मध्य प्रदेश पुलिस पर युवक को अवैध हिरासत में रखकर थर्ड डिग्री देने का आरोप, एसपी चित्रकूट से एफआईआर की मांग
सतना जीआरपी, रेलवे स्टेशन और ट्रेन में मारपीट, इलेक्ट्रिक शॉक, रिश्वत मांगने व मोबाइल-नकदी छीनने का आरोप; पीड़ित ने सौंपा विस्तृत प्रार्थना पत्र
रिपोर्ट: संजय सिंह राणा
चित्रकूट। उत्तर प्रदेश के चित्रकूट जनपद निवासी 18 वर्षीय युवक ने मध्य प्रदेश पुलिस के कुछ पुलिसकर्मियों पर गंभीर आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक चित्रकूट को विस्तृत प्रार्थना पत्र सौंपा है। आवेदन में आरोप लगाया गया है कि उसे बिना किसी वैधानिक प्रक्रिया के हिरासत में लिया गया, जीआरपी लॉकअप और अन्य स्थानों पर बंधक बनाकर रखा गया, बेरहमी से मारपीट की गई, इलेक्ट्रिक शॉक दिए गए तथा रिहाई के नाम पर एक लाख रुपये की रिश्वत मांगी गई। पीड़ित ने आरोपित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष एवं प्रभावी विवेचना कराने की मांग की है।
आवेदन के अनुसार, मानिकपुर थाना क्षेत्र के शिवनगर निवासी सत्यम यादव ने बताया कि 12 जुलाई 2026 को दोपहर लगभग 2:25 बजे उसे इंस्टाग्राम कॉल के माध्यम से हरेंद्र सिंह उर्फ मिंटोई ने मानिकपुर रेलवे स्टेशन के बाहर मिलने के लिए बुलाया था। युवक का आरोप है कि जैसे ही वह रेलवे स्टेशन के बाहर पहुंचा, पहले से मौजूद मध्य प्रदेश पुलिस के एक दरोगा और सादे कपड़ों में आए लगभग छह पुलिसकर्मियों ने उसे चारों ओर से घेर लिया।
पीड़ित का आरोप है कि पुलिसकर्मियों ने बिना कोई कारण बताए उसके साथ गाली-गलौज शुरू कर दी और लात-घूंसों तथा मुक्कों से मारपीट की। विरोध करने और कारण पूछने पर भी कोई संतोषजनक जवाब नहीं दिया गया। आवेदन में कहा गया है कि इसके बाद युवक को जबरन पकड़कर मानिकपुर रेलवे स्टेशन स्थित जीआरपी लॉकअप में बंद कर दिया गया।
प्रार्थना पत्र में दावा किया गया है कि पुलिसकर्मियों ने उसकी जेब से 2300 रुपये नकद और एक मोबाइल फोन भी अपने कब्जे में ले लिया। इसी दौरान घटना की जानकारी मिलने पर युवक की मां कमलेश कुमारी सहित परिजन रेलवे स्टेशन पहुंचे, लेकिन उन्हें युवक से मिलने नहीं दिया गया। आवेदन के अनुसार, परिजनों द्वारा गिरफ्तारी का कारण पूछने पर पुलिसकर्मियों ने चोरी का आरोप लगाते हुए कथित तौर पर एक लाख रुपये की रिश्वत की मांग की। रिश्वत न देने पर पूरे परिवार को झूठे मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी देने का भी आरोप लगाया गया है।
पीड़ित ने अपने आवेदन में आगे आरोप लगाया है कि बाद में उसके हाथों में हथकड़ी लगाकर उसे दादर-वाराणसी सुपरफास्ट ट्रेन के पेंट्री कोच में बैठाकर सतना ले जाया गया। यात्रा के दौरान भी पुलिसकर्मियों ने उसके साथ लगातार मारपीट की और इलेक्ट्रिक शॉक देने वाले उपकरण से शरीर के विभिन्न हिस्सों पर करंट लगाया। आवेदन के अनुसार, युवक रहम की गुहार लगाता रहा, लेकिन पुलिसकर्मी कथित रूप से उसे लगातार प्रताड़ित करते रहे।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि सतना रेलवे स्टेशन पहुंचने के बाद युवक को स्टेशन के पीछे स्थित एक कमरे में ले जाकर फिर से बंधक बना दिया गया। वहां उसके साथ दोबारा मारपीट की गई और इलेक्ट्रिक शॉक दिए गए। पीड़ित का कहना है कि अत्यधिक यातना के कारण उसकी हालत बिगड़ गई, उसे उल्टियां होने लगीं और वह बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़ा।
प्रार्थना पत्र के मुताबिक, युवक की गंभीर स्थिति को देखते हुए पुलिसकर्मियों ने उसकी मां को फोन कर सतना बुलाया। मां के वहां पहुंचने पर भी कथित रूप से एक लाख रुपये की मांग दोहराई गई। आवेदन में कहा गया है कि बाद में युवक की हालत अधिक बिगड़ने पर देर रात उसे उसकी मां के सुपुर्द कर दिया गया।
पीड़ित का कहना है कि घर लौटने के बाद उसकी तबीयत और बिगड़ गई, जिसके बाद उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मानिकपुर में भर्ती कराया गया। आवेदन में उल्लेख है कि चिकित्सकीय परीक्षण के दौरान शरीर पर चोटों के निशान पाए गए तथा इलाज किया गया। युवक का दावा है कि उसके पास मेडिकल पर्ची, इलाज से संबंधित दस्तावेज, फोटो और वीडियो जैसे साक्ष्य मौजूद हैं।
आवेदन में यह भी आरोप लगाया गया है कि घटना की शिकायत स्थानीय स्तर पर किए जाने के बावजूद कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। उल्टे संबंधित पुलिसकर्मियों को बचाने के लिए शिकायतकर्ता के परिवार पर दबाव बनाया जा रहा है। पीड़ित का आरोप है कि पुलिस उसके घर पहुंचकर शिकायत वापस लेने का दबाव बना रही है तथा झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी जा रही है।
पीड़ित ने पुलिस अधीक्षक चित्रकूट से मांग की है कि आरोपित पुलिसकर्मियों के विरुद्ध तत्काल एफआईआर दर्ज कर निष्पक्ष जांच कराई जाए। साथ ही उससे छीने गए मोबाइल फोन और 2300 रुपये वापस दिलाए जाएं तथा उसे और उसके परिवार को सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।
हालांकि, इन सभी आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। यह समाचार पीड़ित द्वारा पुलिस अधीक्षक चित्रकूट को दिए गए लिखित प्रार्थना पत्र में लगाए गए आरोपों पर आधारित है। मामले में संबंधित मध्य प्रदेश पुलिस अथवा जीआरपी का आधिकारिक पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।








