चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट
गोंडा: उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले से शैक्षिक दस्तावेज में ऐसी गंभीर लापरवाही का मामला सामने आया है, जिसने एक छात्रा और उसके परिवार की परेशानी बढ़ा दी है। कोतवाली देहात क्षेत्र के खरगूपुर स्थित नेहा पब्लिक सिटी इंटर कॉलेज की एक छात्रा की हाईस्कूल की मार्कशीट में उसकी वास्तविक उम्र 19 वर्ष के बजाय 55 वर्ष दर्ज कर दी गई। यानी जन्म वर्ष में ऐसी गलती हुई कि छात्रा की उम्र अचानक 36 वर्ष अधिक दर्ज हो गई।
मार्कशीट में दर्ज जन्म वर्ष के अनुसार छात्रा का जन्म वर्ष 1970 दिखाया गया है, जबकि उसके परिवार के मुताबिक उसकी वास्तविक जन्मतिथि वर्ष 2006 की है। इस विसंगति ने छात्रा के सामने आगे की पढ़ाई, प्रवेश और अन्य शैक्षिक प्रक्रियाओं को लेकर गंभीर समस्या खड़ी कर दी है।
आठवीं की टीसी में सही उम्र, हाईस्कूल की मार्कशीट में उलटफेर
पीड़ित छात्रा का कहना है कि उसकी आठवीं कक्षा की टीसी में जन्म संबंधी जानकारी सही दर्ज थी। उस दस्तावेज में उसकी उम्र और जन्म वर्ष को लेकर कोई समस्या नहीं थी। इसके बावजूद जब हाईस्कूल का अंकपत्र जारी हुआ तो उसमें जन्म वर्ष 1970 दर्ज मिला।
छात्रा और उसके परिजनों के लिए सबसे बड़ा सवाल यही है कि जब पहले के शैक्षिक दस्तावेजों में जन्म संबंधी विवरण सही था, तो हाईस्कूल के रिकॉर्ड में अचानक इतनी बड़ी विसंगति कैसे पैदा हो गई?
परिवार का आरोप है कि स्कूल में छात्रा के सही दस्तावेज उपलब्ध होने के बावजूद बोर्ड को गलत जानकारी भेजी गई। हालांकि, इस मामले में वास्तविक गलती किस स्तर पर हुई, यह संबंधित विभाग और बोर्ड की जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा।
19 साल की छात्रा को रिकॉर्ड में बना दिया 55 साल की महिला
हाईस्कूल की मार्कशीट में जन्म वर्ष 1970 दर्ज होने का सीधा अर्थ यह है कि छात्रा की उम्र करीब 55 वर्ष दिखाई दे रही है। वहीं, परिवार द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के अनुसार उसकी उम्र लगभग 19 वर्ष है।
एक ही व्यक्ति की उम्र में 36 वर्ष का अंतर सामान्य टाइपिंग या दस्तावेजी त्रुटि से कहीं अधिक गंभीर दिखाई देता है। यही वजह है कि छात्रा और उसके परिजन इस गलती को जल्द से जल्द ठीक कराने के लिए संबंधित कार्यालयों के चक्कर लगा रहे हैं।
परिजनों के मुताबिक छात्रा को अब अपनी पढ़ाई और भविष्य से जुड़े जरूरी काम छोड़कर सरकारी कार्यालयों में दस्तावेज लेकर जाना पड़ रहा है। परिवार का कहना है कि हर जगह उसे अपनी वास्तविक उम्र साबित करने के लिए अलग-अलग कागजात दिखाने पड़ रहे हैं।
DIOS कार्यालय में जमा किए दस्तावेज, फिर भी सुधार का इंतजार
पीड़ित छात्रा की ओर से अपनी वास्तविक जन्मतिथि साबित करने के लिए आवश्यक दस्तावेज जिला विद्यालय निरीक्षक यानी DIOS कार्यालय, गोंडा में जमा किए जाने की बात कही गई है। परिवार के अनुसार टीसी, आधार कार्ड और लिखित प्रार्थना पत्र सहित संबंधित दस्तावेज अधिकारियों को उपलब्ध कराए जा चुके हैं।
इसके बावजूद अभी तक हाईस्कूल की मार्कशीट में दर्ज जन्म संबंधी गलती का समाधान नहीं हुआ है। परिवार को उम्मीद है कि शिक्षा विभाग मामले को गंभीरता से लेते हुए रिकॉर्ड की जांच करेगा और सही दस्तावेजों के आधार पर आवश्यक सुधार की प्रक्रिया जल्द पूरी कराएगा।
परिजनों ने स्कूल की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल
पीड़ित परिवार ने पूरे मामले के लिए नेहा पब्लिक सिटी इंटर कॉलेज की कथित लापरवाही को जिम्मेदार बताया है। उनका कहना है कि छात्रा के सही दस्तावेज स्कूल में मौजूद थे, फिर भी बोर्ड को गलत जन्म वर्ष की जानकारी कैसे भेजी गई, इसका जवाब स्कूल प्रबंधन को देना चाहिए।
परिजनों का कहना है कि एक छोटी-सी लापरवाही ने छात्रा के भविष्य को प्रभावित करने वाली बड़ी समस्या पैदा कर दी है। उनका यह भी आरोप है कि गलती सुधारने के लिए उन्हें लगातार अलग-अलग कार्यालयों में दस्तावेज लेकर जाना पड़ रहा है।
हालांकि, स्कूल प्रबंधन की ओर से इस मामले में क्या स्पष्टीकरण दिया गया है, इसकी जानकारी सामने नहीं आई है। इसलिए पूरे मामले में सभी पक्षों का आधिकारिक पक्ष सामने आना आवश्यक है।
एडमिशन और छात्रवृत्ति पर भी पड़ सकता है असर
शैक्षिक रिकॉर्ड में जन्मतिथि का गलत होना छात्रा के लिए केवल एक अंकपत्र की समस्या नहीं है। आगे की पढ़ाई में प्रवेश, छात्रवृत्ति, प्रतियोगी परीक्षाओं के आवेदन और अन्य सरकारी या शैक्षिक प्रक्रियाओं में जन्मतिथि का विवरण महत्वपूर्ण होता है।
यदि हाईस्कूल की मार्कशीट में उम्र 55 वर्ष दर्ज है, तो भविष्य में दस्तावेजों के सत्यापन के दौरान छात्रा को बार-बार विसंगति का सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि परिवार जल्द से जल्द रिकॉर्ड दुरुस्त कराने की मांग कर रहा है।
परिजनों को आशंका है कि यदि मार्कशीट में सुधार समय पर नहीं हुआ तो छात्रा का आगे का एडमिशन और छात्रवृत्ति जैसी प्रक्रियाएं भी प्रभावित हो सकती हैं।
आखिर गलती कहां हुई, यह बड़ा सवाल
इस पूरे मामले ने शिक्षा व्यवस्था और रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह है कि जब छात्रा के पुराने दस्तावेजों में जन्म संबंधी जानकारी सही थी, तो हाईस्कूल के रिकॉर्ड में जन्म वर्ष 1970 कैसे दर्ज हो गया?
क्या स्कूल स्तर पर ऑनलाइन डाटा भरने के दौरान गलती हुई? क्या दस्तावेजों की जांच में लापरवाही बरती गई? या फिर बोर्ड के रिकॉर्ड तैयार करने की प्रक्रिया में कोई त्रुटि हुई? इन सवालों का जवाब संबंधित अधिकारियों की जांच के बाद ही मिल सकेगा।
मामला फिलहाल DIOS गोंडा के संज्ञान में होने की बात कही जा रही है। अब छात्रा और उसके परिजनों की नजर शिक्षा विभाग की कार्रवाई पर है।
छात्रा को चाहिए समाधान, सिर्फ आश्वासन नहीं
इस मामले में सबसे महत्वपूर्ण पक्ष छात्रा का भविष्य है। जन्मतिथि संबंधी रिकॉर्ड में इतनी बड़ी विसंगति को जल्द दूर करना जरूरी है, ताकि उसकी आगे की पढ़ाई प्रभावित न हो। परिवार का कहना है कि उनके पास वास्तविक जन्मतिथि साबित करने वाले दस्तावेज मौजूद हैं और वे संबंधित कार्यालय में अपनी शिकायत भी दर्ज करा चुके हैं।
अब देखना होगा कि शिक्षा विभाग और संबंधित बोर्ड इस मामले की जांच किस तरह करता है और छात्रा की मार्कशीट में सही जन्मतिथि दर्ज कराने की प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है।
एक छात्रा की उम्र में 36 वर्ष का अंतर केवल कागज पर दर्ज संख्या की गलती नहीं है। यह उस व्यवस्था की गंभीरता पर भी सवाल खड़ा करता है, जिसमें शैक्षिक दस्तावेज तैयार होने से पहले उपलब्ध प्रमाणों का सही तरीके से सत्यापन होना चाहिए। गोंडा का यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि समय रहते रिकॉर्ड दुरुस्त नहीं किया गया तो इसका असर छात्रा के शैक्षिक और भविष्य से जुड़े कई महत्वपूर्ण अवसरों पर पड़ सकता है।

























