“का हो अखिलेश यादव जी, एकदम्मे किरिया खा लेहले हउवा कि सुधरबा नाहीं?” राजभर का तीखा हमला

अखिलेश यादव और ओम प्रकाश राजभर की तस्वीर के साथ आजमगढ़ विवाद पर दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

आजमगढ़। सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर एक बार फिर तीखा राजनीतिक हमला बोला है। इस बार निशाने पर आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं के बीच सामने आया विवाद है। राजभर ने आरोप लगाया कि अपनी ही पार्टी के कार्यकर्ता से कथित मारपीट के मामले में अखिलेश यादव की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर भोजपुरी अंदाज में पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव पर जमकर तंज कसा। उन्होंने सवालिया लहजे में लिखा कि आखिर अखिलेश यादव क्या कर रहे हैं और क्या उन्होंने कभी न सुधरने की कसम खा ली है? राजभर के इस बयान ने आजमगढ़ के स्थानीय राजनीतिक विवाद को प्रदेश की सियासत के बड़े मुद्दे में बदल दिया है।

आजमगढ़ विवाद बना राजभर के हमले का आधार

पूरा विवाद आजमगढ़ के गोपालपुर विधानसभा क्षेत्र से समाजवादी पार्टी के विधायक नफीस अहमद से जुड़ा बताया जा रहा है। सपा के बूथ अध्यक्ष राहुल यादव ने विधायक के समर्थकों पर कथित मारपीट और अभद्रता का आरोप लगाते हुए महराजगंज थाने में शिकायत दी है।

शिकायतकर्ता राहुल यादव के मुताबिक आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर चल रहे एक सर्वे में उन्होंने विधायक नफीस अहमद के बजाय समाजवादी पार्टी के ही किसी अन्य नेता को अपनी पहली पसंद बताया था। आरोप है कि इसके बाद विवाद की स्थिति पैदा हुई और उन्हें फोन पर कथित रूप से गाली-गलौज की गई।

राहुल यादव का कहना है कि वह अपनी बात रखने के लिए सैदपुर पहुंचे थे। इसी दौरान विधायक के समर्थकों ने कथित तौर पर उन्हें रोक लिया। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वहां उनके साथ अभद्रता की गई और मारपीट की स्थिति बनी। राहुल का यह भी दावा है कि उस समय विधायक नफीस अहमद मौके पर मौजूद थे और उन्होंने कथित घटनाक्रम में हस्तक्षेप नहीं किया।

हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हुई है। ऐसे में पूरे मामले में पुलिस जांच और संबंधित पक्षों का आधिकारिक पक्ष महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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अखिलेश यादव की चुप्पी पर ओम प्रकाश राजभर का सवाल

इसी विवाद को लेकर ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर निशाना साधा। उन्होंने भोजपुरी में लिखे अपने पोस्ट में सपा नेतृत्व की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए और आरोप लगाया कि पार्टी के कार्यकर्ता कथित रूप से परेशान हो रहे हैं, लेकिन नेतृत्व इस पर चुप है।

राजभर ने अपने पोस्ट में अखिलेश यादव से सवाल करते हुए कहा कि क्या उन्होंने कसम खा ली है कि वह नहीं सुधरेंगे। उन्होंने सपा के भीतर कथित दबदबे और कार्यकर्ताओं के साथ होने वाले व्यवहार को लेकर भी कटाक्ष किया।

राजभर का यह हमला केवल एक स्थानीय विवाद तक सीमित नहीं रहा। उन्होंने इसे समाजवादी पार्टी की आंतरिक राजनीति और नेतृत्व की कथित प्राथमिकताओं से जोड़ने की कोशिश की। यही वजह है कि उनके बयान को आगामी चुनावी राजनीति के संदर्भ में भी देखा जा रहा है।

‘मुसलमान प्रेम’ को लेकर भी साधा निशाना

ओम प्रकाश राजभर ने अपने बयान में अखिलेश यादव पर ‘मुसलमान प्रेम’ में डूबे होने का आरोप भी लगाया। उन्होंने कहा कि सपा अध्यक्ष को सही और गलत के बीच अंतर समझना चाहिए और अपनी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ हो रहे कथित व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए।

राजभर के इस बयान में राजनीतिक हमला काफी तीखा दिखाई दिया। उन्होंने सवाल उठाया कि जो कार्यकर्ता पार्टी का झंडा-बैनर लेकर संगठन को मजबूत करते हैं, अगर उन्हीं के साथ कथित रूप से मारपीट होती है तो पार्टी नेतृत्व को उनकी बात सुननी चाहिए।

हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि राजभर के आरोप राजनीतिक बयान हैं। वहीं राहुल यादव द्वारा लगाए गए मारपीट के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि भी अभी नहीं हुई है। इसलिए पूरे मामले की वास्तविक स्थिति पुलिस जांच और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयानों के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।

‘पीट देगा अशफाक’ टिप्पणी से बढ़ा सियासी पारा

ओम प्रकाश राजभर ने अपने भोजपुरी पोस्ट में एक व्यक्ति का जिक्र करते हुए ‘पीट देगा अशफाक’ जैसी टिप्पणी का इस्तेमाल किया। उन्होंने आरोप लगाया कि संबंधित व्यक्ति कथित रूप से रोज नई मनमानी कर रहा है और अखिलेश यादव इस पर चुप हैं।

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राजभर की भाषा और शैली ने इस राजनीतिक विवाद को और ज्यादा धार दे दी। भोजपुरी में किए गए हमले का मकसद सीधे तौर पर पूर्वांचल की राजनीतिक जमीन पर संदेश देने के रूप में भी देखा जा सकता है।

आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी के लिए महत्वपूर्ण राजनीतिक क्षेत्र रहा है। ऐसे में पार्टी के स्थानीय संगठन से जुड़े किसी विवाद को लेकर विपक्षी नेता का सीधे अखिलेश यादव को घेरना राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

राहुल यादव ने शिकायत में क्या कहा?

शिकायतकर्ता राहुल यादव के अनुसार, आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर सोशल मीडिया पर एक सर्वे चल रहा था। इसमें उन्होंने विधायक नफीस अहमद की जगह समाजवादी पार्टी के दूसरे नेता को पसंद किया। आरोप है कि इसी बात को लेकर उन्हें फोन किया गया और कथित तौर पर गाली-गलौज की गई।

इसके बाद जब राहुल यादव अपनी बात रखने के लिए सैदपुर पहुंचे तो कथित तौर पर विधायक समर्थकों ने उन्हें रोक लिया। शिकायत में अभद्रता और मारपीट के आरोप लगाए गए हैं।

राहुल यादव ने यह भी दावा किया कि विधायक नफीस अहमद उस समय मौके पर मौजूद थे। हालांकि, विधायक की भूमिका को लेकर लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। इस पूरे मामले में पुलिस की कार्रवाई और दोनों पक्षों के बयान आने के बाद तस्वीर ज्यादा साफ हो सकती है।

चुनाव से पहले क्यों अहम है आजमगढ़ का विवाद?

आजमगढ़ की राजनीति में समाजवादी पार्टी का लंबे समय से प्रभाव रहा है। ऐसे में पार्टी के स्थानीय कार्यकर्ताओं के बीच किसी विवाद का सामने आना केवल संगठनात्मक मुद्दा नहीं माना जाता। चुनावी मौसम में ऐसे मामले विपक्ष को सत्तारूढ़ या प्रतिद्वंद्वी दल पर राजनीतिक हमला करने का अवसर भी देते हैं।

ओम प्रकाश राजभर ने इसी राजनीतिक परिस्थिति को अपने हमले का आधार बनाया है। उन्होंने अपने बयान में आने वाले चुनाव का जिक्र करते हुए आजमगढ़ के ‘कृष्णवंशी अहीर’ समाज को लेकर भी टिप्पणी की और दावा किया कि लोग कथित अन्याय का जवाब देने के लिए तैयार हैं।

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उनके बयान का यह हिस्सा भी राजनीतिक रूप से काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसमें स्थानीय सामाजिक समीकरणों को चुनावी राजनीति से जोड़ने का प्रयास दिखाई देता है।

राजभर की चेतावनी ने बढ़ाई सियासी हलचल

ओम प्रकाश राजभर ने अपने पोस्ट के अंत में अखिलेश यादव को चुनाव का हवाला देते हुए चेतावनी भरे अंदाज में कहा कि आने वाले समय में उन्हें इसका जवाब समझ में आ जाएगा। उन्होंने आजमगढ़ के सामाजिक समीकरणों का उल्लेख करते हुए विरोधियों को सबक सिखाने की बात कही।

राजभर के इस बयान के बाद सवाल यह है कि क्या समाजवादी पार्टी इस आरोप पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया देगी? क्या विधायक नफीस अहमद या उनके समर्थक राहुल यादव के आरोपों पर अपना पक्ष रखेंगे? और क्या पुलिस शिकायत के आधार पर कोई कार्रवाई आगे बढ़ेगी?

फिलहाल इन सवालों के जवाब सामने आना बाकी है।

सपा के लिए स्थानीय विवाद से बड़ा संदेश

आजमगढ़ का यह मामला इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि इसमें पार्टी के ही कार्यकर्ता और स्थानीय विधायक से जुड़े आरोप सामने आए हैं। यदि आरोपों की जांच में शिकायतकर्ता के दावे सही पाए जाते हैं तो यह समाजवादी पार्टी के स्थानीय संगठन के लिए गंभीर विषय हो सकता है। वहीं यदि आरोप जांच में साबित नहीं होते हैं तो यह राजनीतिक बयानबाजी और संगठनात्मक विवाद के अलग आयाम को सामने लाएगा।

फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर इतना स्पष्ट है कि आजमगढ़ के कथित मारपीट विवाद ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया सियासी मुद्दा जरूर खड़ा कर दिया है। ओम प्रकाश राजभर ने इसे लेकर अखिलेश यादव को सीधे निशाने पर लिया है, जबकि शिकायतकर्ता ने पुलिस से शिकायत कर अपनी बात रखी है।

अब निगाहें पुलिस जांच, सपा विधायक नफीस अहमद के पक्ष और समाजवादी पार्टी नेतृत्व की संभावित प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। चुनावी माहौल के बीच आजमगढ़ से उठा यह विवाद आने वाले दिनों में और राजनीतिक रंग ले सकता है।

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Author: यायावर

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