बिजली कब आएगी, कब जाएगी किसी को नहीं पता, भीषण गर्मी में बेहाल ग्रामीणों का फूटा गुस्सा

गोंडा के इटियाथोक क्षेत्र में बिजली कटौती की समस्या पर आधारित फीचर इमेज, जिसमें रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान की तस्वीर और ग्रामीण क्षेत्र का दृश्य दर्शाया गया है।

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

गोंडा। उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के इटियाथोक क्षेत्र में अनियमित विद्युत आपूर्ति लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गई है। भीषण गर्मी, उमस और लगातार हो रही बिजली कटौती ने ग्रामीण जीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। क्षेत्र के अनेक गांवों में बिजली के आने-जाने का कोई निश्चित समय नहीं है, जिससे आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि दिन हो या रात, कभी भी बिजली चली जाती है और कई-कई घंटों तक आपूर्ति बहाल नहीं होती। इससे लोगों में बिजली विभाग के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है।

भीषण गर्मी में बढ़ी लोगों की परेशानी

सितंबर माह में भी मौसम का मिजाज पूरी तरह सामान्य नहीं हुआ है। दिन में तेज धूप और रात में उमस भरी गर्मी लोगों को परेशान कर रही है। ऐसे समय में बिजली कटौती ने हालात और भी कठिन बना दिए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि रात के समय घंटों बिजली गुल रहने से परिवार के सदस्य ठीक से सो नहीं पा रहे हैं। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को सबसे अधिक परेशानी उठानी पड़ रही है।

स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार रात में बिजली अचानक चली जाती है और सुबह तक नहीं आती। इससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। गर्मी के कारण घरों में रहना मुश्किल हो जाता है और लोग खुले स्थानों पर रात बिताने को मजबूर हो रहे हैं।

मोबाइल चार्जिंग और पेयजल व्यवस्था भी प्रभावित

बिजली कटौती का असर केवल रोशनी तक सीमित नहीं है। ग्रामीण क्षेत्रों में अब अधिकांश काम बिजली पर निर्भर हो चुके हैं। मोबाइल फोन चार्ज न होने से लोगों का संपर्क प्रभावित हो रहा है। कई गांवों में पानी की मोटरें बिजली से संचालित होती हैं। बिजली न रहने पर पेयजल की आपूर्ति भी बाधित हो जाती है।

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महिलाओं को घरेलू कार्यों में अतिरिक्त कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित हो रही है क्योंकि शाम और रात के समय पर्याप्त रोशनी उपलब्ध नहीं हो पाती। प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं का भी कहना है कि अनियमित बिजली आपूर्ति उनकी पढ़ाई में बाधा बन रही है।

किसानों की सिंचाई व्यवस्था पर पड़ा असर

इटियाथोक क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि प्रधान इलाका है। यहां बड़ी संख्या में किसान सिंचाई के लिए विद्युत चालित नलकूपों और पंपसेटों पर निर्भर हैं। बिजली कटौती के कारण खेतों की सिंचाई प्रभावित हो रही है। किसानों का कहना है कि जब फसलों को पानी की आवश्यकता होती है, उसी समय बिजली उपलब्ध नहीं रहती।

धान, सब्जी और अन्य फसलों की खेती करने वाले किसानों को अतिरिक्त खर्च उठाकर डीजल इंजन का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे खेती की लागत बढ़ रही है और किसानों की आर्थिक स्थिति पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय पर पर्याप्त बिजली नहीं मिली तो फसलों के उत्पादन पर भी असर पड़ सकता है।

छोटे कारोबारियों की बढ़ी मुश्किलें

क्षेत्र के छोटे दुकानदार, वेल्डिंग कार्यशालाएं, साइबर कैफे, मोबाइल रिपेयरिंग सेंटर और अन्य छोटे व्यवसाय भी बिजली संकट से प्रभावित हैं। बिजली न होने पर कई व्यवसायों का काम पूरी तरह ठप हो जाता है। दुकानदारों का कहना है कि बार-बार बिजली जाने से ग्राहकों को भी परेशानी होती है और कारोबार में नुकसान उठाना पड़ता है।

कुछ व्यवसायी निजी जनरेटर का उपयोग करते हैं, लेकिन डीजल की बढ़ती कीमतों के कारण यह विकल्प भी महंगा साबित हो रहा है। इससे छोटे व्यापारियों की आय पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है।

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ग्रामीणों में बढ़ रहा आक्रोश

लगातार बिजली संकट के कारण क्षेत्र के लोगों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि बिजली विभाग को कई बार शिकायतें दी गईं, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो पाया। लोगों का कहना है कि जब भी विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया जाता है, उन्हें केवल आश्वासन मिलता है।

ग्रामीणों का मानना है कि यदि बिजली आपूर्ति में किसी तकनीकी कारण से बाधा आ रही है तो विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी जनता को देनी चाहिए। लेकिन अधिकांश समय लोगों को यह भी पता नहीं होता कि बिजली कब तक बहाल होगी।

बेहतर बिजली व्यवस्था की उठी मांग

स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने बिजली विभाग से मांग की है कि इटियाथोक क्षेत्र में विद्युत आपूर्ति की स्थिति में तत्काल सुधार किया जाए। ट्रांसफार्मरों और विद्युत लाइनों की नियमित जांच कराई जाए तथा फॉल्ट होने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

ग्रामीणों का कहना है कि बिजली आपूर्ति का एक निर्धारित समय होना चाहिए ताकि लोग अपनी दिनचर्या उसी के अनुसार व्यवस्थित कर सकें। साथ ही, आपूर्ति बाधित होने की स्थिति में विभाग की ओर से सूचना प्रणाली को भी मजबूत बनाया जाना चाहिए।

समाधान नहीं हुआ तो हो सकता है आंदोलन

ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही बिजली व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो वे सामूहिक रूप से आंदोलन करने को मजबूर होंगे। उनका कहना है कि बिजली आज केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में अनियमित आपूर्ति से शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि और रोजगार सभी प्रभावित हो रहे हैं।

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इटियाथोक क्षेत्र के लोगों को उम्मीद है कि संबंधित अधिकारी उनकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए शीघ्र आवश्यक कदम उठाएंगे। फिलहाल ग्रामीणों की सबसे बड़ी मांग यही है कि उन्हें नियमित और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराई जाए ताकि भीषण गर्मी और उमस के बीच उन्हें राहत मिल सके।

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Author: यायावर

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