फरेबी हुस्न का जाल! रेलवे अधिकारी को अश्लील फोटो से ब्लैकमेल कर 40 हजार वसूले, अब 15 लाख की मांग

झांसी में रेलवे अधिकारी को कथित ब्लैकमेल करने के मामले में गिरफ्तार युवती पुलिस के साथ और रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान की तस्वीर

सुनने के लिए यहां क्लिक करें

चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

झांसी: उत्तर प्रदेश के झांसी में रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी और उनके परिवार को कथित तौर पर अश्लील तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करने का मामला सामने आने के बाद पुलिस की कार्रवाई से हड़कंप मच गया है। पुलिस के मुताबिक, कर्नाटक की रहने वाली एक युवती पर आरोप है कि उसने कथित रूप से अश्लील तस्वीरों को सार्वजनिक करने और अधिकारी तथा उनके परिवार को गंभीर आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी देकर रकम की मांग की। शिकायत के अनुसार, इस सिलसिले में परिवार से कई बार में करीब 40 हजार रुपये भी लिए गए। इसके बाद कथित तौर पर 15 लाख रुपये की बड़ी रकम की मांग की गई।

मामला सामने आने के बाद पुलिस ने तकनीकी निगरानी और सर्विलांस की मदद से आरोपी युवती की लोकेशन का पता लगाया। पुलिस टीम ने प्रयागराज पहुंचकर रेलवे स्टेशन से उसे गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने उसके कब्जे से एक मोबाइल फोन और लैपटॉप बरामद किए हैं। अब इन इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों की जांच के जरिए यह पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि कथित ब्लैकमेलिंग की पूरी कहानी कैसे आगे बढ़ी और इसमें कोई अन्य व्यक्ति भी शामिल था या नहीं।

कौन हैं शिकायत में बताए गए रेलवे अधिकारी?

अपर पुलिस अधीक्षक सिमरन सिंह के अनुसार, शिकायत में जिस अधिकारी का उल्लेख किया गया है, वे जितेंद्र कुमार शर्मा हैं। वे झांसी मंडल रेलवे में वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त यानी डीएससी के पद पर तैनात बताए गए हैं। उनकी पत्नी अंकिता भारद्वाज की शिकायत के आधार पर नवाबाद थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। शिकायत में कर्नाटक निवासी मरीना लॉजरस उर्फ मरीना पर उनके पति और परिवार को कथित तौर पर परेशान करने तथा ब्लैकमेल करने के आरोप लगाए गए हैं।

परिवार का आरोप है कि युवती ने कथित रूप से एआई तकनीक से तैयार की गई अश्लील तस्वीरों का इस्तेमाल किया। इन तस्वीरों को वायरल करने की धमकी देकर परिवार पर दबाव बनाया गया। शिकायत के मुताबिक, व्हाट्सऐप कॉल के माध्यम से भी कथित तौर पर संपर्क किया गया और 15 लाख रुपये की मांग की गई। रकम नहीं देने पर तस्वीरों को सार्वजनिक करने तथा परिवार को आपराधिक मामलों में फंसाने की धमकी दिए जाने का आरोप है।

See also  पहाड़ों से उमड़ा गंगा का रौद्र रूप : 42 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा, 80 हजार से अधिक लोगों की बढ़ी चिंता

पहले छोटी-छोटी रकम, फिर 15 लाख की बड़ी मांग

शिकायत में सबसे महत्वपूर्ण बात यह सामने आई है कि कथित तौर पर ब्लैकमेलिंग के दौरान परिवार से एक बार में बड़ी रकम नहीं मांगी गई, बल्कि अलग-अलग तारीखों पर कई भुगतान किए गए। पुलिस को दी गई जानकारी के अनुसार, जनवरी से जून के बीच कुल सात बार रकम ट्रांसफर की गई। इन भुगतानों का कुल मूल्य करीब 40 हजार रुपये बताया गया है।

शिकायत के अनुसार, 13 जनवरी को पांच हजार रुपये, 9 मार्च को 10 हजार रुपये, 21 मार्च को सात हजार रुपये और 30 मार्च को तीन हजार रुपये भेजे गए। इसके बाद 27 अप्रैल को तीन हजार रुपये, 8 मई को दो हजार रुपये तथा 5 जून को 10 हजार रुपये का भुगतान किए जाने की बात कही गई है। परिवार का आरोप है कि इन भुगतानों के बाद भी कथित मांग समाप्त नहीं हुई और 15 लाख रुपये देने के लिए दबाव बनाया जाता रहा।

पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि रकम किन माध्यमों से भेजी गई, भुगतान के पीछे क्या बातचीत हुई और हर ट्रांसफर से पहले या बाद में किस तरह के संदेश अथवा कॉल किए गए। इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों की जांच इस मामले में अहम मानी जा रही है।

सरकारी आवास पहुंचने का भी आरोप

शिकायतकर्ता अंकिता भारद्वाज ने पुलिस को बताया कि आरोपी युवती कथित तौर पर 2 जून को उनके पति के सरकारी आवास पर भी पहुंची थी। आरोप है कि वहां उसने हंगामा किया और गाली-गलौच की। इसी दौरान कथित तौर पर 15 लाख रुपये की मांग किए जाने की बात भी शिकायत में कही गई है। परिवार के मुताबिक, इसके बाद मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस से शिकायत की गई।

हालांकि पुलिस जांच के स्तर पर यह अभी स्पष्ट होना बाकी है कि दोनों पक्षों के बीच संपर्क कब और किन परिस्थितियों में शुरू हुआ था। कथित अश्लील तस्वीरें किसने तैयार कीं, वे किस माध्यम से भेजी गईं और वास्तव में उनका इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया गया, इन सभी सवालों के जवाब जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएंगे।

See also  चार राज्यों का वांटेड अपराधी सतपाल उर्फ सत्तू मुठभेड़ में ढेर, नाबालिग लड़कियों को बनाता था शिकार

सर्विलांस ने प्रयागराज तक पहुंचाया

मामले की शिकायत दर्ज होने के बाद नवाबाद थाना पुलिस और सर्विलांस टीम ने आरोपी की तलाश शुरू की। पुलिस ने मोबाइल फोन से जुड़ी तकनीकी जानकारी के आधार पर उसकी गतिविधियों को ट्रैक किया। जांच के दौरान बुधवार को आरोपी की लोकेशन प्रयागराज में मिली। इसके बाद झांसी से पुलिस टीम प्रयागराज के लिए रवाना हुई।

पुलिस के मुताबिक, टीम ने कार्रवाई करते हुए प्रयागराज रेलवे स्टेशन से गुरुवार को युवती को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की गई और कथित ब्लैकमेलिंग से संबंधित इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को कब्जे में लिया गया। पूछताछ पूरी होने के बाद देर शाम उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजे जाने की जानकारी पुलिस ने दी।

मोबाइल और लैपटॉप खोलेंगे ब्लैकमेलिंग का राज?

अब जांच का सबसे अहम हिस्सा आरोपी के मोबाइल फोन और लैपटॉप की तकनीकी जांच है। पुलिस इन उपकरणों में मौजूद व्हाट्सऐप चैट, कॉल डिटेल, फोटो, वीडियो, सोशल मीडिया गतिविधियों और अन्य डिजिटल सामग्री की जांच कर सकती है। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि शिकायतकर्ता परिवार को किस तरह के संदेश भेजे गए और 15 लाख रुपये की मांग किस परिस्थिति में की गई।

परिवार ने पुलिस के सामने यह आशंका भी जताई है कि कथित ब्लैकमेलिंग का पूरा नेटवर्क अकेले एक व्यक्ति द्वारा संचालित नहीं किया जा रहा था। हालांकि इस संबंध में अभी कोई निष्कर्ष सामने नहीं आया है। पुलिस इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि कहीं कोई अन्य व्यक्ति इस पूरे प्रकरण में शामिल तो नहीं है।

एआई से बनी तस्वीरों का इस्तेमाल जांच का अहम बिंदु

इस मामले में कथित तौर पर एआई से तैयार की गई अश्लील तस्वीरों का उल्लेख इसे डिजिटल ब्लैकमेलिंग के बदलते स्वरूप से भी जोड़ता है। आज कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से किसी व्यक्ति की तस्वीर में डिजिटल तरीके से बदलाव करना संभव है। ऐसे मामलों में वास्तविक और कृत्रिम सामग्री के बीच अंतर की तकनीकी जांच महत्वपूर्ण हो जाती है।

See also  चहुँओर गूंजा जय बजरंगबली का जयघोष, कर्नलगंज क्षेत्र में विशाल भंडारों में उमड़ा आस्था का सैलाब

हालांकि इस प्रकरण में तस्वीरें वास्तव में एआई से तैयार की गई थीं या नहीं, उनकी उत्पत्ति क्या है और उनका इस्तेमाल किसने किया, इसका अंतिम निर्धारण पुलिस की डिजिटल फोरेंसिक जांच और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही हो सकेगा। इसलिए फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों को जांच के निष्कर्ष से अलग समझना जरूरी है।

40 हजार की वसूली के बाद 15 लाख की मांग ने बढ़ाई चिंता

इस प्रकरण में 40 हजार रुपये के कथित भुगतान के बावजूद 15 लाख रुपये की मांग किए जाने का आरोप सबसे ज्यादा चर्चा में है। परिवार का कहना है कि पहले अलग-अलग अवसरों पर रकम भेजी गई, लेकिन बाद में मांग बढ़ती चली गई। पुलिस के लिए अब यह पता लगाना जरूरी होगा कि कथित रकम की मांग किस उद्देश्य से की गई और भुगतान के लिए किस तरह का दबाव बनाया गया।

डिजिटल ब्लैकमेलिंग के मामलों में अक्सर मोबाइल चैट, कॉल रिकॉर्ड, बैंक या डिजिटल भुगतान का रिकॉर्ड, फोटो-वीडियो की मूल फाइलें और सोशल मीडिया गतिविधियां महत्वपूर्ण साक्ष्य बन सकती हैं। झांसी पुलिस की मौजूदा जांच में भी ऐसे डिजिटल साक्ष्यों की भूमिका अहम रहने की संभावना है।

जांच पूरी होने के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर

फिलहाल पुलिस ने आरोपी युवती को गिरफ्तार कर लिया है और उसके मोबाइल तथा लैपटॉप को जांच के दायरे में लिया गया है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि शिकायत में लगाए गए आरोपों में कितनी सच्चाई है, कथित अश्लील तस्वीरों का स्रोत क्या है, 40 हजार रुपये के भुगतान से जुड़ी परिस्थितियां क्या थीं और 15 लाख रुपये की मांग के पीछे कौन-कौन से लोग या डिजिटल माध्यम सक्रिय थे।

मामले की जांच आगे बढ़ने के साथ ही यह भी स्पष्ट हो सकता है कि यह कथित ब्लैकमेलिंग किसी एक व्यक्ति तक सीमित थी या इसके पीछे कोई बड़ा डिजिटल नेटवर्क काम कर रहा था। फिलहाल पुलिस की तकनीकी जांच और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य ही इस पूरे प्रकरण की असली तस्वीर सामने लाने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

यायावर
Author: यायावर

यायावर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Read More

Cricket Live Score

Rashifal

और पढ़ें