19 अक्टूबर 2026 5:09 पूर्वाह्न

‘सिर्फ एक महीने में टूट गया रिश्ता’: शारीरिक संबंध और रंग-रूप को लेकर पत्नी ने छोड़ा पति, हाथरस का मामला बना चर्चा का विषय

रिपोर्टर ठाकुर बख्श सिंह की तस्वीर और घूंघट में बैठी महिला की सांकेतिक तस्वीर के साथ हाथरस के चर्चित वैवाहिक विवाद पर आधारित लैंडस्केप फीचर इमेज

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ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के हाथरस से सामने आया एक वैवाहिक विवाद इन दिनों सोशल मीडिया से लेकर स्थानीय स्तर तक चर्चा का विषय बना हुआ है। शादी के महज एक महीने बाद ही एक नवविवाहिता ने अपने पति के साथ रहने से इनकार कर दिया। पत्नी ने पति के रंग-रूप और वैवाहिक जीवन से असंतुष्टि को अलग होने की वजह बताया है। इस पूरे घटनाक्रम ने आधुनिक रिश्तों, वैवाहिक अपेक्षाओं और सामाजिक मूल्यों पर नई बहस छेड़ दी है।

मामला केवल पति-पत्नी के बीच विवाद तक सीमित नहीं रहा, बल्कि दोनों परिवारों, पंचायत और स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा का केंद्र बन गया। रिश्ते को बचाने के कई प्रयास किए गए, लेकिन आखिरकार नवविवाहिता अपने निर्णय पर कायम रही और उसने पति से अलग रहने का फैसला कर लिया।

एक महीने पहले हुई थी शादी, फिर अचानक बिगड़ गए हालात

जानकारी के अनुसार, हाथरस निवासी अभिषेक सक्सेना की शादी लगभग एक महीने पहले ही परिवार की सहमति से एक युवती के साथ हुई थी। शुरुआती दिनों में सब कुछ सामान्य बताया जा रहा था। परिवार को भी लगा कि नवदंपती खुशहाल जीवन की शुरुआत कर चुके हैं।

लेकिन कुछ ही दिनों बाद दोनों के बीच तनाव बढ़ने लगा। पत्नी ने पति के साथ रहने से इनकार करना शुरू कर दिया। उसने आरोप लगाया कि वह अपने वैवाहिक जीवन और शारीरिक संबंधों से संतुष्ट नहीं है। यही नहीं, पति का सांवला रंग भी उसे पसंद नहीं आया।

पत्नी के इस फैसले ने पति और उसके परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। परिवार को उम्मीद थी कि समय के साथ स्थिति सामान्य हो जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

‘कुछ बातें खुलकर नहीं बता सकती’: पत्नी का बयान

मीडिया के सामने आए बयान में नवविवाहिता ने कहा कि उनके बीच कोई पारिवारिक विवाद नहीं है, लेकिन वैवाहिक संबंधों को लेकर कुछ ऐसी समस्याएं हैं जिन्हें वह सार्वजनिक रूप से नहीं बता सकती।

महिला ने कहा कि शादी के बाद उसे महसूस हुआ कि वह इस रिश्ते में सहज नहीं है। उसने साफ कहा कि अब वह पति के साथ आगे जीवन नहीं बिताना चाहती और कानूनी तरीके से अलग होना चाहती है।

उसका कहना था कि वह किसी दबाव में यह रिश्ता नहीं निभाना चाहती। महिला के इस बयान ने पूरे मामले को और अधिक संवेदनशील बना दिया, क्योंकि उसने निजी जीवन से जुड़े मुद्दों को अलग होने की प्रमुख वजह बताया।

पति बोला- ‘सिर्फ इसलिए छोड़ रही है क्योंकि मैं पसंद नहीं हूं’

दूसरी ओर, पति अभिषेक सक्सेना इस घटनाक्रम से पूरी तरह टूटे हुए दिखाई दिए। उनका कहना है कि शादी दोनों परिवारों की सहमति से हुई थी और उन्होंने इस रिश्ते को पूरी ईमानदारी से निभाने की कोशिश की।

अभिषेक ने भावुक होकर कहा कि शादी में परिवार ने करीब ढाई से तीन लाख रुपये खर्च किए थे। उन्हें उम्मीद थी कि उनका वैवाहिक जीवन खुशहाल रहेगा, लेकिन अचानक पत्नी के फैसले ने सब कुछ बदल दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि पत्नी अब उनके सांवले रंग को मुद्दा बना रही है और यही वजह है कि वह उन्हें छोड़ना चाहती है। अभिषेक का कहना है कि उन्होंने पत्नी को मनाने की बहुत कोशिश की, लेकिन वह अपने फैसले से पीछे नहीं हटी।

पंचायत और परिवार भी नहीं बचा सके रिश्ता

मामले को सुलझाने के लिए दोनों परिवारों ने कई दौर की बातचीत की। स्थानीय स्तर पर पंचायत भी बुलाई गई ताकि रिश्ते को टूटने से बचाया जा सके। परिजनों ने नवविवाहिता को समझाने की कोशिश की कि वैवाहिक जीवन में शुरुआती परेशानियां सामान्य होती हैं और समय के साथ रिश्ते मजबूत हो जाते हैं।

बताया जा रहा है कि पति ने भी पत्नी से साथ रहने की गुहार लगाई, लेकिन महिला ने साफ कर दिया कि वह अब इस रिश्ते में नहीं रहना चाहती। अंततः बिना किसी समझौते के दोनों अलग होने पर सहमत हो गए। इस तरह शादी का यह रिश्ता महज एक महीने के भीतर टूट गया।

सोशल मीडिया पर छिड़ी बहस

यह मामला सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर लोगों की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं। कुछ लोग पत्नी के फैसले को उसका व्यक्तिगत अधिकार बता रहे हैं, जबकि कई लोग इसे रिश्तों में बढ़ती अस्थिरता और बाहरी आकर्षण को प्राथमिकता देने की मानसिकता से जोड़ रहे हैं।

कई यूजर्स का कहना है कि आज के दौर में रिश्तों की नींव समझ, धैर्य और विश्वास की बजाय शारीरिक आकर्षण और तात्कालिक अपेक्षाओं पर टिकती जा रही है। वहीं कुछ लोगों ने यह भी कहा कि यदि किसी महिला को वैवाहिक जीवन में असहजता महसूस हो रही है तो उसे अपनी बात रखने और निर्णय लेने का पूरा अधिकार है।

बदलते समाज में रिश्तों की नई चुनौतियां

विशेषज्ञों की मानें तो आधुनिक जीवनशैली, सोशल मीडिया का प्रभाव और अवास्तविक अपेक्षाएं वैवाहिक रिश्तों पर गहरा असर डाल रही हैं। पहले जहां विवाह को सामाजिक और भावनात्मक जिम्मेदारी माना जाता था, वहीं अब व्यक्तिगत संतुष्टि और निजी पसंद-नापसंद अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही हैं।

वैवाहिक जीवन में शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक सामंजस्य बेहद जरूरी माना जाता है। लेकिन जब अपेक्षाएं वास्तविकता से मेल नहीं खातीं, तब रिश्तों में तनाव बढ़ने लगता है। हाथरस का यह मामला भी कहीं न कहीं इसी बदलती सामाजिक सोच को उजागर करता दिखाई देता है।

रिश्तों में संवाद की कमी भी बन रही वजह

परिवार परामर्श से जुड़े विशेषज्ञों का कहना है कि कई बार पति-पत्नी के बीच खुलकर बातचीत न होने से छोटी समस्याएं भी बड़े विवाद का रूप ले लेती हैं। यदि शुरुआती दौर में ही दोनों पक्ष अपनी परेशानियों और अपेक्षाओं पर स्पष्ट संवाद करें, तो कई रिश्ते टूटने से बच सकते हैं।

हालांकि इस मामले में असली वजह क्या है, यह पूरी तरह दोनों पक्ष ही जानते हैं, लेकिन इतना जरूर है कि इस घटना ने समाज को सोचने पर मजबूर कर दिया है कि क्या अब रिश्तों की उम्र सचमुच केवल आकर्षण और शारीरिक संतुष्टि तक सीमित होती जा रही है।

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