बीएचयू में पद्मश्री प्रो. टीके लाहिड़ी से कथित मारपीट का मामला गरमाया, जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति गठित

वाराणसी बीएचयू अस्पताल में पद्मश्री प्रो. टीके लाहिड़ी से कथित मारपीट मामले की खबर, तीन सदस्यीय जांच समिति और रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी

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रिपोर्ट: कमलेश कुमार चौधरी

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) के सर सुंदरलाल अस्पताल में सेवानिवृत्त कार्डियोथोरेसिक सर्जन और पद्मश्री से सम्मानित प्रो. टीके लाहिड़ी के साथ कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद वाराणसी में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज हो गई है। प्रो. लाहिड़ी की बहन की ओर से अस्पताल प्रशासन को भेजी गई शिकायत में विभाग के चिकित्सक डॉ. अरविंद पांडेय पर अभद्रता और मारपीट का आरोप लगाया गया है। मामला सार्वजनिक होने के बाद कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रतिनिधियों ने अस्पताल पहुंचकर घटना की जानकारी ली और प्रो. लाहिड़ी का हाल जाना।

वहीं, बीएचयू प्रशासन, आईएमएस निदेशक और अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक ने मारपीट के आरोपों को खारिज किया है। डॉ. अरविंद पांडेय ने भी आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि प्रो. लाहिड़ी उनके गुरु हैं और वह उनके साथ मारपीट करने की कल्पना भी नहीं कर सकते।

मामले की गंभीरता को देखते हुए उत्तर प्रदेश सरकार के मंत्री रवींद्र जायसवाल ने प्रो. लाहिड़ी से मुलाकात की और जांच के निर्देश दिए। इसके बाद तीन सदस्यीय जांच समिति गठित की गई है। समिति में बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर, आईएमएस निदेशक और डीसीपी काशी को शामिल किया गया है।

बहन ने ई-मेल भेजकर लगाया मारपीट का आरोप

प्रो. टीके लाहिड़ी की कोलकाता निवासी बहन केतकी ने एक सितंबर को बीएचयू प्रशासन और अस्पताल प्रबंधन को ई-मेल भेजकर शिकायत की। शिकायत में उन्होंने आरोप लगाया कि सुबह के समय डॉ. अरविंद पांडेय ने प्रो. लाहिड़ी को थप्पड़ मारा और उनके साथ गाली-गलौज की।

शिकायत में यह भी कहा गया कि उस समय वहां मौजूद एक कर्मचारी ने कथित तौर पर डॉक्टर को रोकने का प्रयास किया। शिकायत सामने आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने मामले की चिकित्सकीय जांच शुरू कराई। बाद में इसे लेकर विश्वविद्यालय स्तर पर जांच की प्रक्रिया आगे बढ़ाई गई।

हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि उपलब्ध चिकित्सकीय परीक्षण और विशेषज्ञ चिकित्सकों की जांच में प्रो. लाहिड़ी के साथ मारपीट की पुष्टि नहीं हुई है।

आठ महीने से अस्पताल में भर्ती हैं प्रो. लाहिड़ी

85 वर्षीय प्रो. टीके लाहिड़ी पिछले करीब आठ महीने से सर सुंदरलाल अस्पताल के कार्डियोथोरेसिक विभाग में भर्ती हैं। बताया गया है कि वह टीबी और डिमेंशिया जैसी स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं से जूझ रहे हैं। उनका उपचार डॉ. अरविंद पांडेय की निगरानी में चल रहा है।

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बीएचयू प्रशासन के अनुसार उम्र संबंधी शारीरिक और मानसिक समस्याओं के कारण प्रो. लाहिड़ी को उपचार, दैनिक गतिविधियों और साफ-सफाई से संबंधित देखभाल में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। अस्पताल के चिकित्सकों और कर्मचारियों द्वारा लगातार उनकी देखभाल किए जाने की बात विश्वविद्यालय प्रशासन ने कही है।

मंत्री रवींद्र जायसवाल ने लिया संज्ञान

विवाद बढ़ने के बाद प्रदेश सरकार में मंत्री रवींद्र जायसवाल ने अस्पताल पहुंचकर प्रो. लाहिड़ी से मुलाकात की। उन्होंने मामले को गंभीरता से लेते हुए निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए।

इसके बाद तीन सदस्यीय समिति का गठन किया गया। इसमें बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर, आईएमएस निदेशक और डीसीपी काशी को शामिल किया गया है। समिति से मामले के विभिन्न पहलुओं की जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाने की अपेक्षा की जा रही है।

पुलिस ने भी ली जानकारी, तहरीर मिलने पर कार्रवाई का संकेत

कथित मारपीट का मामला सामने आने के बाद पुलिस ने भी मामले की जानकारी जुटानी शुरू कर दी। एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार के अनुसार पुलिस ने बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर से संपर्क किया है। चीफ प्रॉक्टर की ओर से बताया गया कि शिकायत के आधार पर विश्वविद्यालय स्तर पर जांच कराई जा रही है।

पुलिस का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से शिकायत मिलने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने बीएचयू प्रशासन से जांच की प्रगति और रिपोर्ट की जानकारी देने को भी कहा है। लंका पुलिस को भी मामले पर नजर रखने के निर्देश दिए गए हैं।

इस बीच अधिवक्ता दीपक राय ‘कान्हा’ ने लंका थाने में तहरीर देकर प्रो. लाहिड़ी के साथ कथित मारपीट का आरोप लगाया है। तहरीर में मामले में मुकदमा दर्ज कर कार्रवाई की मांग की गई है।

डॉ. अरविंद पांडेय बोले—प्रो. लाहिड़ी मेरे गुरु हैं

आरोपों के बीच डॉ. अरविंद पांडेय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि प्रो. टीके लाहिड़ी उनके गुरु हैं और वह पिछले आठ महीनों से उनकी सेवा और उपचार में लगे हैं। उन्होंने मारपीट और गाली-गलौज के आरोपों को पूरी तरह गलत बताया।

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डॉ. पांडेय के अनुसार प्रो. लाहिड़ी की स्वास्थ्य स्थिति के कारण कई बार ऐसी परिस्थितियां उत्पन्न होती हैं, जिनमें चिकित्सकों और कर्मचारियों को उनकी देखभाल के लिए अतिरिक्त प्रयास करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि जिस घटना को मारपीट बताया जा रहा है, उसमें उन्होंने केवल प्रो. लाहिड़ी को थूकने से रोकने के लिए उनके मुंह की ओर हाथ बढ़ाया था।

उन्होंने कहा कि प्रो. लाहिड़ी की सेवा में वह व्यक्तिगत स्तर पर भी कई बार मदद करते हैं। ऐसे में उनके साथ मारपीट करने का आरोप उनके लिए बेहद दुखद और गलत है।

आईएमएस निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक ने आरोपों से किया इनकार

आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार ने प्रो. लाहिड़ी से मुलाकात के बाद कहा कि मारपीट की घटना की पुष्टि नहीं हुई है। उन्होंने बताया कि डॉ. अरविंद पांडेय लंबे समय से प्रो. लाहिड़ी की देखभाल और उपचार कर रहे हैं।

अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक प्रो. पुनीत ने भी मारपीट के आरोप को गलत बताया। उनके अनुसार शिकायत मिलने के बाद विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम को प्रो. लाहिड़ी की स्थिति का परीक्षण करने के लिए भेजा गया था। टीम ने उनकी स्वास्थ्य स्थिति का आकलन किया।

वाराणसी के मंडलायुक्त एस. राजलिंगम ने भी कहा कि बीएचयू से जांच रिपोर्ट मंगाई गई थी। उनके अनुसार उपलब्ध रिपोर्ट में मारपीट की घटना की पुष्टि नहीं हुई है। आंतरिक मेडिकल टीम की जांच में भी कथित मारपीट की पुष्टि नहीं होने की बात सामने आई है।

कांग्रेस और सपा ने उठाए सवाल

मामले ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष अजय राय के निर्देश पर महानगर कांग्रेस अध्यक्ष राघवेंद्र चौबे के नेतृत्व में प्रतिनिधिमंडल बीएचयू पहुंचा। कांग्रेस नेताओं ने प्रो. लाहिड़ी के स्वास्थ्य की जानकारी ली और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की।

राघवेंद्र चौबे ने कहा कि यदि परिजनों की शिकायत सही है तो अस्पताल के संवेदनशील वार्ड में ऐसी घटना कैसे हुई, इसकी जांच जरूरी है। उन्होंने निष्पक्ष, पारदर्शी और समयबद्ध जांच की मांग करते हुए कहा कि आरोप सही पाए जाने पर जिम्मेदार व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

समाजवादी पार्टी ने भी मामले पर विरोध दर्ज कराया। महानगर अध्यक्ष दिलीप डे की मौजूदगी में हुई बैठक में नेताओं ने घटना को गंभीर बताते हुए जांच और दोषी पाए जाने वाले व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की मांग की।

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बीएचयू छात्रों ने भी किया प्रदर्शन

मामले को लेकर बीएचयू परिसर में छात्रों ने भी विरोध प्रदर्शन किया। विश्वनाथ मंदिर के बाहर छात्रों ने प्रो. लाहिड़ी को न्याय दिलाने की मांग उठाई। दूसरी ओर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की बीएचयू इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने भी प्रो. लाहिड़ी से मुलाकात की।

अभाविप के प्रतिनिधियों ने मामले की निष्पक्ष जांच के साथ आरोपी चिकित्सक के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। संगठन की ओर से प्रो. लाहिड़ी की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग भी रखी गई।

बीएचयू ने जारी किया विस्तृत स्पष्टीकरण

विवाद बढ़ने के बीच बीएचयू प्रशासन ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया। विश्वविद्यालय के अनुसार प्रो. लाहिड़ी के साथ कथित मारपीट और दुर्व्यवहार संबंधी शिकायत कुलपति, आईएमएस निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक को ई-मेल के माध्यम से मिली थी।

शिकायत के बाद चिकित्सा अधीक्षक ने हृदय रोग, सामान्य मेडिसिन, मनोचिकित्सा, वृद्धावस्था रोग, न्यूरोलॉजी, क्रिटिकल केयर तथा टीबी एवं छाती रोग के विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम से प्रो. लाहिड़ी के स्वास्थ्य की जांच कराई।

विश्वविद्यालय प्रशासन का कहना है कि विशेषज्ञों की रिपोर्ट में उम्र से जुड़ी शारीरिक और मानसिक समस्याओं का उल्लेख किया गया है। प्रशासन के मुताबिक जनवरी में भर्ती होने के बाद से चिकित्साधिकारी और अस्पताल कर्मचारी लगातार उनकी देखभाल कर रहे हैं।

अब जांच समिति की रिपोर्ट पर टिकी निगाहें

प्रो. टीके लाहिड़ी से कथित मारपीट के आरोप और बीएचयू प्रशासन के खंडन के बीच मामला फिलहाल जांच के दौर में है। एक ओर परिजनों की शिकायत, पुलिस को दी गई तहरीर और राजनीतिक दलों की ओर से निष्पक्ष जांच की मांग है, तो दूसरी ओर चिकित्सक और विश्वविद्यालय प्रशासन आरोपों को नकार रहे हैं।

अब तीन सदस्यीय समिति की जांच रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। रिपोर्ट से यह स्पष्ट होने की उम्मीद है कि प्रो. लाहिड़ी के साथ वास्तव में क्या हुआ था और शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है। फिलहाल बीएचयू परिसर से लेकर सोशल मीडिया तक यह मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।

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Author: यायावर

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