पहाड़ों से उमड़ा गंगा का रौद्र रूप : 42 गांवों पर मंडराया बाढ़ का खतरा, 80 हजार से अधिक लोगों की बढ़ी चिंता

गंगा नदी के उफनते जलस्तर की पृष्ठभूमि में रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान की तस्वीर, संभल के गुन्नौर क्षेत्र में 42 गांवों पर मंडराते बाढ़ के खतरे को दर्शाती फीचर इमेज।

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रिपोर्ट: चुन्नीलाल प्रधान

गुन्नौर (संभल)। पहाड़ी क्षेत्रों में लगातार हो रही भारी बारिश का असर अब मैदानी इलाकों में भी साफ दिखाई देने लगा है। ऊपरी क्षेत्रों से लगातार छोड़े जा रहे पानी के कारण गंगा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। इसका सीधा प्रभाव संभल जिले की गुन्नौर तहसील के गंगा तटीय इलाकों पर पड़ने लगा है। नदी का पानी धीरे-धीरे खेतों की ओर बढ़ रहा है, जिससे किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें गहरा गई हैं। प्रशासन ने स्थिति पर लगातार निगरानी बनाए रखी है, जबकि संभावित बाढ़ को देखते हुए संवेदनशील क्षेत्रों में बाढ़ चौकियां सक्रिय कर दी गई हैं।

42 गांवों पर मंडरा रहा बाढ़ का खतरा

गंगा नदी के बढ़ते जलस्तर ने गुन्नौर तहसील के करीब 42 गांवों को संभावित बाढ़ की जद में ला दिया है। इन गांवों में रहने वाले लगभग 80 हजार लोगों के सामने खतरे की स्थिति बनती दिखाई दे रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि अगले कुछ दिनों तक जलस्तर इसी तरह बढ़ता रहा तो खेतों के साथ-साथ आबादी वाले क्षेत्रों तक भी पानी पहुंच सकता है।

हर साल बरसात के मौसम में गंगा किनारे बसे गांवों को बाढ़ की चुनौती का सामना करना पड़ता है। इस बार भी पहाड़ों में लगातार बारिश होने के कारण नदी का बहाव तेज हो गया है और पानी तेजी से निचले इलाकों की ओर बढ़ रहा है।

ईख के खेतों में घुसने लगा गंगा का पानी

विकास खंड गुन्नौर के गांव ईशमपुर डांडा के आसपास गंगा का पानी खेतों में प्रवेश करने लगा है। सबसे अधिक चिंता उन किसानों को है जिनकी ईख, धान और अन्य खरीफ फसलें अभी खेतों में खड़ी हैं। किसानों का कहना है कि यदि पानी का स्तर और बढ़ा तो हजारों बीघा फसल जलमग्न हो सकती है, जिससे उन्हें भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

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कई किसानों ने बताया कि नदी का पानी पहले से कहीं अधिक तेजी से खेतों की ओर बढ़ रहा है। यदि समय रहते जलस्तर नहीं थमा तो फसल बचाना मुश्किल हो जाएगा। ग्रामीण लगातार नदी की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और प्रशासन से आवश्यक सहायता की उम्मीद कर रहे हैं।

खतरे के निशान के बेहद करीब पहुंचा जलस्तर

शनिवार दोपहर लगभग दो बजे तक चौधरी चरण सिंह गंगा बैराज, नरौरा पर गंगा का डाउन स्ट्रीम जलस्तर 177.62 मीटर दर्ज किया गया। जबकि यहां खतरे का निशान 178.765 मीटर निर्धारित है। यानी गंगा का जलस्तर खतरे के स्तर से बहुत कम दूरी पर पहुंच चुका है।

बैराज से लगभग 67,201 क्यूसेक पानी का प्रवाह दर्ज किया गया। स्थानीय स्तर पर शनिवार को बारिश नहीं हुई, लेकिन पहाड़ी क्षेत्रों से लगातार आ रहे पानी के कारण नदी का जलस्तर ऊंचा बना हुआ है। जल विशेषज्ञों का मानना है कि यदि ऊपरी क्षेत्रों में वर्षा का सिलसिला जारी रहा तो आने वाले दिनों में जलस्तर में और वृद्धि हो सकती है।

किसानों की बढ़ी चिंता, फसलों पर मंडराया संकट

गंगा किनारे बसे गांवों के किसानों के लिए यह समय सबसे अधिक चिंता का है। खेतों में तैयार खड़ी ईख और अन्य फसलें उनकी सालभर की मेहनत का परिणाम हैं। यदि बाढ़ का पानी खेतों में भर गया तो न केवल उत्पादन प्रभावित होगा बल्कि किसानों को आर्थिक संकट का भी सामना करना पड़ेगा।

ग्रामीणों का कहना है कि नदी के बढ़ते पानी ने पहले ही खेतों के निचले हिस्सों को अपनी चपेट में लेना शुरू कर दिया है। कई स्थानों पर पानी मेड़ों तक पहुंच चुका है। किसानों ने प्रशासन से समय रहते सुरक्षा और राहत संबंधी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने की मांग की है।

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प्रशासन ने बढ़ाई सतर्कता

संभावित बाढ़ की स्थिति को देखते हुए प्रशासन पूरी तरह सतर्क नजर आ रहा है। सिंचाई विभाग और राजस्व विभाग लगातार नदी के जलस्तर की निगरानी कर रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है, लेकिन किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए सभी तैयारियां पूरी रखी गई हैं।

सिंचाई विभाग के एसडीओ अंकित सिंह ने बताया कि गंगा नदी के जलस्तर पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। जलस्तर में होने वाले प्रत्येक बदलाव की जानकारी संबंधित विभागों को तत्काल उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर समय रहते राहत और बचाव कार्य शुरू किए जा सकें।

संवेदनशील गांवों में बनाई गईं बाढ़ चौकियां

संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने गंगा किनारे के संवेदनशील गांवों में बाढ़ चौकियां स्थापित कर दी हैं। इन चौकियों के माध्यम से जलस्तर की निगरानी, ग्रामीणों को समय पर सूचना देने तथा राहत एवं बचाव कार्यों का समन्वय किया जाएगा।

बाढ़ चौकियां जिन प्रमुख स्थानों पर स्थापित की गई हैं, उनमें प्राथमिक विद्यालय बझांगी, चिरवारा, सिंघोला पुख्ता, रघुपुर पुख्ता, काशीपुर, मरकावणी, जूनियर हाईस्कूल खिरकवारी टप्पावैश्य, रसूलपुर, प्राथमिक विद्यालय मिठनपुर, ईशमपुर डांडा, असदपुर, बिचपुरी सैलाब, शाहजहानाबाद, बसंतपुर डांडा, चाऊपुर डांडा तथा प्राथमिक विद्यालय जिजोड़ा डांडा शामिल हैं।

इन केंद्रों पर आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं ताकि जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा सके।

ग्रामीणों की नजर अब मौसम और गंगा के मिजाज पर

गंगा तटीय गांवों के लोगों की निगाहें अब मौसम और नदी के बदलते स्वरूप पर टिकी हुई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि पहाड़ी इलाकों में बारिश का सिलसिला थम गया तो स्थिति सामान्य हो सकती है, लेकिन लगातार पानी आने की स्थिति में बाढ़ का खतरा और बढ़ जाएगा।

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लोग अपने स्तर पर भी एहतियात बरत रहे हैं। कई परिवारों ने जरूरी सामान सुरक्षित स्थानों पर रखना शुरू कर दिया है, जबकि पशुपालक अपने मवेशियों को ऊंचे स्थानों पर ले जाने की तैयारी कर रहे हैं।

प्रशासन ने लोगों से की सतर्क रहने की अपील

जिला प्रशासन ने गंगा किनारे रहने वाले लोगों से अपील की है कि वे अफवाहों पर ध्यान न दें और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन करें। अधिकारियों ने कहा है कि नदी के किनारे अनावश्यक रूप से जाने से बचें तथा किसी भी आपात स्थिति की सूचना तुरंत संबंधित अधिकारियों को दें।

फिलहाल हालात नियंत्रण में हैं, लेकिन गंगा का लगातार बढ़ता जलस्तर यह संकेत दे रहा है कि यदि मौसम का मिजाज नहीं बदला तो आने वाले दिनों में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ऐसे में प्रशासन और स्थानीय लोगों दोनों की सतर्कता ही संभावित बाढ़ के खतरे को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इस खबर से जुड़ी ताजा अपडेट के लिए जनगणदूत के साथ बने रहें।

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Author: यायावर

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