रिपोर्ट:कमलेश कुमार चौधरी
नं. राजधानी लखनऊ में अशोक लीलैंड कंपनी द्वारा कथित तौर पर सरकारी भूमि, नालों और सड़कों पर कब्जा करने का आरोप लगाते हुए राजनीतिक और स्थानीय स्तर पर विरोध तेज हो गया है। रविवार, 16 सितंबर 2026 को कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष रुद्र दमन सिंह चौहान नोयना डॉयमा के नेतृत्व में सैकड़ों कांग्रेस और स्थानीय बिरले ने कंपनी के गेट नंबर-2 के खिलाफ हड़ताल प्रदर्शन शुरू कर दिया। सुपरस्टार ने कंपनी पर सरकारी भूमि और सार्वजनिक मार्ग से संबंधित पुराने की अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की।
रिवॉल्यूशन में कहा गया है कि कथित तौर पर इस फैसले के कारण क्षेत्र में जल विक्रेताओं की व्यवस्था प्रभावित हुई है। बारिश के दौरान पानी की रुकावट से कई जगहों पर विकलांगता की समस्या गंभीर हो गई है। रेस्टॉरेंट ने दावा किया कि पानी के घरों तक पहुंचने से लेकर स्थानीय लोगों तक के नमूनों का सामना करना पड़ रहा है और लंबे समय तक आवास निवास के कारण, मलेरिया सहित जलजनित और मच्छरजनित समूहों का खतरा बढ़ गया है।
सरकारी सड़क और 30 फुट रोड पर व्यवसाय का आरोप
हड़ताल दे रहे राहुल और कांग्रेस नेताओं पर मुख्य आरोप अशोक ली लैंड कंपनी की नवनिर्मित पत्रिका वॉल और उसके आसपास की जमीन को लेकर है। निवेशकों का आरोप है कि प्राइवेट इंडिया के बंद होने के बाद कंपनी के विस्तार के दौरान सरकारी जमीन के साथ-साथ सार्वजनिक उपयोग में आने वाले नाले और सड़क की जमीन को भी अपने व्यवसाय में लेने का प्रयास किया गया।
कांग्रेस के नेताओं के अनुसार, लिबरल इंडिया के दस्तावेज़ से पिपसेट की ओर जाने वाले मार्ग की चौड़ाई सरकारी अभिलेखों में लगभग 30 फुट दर्ज है। आरोप है कि पहले मौजूदा बिजनेस कंपनी से अलग होकर अब आयरन की ग्रिल पब्लिक मार्केट की जमीन को भी अपने परिसर में शामिल करने का प्रयास कर रही है।
संविधान प्रशासन ने मांग की है कि संबंधित राजस्व अभिलेखों, नक्शों और मस्जिदों की वास्तविक स्थिति का मिलान किया जाए। उनका कहना है कि यदि सरकारी जमीन या सार्वजनिक मार्ग पर कब्जा है तो उसे हटा दिया जाना चाहिए।
नाला पाटने से नई समस्या बढ़ने का दावा
पुडुचेरी की याचिका का दूसरा प्रमुख वियोज्य जल विक्रेता से दौरा किया गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि जिस नाले से बारिश के पानी की बिक्री होती थी, कथित रूप से उन्हें इस क्षेत्र में जाने के बाद पानी मिला है। बारिश के दौरान घरों से निकलने, आने-जाने और दैनिक कार्यों में परेशानी हो रही है।
रिव्यू का कहना है कि डिजिटल केवल सर्टिफिकेट की समस्या नहीं है, बल्कि इससे स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी पैदा हो रहे हैं। जमा पानी में मच्छरों के खतरे के निर्माण और मलेरिया जैसे खतरे बढ़ने की बात कही जा रही है।
हालाँकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि समाचार अब तक नहीं लिखा गया है। ऐसे में मामले में राजस्व, नगर निकाय या संबंधित संस्थागत विभाग द्वारा स्थल निरीक्षण और अभिलेखों की जांच महत्वपूर्ण होगी।
कंपनी परिसर में पुलिस स्टेशन बनाए जाने पर भी प्रश्न
कांग्रेस अध्यक्ष रुद्र दमन सिंह चौहान उर्फ बबलू भैया ने आरोप लगाया कि कंपनी परिसर से जुड़े क्षेत्र में नाले को पाटकर पुलिस चौकी स्थापित किए जाने की स्थिति भी जांच का विषय है। प्रदर्शनकारियों ने इस संबंध में पुलिस और प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए हैं।
कांग्रेस नेताओं ने मांग की कि पुलिस चौकी के निर्माण और उसके लिए इस्तेमाल की गई भूमि से संबंधित दस्तावेजों की भी जांच की जाए। उनका कहना है कि यदि किसी सरकारी अथवा सार्वजनिक उपयोग की भूमि का स्वरूप बदला गया है तो इसकी वैधानिक प्रक्रिया और अनुमति की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
यह भी स्पष्ट है कि पुलिस प्रशासन पर लगाए गए कथित मिलीभगत के आरोप फिलहाल कांग्रेस और प्रदर्शनकारियों के दावे हैं। संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक अधिकारियों का पक्ष सामने आने के बाद ही इन आरोपों की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी।
गेट नंबर-2 पर सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने दिया धरना
बुधवार को स्थानीय ग्रामीणों और कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एकजुट होकर कंपनी के गेट नंबर-2 के सामने विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों की ओर से शिकायत पत्र भी सौंपे जाने की बात कही गई है। धरने के दौरान सरकारी भूमि की स्थिति स्पष्ट करने, नाले की सफाई और जल निकासी बहाल करने तथा सड़क की जमीन को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग उठाई गई।
रुद्र दमन सिंह चौहान ने प्रदर्शन के दौरान राज्य सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा में लापरवाही के कारण कई स्थानों पर सार्वजनिक जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायतें सामने आ रही हैं।
कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार की कार्यशैली पर उठाए सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष रुद्र दमन सिंह चौहान ने उत्तर प्रदेश की भाजपा सरकार पर भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यदि सरकारी जमीन, नाले और सार्वजनिक रास्ते से जुड़े मामलों में शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती है तो इससे आम लोगों का प्रशासन पर विश्वास प्रभावित होता है।
उन्होंने सवाल उठाया कि जिस ‘रामराज्य’ की बात राजनीतिक मंचों पर की जाती है, उसमें आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान किस तरह और कितनी तेजी से हो रहा है। उन्होंने अधिकारियों की कार्यशैली पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि जनता को अपनी मूलभूत समस्याओं के समाधान के लिए धरने और प्रदर्शन का सहारा लेना पड़ रहा है।
कांग्रेस नेता ने यह भी आरोप लगाया कि राजधानी लखनऊ में अधिकारियों, प्रभावशाली लोगों, संपत्ति कारोबार से जुड़े लोगों और स्थानीय राजनीतिक प्रभाव रखने वाले व्यक्तियों के बीच कथित गठजोड़ के कारण सरकारी संपत्तियों से जुड़ी शिकायतों का समाधान प्रभावित होता है। इन आरोपों की भी स्वतंत्र पुष्टि समाचार लिखे जाने तक नहीं हुई है।
सरकारी संपत्तियों पर कब्जे का आरोप, राजस्व नुकसान का दावा
प्रदर्शनकारियों ने व्यापक आरोप लगाते हुए कहा कि राजधानी और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायतों तथा अन्य सरकारी संस्थाओं की जमीनों पर अवैध कब्जे की शिकायतें लंबे समय से सामने आती रही हैं। कांग्रेस नेताओं का दावा है कि सरकारी संपत्तियों के कथित अवैध इस्तेमाल या बिक्री से सरकार को राजस्व का नुकसान होता है और सार्वजनिक संसाधनों पर आम जनता का अधिकार प्रभावित होता है।
उन्होंने मांग की कि संबंधित सरकारी जमीनों का सीमांकन कराया जाए और राजस्व अभिलेखों के आधार पर वास्तविक स्थिति सार्वजनिक की जाए। ग्रामीणों का कहना है कि केवल शिकायत दर्ज करने से समस्या का समाधान नहीं होगा, बल्कि मौके पर जांच और कार्रवाई जरूरी है।
ऑफलाइन इंडिया बंद होने का सामान भी उठाओ
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने भारत के बंद होने का भी आह्वान किया। उन्होंने कहा कि कंपनी बंद होने के बाद बड़ी संख्या में कर्मचारियों के उद्योग प्रभावित हुए और कई परिवारों के सामने रोजगार का संकट पैदा हो गया।
रुद्र दमन सिंह चौहान ने दावा किया कि पिछले वर्षों में प्रदेश के विद्यार्थियों को आवास नहीं मिले। उन्होंने बेरोजगारी के मुद्दे पर भी लगातार विरोध प्रदर्शन करते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्रों में स्थानीय लोगों के हितों और सार्वजनिक कर्मचारियों की सुरक्षा पर ध्यान दिया जाना चाहिए।
2027 विधानसभा चुनाव को लेकर भी दिया बयान
इस दौरान कांग्रेस अध्यक्ष ने वर्ष 2027 में होने वाले उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि बेरोजगारी, बेरोजगारी और आम जनता से जुड़ी अर्थव्यवस्था को कांग्रेस कार्यकर्ता निजीकरण कहते हैं। उन्होंने सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि अगर सरकारी जमीन और सार्वजनिक सुविधाओं से जुड़े मामलों पर कार्रवाई नहीं हुई तो कांग्रेस का आंदोलन आगे भी जारी रहेगा.
उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी गरीबों, पीड़ितों और अमीर परिवारों के साथ मिलकर संघर्ष जारी रखेगी।
अब सार्वजनिक जांच पर टिकी अलगावें
टाटा टेल्को से शुरू हुआ यह विवाद अब अवैध जांच केंद्र में है। पोर्टफोलियो और कांग्रेस नेताओं द्वारा लगाए गए दस्तावेजों की वास्तविकता के लिए राजस्व रिकॉर्ड, मक्के की पैमाइश, सड़क की निर्धारित चौड़ाई, सड़क की स्थिति और कंपनी की पाइपलाइन से संबंधित दस्तावेजों की जांच आवश्यक है।
यदि सरकारी जमीन या सार्वजनिक मार्ग पर प्रतिबंध की पुष्टि है तो प्रशासन के सामने उसे हटाना और सार्वजनिक उपयोग की सुविधा बहाल करना जिम्मेदारी होगी। वहीं अगर कंपनी के पास संबंधित भूमि के वैध दस्तावेज और गैजेट मौजूद हैं तो उनकी भी जांच के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकती है।
समूह प्रदर्शन हड़ताल जारी है और स्थानीय ग्रामीण इलाकों को लेकर कंपनी गेट के बाहर प्रदर्शन किया गया है। विवाद का समाधान परमाणु स्तर पर वैज्ञानिक जांच और संबंधित सभी स्टार्स का पक्ष सामने आने के बाद ही स्पष्ट हो सका।
Author: यायावर
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