दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
GONDA NEWS यौन शोषण के आरोपों से जुड़े मामले में अदालत से बरी होने के बाद कैसरगंज के पूर्व भाजपा सांसद बृजभूषण शरण सिंह एक बार फिर अपने बयानों को लेकर चर्चा में हैं। शनिवार को एक निजी समाचार चैनल को दिए इंटरव्यू में उन्होंने अपने खिलाफ चले मुकदमे, पहलवानों की ओर से आगे की कानूनी कार्रवाई, भाजपा में अपनी संभावित भूमिका और उत्तर प्रदेश के आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर खुलकर अपनी बात रखी। उन्होंने दावा किया कि मुकदमे की पूरी अवधि के दौरान उन्होंने अपने बचाव के लिए न तो भाजपा के किसी बड़े नेता से मदद मांगी और न ही विपक्ष के किसी राजनीतिक नेता से संपर्क किया।
बृजभूषण शरण सिंह ने अपने दावे को मजबूत करने के लिए गले में पहने हनुमान जी के लॉकेट को निकालकर शपथ लेने की बात कही। उनका कहना था कि वह पूरी जिम्मेदारी के साथ यह कह रहे हैं कि केस के दौरान उन्होंने किसी नेता को फोन नहीं किया। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी इस बात पर कौन विश्वास करता है और कौन नहीं, यह अलग विषय है, लेकिन वह अपने दावे पर कायम हैं।
हनुमान जी की शपथ लेकर बोले- किसी नेता से नहीं मांगी मदद
अपने मुकदमे के दौरान राजनीतिक सहयोग मिलने की चर्चाओं पर बृजभूषण सिंह ने साफ तौर पर इनकार किया। उन्होंने कहा कि चाहे उनकी अपनी पार्टी का नेता हो या विपक्ष में बैठा कोई नेता, उन्होंने किसी को अपने मामले में मदद के लिए फोन नहीं किया।
उन्होंने कहा कि न्यायिक प्रक्रिया के दौरान उन्होंने अपने स्तर पर कानूनी लड़ाई लड़ी और किसी राजनीतिक व्यक्ति से सहायता लेने की कोशिश नहीं की। इसी बात को दोहराते हुए उन्होंने हनुमान जी के लॉकेट की शपथ लेने का हवाला दिया।
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब पहलवानों से जुड़े इस मामले ने लंबे समय तक राष्ट्रीय राजनीति और खेल जगत में व्यापक चर्चा पैदा की थी।
हाईकोर्ट जाने का पहलवानों को अधिकार, बोले- वहां ज्यादा भद पिटेगी
मामले में पहलवानों के हाईकोर्ट जाने की संभावना को लेकर पूछे गए सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि अदालत का दरवाजा खटखटाना उनका अधिकार है। उन्होंने कहा कि यदि वे निचली अदालत के फैसले से संतुष्ट नहीं हैं तो वे उच्च न्यायालय का रुख कर सकते हैं।
हालांकि, इसी के साथ उन्होंने दावा किया कि जिस तरह निचली अदालत की कार्यवाही में उनकी नजर में दूसरे पक्ष को नुकसान हुआ है, उससे ज्यादा नुकसान हाईकोर्ट में हो सकता है। उन्होंने कहा कि यह फिलहाल न्यायिक प्रक्रिया का हिस्सा है और जब तक सभी कानूनी रास्ते खुले हुए हैं, तब तक वह मानहानि या अन्य किसी कार्रवाई के बारे में आगे नहीं बढ़ेंगे।
उनके मुताबिक, जब तक संबंधित पक्ष के पास न्यायिक फैसले को चुनौती देने का रास्ता उपलब्ध है, तब तक उसके खिलाफ अलग से कार्रवाई शुरू करने का सवाल नहीं उठता।
विधायक का चुनाव नहीं लड़ेंगे, लेकिन राजनीति नहीं छोड़ेंगे
अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट संकेत दिया कि वह विधायक का चुनाव लड़ने के इच्छुक नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने राजनीति से दूरी बनाने की संभावना को पूरी तरह खारिज कर दिया।
उन्होंने कहा कि कोई राजनीतिक व्यक्ति राजनीति छोड़ दे, यह आसान बात नहीं है। उन्होंने खुद को ‘मेकर’ बताते हुए कहा कि फिलहाल वह छोटा मेकर हैं और भविष्य में बड़ी भूमिका भी निभा सकते हैं। उनका कहना था कि उन्हें भगवान ने मेकर बनाया है।
उनके इस बयान को राजनीतिक गलियारों में उनके भविष्य की भूमिका से जोड़कर देखा जा रहा है। हालांकि उन्होंने अपनी अगली जिम्मेदारी को लेकर अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व पर छोड़ दिया।
बेटा विधायक, दूसरा सांसद; पार्टी तय करेगी भूमिका
भाजपा में अपनी संभावित भूमिका के सवाल पर बृजभूषण सिंह ने अपने परिवार की मौजूदा राजनीतिक स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके एक बेटे विधायक हैं, जबकि दूसरे बेटे को सांसद के रूप में जनता ने चुना है।
उन्होंने कहा कि जनता ने उनके बेटों को पांच वर्ष के लिए जिम्मेदारी दी है और उन्हें अपनी जिम्मेदारी पूरी करनी चाहिए। उनके मुताबिक, यह जरूरी नहीं है कि उनके बेटे अपनी सीट छोड़ें और वह स्वयं चुनाव मैदान में उतरें।
उन्होंने संकेत दिया कि भाजपा नेतृत्व भविष्य में उनकी भूमिका को लेकर फैसला कर सकता है। उनके मुताबिक, पार्टी एक-दो महीने के भीतर इस विषय पर विचार कर सकती है।
राम मंदिर को लेकर भी दिया बेबाक जवाब
राम मंदिर दर्शन के सवाल पर भी पूर्व सांसद ने बेबाक टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जहां उन्हें सम्मान नहीं मिलता, वहां वह जाने वाले व्यक्ति नहीं हैं। उनका यह बयान भी राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया।
2027 में ‘चंदा चोरी’ नहीं, काम और खामियां बनेंगी चुनावी मुद्दा
उत्तर प्रदेश के 2027 विधानसभा चुनाव को लेकर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि चुनाव में ‘चंदा चोरी’ जैसा मुद्दा निर्णायक नहीं रहने वाला है। उनके मुताबिक, सत्तारूढ़ दल अपनी सरकार के कामकाज को जनता के सामने रखेगा, जबकि विपक्ष सरकार की कमियां गिनाकर वोट मांगेगा।
उन्होंने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर कहा कि उन्हें मजबूती से चुनाव लड़ना चाहिए और उम्मीद है कि वह अच्छा चुनाव लड़ेंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि चुनावी राजनीति में परिस्थितियां लगातार बदलती रहती हैं और किसी भी दल के लिए चुनाव को आसान नहीं माना जा सकता।
‘कॉकरोच जनता पार्टी’ पर तीखा हमला
इंटरव्यू के दौरान बृजभूषण सिंह ने एक राजनीतिक संगठन को ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ कहते हुए उसके भविष्य पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि इस संगठन ने युवाओं के आंदोलन को अपने हाथ में लेने की कोशिश की।
उनका कहना था कि देश का युवा पहले से परेशान था और कुछ लोगों ने इस स्थिति का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास किया। उन्होंने आंदोलन के दौरान तोड़फोड़ और कैमरे तोड़े जाने जैसी घटनाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि पढ़ाई करने वाला बच्चा ऐसी गतिविधियों में शामिल नहीं होता।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी राजनीतिक दल को केवल नैतिक समर्थन देना था तो उसे आंदोलन में शामिल होने के बजाय बाहर से समर्थन देना चाहिए था। उनके अनुसार, ऐसा होता तो आंदोलन की दिशा और भविष्य अलग हो सकता था।
‘सरकार Gen-Z के कारण नहीं, बच्चों के भविष्य के लिए झुकी’
युवाओं और Gen-Z से जुड़े सवाल पर बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि सरकार के किसी मुद्दे पर पीछे हटने या फैसला बदलने को केवल Gen-Z की ताकत से जोड़ना उचित नहीं है।
उन्होंने कहा कि सरकार ने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए कदम उठाया। इसी संदर्भ में उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे का भी उल्लेख किया और कहा कि बच्चों के भविष्य से जुड़े सवाल पर सरकार का संवेदनशील होना अच्छी बात है।
उनका तर्क था कि यदि बच्चों के भविष्य का सवाल सामने हो तो सरकार का जनता के हित में झुकना लोकतांत्रिक व्यवस्था का सकारात्मक पहलू है।
विपक्ष को चुनौती- बच्चों को हटाकर मैदान में आएं
विपक्षी दलों पर निशाना साधते हुए पूर्व सांसद ने कहा कि यदि विपक्ष को अपने राजनीतिक प्रभाव पर इतना भरोसा है तो वह युवाओं और बच्चों के मुद्दे को अलग रखकर सीधे चुनाव मैदान में आए।
उन्होंने दावा किया कि देश की जनता का विपक्ष पर पर्याप्त विश्वास नहीं है। इसी क्रम में उन्होंने संबंधित संगठन को चुनौती देते हुए कहा कि यदि उसमें राजनीतिक ताकत है तो वह बाकायदा पार्टी बनाकर चुनाव लड़े।
उन्होंने यहां तक दावा किया कि ऐसा संगठन छह महीने बाद राजनीतिक तौर पर दिखाई नहीं देगा। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन और दावा है, जिसका वास्तविक असर आगामी चुनावी परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।
सेमेस्टर सिस्टम पर उठाए सवाल
राजनीतिक मुद्दों के अलावा बृजभूषण सिंह ने शिक्षा व्यवस्था पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने विश्वविद्यालयों में लागू सेमेस्टर प्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि इससे शिक्षा व्यवस्था को नुकसान पहुंचा है।
उनका विशेष जोर ग्रामीण क्षेत्रों की शिक्षा व्यवस्था पर था। उन्होंने दावा किया कि सेमेस्टर प्रणाली के कारण ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले विद्यार्थियों और विद्यालयों पर अलग तरह का दबाव पड़ा है।
उनके मुताबिक, शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षाओं की तैयारी तक सीमित नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि लगातार परीक्षा केंद्रित व्यवस्था के कारण पढ़ाई के मूल उद्देश्य पर असर पड़ता है और विद्यार्थियों के समग्र विकास पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है।
2027 में भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला?
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर बृजभूषण शरण सिंह ने भाजपा और समाजवादी पार्टी के बीच मुकाबला होने की संभावना जताई। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि चुनावी परिस्थितियां स्थायी नहीं होतीं और समय के साथ समीकरण बदलते रहते हैं।
उन्होंने कहा कि इस बार चुनाव में मुकाबला होगा और किसी भी राजनीतिक दल के लिए इसे आसान नहीं कहा जा सकता। उन्होंने सत्ता विरोधी लहर की संभावना को भी राजनीति का स्वाभाविक हिस्सा बताया।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पिछले चुनावों में जीत के अंतर का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि समय के साथ चुनावी मार्जिन में बदलाव आया है। उनके मुताबिक, सत्ता में लंबे समय तक रहने वाले दलों के सामने जनता की अपेक्षाएं भी बढ़ती हैं और यही चुनावी राजनीति को चुनौतीपूर्ण बनाती हैं।
बयान के बाद फिर चर्चा में बृजभूषण
यौन शोषण मामले में अदालत से बरी होने के बाद बृजभूषण शरण सिंह का यह इंटरव्यू उनके राजनीतिक रुख को एक बार फिर सामने लाता है। उन्होंने एक ओर अपने मुकदमे को लेकर किसी राजनीतिक मदद से इनकार किया, वहीं दूसरी ओर राजनीति से सक्रिय रूप से जुड़े रहने के संकेत भी दिए।
2027 के विधानसभा चुनाव, भाजपा में अपनी भूमिका, विपक्ष की रणनीति, युवाओं के आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था जैसे विषयों पर उनके बयानों ने राजनीतिक बहस को नए सिरे से हवा दी है। हालांकि, उनके दावों और राजनीतिक आकलनों का वास्तविक प्रभाव आने वाले समय में होने वाली राजनीतिक गतिविधियों और चुनावी परिस्थितियों से ही स्पष्ट होगा।

























