ज्येष्ठ अमावस्या से पहले मंदाकिनी में सफाई का महाअभियान, 300 मीटर तक चमके घाट
बुंदेली सेना की मुहिम से पन्नालाल घाट पर दिखने लगी स्वच्छता की नई तस्वीर, श्रद्धालुओं को मिलेगा निर्मल जल में स्नान का अवसर
संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट की पवित्र मंदाकिनी नदी को स्वच्छ और निर्मल बनाने के लिए इन दिनों एक बड़ा जनअभियान चल रहा है। ज्येष्ठ अमावस्या जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व से पहले बुंदेली सेना ने नदी सफाई की ऐसी मुहिम छेड़ी है, जिसने घाटों की बदहाल तस्वीर बदलनी शुरू कर दी है। लगातार चार दिनों से चल रहे इस अभियान के तहत पन्नालाल घाट सहित लगभग 300 मीटर लंबे नदी क्षेत्र को साफ कर दिया गया है।
अब तक नदी में फैली चोई घास, प्लास्टिक कचरा, पूजा सामग्री और गंदगी का बड़ा हिस्सा हटाया जा चुका है। इससे घाटों पर न केवल स्वच्छता दिखाई देने लगी है बल्कि श्रद्धालुओं और स्थानीय लोगों में भी उत्साह बढ़ा है कि इस बार ज्येष्ठ अमावस्या पर उन्हें स्वच्छ नदी में स्नान करने का अवसर मिलेगा।
मंदाकिनी के घाटों पर दिखी श्रमदान की मिसाल
चित्रकूट की पहचान केवल धार्मिक नगरी के रूप में ही नहीं, बल्कि मंदाकिनी नदी की आस्था से भी जुड़ी हुई है। हर दिन हजारों श्रद्धालु यहां स्नान और पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं, लेकिन बीते कुछ वर्षों में नदी लगातार प्रदूषण और उपेक्षा का शिकार होती गई।
नदी के कई हिस्सों में चोई घास इतनी अधिक फैल गई थी कि जलधारा दिखाई देना मुश्किल हो गया था। वहीं प्लास्टिक कचरे और पूजा सामग्री ने घाटों की सुंदरता को प्रभावित कर दिया था। इस स्थिति को देखते हुए बुंदेली सेना ने नदी सफाई का अभियान शुरू किया।
अभियान के दौरान कार्यकर्ता नदी में उतरकर हाथों से घास और कचरा निकाल रहे हैं। कई स्थानों पर नावों और रस्सियों की मदद से नदी की सतह पर फैली गंदगी को हटाया गया। लगातार श्रमदान के चलते अब घाटों की तस्वीर पहले से काफी बदल चुकी है।
चौथे दिन भी जारी रहा सफाई अभियान
शुक्रवार को अभियान के चौथे दिन भी कार्यकर्ताओं ने सुबह से नदी सफाई का कार्य जारी रखा। पन्नालाल घाट के आसपास नदी से भारी मात्रा में चोई घास और प्लास्टिक कचरा बाहर निकाला गया।
सफाई अभियान में शामिल लोगों का कहना है कि शुरुआत में नदी की स्थिति बेहद खराब थी। कई जगह पानी पूरी तरह हरी घास और कचरे से ढंका हुआ था। लेकिन लगातार चार दिनों के प्रयास के बाद अब नदी का बड़ा हिस्सा साफ दिखाई देने लगा है।
कार्यकर्ताओं ने घाटों की सीढ़ियों और आसपास के क्षेत्रों से भी गंदगी हटाई। अभियान के दौरान लोगों को यह संदेश भी दिया गया कि वे धार्मिक आस्था के नाम पर नदी में कचरा न फेंकें।
बूढ़े हनुमाजी मंदिर तक चलेगी सफाई मुहिम
बुंदेली सेना के जिलाध्यक्ष अजीत सिंह ने बताया कि छोटे पुल से लेकर बूढ़े हनुमाजी मंदिर तक नदी का उपयोग स्थानीय लोग और श्रद्धालु बड़े स्तर पर करते हैं। गर्मियों में यहां स्नान करने वालों की संख्या और बढ़ जाती है।
उन्होंने कहा कि लंबे समय से यह क्षेत्र प्रदूषण और अव्यवस्था का शिकार था। लोगों को स्वच्छ जल में स्नान कराने और नदी को उसकी पुरानी पहचान दिलाने के उद्देश्य से यह अभियान शुरू किया गया है।
अजीत सिंह के अनुसार अब तक लगभग तीन सौ मीटर लंबी नदी की सफाई की जा चुकी है। अगले दो से तीन दिनों के भीतर बूढ़े हनुमाजी मंदिर तक पूरे क्षेत्र को स्वच्छ कर दिया जाएगा। इसके बाद अगले चरण में नया गांव क्षेत्र के घाटों और सीढ़ियों की सफाई का कार्य शुरू किया जाएगा।
आस्था के साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश
बुंदेली सेना का यह अभियान केवल सफाई तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज को जागरूक करने की भी एक बड़ी कोशिश है। संगठन का मानना है कि जब तक लोग स्वयं अपनी नदियों और घाटों के प्रति जिम्मेदार नहीं बनेंगे, तब तक किसी भी सफाई अभियान का स्थायी असर नहीं दिखेगा।
इसी कारण सफाई के साथ-साथ लोगों को लगातार जागरूक भी किया जा रहा है। घाटों पर आने वाले श्रद्धालुओं से अपील की जा रही है कि वे प्लास्टिक, कपड़े, फूल-मालाएं और अन्य सामग्री नदी में प्रवाहित न करें।
धार्मिक परंपराओं को निभाते समय पर्यावरण का ध्यान रखना भी जरूरी है। यदि लोग अपनी आदतों में बदलाव लाएं तो मंदाकिनी जैसी पवित्र नदियों को लंबे समय तक स्वच्छ रखा जा सकता है।
गर्मियों में स्थानीय लोगों को मिलेगी बड़ी राहत
गर्मी के मौसम में मंदाकिनी नदी स्थानीय लोगों के लिए राहत का प्रमुख केंद्र बन जाती है। बड़ी संख्या में बच्चे और युवा नदी में स्नान करने पहुंचते हैं। लेकिन गंदगी और जलकुंभी जैसी समस्या के कारण पिछले कुछ समय से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा था।
अब सफाई अभियान के चलते नदी के घाटों पर फिर से साफ-सुथरा वातावरण दिखाई देने लगा है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इस प्रकार नियमित रूप से सफाई होती रही तो चित्रकूट की धार्मिक पहचान और मजबूत होगी।
घाटों पर पहुंचने वाले श्रद्धालुओं ने भी बुंदेली सेना के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि यह अभियान केवल सफाई नहीं बल्कि समाज को जिम्मेदारी का एहसास कराने वाली पहल है।
जनभागीदारी से ही बचेगी मंदाकिनी
विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी नदी को स्वच्छ बनाए रखने के लिए केवल सरकारी प्रयास पर्याप्त नहीं होते। समाज की भागीदारी और जनजागरूकता सबसे जरूरी होती है।
चित्रकूट की मंदाकिनी नदी केवल धार्मिक महत्व ही नहीं रखती, बल्कि यह स्थानीय जीवन और संस्कृति का अभिन्न हिस्सा भी है। यदि लोग स्वयं इसकी स्वच्छता के प्रति गंभीर हों तो नदी को प्रदूषण से बचाया जा सकता है।
बुंदेली सेना की यह पहल अब धीरे-धीरे जनआंदोलन का रूप लेती दिखाई दे रही है। ज्येष्ठ अमावस्या से पहले शुरू हुआ यह महाअभियान लोगों के भीतर अपनी धरोहर के प्रति जिम्मेदारी और संवेदनशीलता का संदेश भी दे रहा है।








