विद्यालयों में लापरवाही पर सख्त हुए डीएम, औचक निरीक्षण में शिक्षा व्यवस्था सुधारने के दिए कड़े निर्देश
डिजिटल उपस्थिति, छात्र उपस्थिति और गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन पर विशेष जोर; बनकटा के खंड शिक्षा अधिकारी को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
देवरिया। जिले में प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा व्यवस्था को अधिक प्रभावी और गुणवत्तापूर्ण बनाने की दिशा में जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने मंगलवार को विकासखंड बनकटा के विभिन्न विद्यालयों और एक आंगनबाड़ी केंद्र का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने विद्यालयों में पठन-पाठन की गुणवत्ता, छात्रों की उपस्थिति, शिक्षकों की कार्यप्रणाली, डिजिटल उपस्थिति प्रणाली, शैक्षणिक संसाधनों और मूलभूत सुविधाओं का बारीकी से जायजा लिया। निरीक्षण में सामने आई कमियों और पर्यवेक्षण में शिथिलता पर जिलाधिकारी ने कड़ा रुख अपनाते हुए खंड शिक्षा अधिकारी (बीईओ) बनकटा को कारण बताओ नोटिस जारी करने के निर्देश दिए।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी स्तर पर लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि यदि भविष्य में निरीक्षण के दौरान इसी प्रकार की कमियां दोबारा मिलीं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।
कई विद्यालयों और आंगनबाड़ी केंद्र का किया निरीक्षण
निरीक्षण अभियान के दौरान जिलाधिकारी ने पूर्व माध्यमिक विद्यालय एवं आंगनबाड़ी केंद्र सोहनपुर, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (केजीबीवी) सोहनपुर, प्राथमिक विद्यालय इंगुरी बाजार, उच्च विद्यालय रामपुर बुजुर्ग तथा उच्च माध्यमिक विद्यालय प्रताप छापर का निरीक्षण किया। प्रत्येक विद्यालय में उन्होंने शैक्षणिक गतिविधियों, छात्रों की उपस्थिति, कक्षाओं के संचालन, साफ-सफाई, उपलब्ध संसाधनों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति का अवलोकन किया।
उन्होंने विद्यालय परिसर का निरीक्षण करते हुए यह भी देखा कि बच्चों को शासन द्वारा उपलब्ध कराई जा रही सुविधाएं समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से मिल रही हैं या नहीं।
अधिकांश शिक्षक मिले उपस्थित, लेकिन छात्र उपस्थिति रही चिंता का विषय
निरीक्षण के दौरान अधिकांश विद्यालयों में शिक्षक उपस्थित पाए गए, लेकिन छात्र-छात्राओं की उपस्थिति अपेक्षा के अनुरूप नहीं मिली। इस स्थिति पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित शिक्षकों और शिक्षा विभाग के अधिकारियों को निर्देश दिया कि विद्यार्थियों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए विशेष अभियान चलाया जाए।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तभी संभव है, जब छात्र नियमित रूप से विद्यालय आएं। इसके लिए अभिभावकों से संवाद बढ़ाया जाए, समुदाय का सहयोग लिया जाए और ड्रॉपआउट या अनियमित छात्रों की पहचान कर उन्हें पुनः विद्यालय से जोड़ा जाए।
डिजिटल उपस्थिति प्रणाली का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश
जिलाधिकारी ने सभी विद्यालयों में डिजिटल उपस्थिति प्रणाली को पूरी तरह लागू करने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि शिक्षकों और विद्यार्थियों की उपस्थिति डिजिटल माध्यम से नियमित रूप से दर्ज की जाए ताकि पारदर्शिता बनी रहे और निगरानी व्यवस्था अधिक प्रभावी हो सके।
उन्होंने कहा कि डिजिटल व्यवस्था केवल औपचारिकता नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था को जवाबदेह बनाने का महत्वपूर्ण माध्यम है। इसमें किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी।
केजीबीवी में छात्राओं से संवाद कर परखी शैक्षणिक गुणवत्ता
कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय, सोहनपुर के निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने छात्राओं से सीधे संवाद किया। उन्होंने छात्राओं से पाठ्यपुस्तक पढ़वाई और उनसे विषय से संबंधित प्रश्न पूछकर उनकी शैक्षणिक दक्षता का आकलन किया।
निरीक्षण में यह पाया गया कि विद्यालय में 110 छात्राएं पंजीकृत हैं, जबकि मौके पर केवल 70 छात्राएं उपस्थित थीं। इस पर जिलाधिकारी ने चिंता व्यक्त करते हुए विद्यालय प्रशासन को छात्राओं की नियमित उपस्थिति बढ़ाने के लिए प्रभावी कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश दिए।
उन्होंने शिक्षकों से कहा कि प्रत्येक छात्रा की शैक्षणिक प्रगति पर व्यक्तिगत रूप से ध्यान दिया जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि सभी छात्राएं गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्राप्त करें।
पठन-पाठन को और प्रभावी बनाने पर दिया जोर
जिलाधिकारी ने शिक्षकों को निर्देशित किया कि कक्षाओं का संचालन नियमित, व्यवस्थित और परिणामोन्मुखी ढंग से किया जाए। उन्होंने कहा कि केवल पाठ्यक्रम पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी जरूरी है कि छात्र विषय को समझें और उनकी बुनियादी शैक्षणिक क्षमता विकसित हो।
उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों के सीखने के स्तर के अनुसार शिक्षण पद्धति अपनानी चाहिए, जिससे प्रत्येक छात्र को समान रूप से सीखने का अवसर मिल सके।
पीएम श्री और मॉडल विद्यालयों में बेहतर शिक्षण व्यवस्था बनाए रखने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने पीएम श्री और मॉडल विद्यालयों में कक्षा 9 से 12 तक की शिक्षण व्यवस्था की भी समीक्षा की। उन्होंने निर्देश दिया कि इन विद्यालयों में आधुनिक शिक्षण संसाधनों का प्रभावी उपयोग किया जाए और विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने में किसी प्रकार की कमी न रहने पाए।
उन्होंने यह भी कहा कि शासन की विभिन्न योजनाओं का लाभ पात्र विद्यार्थियों तक समय पर पहुंचे और उनका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाए।
नियमित मॉनिटरिंग से ही सुधरेगी शिक्षा व्यवस्था
जिलाधिकारी ने कहा कि विद्यालयों की गुणवत्ता सुधारने के लिए केवल निरीक्षण पर्याप्त नहीं है, बल्कि नियमित मॉनिटरिंग और प्रभावी अनुश्रवण भी उतना ही आवश्यक है। उन्होंने खंड शिक्षा अधिकारी को निर्देश दिया कि सभी विद्यालयों का नियमित निरीक्षण करें, कमियों की समयबद्ध समीक्षा करें और उनका तत्काल समाधान सुनिश्चित करें।
उन्होंने कहा कि शिक्षा विभाग के अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि नियमित रूप से विद्यालयों का भ्रमण कर वास्तविक स्थिति का आकलन करें। इससे शिक्षण व्यवस्था में सुधार आएगा और विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिलेगा।
गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता
जिलाधिकारी मधुसूदन हुल्गी ने कहा कि शासन की मंशा प्रत्येक बच्चे तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पहुंचाने की है। इसके लिए विद्यालयों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, नियमित उपस्थिति, प्रभावी शिक्षण व्यवस्था और सतत निगरानी बेहद जरूरी है।
उन्होंने अधिकारियों और शिक्षकों को स्पष्ट संदेश दिया कि शिक्षा व्यवस्था में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि भविष्य के निरीक्षणों में कमियां दोबारा मिलीं तो संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।









