सूरज सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट। विकास और आधुनिक सुविधाओं के इस दौर में भी जिले के राजापुर तहसील क्षेत्र के कई गांव पिछले करीब दस दिनों से बिजली संकट का सामना कर रहे हैं। सरधुवा पावर हाउस से जुड़ी विद्युत आपूर्ति बाधित होने के कारण सिधौली, लोधन पुरवा, ब्योहरा, अर्चा, बरेठी सहित अनेक गांवों के हजारों ग्रामीण अंधेरे में जीवन बिताने को विवश हैं। लगातार बिजली गुल रहने से न केवल घरेलू जीवन प्रभावित हुआ है, बल्कि खेती-किसानी, पेयजल व्यवस्था और विद्यार्थियों की पढ़ाई भी गंभीर रूप से प्रभावित हो रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि इतनी लंबी अवधि तक बिजली आपूर्ति ठप रहने की स्थिति पहले कभी देखने को नहीं मिली। दिन और रात दोनों समय बिजली न मिलने से लोगों की दैनिक दिनचर्या पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गई है। क्षेत्र में बढ़ती उमस और गर्मी के बीच लोगों को अतिरिक्त परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
बिजली संकट ने बढ़ाई ग्रामीणों की परेशानी
सरधुवा पावर हाउस से जुड़े गांवों में पिछले कई दिनों से बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण आम जनजीवन प्रभावित हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि घरों में अंधेरा रहने से बच्चों की पढ़ाई बाधित हो रही है। वहीं मोबाइल फोन चार्ज न होने से लोगों का संपर्क भी प्रभावित हो रहा है।
आज के समय में मोबाइल संचार का सबसे महत्वपूर्ण माध्यम बन चुका है। ऐसे में बिजली न होने के कारण लोग अपने फोन चार्ज करने के लिए दूसरे गांवों या बाजारों का सहारा लेने को मजबूर हैं। कई परिवारों को छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ रहा है।
पेयजल व्यवस्था पर भी पड़ा असर
ग्रामीण क्षेत्रों में बड़ी संख्या में लोग बिजली से संचालित मोटरों और सबमर्सिबल पंपों पर निर्भर रहते हैं। बिजली आपूर्ति ठप होने के कारण पेयजल संकट भी गहराता जा रहा है। कई गांवों में लोगों को दूर-दराज के हैंडपंपों और अन्य जल स्रोतों से पानी लाना पड़ रहा है।
महिलाओं और बुजुर्गों के लिए यह स्थिति विशेष रूप से कठिन साबित हो रही है। पानी की उपलब्धता प्रभावित होने से घरेलू कार्यों में भी बाधा उत्पन्न हो रही है। ग्रामीणों का कहना है कि बिजली और पानी दोनों की समस्या ने उनके सामने दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।
किसानों की चिंता बढ़ी, सिंचाई कार्य प्रभावित
बिजली संकट का सबसे अधिक प्रभाव किसानों पर पड़ रहा है। क्षेत्र के अधिकांश किसान सिंचाई के लिए विद्युत चालित नलकूपों का उपयोग करते हैं। पिछले दस दिनों से बिजली न मिलने के कारण नलकूप बंद पड़े हैं, जिससे खेतों में सिंचाई कार्य प्रभावित हो गया है।
किसानों का कहना है कि फसलों को समय पर पानी न मिलने से उत्पादन पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है। वर्तमान मौसम में कई फसलों को नियमित सिंचाई की आवश्यकता होती है। यदि जल्द बिजली आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।
ग्रामीण किसानों ने बताया कि वे पहले ही मौसम की अनिश्चितताओं और बढ़ती लागत से जूझ रहे हैं। ऐसे में लंबे समय तक बिजली बाधित रहने से उनकी मुश्किलें और बढ़ गई हैं।
शिकायतों के बावजूद नहीं मिला स्थायी समाधान
ग्रामीणों के अनुसार बिजली आपूर्ति बंद होने के बाद उन्होंने कई बार विभागीय अधिकारियों और कर्मचारियों को समस्या की जानकारी दी। स्थानीय स्तर पर शिकायतें दर्ज कराई गईं और जिम्मेदार अधिकारियों से संपर्क भी किया गया।
हालांकि ग्रामीणों का आरोप है कि लगातार शिकायतों के बावजूद समस्या का समाधान अपेक्षित गति से नहीं हो सका। परिणामस्वरूप लोगों को कई दिनों तक अंधेरे में रहना पड़ा। इससे ग्रामीणों में नाराजगी और असंतोष बढ़ता जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक कदम उठाए गए होते तो इतनी लंबी अवधि तक बिजली आपूर्ति बाधित नहीं रहती। लोगों ने विभाग से भविष्य में ऐसी परिस्थितियों से बचने के लिए मजबूत और स्थायी व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है।
बिजली विभाग ने बताई सप्लाई बाधित होने की वजह
बिजली आपूर्ति ठप रहने को लेकर जब विभागीय अधिकारियों से संपर्क किया गया तो क्षेत्रीय जूनियर इंजीनियर (जेई) निशार अहमद ने स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने बताया कि विद्युत लाइन से जुड़े चार पोल क्षतिग्रस्त होने के कारण बिजली आपूर्ति बाधित हुई थी।
उन्होंने कहा कि खराब पोलों को बदलने और लाइन को दुरुस्त करने का कार्य तेजी से कराया जा रहा है। विभागीय टीम लगातार मौके पर काम कर रही है ताकि प्रभावित गांवों में जल्द से जल्द विद्युत आपूर्ति बहाल की जा सके।
जेई के अनुसार यदि मौसम और अन्य परिस्थितियां अनुकूल रहीं तो अगले दिन सुबह तक बिजली आपूर्ति शुरू कर दी जाएगी। उन्होंने ग्रामीणों को आश्वस्त किया कि समस्या के समाधान के लिए विभाग पूरी गंभीरता के साथ कार्य कर रहा है।
ग्रामीणों ने की शीघ्र बिजली बहाली की मांग
लगातार दस दिनों से बिजली संकट झेल रहे ग्रामीणों ने विभाग के उच्च अधिकारियों से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। उनका कहना है कि बिजली आज केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन की मूलभूत आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में लंबे समय तक बिजली आपूर्ति बाधित रहना गंभीर चिंता का विषय है।
ग्रामीणों ने मांग की है कि क्षतिग्रस्त विद्युत ढांचे की शीघ्र मरम्मत कर नियमित और निर्बाध बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए विद्युत लाइनों और पोलों के रखरखाव पर विशेष ध्यान दिया जाए।
फिलहाल सिधौली, लोधन पुरवा, ब्योहरा, अर्चा, बरेठी और आसपास के गांवों के लोग विभाग द्वारा किए जा रहे दावों पर नजर बनाए हुए हैं। अब सभी की उम्मीदें इस बात पर टिकी हैं कि बिजली विभाग का आश्वासन धरातल पर कब तक दिखाई देता है और अंधेरे में डूबे इन गांवों को राहत कब मिलती है।

























