क कर लोगों से कार्यक्रम में भाग लेने की अपील की है।
रालोद की ओर से इस सम्मेलन के केंद्र में सामाजिक समरसता, संगठन और जनसंपर्क से जुड़े विषय बताए जा रहे हैं। ऐसे में कार्यक्रम में जयंत चौधरी का संबोधन और स्थानीय कार्यकर्ताओं की भागीदारी पार्टी की पश्चिमी यूपी में गतिविधियों को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी। हालांकि किसी कार्यक्रम की भीड़ को सीधे चुनावी समर्थन का पैमाना मानना उचित नहीं होगा। इसका वास्तविक राजनीतिक प्रभाव आने वाले समय में संगठनात्मक गतिविधियों और मतदाताओं के रुझानों से ही स्पष्ट होगा।
सरधना में सपा नेताओं की सभा पर भी नजर
20 सितंबर को मेरठ की सरधना विधानसभा सीट भी राजनीतिक गतिविधियों का केंद्र रहने वाली है। यहां समाजवादी पार्टी के विधायक अतुल प्रधान की ओर से कार्यक्रम प्रस्तावित है। इसमें कैराना की सांसद इकरा हसन और सपा नेता जावेद आब्दी के शामिल होने की जानकारी सामने आई है। कार्यक्रम को पूर्व राष्ट्रपति डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम से आयोजित किया जा रहा है।
आयोजकों की ओर से कार्यक्रम में अल्पसंख्यक समुदाय की बच्चियों को साइकिलें वितरित किए जाने की योजना बताई गई है। इसके साथ ही सभा और गोष्ठी के माध्यम से स्थानीय सामाजिक तथा राजनीतिक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। पश्चिमी यूपी में सपा की गतिविधियों के लिहाज से सरधना का यह कार्यक्रम इसलिए भी ध्यान खींच रहा है क्योंकि यहां पार्टी के स्थानीय संगठन और नेताओं की सक्रियता लगातार बनी हुई है।
अतुल प्रधान और इकरा हसन हाल के दिनों में पश्चिमी यूपी से जुड़े कई मुद्दों पर सार्वजनिक रूप से सक्रिय दिखाई दिए हैं। सहारनपुर से जुड़े मस्जिद विवाद को लेकर भी सपा नेताओं की ओर से बयान और प्रतिनिधिमंडल की गतिविधियां सामने आई थीं। इकरा हसन ने इस मामले में कानूनी प्रक्रिया के जरिए आगे बढ़ने की बात कही थी। ऐसे में सरधना की सभा में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ संगठन, सामाजिक भागीदारी और क्षेत्रीय राजनीति से जुड़े विषयों के उठने की संभावना है।
शाहिद मंजूर के पीडीए सम्मेलन से संगठन पर फोकस
इसी दिन मेरठ के किठौर क्षेत्र में पूर्व मंत्री और सपा नेता शाहिद मंजूर की ओर से पीडीए कार्यकर्ता सम्मेलन आयोजित किए जाने की जानकारी है। पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक सामाजिक समूहों को केंद्र में रखकर समाजवादी पार्टी अपनी संगठनात्मक राजनीति को आगे बढ़ाती रही है।
ग्राम जई में प्रस्तावित इस सम्मेलन का फोकस कार्यकर्ताओं की भागीदारी और संगठनात्मक गतिविधियों पर रहने की संभावना है। गांव और बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना किसी भी राजनीतिक दल के लिए चुनावी तैयारी का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। ऐसे में शाहिद मंजूर का सम्मेलन स्थानीय संगठन की गतिविधियों और आने वाले समय में पार्टी के जनसंपर्क अभियान के लिहाज से देखा जा रहा है।
हालांकि सम्मेलन में कितने कार्यकर्ता और समर्थक पहुंचते हैं, किन स्थानीय मुद्दों को प्रमुखता मिलती है और उसके बाद संगठन की गतिविधियां किस दिशा में आगे बढ़ती हैं, इन पहलुओं से ही कार्यक्रम के प्रभाव का आकलन किया जा सकेगा।
तीन अलग-अलग कार्यक्रम, तीन राजनीतिक संदेश
20 सितंबर को पश्चिमी यूपी में होने वाले कार्यक्रमों की खास बात यह है कि अलग-अलग राजनीतिक दल और नेता अपने-अपने संगठनात्मक आधार और सामाजिक संपर्क को सक्रिय करते दिखाई देंगे। मुजफ्फरनगर में रालोद का सामाजिक समरसता सम्मेलन है तो मेरठ के सरधना और किठौर क्षेत्र में सपा से जुड़े कार्यक्रम प्रस्तावित हैं।
रालोद के कार्यक्रम में सामाजिक समरसता और संगठन को प्रमुखता दी जा रही है। सपा के कार्यक्रमों में सामाजिक समूहों की भागीदारी, पीडीए और स्थानीय मुद्दों पर जोर दिखाई दे रहा है। दोनों दलों के कार्यक्रमों का स्वरूप और राजनीतिक संदेश अलग-अलग है, इसलिए इनके असर को एक ही पैमाने से देखना उचित नहीं होगा।
पश्चिमी यूपी की राजनीति में मेरठ और मुजफ्फरनगर जैसे जिले लंबे समय से महत्वपूर्ण माने जाते हैं। यहां किसान, ग्रामीण क्षेत्र, सामाजिक समीकरण, स्थानीय विकास, रोजगार, कानून-व्यवस्था और विभिन्न समुदायों से जुड़े मुद्दे राजनीतिक विमर्श का हिस्सा रहे हैं। इसलिए बड़े नेताओं की मौजूदगी वाले कार्यक्रमों पर स्वाभाविक रूप से राजनीतिक नजर रहती है।
21 और 22 सितंबर को बीजेपी का संगठनात्मक दौरा
20 सितंबर के कार्यक्रमों के बाद 21 और 22 सितंबर को बीजेपी की गतिविधियां भी पश्चिमी यूपी में दिखाई देंगी। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नबीन 21 सितंबर को मेरठ और 22 सितंबर को सहारनपुर पहुंचेंगे। रिपोर्टों के मुताबिक दोनों जिलों में पार्टी के क्षेत्रीय पदाधिकारियों, सांसदों, विधायकों और अन्य संगठनात्मक पदाधिकारियों के साथ बैठकें प्रस्तावित हैं। इन बैठकों में बूथ, शक्ति केंद्र, मंडल और जिला स्तर की तैयारियों की समीक्षा की जानी है।
पश्चिमी यूपी में कुल 71 विधानसभा सीटें हैं और बीजेपी इस क्षेत्र को अपनी संगठनात्मक तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण मान रही है। पार्टी नेतृत्व की ओर से बूथ स्तर तक संगठन को सक्रिय करने और आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियों की समीक्षा पर जोर दिया जा रहा है। नितिन नबीन का यह दौरा राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद पश्चिमी यूपी का पहला दौरा बताया जा रहा है।
चुनाव से पहले संगठन और जनसंपर्क का दौर
2027 के विधानसभा चुनाव में अभी समय है, लेकिन राजनीतिक दलों की गतिविधियों से यह जरूर दिखाई दे रहा है कि संगठनात्मक तैयारियों का दौर शुरू हो चुका है। सार्वजनिक सभाएं, कार्यकर्ता सम्मेलन, सामाजिक कार्यक्रम, जनसंपर्क अभियान और संगठनात्मक बैठकें राजनीतिक दलों को अपने कार्यकर्ताओं से संवाद का अवसर देती हैं।
20 सितंबर से शुरू होने वाली गतिविधियों में एक तरफ रालोद अपने सामाजिक समरसता सम्मेलन के जरिए कार्यकर्ताओं और विभिन्न सामाजिक वर्गों को जोड़ने का प्रयास कर रहा है, वहीं सपा के कार्यक्रमों में पीडीए और सामाजिक भागीदारी के मुद्दे सामने हैं। इसके बाद बीजेपी संगठनात्मक बैठकों के माध्यम से बूथ और जिला स्तर की तैयारियों की समीक्षा करेगी।
ऐसे में पश्चिमी यूपी में अगले कुछ दिनों की राजनीतिक गतिविधियां केवल मंचों और सभाओं तक सीमित नहीं रहेंगी। इन कार्यक्रमों के बाद राजनीतिक दल अपने संगठन को किस तरह सक्रिय करते हैं, स्थानीय मुद्दों को कितना महत्व देते हैं और जनता के बीच उनका जनसंपर्क किस रूप में आगे बढ़ता है, यह अधिक महत्वपूर्ण होगा।
20 सितंबर को होने वाले कार्यक्रमों में जुटने वाली भीड़, नेताओं के भाषणों में उठने वाले मुद्दे, स्थानीय कार्यकर्ताओं की सक्रियता और उसके बाद होने वाली संगठनात्मक गतिविधियां पश्चिमी यूपी की राजनीति की दिशा को समझने के लिए महत्वपूर्ण संकेत दे सकती हैं। फिलहाल इतना स्पष्ट है कि चुनावी साल से पहले पश्चिमी उत्तर प्रदेश में राजनीतिक गतिविधियों की रफ्तार बढ़ रही है और मेरठ-मुजफ्फरनगर-सहारनपुर बेल्ट आने वाले महीनों में राजनीतिक विमर्श का एक प्रमुख केंद्र बना रह सकता है।
























