इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया, भाटपार रानी। घर की आर्थिक जरूरतों को पूरा करने और परिवार के बेहतर भविष्य की उम्मीद लेकर अहमदाबाद मजदूरी करने निकले 28 वर्षीय दिनेश प्रसाद की रास्ते में दर्दनाक मौत हो गई। भाटपार रानी थाना क्षेत्र के राजस्व ग्राम सभा उसका निवासी दिनेश प्रसाद पुत्र फौजदार प्रसाद 10 सितंबर 2026 को घर से अहमदाबाद के लिए रवाना हुआ था। बताया गया कि रात के समय देवरिया रेलवे स्टेशन पर ट्रेन में सवार होने के दौरान वह अचानक ट्रेन के गेट के पास से फिसलकर नीचे गिर गया और ट्रेन की चपेट में आ गया। हादसे में उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
अहमदाबाद में मजदूरी के लिए घर से निकला था युवक
परिजनों के अनुसार दिनेश प्रसाद परिवार की आर्थिक स्थिति को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अहमदाबाद में मजदूरी करने जा रहा था। घर से निकलते समय परिवार को यह अंदाजा भी नहीं था कि कुछ ही घंटों बाद उनके सामने ऐसी हृदयविदारक खबर आने वाली है। दिनेश के अचानक निधन की सूचना ने पूरे परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया।
बताया गया कि 10 सितंबर को घर से निकलने के बाद वह देवरिया रेलवे स्टेशन पहुंचा। रात में ट्रेन पर चढ़ते समय अचानक उसका संतुलन बिगड़ गया। वह ट्रेन के गेट के पास से नीचे गिर गया और ट्रेन की चपेट में आ गया। हादसा इतना गंभीर था कि दिनेश ने घटनास्थल पर ही दम तोड़ दिया।
रेलवे पुलिस ने मोबाइल से परिजनों को दी सूचना
घटना की जानकारी मिलने के बाद देवरिया रेलवे पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक कार्रवाई शुरू की। पुलिस को मृतक के पास से मोबाइल फोन मिला। इसी मोबाइल के माध्यम से रेलवे पुलिस ने उसके परिवार से संपर्क कर हादसे की सूचना दी। जैसे ही दिनेश की मौत की खबर उसके घर पहुंची, परिवार में चीख-पुकार मच गई। देखते ही देखते खुशी का माहौल मातम में बदल गया।
दिनेश की मौत की खबर गांव में भी तेजी से फैल गई। ग्रामीणों और परिचितों में शोक की लहर दौड़ गई। परिवार के लोग रात में ही देवरिया के लिए रवाना हुए। मृतक के पिता फौजदार प्रसाद और बड़े भाई संदीप प्रसाद के साथ रिश्तेदार देवांगन कश्यप भी देवरिया पहुंचे। बताया गया कि देवांगन कश्यप पूर्व में लार पूर्वी क्षेत्र से जिला पंचायत सदस्य पद के प्रत्याशी रह चुके हैं।
कागजी कार्रवाई के बाद पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया शव
देवरिया पहुंचने के बाद परिजनों ने रेलवे पुलिस से संपर्क किया। रेलवे पुलिस ने आवश्यक कानूनी और कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए देवरिया पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी होने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया।
परिवार के लोग दिनेश के शव को लेकर घर के लिए रवाना हुए। बताया गया कि लगभग शाम चार बजे शव गांव पहुंचा। शव के घर पहुंचते ही वहां मातम और करुण क्रंदन का माहौल बन गया। परिजन अपने जवान बेटे और पति को खोने के गम में बेसुध नजर आए। ग्रामीणों की भीड़ मृतक के घर पहुंचने लगी और हर कोई परिवार को ढांढस बंधाने का प्रयास करता रहा।
डेढ़ वर्ष पहले हुई थी दिनेश की शादी
दिनेश प्रसाद की शादी करीब डेढ़ वर्ष पहले हुई थी। उसके परिवार में पत्नी वंदना देवी और करीब छह माह का छोटा बच्चा है। कम उम्र में पति को खोने के बाद वंदना देवी पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है। मासूम बच्चे के सिर से भी पिता का साया उठ गया। परिवार के लोगों के लिए यह घटना इसलिए भी बेहद पीड़ादायक है क्योंकि दिनेश अपने छोटे बच्चे और परिवार के भविष्य को बेहतर बनाने की उम्मीद लेकर ही कमाने के लिए घर से निकला था।
दिनेश दो भाइयों में छोटा था। उसके परिवार में माता शारदा देवी, पिता फौजदार प्रसाद, बड़ा भाई संदीप प्रसाद तथा तीन बहनें ममता देवी, सविता देवी और बबली देवी हैं। बताया गया कि तीनों बहनों में छोटी बहन की शादी अभी बाकी है। परिवार की जिम्मेदारियों में दिनेश की भूमिका महत्वपूर्ण थी। उसकी असमय मौत ने परिवार के सामने भावनात्मक संकट के साथ-साथ भविष्य की कई चिंताएं भी खड़ी कर दी हैं।
माता-पिता और पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल
दिनेश की मौत के बाद उसकी मां शारदा देवी का रो-रोकर बुरा हाल है। पिता फौजदार प्रसाद भी अपने जवान बेटे को खोने के सदमे में टूट गए हैं। पत्नी वंदना देवी की हालत देखकर वहां मौजूद लोगों की आंखें भी नम हो गईं। छह माह के मासूम बच्चे को शायद अभी यह भी पता नहीं कि उसके पिता अब कभी लौटकर नहीं आएंगे। परिवार के सदस्यों और रिश्तेदारों के विलाप से पूरा माहौल गमगीन बना रहा।
गांव के लोगों के अनुसार दिनेश मेहनत-मजदूरी कर अपने परिवार का जीवन बेहतर बनाने का प्रयास कर रहा था। परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए उसने अहमदाबाद जाने का निर्णय लिया था। लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था। जिस सफर की शुरुआत रोजी-रोटी की तलाश में हुई थी, वही सफर परिवार के लिए जीवनभर का दर्द बन गया।
छोटी गंडक नदी के किनारे हुआ अंतिम संस्कार
पोस्टमार्टम के बाद जब दिनेश का शव गांव पहुंचा तो अंतिम दर्शन के लिए बड़ी संख्या में ग्रामीण, रिश्तेदार और परिचित मृतक के घर पहुंचे। हिंदू रीति-रिवाज के अनुसार अंतिम संस्कार की तैयारियां की गईं। इसके बाद चनुकी में छोटी गंडक नदी के किनारे स्थित श्मशान घाट पर दिनेश प्रसाद का अंतिम संस्कार किया गया। मृतक के पिता फौजदार प्रसाद ने अपने पुत्र को मुखाग्नि दी।
अंतिम संस्कार के दौरान माहौल बेहद गमगीन रहा। सगे-संबंधियों, हित-रिश्तेदारों और गांव के सैकड़ों लोगों ने श्मशान घाट पहुंचकर दिवंगत दिनेश को अंतिम विदाई दी। लोगों ने शोक संतप्त परिवार को ढांढस बंधाया और इस कठिन समय में परिवार के साथ खड़े रहने का भरोसा दिया।
एक हादसे ने उजाड़ दिया पूरा परिवार
दिनेश प्रसाद की मौत केवल एक युवक की असमय मृत्यु नहीं है, बल्कि इसके साथ एक परिवार की उम्मीदें भी टूट गई हैं। करीब डेढ़ वर्ष पहले जिस घर में शादी के बाद नई खुशियां आई थीं, वहां अब मातम पसरा है। छह माह के मासूम बच्चे की परवरिश, पत्नी का भविष्य, छोटी बहन की शादी और परिवार की आर्थिक जिम्मेदारियां अब परिजनों के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी हैं।
देवरिया रेलवे स्टेशन पर हुई इस दर्दनाक ट्रेन दुर्घटना ने एक बार फिर यह सवाल सामने ला दिया है कि रेलवे स्टेशनों पर यात्रियों को ट्रेन में चढ़ते समय कितनी सावधानी बरतनी चाहिए। हालांकि इस घटना के वास्तविक कारणों की पुष्टि संबंधित जांच और आधिकारिक कार्रवाई के आधार पर ही हो सकेगी, लेकिन दिनेश की मौत ने उसके परिवार और गांव को गहरे सदमे में डाल दिया है।
अहमदाबाद कमाने की उम्मीद लेकर घर से निकला 28 वर्षीय दिनेश प्रसाद अब कभी वापस नहीं लौटेगा। पीछे रह गए हैं उसके बुजुर्ग माता-पिता, पत्नी, छह माह का मासूम बच्चा, भाई-बहन और वह पूरा गांव, जो अब इस दर्दनाक घटना को लंबे समय तक भूल नहीं पाएगा।

























