गौरी बाजार के विद्यालयों में बीएसए का औचक निरीक्षण, शैक्षणिक गुणवत्ता से लेकर डिजिटल उपस्थिति तक परखी व्यवस्था

देवरिया के गौरी बाजार में बीएसए के विद्यालय निरीक्षण की फीचर इमेज, स्कूल में पढ़ते बच्चे, शिक्षक और रिपोर्टर इरफान अली लारी

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इरफान अली लारी की रिपोर्ट

देवरिया। जिले में परिषदीय विद्यालयों की शैक्षणिक व्यवस्था, शिक्षण की गुणवत्ता, विद्यार्थियों की उपस्थिति और विद्यालयों में उपलब्ध मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की दिशा में बेसिक शिक्षा विभाग लगातार निरीक्षण अभियान चला रहा है। इसी क्रम में 11 सितंबर 2026 को जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राम जियावन मौर्य ने विकासखंड गौरी बाजार के कई प्राथमिक, उच्च प्राथमिक और कंपोजिट विद्यालयों का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालयों में चल रही शैक्षणिक गतिविधियों के साथ-साथ डिजिटल उपस्थिति, ऑपरेशन कायाकल्प, स्वच्छता व्यवस्था, छात्र-छात्राओं की उपस्थिति और मध्याह्न भोजन की गुणवत्ता का बारीकी से जायजा लिया।

बीएसए के औचक निरीक्षण का उद्देश्य केवल विद्यालयों की कमियों को देखना ही नहीं, बल्कि बेहतर कार्य कर रहे विद्यालयों की व्यवस्थाओं को समझना और अन्य विद्यालयों में भी उन व्यवस्थाओं को लागू कराने की दिशा में प्रयास करना रहा। निरीक्षण के समय खंड शिक्षा अधिकारी गौरी बाजार विनय शील मिश्र तथा जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी कार्यालय से महेंद्र मिश्र भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने विद्यालयों में पहुंचकर मौके पर व्यवस्थाओं की वास्तविक स्थिति देखी और संबंधित प्रधानाध्यापकों तथा शिक्षकों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।

प्राथमिक विद्यालय भटौली बुजुर्ग में शैक्षणिक गतिविधियां मिलीं बेहतर

निरीक्षण अभियान की शुरुआत प्राथमिक विद्यालय भटौली बुजुर्ग से हुई। विद्यालय में कुल 113 विद्यार्थी नामांकित पाए गए, जिनमें से 74 विद्यार्थी निरीक्षण के समय उपस्थित मिले। विद्यालय में कार्यरत चारों अध्यापक और दोनों शिक्षामित्र समय से विद्यालय में उपस्थित थे और बच्चों के पठन-पाठन में सक्रिय रूप से संलग्न पाए गए। अधिकारियों ने विद्यालय की शैक्षणिक गतिविधियों को करीब से देखा और बच्चों से बातचीत कर उनके अधिगम स्तर का भी आकलन किया।

निरीक्षण के दौरान छात्रा पायल ने कविता प्रस्तुत की, जिसे सुनकर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राम जियावन मौर्य ने उसकी सराहना की। बच्चों की शैक्षणिक क्षमता और कक्षा में उनकी भागीदारी को सकारात्मक रूप से देखा गया। निरीक्षण में पाया गया कि विद्यालय की कक्षाएं निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित हो रही थीं। शिक्षकों द्वारा शिक्षक संदर्शिका और शिक्षक डायरी का उपयोग करते हुए शिक्षण कार्य किया जा रहा था।

विद्यालय में स्मार्ट क्लास और टीएलएम यानी शिक्षण-अधिगम सामग्री का प्रयोग भी प्रभावी ढंग से किया जा रहा था। अधिकारियों ने इस व्यवस्था को बच्चों के सीखने की प्रक्रिया को मजबूत करने वाला महत्वपूर्ण माध्यम माना। निरीक्षण के दौरान बच्चों का अधिगम स्तर उच्च कोटि का पाया गया, जिससे विद्यालय में शिक्षकों द्वारा किए जा रहे शैक्षणिक प्रयासों की स्थिति स्पष्ट हुई।

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ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालय में दिखी बेहतर व्यवस्था

प्राथमिक विद्यालय भटौली बुजुर्ग में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत किए गए कार्य भी निरीक्षण के दौरान संतोषजनक पाए गए। कक्षा-कक्षों में टाईलीकरण, रंगाई-पुताई, पेयजल की सुविधा, हाथ धोने की व्यवस्था, बिजली से संबंधित आवश्यक उपकरण, ब्लैक बोर्ड और किचन शेड जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध मिलीं। छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग स्वच्छ शौचालय की सुविधा भी विद्यालय में पाई गई। विद्यालय परिसर में जलभराव की स्थिति नहीं थी, जो बरसात के मौसम को देखते हुए महत्वपूर्ण मानी गई।

निरीक्षण के दौरान यह भी देखा गया कि विद्यार्थी निर्धारित यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और पाठ्य-पुस्तकों के साथ विद्यालय आए थे। इससे विद्यालय में छात्र-छात्राओं की शैक्षणिक आवश्यकताओं और अनुशासन से संबंधित व्यवस्थाओं के बेहतर संचालन का संकेत मिला।

उच्च प्राथमिक विद्यालय कलवन में डिजिटल उपस्थिति पर जोर

इसके बाद जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने उच्च प्राथमिक विद्यालय कलवन का निरीक्षण किया। यहां कुल 148 विद्यार्थी नामांकित हैं, जिनमें से 126 विद्यार्थी निरीक्षण के समय उपस्थित पाए गए। विद्यालय में शिक्षकों द्वारा बच्चों की डिजिटल उपस्थिति दर्ज की जा रही थी। इससे स्पष्ट हुआ कि विद्यालय स्तर पर तकनीक आधारित उपस्थिति व्यवस्था को लागू किया जा रहा है और शिक्षक इस व्यवस्था के प्रति गंभीर हैं।

विद्यालय में कैच-अप अभियान, पठन संस्कृति और निपुण तालिका भी व्यवस्थित रूप से प्रदर्शित मिली। अधिकारियों ने इन व्यवस्थाओं को देखा और शिक्षकों द्वारा बच्चों के शैक्षणिक स्तर को मजबूत करने के लिए किए जा रहे प्रयासों का जायजा लिया। कैच-अप अभियान के माध्यम से बच्चों की सीखने संबंधी आवश्यकताओं को पूरा करने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

निरीक्षण के दौरान मध्याह्न भोजन की व्यवस्था भी देखी गई। विद्यालय में बच्चों के लिए तहरी बनी हुई मिली। बीएसए ने विद्यालय में भोजन की व्यवस्था और उसकी गुणवत्ता का भी निरीक्षण किया। विद्यालय में बिना ड्रेस के आने वाले कुछ बच्चों के संदर्भ में प्रधानाध्यापक को आवश्यक निर्देश दिए गए। उन्हें अभिभावकों के साथ पीटीए बैठक आयोजित कर बच्चों को निर्धारित यूनिफॉर्म उपलब्ध कराने के लिए प्रेरित करने को कहा गया।

प्राथमिक विद्यालय बेलही में ऑपरेशन कायाकल्प के सभी कार्य पूर्ण

निरीक्षण अभियान के दौरान प्राथमिक विद्यालय बेलही भी अधिकारियों की जांच के दायरे में रहा। यहां ऑपरेशन कायाकल्प के तहत निर्धारित बुनियादी विकास कार्यों की स्थिति का जायजा लिया गया। निरीक्षण के दौरान विद्यालय में ऑपरेशन कायाकल्प के अंतर्गत निर्धारित सभी आवश्यक कार्य पूर्ण पाए गए। विद्यालय में मूलभूत सुविधाओं के संतृप्तीकरण की स्थिति को अधिकारियों ने देखा और व्यवस्थाओं की जानकारी ली।

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परिषदीय विद्यालयों में मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता को शिक्षा की गुणवत्ता के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ऐसे में ऑपरेशन कायाकल्प के तहत विद्यालयों में भवन, कक्षाओं, पेयजल, स्वच्छता और अन्य आवश्यक सुविधाओं को मजबूत करने पर लगातार जोर दिया जा रहा है।

कंपोजिट विद्यालय पोखारभिंडा में 101 विद्यार्थी मिले उपस्थित

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने कंपोजिट विद्यालय पोखारभिंडा का भी औचक निरीक्षण किया। विद्यालय में कुल 140 विद्यार्थी नामांकित हैं, जिनमें से 101 विद्यार्थी निरीक्षण के दौरान उपस्थित पाए गए। विद्यालय में कुल आठ अध्यापक और एक शिक्षामित्र का स्टाफ दर्ज है। निरीक्षण के समय दो शिक्षिकाएं बाल देखभाल अवकाश यानी सीसीएल पर थीं, जबकि अन्य सभी शिक्षक और शिक्षिकाएं विद्यालय में मौजूद रहकर कक्षाओं में शिक्षण कार्य करते पाए गए।

विद्यालय की कक्षाएं निर्धारित समय-सारणी के अनुसार संचालित होती मिलीं। अधिकारियों ने बच्चों की शैक्षणिक स्थिति का भी जायजा लिया। निरीक्षण में बच्चों की शिक्षा की गुणवत्ता संतोषजनक पाई गई। इससे यह संकेत मिला कि विद्यालय में उपलब्ध शिक्षकीय संसाधनों का उपयोग कक्षा शिक्षण के लिए किया जा रहा है।

विद्यालय के भौतिक संसाधनों की समीक्षा के दौरान सभी कमरों में टाईलीकरण का कार्य पूरा पाया गया। हालांकि भवन की रंगाई-पुताई का कार्य अभी पूरा होना शेष था। इस पर जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी ने प्रधानाध्यापक को विद्यालय भवन की रंगाई-पुताई का कार्य शीघ्र पूरा कराने के निर्देश दिए। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि विद्यालय की भौतिक सुंदरता के साथ-साथ स्वच्छता और सुरक्षित वातावरण भी बच्चों के बेहतर शैक्षणिक माहौल के लिए जरूरी है।

शैक्षणिक गुणवत्ता और डिजिटल व्यवस्था पर लगातार निगरानी

गौरी बाजार के विभिन्न विद्यालयों के निरीक्षण से यह भी स्पष्ट हुआ कि बेसिक शिक्षा विभाग अब विद्यालयों में केवल शिक्षक और विद्यार्थी की उपस्थिति तक सीमित निरीक्षण के बजाय शिक्षा की गुणवत्ता, डिजिटल व्यवस्था, अधिगम स्तर, स्वच्छता, कायाकल्प कार्य और मध्याह्न भोजन जैसी व्यवस्थाओं को भी एक साथ परख रहा है। औचक निरीक्षण का उद्देश्य विद्यालयों में नियमितता और जवाबदेही को मजबूत करना है, ताकि सरकारी विद्यालयों में पढ़ने वाले बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जा सके।

जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राम जियावन मौर्य ने निरीक्षण के दौरान विद्यालयों में शिक्षकों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए इस बात पर जोर दिया कि बच्चों की नियमित उपस्थिति के साथ उनका वास्तविक अधिगम स्तर भी लगातार बेहतर होना चाहिए। स्मार्ट क्लास, टीएलएम, शिक्षक संदर्शिका, शिक्षक डायरी, कैच-अप अभियान और पठन संस्कृति जैसी व्यवस्थाओं का प्रभाव तभी दिखाई देगा, जब उनका नियमित और प्रभावी इस्तेमाल कक्षा में किया जाए।

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विद्यालयों में स्वच्छता और बच्चों की सुविधाओं पर भी नजर

निरीक्षण के दौरान स्वच्छता व्यवस्था को भी प्राथमिकता दी गई। विद्यालय परिसर में जलभराव, पेयजल, हाथ धोने की सुविधा, शौचालय और कक्षा-कक्षों की स्थिति जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं को देखा गया। बरसात के मौसम में विद्यालय परिसरों में जलभराव बच्चों की सुरक्षा और आवागमन दोनों के लिए चुनौती बन सकता है। ऐसे में भटौली बुजुर्ग विद्यालय का परिसर जलभराव से मुक्त मिलना सकारात्मक स्थिति रही।

बच्चों के लिए निर्धारित यूनिफॉर्म, जूते-मोजे और पाठ्य-पुस्तकों की उपलब्धता भी विद्यालयी व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कलवन विद्यालय में बिना ड्रेस आने वाले बच्चों के मामले में अभिभावकों से संवाद बढ़ाने के निर्देश देकर विभाग ने यह संकेत दिया कि विद्यालय और परिवार के बीच समन्वय को भी शिक्षा व्यवस्था का आवश्यक हिस्सा माना जा रहा है।

बीएसए ने दिए निरंतर गुणवत्ता बनाए रखने के निर्देश

निरीक्षण अभियान के अंत में जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी डॉ. राम जियावन मौर्य ने सभी संबंधित विद्यालयों को शैक्षणिक गुणवत्ता बनाए रखने, बच्चों की डिजिटल उपस्थिति को नियमित रूप से दर्ज करने और विद्यालयों में स्वच्छता व्यवस्था को निरंतर बेहतर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने विद्यालयों में उपलब्ध संसाधनों के प्रभावी उपयोग और बच्चों के सीखने के स्तर में निरंतर सुधार पर विशेष ध्यान देने को कहा।

गौरी बाजार क्षेत्र में हुए इस औचक निरीक्षण ने यह संदेश दिया कि परिषदीय विद्यालयों की व्यवस्थाओं में सुधार के लिए विभागीय स्तर पर निगरानी लगातार जारी है। जहां विद्यालयों में अच्छी व्यवस्थाएं मिलीं, वहां उनके प्रयासों को प्रोत्साहन मिला, वहीं जिन बिंदुओं पर सुधार की आवश्यकता पाई गई, वहां संबंधित प्रधानाध्यापकों को निर्देश दिए गए। इस तरह औचक निरीक्षण को विद्यालयों की जवाबदेही, शिक्षण व्यवस्था की मजबूती और बच्चों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा सकता है।

बेसिक शिक्षा विभाग की प्राथमिकता अब ऐसे विद्यालयी वातावरण का निर्माण करना है, जहां बच्चे नियमित रूप से विद्यालय आएं, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करें, डिजिटल और आधुनिक शिक्षण संसाधनों का लाभ उठाएं तथा उन्हें स्वच्छ, सुरक्षित और सुविधाजनक परिसर उपलब्ध हो। गौरी बाजार के विद्यालयों में किया गया यह निरीक्षण इसी व्यापक उद्देश्य की दिशा में विभागीय प्रयासों की एक महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में देखा जा रहा है।

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Author: यायावर

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