बलराम पण्डित की रिपोर्ट
दरभंगा में सरकारी जमीन के फर्जीवाड़े पर प्रशासन का शिकंजा
दरभंगा जिले में सरकारी जमीन के दाखिल-खारिज और जमाबंदी से जुड़े कथित फर्जीवाड़े के मामले में जिला प्रशासन ने कड़ा रुख अपनाया है। सदर अंचल के खोजकीपुर मौजा में गैरमजरूआ खास यानी झील की सरकारी भूमि को कथित तौर पर अवैध तरीके से दाखिल-खारिज किए जाने का मामला सामने आने के बाद जिलाधिकारी कौशल कुमार ने बड़ी कार्रवाई की है। जांच में गड़बड़ी सामने आने के बाद तीन राजस्व कर्मचारियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।
इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग से जुड़े कर्मचारियों और अधिकारियों के बीच हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है। प्रशासन ने यह स्पष्ट संकेत दिया है कि सरकारी भूमि से जुड़े राजस्व अभिलेखों में किसी भी प्रकार की हेराफेरी, अनियमितता या नियमों की अनदेखी को गंभीरता से लिया जाएगा।
27 मामलों में सरकारी भूमि की जमाबंदी का आरोप
मामला केवल एक-दो जमीन के रिकॉर्ड तक सीमित नहीं बताया जा रहा है। जांच रिपोर्ट के अनुसार, खोजकीपुर मौजा स्थित गैरमजरूआ खास भूमि से जुड़े कुल 27 मामलों में सरकारी जमीन का कथित रूप से अवैध दाखिल-खारिज कर रैयती जमाबंदी कायम कर दी गई।
गैरमजरूआ खास भूमि सामान्य तौर पर सरकारी भूमि की श्रेणी में आती है। ऐसे में यदि इस प्रकार की भूमि को निजी रैयती जमीन के रूप में राजस्व अभिलेखों में दर्ज किया गया है, तो यह राजस्व व्यवस्था और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर विषय बन जाता है।
प्रशासनिक जांच में कथित अनियमितताओं के सामने आने के बाद जिलाधिकारी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों की भूमिका की पड़ताल कराई। जांच के निष्कर्षों के आधार पर अब विभागीय कार्रवाई का रास्ता भी खोल दिया गया है।
तीन राजस्व कर्मचारी तत्काल प्रभाव से निलंबित
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने जांच रिपोर्ट के आधार पर चन्दन कुमार शर्मा, नन्द लाल दास और नेहाल कुमार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। इन कर्मचारियों पर सरकारी भूमि के दाखिल-खारिज की प्रक्रिया में कथित अनियमितता बरतने और राजस्व अभिलेखों में गलत तरीके से जमाबंदी कायम किए जाने के मामले में कार्रवाई की गई है।
प्रशासन की इस कार्रवाई को राजस्व व्यवस्था में जवाबदेही सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। खास बात यह है कि कार्रवाई केवल निचले स्तर के कर्मचारियों तक सीमित नहीं रखी गई है, बल्कि तत्कालीन अंचल अधिकारियों और अन्य संबंधित राजस्व पदाधिकारियों की भूमिका की भी जांच के दायरे में लाई गई है।
तत्कालीन अधिकारियों पर भी विभागीय कार्रवाई की तैयारी
जांच में कथित अनियमितताओं के लिए तत्कालीन अंचल अधिकारियों और राजस्व अधिकारियों की भूमिका भी सामने आने के बाद उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया है।
तत्कालीन अंचल अधिकारी अरुण कुमार सक्सेना, इन्द्रसान साह और रंधीर कुमार, राजस्व अधिकारी विनीत चित्रा तथा तत्कालीन राजस्व कर्मचारियों बबन पाल, राधेश्याम चौधरी, भरत कुमार और पूर्णानन्द झा के विरुद्ध प्रपत्र ‘क’ गठित कर विभागीय कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
इसके अलावा दो अंचल अधिकारियों के खिलाफ कारण बताओ नोटिस जारी किए जाने की बात भी सामने आई है। इससे संकेत मिलता है कि प्रशासन इस पूरे मामले की जिम्मेदारी तय करने में किसी स्तर पर नरमी बरतने के मूड में नहीं है।
शिकायत के बाद शुरू हुई जांच
बताया गया है कि सरकारी भूमि के कथित अवैध दाखिल-खारिज और जमाबंदी कायम किए जाने को लेकर शिकायत मिलने के बाद जिलाधिकारी ने जांच का निर्देश दिया था। जांच के दौरान राजस्व अभिलेखों और दाखिल-खारिज से जुड़े मामलों की पड़ताल की गई।
जांच में 27 मामलों में सरकारी भूमि को कथित तौर पर रैयती जमाबंदी में शामिल किए जाने की बात सामने आई। इसके बाद जिलाधिकारी ने संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ निलंबन की कार्रवाई की तथा अधिकारियों की भूमिका को लेकर विभागीय प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया।
यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि राजस्व रिकॉर्ड में एक बार किसी भूमि की जमाबंदी कायम हो जाने के बाद उससे जुड़े विवाद लंबे समय तक बने रह सकते हैं। ऐसे में सरकारी भूमि के रिकॉर्ड की शुद्धता बनाए रखना प्रशासन की बड़ी जिम्मेदारी मानी जाती है।
सरकारी भूमि की सुरक्षा पर डीएम का सख्त संदेश
जिलाधिकारी कौशल कुमार ने स्पष्ट किया है कि सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा, फर्जी दाखिल-खारिज अथवा नियमों के विपरीत जमाबंदी कायम करने जैसी गतिविधियों को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा।
उन्होंने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को यह संदेश भी दिया है कि राजस्व अभिलेखों की शुचिता से किसी भी प्रकार का समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सरकारी संपत्ति की सुरक्षा और राजस्व रिकॉर्ड को दुरुस्त रखना जिला प्रशासन की प्राथमिकताओं में शामिल है।
डीएम के इस रुख से यह संकेत साफ है कि आने वाले समय में सरकारी जमीन से जुड़े पुराने दाखिल-खारिज और जमाबंदी मामलों की भी जांच हो सकती है। यदि कहीं नियमों के विपरीत सरकारी भूमि को निजी रिकॉर्ड में दर्ज किए जाने की पुष्टि होती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की संभावना बनी रहेगी।
राजस्व कर्मचारियों में बढ़ी चिंता
दरभंगा में इस कार्रवाई के बाद राजस्व विभाग से जुड़े कर्मचारियों में चर्चा तेज हो गई है। तीन कर्मचारियों के निलंबन और कई अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू होने से राजस्व अभिलेखों में किसी भी प्रकार की अनियमितता को लेकर सतर्कता बढ़ने की संभावना है।
प्रशासन की कार्रवाई का व्यापक संदेश यह है कि सरकारी भूमि से संबंधित रिकॉर्ड में गड़बड़ी को केवल कार्यालयी अनियमितता मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाएगा। यदि जांच में किसी कर्मचारी या अधिकारी की भूमिका सामने आती है, तो उसके खिलाफ विभागीय और आवश्यकतानुसार कानूनी कार्रवाई भी की जा सकती है।
अब आगे क्या होगा?
पूरे मामले में विभागीय कार्रवाई की प्रक्रिया आगे बढ़ने के साथ यह भी महत्वपूर्ण होगा कि कथित रूप से गलत तरीके से कायम की गई जमाबंदियों की स्थिति क्या होती है और सरकारी भूमि के रिकॉर्ड को किस प्रकार दुरुस्त किया जाता है। प्रशासनिक जांच के बाद संबंधित राजस्व अभिलेखों में आवश्यक सुधार की प्रक्रिया भी महत्वपूर्ण मानी जाएगी।
दरभंगा प्रशासन की इस कार्रवाई ने सरकारी भूमि और राजस्व रिकॉर्ड की सुरक्षा को लेकर एक कड़ा संदेश दिया है। अब निगाह इस बात पर रहेगी कि विभागीय जांच में जिम्मेदारी किस स्तर तक तय होती है और 27 मामलों में कथित रूप से प्रभावित सरकारी भूमि के राजस्व रिकॉर्ड को किस तरह पुनः व्यवस्थित किया जाता है।
जिलाधिकारी कौशल कुमार के सख्त रुख से इतना स्पष्ट है कि सरकारी जमीन के कथित फर्जी दाखिल-खारिज और अनियमित जमाबंदी के मामलों में प्रशासन कार्रवाई को आगे भी जारी रख सकता है। यह कार्रवाई राजस्व व्यवस्था में पारदर्शिता और सरकारी संपत्ति की सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

























