गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर शिकंजा, दो स्कूलों पर मुकदमा दर्ज

रिपोर्टर इरफान अली लारी की तस्वीर के साथ गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों पर शिक्षा विभाग की कार्रवाई और दो स्कूलों पर मुकदमा दर्ज होने को दर्शाती फीचर इमेज।

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया। जिले में शिक्षा व्यवस्था को लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अख्तियार करना शुरू कर दिया है। बिना मान्यता संचालित हो रहे विद्यालयों और मान्यता की शर्तों के विपरीत शिक्षण संस्थान चलाने वालों के खिलाफ कार्रवाई का सिलसिला तेज हो गया है। शिक्षा विभाग की ओर से जारी निर्देशों के बाद जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में विद्यालयों की जांच का दायरा बढ़ाने की तैयारी है। इसी कार्रवाई के तहत दो विद्यालयों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई गई है। इससे उन स्कूल संचालकों में खलबली मच गई है, जो कथित तौर पर आवश्यक मान्यता और विभागीय नियमों का पालन किए बिना विद्यालय संचालित कर रहे हैं।

शिक्षा विभाग की कार्रवाई का यह कदम केवल दो विद्यालयों तक सीमित रहने वाला नहीं माना जा रहा है। विभाग ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में संचालित विद्यालयों की स्थिति की पड़ताल करने और नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर कठोर कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। ऐसे में आने वाले दिनों में जिले में कई और विद्यालयों की जांच तथा उनके खिलाफ कार्रवाई की तस्वीर सामने आ सकती है।

विभागीय निर्देश के बाद बढ़ी निगरानी

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राम जियावन नाथ के निर्देश के बाद गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों के खिलाफ अभियान को गति देने की कवायद शुरू हुई है। विभाग का उद्देश्य ऐसे विद्यालयों को चिन्हित करना है, जो बिना आवश्यक मान्यता के बच्चों को पढ़ा रहे हैं या निर्धारित मानकों और प्राप्त मान्यता के दायरे से बाहर जाकर विद्यालय का संचालन कर रहे हैं।

शिक्षा विभाग ने सभी खंड शिक्षा अधिकारियों को अपने-अपने क्षेत्र में संचालित विद्यालयों की विस्तृत जांच करने के निर्देश दिए हैं। जांच के दौरान विद्यालय की मान्यता, संचालन की स्थिति और संबंधित नियमों के अनुपालन की पड़ताल की जाएगी। यदि किसी विद्यालय के संचालन में गंभीर अनियमितता मिलती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

विभागीय स्तर पर तैयार होने वाली सूची में मान्यता प्राप्त विद्यालयों के साथ उन विद्यालयों को भी शामिल किया जाएगा, जो बिना मान्यता के संचालित पाए जाते हैं। इससे शिक्षा विभाग को जिले में वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी और गैरकानूनी तरीके से संचालित संस्थानों पर कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।

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दो विद्यालयों के खिलाफ पुलिस कार्रवाई

इसी अभियान के तहत खंड शिक्षा अधिकारी भाटपाररानी संजीव सिंह ने बनकटा थाने पहुंचकर दो विद्यालयों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराने के लिए तहरीर दी। जिन विद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की गई है, उनमें नेशनल डिफेंस एकेडमी, रामकोला और अवध बिहारी इंटरनेशनल स्कूल, अकटही बाजार शामिल हैं।

पुलिस के अनुसार दोनों विद्यालयों के खिलाफ संबंधित धाराओं में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। शिक्षा विभाग की ओर से दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने मामले को दर्ज करते हुए आगे की कार्रवाई शुरू की है।

इस कार्रवाई के बाद यह साफ संकेत मिल गया है कि विभाग अब केवल निरीक्षण या चेतावनी तक सीमित रहने के बजाय नियमों का उल्लंघन करने वाले विद्यालयों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई का रास्ता भी अपना रहा है।

जांच में सामने आएगी विद्यालयों की वास्तविक स्थिति

जिले में बड़ी संख्या में निजी विद्यालय संचालित होते हैं। इनमें कई विद्यालय निर्धारित नियमों के तहत मान्यता लेकर शिक्षण कार्य कर रहे हैं, जबकि समय-समय पर ऐसे संस्थानों की शिकायतें भी सामने आती रही हैं, जिनके पास आवश्यक मान्यता नहीं होती या वे अपनी मान्यता के विपरीत गतिविधियां संचालित करते हैं।

ऐसे विद्यालयों की जांच अब विभाग के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है। जांच के दौरान यह देखा जाएगा कि विद्यालय के पास संचालन के लिए वैध मान्यता है या नहीं। इसके साथ ही यह भी पड़ताल की जाएगी कि विद्यालय जिस स्तर या कक्षा तक शिक्षा दे रहा है, उसके लिए संबंधित विभाग से आवश्यक अनुमति प्राप्त है अथवा नहीं।

यदि किसी संस्थान में नियमों का गंभीर उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संचालक के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है। विभागीय अधिकारियों के निर्देश से यह भी स्पष्ट है कि जांच को केवल कागजी कार्रवाई तक सीमित नहीं रखा जाएगा, बल्कि जरूरत पड़ने पर पुलिस प्रशासन की सहायता लेकर कार्रवाई को प्रभावी बनाया जाएगा।

जांच के दौरान पुलिस बल की भी व्यवस्था

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी के आदेश में खंड शिक्षा अधिकारियों को यह निर्देश भी दिया गया है कि यदि किसी विद्यालय की जांच के दौरान स्थिति संवेदनशील होने की आशंका हो अथवा कार्रवाई के लिए पुलिस की आवश्यकता महसूस हो तो संबंधित उप जिलाधिकारी से पुलिस बल उपलब्ध कराने के लिए आदेश प्राप्त किया जाए।

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इस व्यवस्था का उद्देश्य जांच और कार्रवाई के दौरान किसी भी प्रकार के विरोध या विवाद की स्थिति से निपटना है। शिक्षा विभाग और प्रशासन के बीच समन्वय से अभियान को अधिक प्रभावी तरीके से आगे बढ़ाने की तैयारी है।

विभागीय अधिकारियों का यह रुख उन विद्यालय संचालकों के लिए स्पष्ट चेतावनी माना जा रहा है, जो आवश्यक औपचारिकताएं पूरी किए बिना शिक्षण संस्थान चला रहे हैं।

अभिभावकों और विद्यार्थियों पर भी पड़ता है असर

बिना मान्यता संचालित विद्यालयों का सबसे बड़ा प्रभाव वहां पढ़ने वाले विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों पर पड़ सकता है। अभिभावक अपने बच्चों की शिक्षा के लिए विद्यालय का चयन करते समय उसकी मान्यता और शैक्षिक व्यवस्था को महत्वपूर्ण मानते हैं। यदि किसी विद्यालय की मान्यता ही स्पष्ट नहीं है या वह नियमों के विपरीत संचालित हो रहा है तो भविष्य में विद्यार्थियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है।

इसी वजह से शिक्षा विभाग द्वारा ऐसे विद्यालयों की पहचान और कार्रवाई को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि बच्चों को निर्धारित मानकों के अनुरूप शिक्षा उपलब्ध हो और अभिभावकों को भी विद्यालय की वैधता को लेकर किसी प्रकार की असमंजस की स्थिति न रहे।

अन्य विद्यालयों पर भी गिर सकती है गाज

दो विद्यालयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज होने के बाद अब निगाहें जिले के अन्य निजी विद्यालयों पर भी टिक गई हैं। विभागीय आदेश के बाद यदि क्षेत्रवार जांच व्यापक स्तर पर की जाती है तो कई ऐसे विद्यालयों की स्थिति सामने आ सकती है, जिनके संचालन में मान्यता संबंधी कमियां अथवा अन्य नियमों का उल्लंघन पाया जाए।

ऐसे मामलों में केवल नोटिस देकर मामला समाप्त करने के बजाय नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है। जरूरत पड़ने पर संबंधित विद्यालयों को बंद कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

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हालांकि किसी विद्यालय के खिलाफ अंतिम कार्रवाई जांच में सामने आने वाले तथ्यों और विभागीय नियमों के आधार पर ही होगी। शिक्षा विभाग का अभियान किस स्तर तक पहुंचता है, यह आने वाले दिनों में होने वाली जांच और उसके बाद की कार्रवाई से स्पष्ट होगा।

शिक्षा व्यवस्था में नियमों का पालन जरूरी

विद्यालय शिक्षा का महत्वपूर्ण केंद्र होता है। ऐसे में उसके संचालन से जुड़े नियमों और मानकों का पालन करना बेहद जरूरी है। मान्यता की व्यवस्था का उद्देश्य यही है कि विद्यार्थियों को निर्धारित शैक्षिक वातावरण, आवश्यक सुविधाएं और नियमों के अनुरूप शिक्षा मिल सके।

शिक्षा विभाग द्वारा शुरू की गई कार्रवाई को इसी व्यापक संदर्भ में देखा जा रहा है। यदि जांच निष्पक्ष और प्रभावी ढंग से आगे बढ़ती है तो इससे जिले में संचालित विद्यालयों की वास्तविक स्थिति सामने आने की उम्मीद है। साथ ही नियमों की अनदेखी करने वाले संचालकों के बीच भी जिम्मेदारी और जवाबदेही का संदेश जाएगा।

थानाध्यक्ष ने मुकदमा दर्ज होने की पुष्टि की

बनकटा थानाध्यक्ष दिनेश कुमार मौर्य ने बताया कि संबंधित विद्यालयों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब दर्ज मामले के आधार पर आवश्यक कार्रवाई करेगी।

फिलहाल दो विद्यालयों के खिलाफ हुई यह कार्रवाई शिक्षा विभाग के अभियान की शुरुआत मानी जा रही है। विभाग द्वारा जिलेभर में विद्यालयों की जांच के निर्देश दिए जाने के बाद आने वाले दिनों में और भी संस्थानों पर कार्रवाई की संभावना बनी हुई है। यदि जांच के दौरान बिना मान्यता या नियमों के विपरीत विद्यालय संचालित पाए जाते हैं तो उनके खिलाफ भी मुकदमा दर्ज होने और संचालन बंद कराने जैसी कार्रवाई हो सकती है।

इस पूरे अभियान का असर जिले की शिक्षा व्यवस्था पर किस तरह पड़ता है, यह आने वाली जांच रिपोर्ट और विभागीय कार्रवाई से सामने आएगा। फिलहाल दो विद्यालयों पर मुकदमा दर्ज होने से इतना जरूर स्पष्ट हो गया है कि शिक्षा विभाग ने गैर मान्यता प्राप्त विद्यालयों के मामले में अब सख्ती का रास्ता अपना लिया है।

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Author: यायावर

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