जोगिंदर सिंह उर्फ कालू छारा की रिपोर्ट
झज्जर, हरियाणा। । हरियाणा के झज्जर जिले के गांव छारा स्थित बाबा जत्ती वाले धाम में गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग को लेकर धार्मिक तप और हठयोग का सिलसिला जारी है। धाम के गद्दीनशीन बाबा सागर नाथ जी महाराज ने अपनी मांग के समर्थन में पिछले करीब दो सप्ताह से अन्न और जल का त्याग कर मौन व्रत धारण किया हुआ है। धाम से जुड़े सूत्रों के अनुसार बाबा सागर नाथ का यह संकल्प तब तक जारी रखने की बात कही गई है, जब तक गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग पर सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया जाता।
गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग बनी संकल्प का केंद्र
गांव छारा स्थित बाबा जत्ती वाले धाम में चल रहा यह धार्मिक अनुष्ठान अब गौ संरक्षण और गौमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने की मांग से जुड़ गया है। बाबा सागर नाथ जी महाराज ने इस मांग को लेकर मौन व्रत और अन्न-जल त्याग का मार्ग अपनाया है। उनका उद्देश्य धार्मिक आस्था के साथ इस मांग को व्यापक स्तर पर सामने रखना बताया जा रहा है।
भारत में गाय को लंबे समय से धार्मिक, सांस्कृतिक और सामाजिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता रहा है। देश के विभिन्न हिस्सों में गौसेवा और गौ संरक्षण से जुड़े धार्मिक आयोजन होते रहे हैं। ऐसे में गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी समय-समय पर अलग-अलग मंचों से उठती रही है। बाबा जत्ती वाले धाम में चल रहा मौन व्रत इसी मांग को धार्मिक संकल्प के रूप में सामने रख रहा है।
दो सप्ताह से जारी है अन्न-जल त्याग और मौन व्रत
धाम से मिली जानकारी के अनुसार बाबा सागर नाथ जी महाराज पिछले लगभग दो सप्ताह से अन्न और जल का त्याग कर मौन व्रत का पालन कर रहे हैं। इस दौरान धार्मिक अनुष्ठान भी जारी रहने की बात कही गई है। बाबा के इस संकल्प को देखने और उनके प्रति समर्थन व्यक्त करने के लिए श्रद्धालुओं के धाम पहुंचने की जानकारी भी सामने आई है।
अन्न-जल त्यागकर मौन व्रत रखना धार्मिक परंपराओं में कठिन साधना के रूप में देखा जाता है। बाबा सागर नाथ ने इसी साधना के माध्यम से अपनी मांग को सरकार और समाज के सामने रखने का निर्णय लिया है। धाम से जुड़े लोगों का कहना है कि यह केवल किसी व्यक्तिगत लाभ की मांग नहीं है, बल्कि गौ संरक्षण और गौसेवा से जुड़ा धार्मिक एवं सामाजिक विषय है।
धार्मिक अनुष्ठान के साथ आगे बढ़ रहा संकल्प
बाबा जत्ती वाले धाम में धार्मिक गतिविधियों के साथ बाबा सागर नाथ का संकल्प जारी है। धाम के वातावरण में गौसेवा, धार्मिक आस्था और आध्यात्मिक साधना से जुड़े विषय प्रमुखता से दिखाई दे रहे हैं। बाबा के समर्थकों और श्रद्धालुओं का मानना है कि गौमाता के प्रति सम्मान भारतीय परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा है और इसी भावना को राष्ट्रीय स्तर पर सम्मान देने के लिए गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए।
इस मांग को लेकर बाबा सागर नाथ द्वारा अपनाया गया रास्ता धार्मिक तपस्या और मौन साधना पर आधारित है। वह सार्वजनिक रूप से बयान देने के बजाय मौन रहकर अपनी मांग को सामने रख रहे हैं। धाम के सूत्रों के अनुसार बाबा का हठयोग लगातार जारी है और फिलहाल इसे समाप्त करने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है।
गौ संरक्षण का मुद्दा फिर चर्चा में
बाबा सागर नाथ के अन्न-जल त्याग और मौन व्रत के चलते गौ संरक्षण का विषय एक बार फिर चर्चा में आ गया है। भारत में गाय से संबंधित विषय धार्मिक आस्था के साथ-साथ पशु कल्याण, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से भी जुड़े हुए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में गाय और पशुधन का पारंपरिक रूप से महत्वपूर्ण स्थान रहा है।
गौ संरक्षण से जुड़े संगठनों और धार्मिक संतों की ओर से समय-समय पर सरकार से गौवंश की सुरक्षा और संरक्षण के लिए प्रभावी कदम उठाने की मांग की जाती रही है। इसी व्यापक संदर्भ में गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग भी सामने आती रही है।
हालांकि किसी पशु को राष्ट्रीय पशु घोषित करना केंद्र सरकार की नीति और आधिकारिक निर्णय से जुड़ा विषय है। बाबा सागर नाथ की ओर से की जा रही मांग को भी इसी संदर्भ में देखा जा रहा है।
बाबा जत्ती वाले धाम में श्रद्धालुओं की नजर संकल्प पर
गांव छारा स्थित बाबा जत्ती वाले धाम की धार्मिक पहचान के कारण बाबा सागर नाथ के संकल्प को स्थानीय स्तर पर विशेष ध्यान मिल रहा है। धाम से जुड़े लोगों की निगाह अब इस बात पर है कि सरकार या संबंधित स्तर से इस मांग पर आगे क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।
बाबा के अनुयायियों के अनुसार उनका संकल्प दृढ़ है। धाम के सूत्रों का कहना है कि बाबा सागर नाथ ने गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग को लेकर अपना हठयोग जारी रखने का निर्णय लिया है। उनके इस निर्णय के बाद श्रद्धालुओं और गौसेवा से जुड़े लोगों के बीच भी इस विषय पर चर्चा तेज हुई है।
मौन व्रत के पीछे क्या है संदेश?
बाबा सागर नाथ का मौन व्रत अपने आप में एक संदेश के रूप में देखा जा रहा है। धार्मिक परंपरा में मौन को आत्मसंयम और संकल्प की साधना माना जाता है। अन्न-जल त्याग के साथ मौन व्रत रखना साधक के लिए कठिन तपस्या मानी जाती है।
बाबा द्वारा अपनाया गया यह मार्ग इस बात को रेखांकित करता है कि वह गौमाता को राष्ट्रीय पशु का दर्जा दिए जाने की मांग को लेकर कितने गंभीर हैं। उनके समर्थक इसे गौमाता के सम्मान और संरक्षण से जुड़ा अभियान मान रहे हैं।
सरकार के निर्णय पर टिकी नजर
अब इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण पहलू सरकार की प्रतिक्रिया को माना जा रहा है। गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग को लेकर बाबा सागर नाथ जी महाराज ने अपना धार्मिक संकल्प जारी रखा है। धाम के सूत्रों के अनुसार यह हठयोग मांग पूरी होने तक जारी रखने की बात कही गई है।
ऐसे में आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि प्रशासनिक या सरकारी स्तर पर इस संबंध में कोई पहल होती है या नहीं। फिलहाल गांव छारा स्थित बाबा जत्ती वाले धाम में बाबा सागर नाथ का मौन व्रत जारी है और श्रद्धालुओं की नजर उनके स्वास्थ्य तथा आगे के संकल्प पर बनी हुई है।
गौमाता के सम्मान और संरक्षण का सवाल
गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित करने की मांग केवल धार्मिक भावनाओं तक सीमित नहीं है। इसके साथ गौवंश संरक्षण, पशु कल्याण और ग्रामीण जीवन से जुड़े कई सवाल भी जुड़े हुए हैं। देश के विभिन्न हिस्सों में गौशालाओं और गौसेवा संस्थाओं के माध्यम से गौवंश के संरक्षण का कार्य किया जाता है।
बाबा सागर नाथ का मौन व्रत इसी विषय को धार्मिक मंच से उठाने का एक प्रयास है। उनके समर्थकों का कहना है कि गाय के प्रति भारतीय समाज की पारंपरिक श्रद्धा को देखते हुए उसे राष्ट्रीय स्तर पर विशेष सम्मान मिलना चाहिए।
फिलहाल झज्जर के गांव छारा स्थित बाबा जत्ती वाले धाम में बाबा सागर नाथ जी महाराज का अन्न-जल त्याग और मौन व्रत जारी है। धाम के अनुसार उनका संकल्प स्पष्ट है और वह गौमाता को राष्ट्रीय पशु घोषित किए जाने की मांग को लेकर अपने हठयोग पर कायम हैं। अब इस धार्मिक संकल्प का आगे क्या स्वरूप होगा और संबंधित स्तर से इस मांग पर क्या प्रतिक्रिया आती है, इस पर सभी की निगाहें टिकी हैं।

























