संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट। मंदाकिनी नदी में उफान और लगातार हुई मूसलाधार बारिश से चित्रकूट के कई गांवों में पैदा हुए बाढ़ के हालात के बीच जरूरतमंद परिवारों तक राहत पहुंचाने का अभियान जारी है। इसी क्रम में सेवा इंटरनेशनल और कोटक महिंद्रा बैंक की संयुक्त टीम ने चित्रकूट के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचकर ग्रामीणों को राहत सामग्री वितरित की। राहत अभियान के दौरान टीम ने उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश से जुड़े प्रभावित इलाकों में पहुंचकर बाढ़ से उत्पन्न परिस्थितियों का जायजा लिया और प्रभावित परिवारों की जरूरतों को समझते हुए खाद्य सामग्री तथा दैनिक उपयोग की आवश्यक वस्तुओं से युक्त राहत किट वितरित की।
मंदाकिनी नदी का जलस्तर बढ़ने और लगातार बारिश के कारण चित्रकूट के ग्रामीण क्षेत्रों में कई परिवारों के सामने भोजन, जरूरी घरेलू सामान और सुरक्षित आवास जैसी समस्याएं खड़ी हो गई थीं। ऐसे समय में राहत दल ने उन इलाकों तक पहुंचने का प्रयास किया, जहां सामान्य परिस्थितियों में भी आवागमन चुनौतीपूर्ण रहता है। बाढ़ के कारण रास्तों पर पानी भर जाने और संपर्क मार्ग प्रभावित होने के बावजूद स्वयंसेवकों ने स्थानीय लोगों के सहयोग से जरूरतमंद परिवारों तक राहत सामग्री पहुंचाई।
राहत अभियान के तहत कलवारा बुजुर्ग, कलवारा खुर्द, अरछा बरेठी, केवटन पुरवा, खेरिया और ब्योहरा समेत कई प्रभावित गांवों में राहत किट का वितरण किया गया। अभियान का उद्देश्य केवल सामग्री का वितरण करना ही नहीं, बल्कि बाढ़ से प्रभावित परिवारों तक यह संदेश पहुंचाना भी रहा कि आपदा की इस घड़ी में समाज उनके साथ खड़ा है। राहत दल के सदस्यों ने ग्रामीणों से उनकी समस्याओं के बारे में जानकारी ली और भविष्य में आवश्यक सहायता के संबंध में भी चर्चा की।
संतों ने राहत वाहनों को दिखाई हरी झंडी
राहत सामग्री से लदे वाहनों को प्रभावित गांवों के लिए रवाना करने से पहले धार्मिक और सामाजिक क्षेत्र से जुड़े संतों ने अभियान में सहभागिता की। दिगंबर अखाड़ा के श्रीमहंत महंत दिव्य जीवन दास जी महाराज, निर्मोही अखाड़ा के महंत ओंकार दास महाराज, निर्मोही अखाड़ा के अधिकारी दीनदयाल दास जी महाराज, मुन्ना महाराज तथा खाकी अखाड़ा के महंत राम जन्म दास जी महाराज सहित अन्य संतों और समाजसेवियों ने राहत सामग्री से भरे वाहनों को हरी झंडी दिखाकर प्रभावित क्षेत्रों के लिए रवाना किया।
इस अवसर पर संतों ने कहा कि आपदा के समय जरूरतमंद लोगों के साथ खड़ा होना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। बाढ़, अतिवृष्टि या किसी अन्य प्राकृतिक आपदा से प्रभावित परिवारों के लिए राहत सामग्री तत्काल पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि ऐसी परिस्थितियों में सामान्य जीवन पूरी तरह प्रभावित हो जाता है। उन्होंने सेवा इंटरनेशनल और कोटक महिंद्रा बैंक की ओर से चलाए जा रहे राहत अभियान की सराहना करते हुए कहा कि संस्थाओं और समाज के सामूहिक प्रयासों से आपदा प्रभावित लोगों को बड़ी राहत मिल सकती है।
महंत दिव्य जीवन दास महाराज ने कहा कि आपदा की घड़ी में पीड़ित परिवारों को राहत सामग्री उपलब्ध कराना मानवता की सच्ची सेवा है। उन्होंने कहा कि जब कोई व्यक्ति या संस्था संकट में फंसे परिवार की मदद के लिए आगे आती है तो यह केवल सहायता नहीं, बल्कि सामाजिक जिम्मेदारी का निर्वहन भी है। उन्होंने राहत अभियान में जुटे सभी लोगों की सराहना की और उम्मीद जताई कि प्रभावित परिवारों को आगे भी आवश्यक सहयोग मिलता रहेगा।
डॉ. संतोष मिश्रा ने कहा—नर सेवा ही नारायण सेवा
राहत सामग्री वितरण अभियान के जिला समन्वयक और समाजसेवी डॉ. संतोष मिश्रा ने कहा कि नर सेवा ही नारायण सेवा है। उन्होंने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा में प्रभावित लोगों की सहायता करना किसी भी धार्मिक या सामाजिक दायित्व से कम नहीं है। जरूरतमंद परिवारों तक भोजन और आवश्यक सामग्री पहुंचाना सच्ची मानव सेवा है।
डॉ. संतोष मिश्रा ने कहा कि भगवान कामतानाथ जी सभी लोगों को सेवा करने की शक्ति प्रदान करते रहें और समाज के सहयोग से यह सेवा कार्य लगातार जारी रहे। उन्होंने राहत अभियान में सहभागिता के लिए कोटक महिंद्रा बैंक के रीजनल मैनेजर रितेश पांडे, सेवा इंटरनेशनल के अंकित मलिक और उनकी पूरी टीम का आभार व्यक्त किया।
उन्होंने कहा कि चित्रकूट की बाढ़ की स्थिति को देखते हुए दोनों संस्थाओं ने आगे बढ़कर जिस तरह राहत कार्य में सहभागिता की है, वह सराहनीय है। उनके अनुसार, जरूरत के समय किसी पीड़ित व्यक्ति के काम आना ही सबसे बड़ी सेवा है। उन्होंने कहा कि मानव सेवा को भगवान की सेवा के समान माना गया है और आपदा प्रभावित परिवारों के बीच पहुंचकर उनकी मदद करना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
डॉ. मिश्रा ने यह भी कहा कि राहत सामग्री का वितरण केवल तत्काल जरूरतों को पूरा करने का प्रयास है। बाढ़ प्रभावित परिवारों के सामने आने वाले दिनों में भी कई चुनौतियां रहेंगी। इसलिए राहत के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में पुनर्वास, आवास, सड़क, पेयजल और भविष्य में बाढ़ से बचाव के स्थायी उपायों पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है।
अरछा बरेठी में बाढ़ से प्रभावित हुए परिवार
समाजसेवी शंकर यादव ने कहा कि मंदाकिनी नदी में आई बाढ़ से अरछा बरेठी गांव बुरी तरह प्रभावित हुआ है। बाढ़ के कारण ग्रामीण परिवारों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। ऐसे समय में सेवा इंटरनेशनल और कोटक महिंद्रा बैंक की संयुक्त टीम द्वारा गांव में पहुंचकर राहत किट उपलब्ध कराना महत्वपूर्ण पहल है।
उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत के साथ भविष्य के लिए भी सरकारी सहायता की आवश्यकता है। प्रभावित लोगों की समस्याओं को शासन और प्रशासन के समक्ष उठाकर उनके समाधान के लिए प्रयास किया जाएगा। शंकर यादव ने राहत अभियान में सहयोग करने वाले सभी सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्वयंसेवकों की प्रशंसा करते हुए कहा कि संकट के समय समाज के लोगों का एकजुट होना ही सबसे बड़ी ताकत है।
दूरस्थ गांवों तक पहुंची राहत टीम
राहत अभियान की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह रही कि टीम ने केवल आसानी से पहुंच वाले क्षेत्रों तक राहत सामग्री सीमित नहीं रखी। बाढ़ से प्रभावित और अपेक्षाकृत दूरस्थ गांवों में भी स्वयंसेवकों ने पहुंचने का प्रयास किया। कई स्थानों पर जलभराव और खराब संपर्क मार्ग के कारण राहत सामग्री पहुंचाना चुनौतीपूर्ण था। इसके बावजूद स्थानीय लोगों की मदद से राहत किट जरूरतमंद परिवारों तक पहुंचाई गई।
राहत किट में खाद्य सामग्री के साथ दैनिक जीवन में उपयोग होने वाली आवश्यक वस्तुएं शामिल थीं। इससे उन परिवारों को तत्काल मदद मिली, जिनके सामने बाढ़ के कारण सामान्य घरेलू व्यवस्था बनाए रखना कठिन हो गया था। राहत सामग्री मिलने पर ग्रामीणों ने दोनों संस्थाओं और अभियान से जुड़े स्वयंसेवकों के प्रति आभार जताया।
ग्रामीणों ने कहा कि प्राकृतिक आपदा के समय मिलने वाली ऐसी सहायता प्रभावित परिवारों के लिए बड़ी राहत होती है। हालांकि, उन्होंने प्रशासन से यह भी मांग की कि बाढ़ प्रभावित परिवारों की स्थिति का स्थायी समाधान किया जाए। जिन परिवारों के घर क्षतिग्रस्त हुए हैं, उन्हें आवास उपलब्ध कराया जाए और भविष्य में बाढ़ की स्थिति में नुकसान कम करने के लिए ठोस इंतजाम किए जाएं।
बाढ़ के बाद पुनर्वास की चुनौती
चित्रकूट में बाढ़ का पानी कम होने के बाद भी प्रभावित परिवारों की मुश्किलें पूरी तरह समाप्त नहीं होतीं। कई परिवारों के सामने घरों की मरम्मत, खाद्यान्न की व्यवस्था, रोजगार की वापसी और क्षतिग्रस्त सड़कों एवं संपर्क मार्गों के कारण आवागमन जैसी समस्याएं बनी रहती हैं। ऐसे में राहत सामग्री के साथ दीर्घकालिक पुनर्वास की योजना भी आवश्यक हो जाती है।
सामाजिक संस्थाओं और बैंकिंग क्षेत्र से जुड़े संगठनों द्वारा चलाए जा रहे राहत अभियान तत्काल राहत पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वहीं शासन-प्रशासन की जिम्मेदारी है कि बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराकर वास्तविक नुकसान का आकलन किया जाए और पात्र परिवारों को नियमानुसार सहायता उपलब्ध कराई जाए।
ग्रामीणों की मांग है कि मंदाकिनी नदी के बढ़ते जलस्तर और बरसात के दौरान जलभराव की समस्या को ध्यान में रखते हुए संवेदनशील गांवों में पहले से तैयारी की जाए। राहत एवं बचाव व्यवस्था को मजबूत करने के साथ-साथ सुरक्षित स्थानों की पहचान, समय पर सूचना, आवागमन के वैकल्पिक साधन और आवश्यक खाद्य सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
स्वयंसेवकों ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
राहत अभियान में जिला समन्वयक एवं समाजसेवी संतोष मिश्रा, शंकर यादव, मनोज बैंजवाल, सूर्यकांत, विवेक पंत और मनवर रावत सहित बड़ी संख्या में स्वयंसेवकों ने सहयोग किया। स्वयंसेवकों ने राहत सामग्री को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचाने, जरूरतमंद परिवारों की पहचान करने और वितरण व्यवस्था को व्यवस्थित रखने में भूमिका निभाई।
अभियान से जुड़े लोगों का कहना है कि प्राकृतिक आपदा के समय सरकारी प्रयासों के साथ सामाजिक संस्थाओं, उद्योग जगत और आम नागरिकों की सहभागिता भी जरूरी है। सामूहिक प्रयासों से राहत कार्य का दायरा बढ़ाया जा सकता है और अधिक से अधिक प्रभावित परिवारों तक समय पर सहायता पहुंचाई जा सकती है।
चित्रकूट के बाढ़ प्रभावित गांवों में चलाया गया यह राहत अभियान इसी सामूहिक जिम्मेदारी की मिसाल के रूप में सामने आया है। एक ओर जहां सेवा इंटरनेशनल और कोटक महिंद्रा बैंक की संयुक्त टीम ने प्रभावित परिवारों तक आवश्यक सामग्री पहुंचाई, वहीं संतों, समाजसेवियों और स्वयंसेवकों ने अभियान को स्थानीय स्तर पर सहयोग दिया। राहत किट मिलने से प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता मिली है, लेकिन ग्रामीणों की मांग यह है कि बाढ़ से होने वाले नुकसान को स्थायी रूप से कम करने के लिए दीर्घकालिक योजनाओं पर भी गंभीरता से काम किया जाए।
आपदा की घड़ी में किसी पीड़ित परिवार के दरवाजे तक पहुंचकर उसके साथ खड़ा होना मानवता का सबसे बड़ा संदेश है। चित्रकूट में चलाया गया यह राहत अभियान भी इसी भावना को आगे बढ़ाता दिखाई देता है कि तबाही से जूझ रहे लोगों तक राहत पहुंचाना केवल सामाजिक दायित्व नहीं, बल्कि मानव धर्म है।

























