रिपोर्ट: ठाकुर के के सिंह
MATHURA हतावली/फरह, फरह क्षेत्र के परखम चौराहा निवासी वरिष्ठ समाजसेवी ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे, जिन्हें क्षेत्र में स्नेहपूर्वक ‘राजा बौहरे’ के नाम से जाना जाता था, का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन की खबर मिलते ही परखम चौराहा और आसपास के क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। सरल स्वभाव, मिलनसार व्यक्तित्व और जरूरतमंदों की मदद के लिए सदैव तत्पर रहने वाले ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे के निधन को क्षेत्र के लोगों ने सामाजिक जीवन की एक महत्वपूर्ण क्षति बताया।
परिवारजनों के अनुसार ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे का जन्म वर्ष 1934 में हुआ था। उन्होंने अपने जीवन के 92 वर्षों में परिवार, समाज और अपने आसपास के लोगों के बीच एक अलग पहचान बनाई। उनके परिचितों और शुभचिंतकों के बीच उनकी पहचान ऐसे व्यक्ति के रूप में रही, जो किसी जरूरतमंद को अपने दरवाजे से निराश नहीं लौटाते थे। यही वजह रही कि समय के साथ क्षेत्र में उन्हें गरीब और जरूरतमंद लोगों का सहारा मानने वालों की संख्या बढ़ती गई।
बौहरे परिवार की पुरानी प्रतिष्ठा से जुड़े थे ठाकुर गुलाब सिंह
परिवारजनों ने बताया कि ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे प्रतिष्ठित बौहरे परिवार से संबंध रखते थे। यह परिवार अंग्रेजों के समय से ही क्षेत्र में अपनी सामाजिक और पारिवारिक प्रतिष्ठा के लिए जाना जाता रहा है। परिवार के लोगों के अनुसार उस दौर में पूरे मथुरा जिले में बौहरे परिवारों की संख्या बहुत सीमित थी और लगभग 100 परिवारों में उनका परिवार भी शामिल था।
इसी पारिवारिक पृष्ठभूमि के बीच पले-बढ़े ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे ने अपने व्यक्तित्व में परिवार की सामाजिक परंपराओं के साथ लोगों के प्रति सहयोग और अपनत्व की भावना को भी बनाए रखा। परिवार के लिए वे केवल एक सदस्य नहीं, बल्कि भावनात्मक रूप से बेहद प्रिय व्यक्ति थे। अपने भाई-बहनों के बीच उन्हें विशेष स्नेह प्राप्त था और इसी आत्मीयता के चलते परिवार के लोग उन्हें प्यार से ‘राजा’ कहकर पुकारते थे।
बताया गया कि वे पांच भाइयों और दो बहनों वाले परिवार के सबसे छोटे भाइयों में थे और सभी के बेहद लाडले थे। उम्र बढ़ने के साथ भी परिवार के बीच उनका यह अपनापन और आत्मीय रिश्ता कायम रहा।
गरीब और जरूरतमंद लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे
ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे के जीवन का एक महत्वपूर्ण पक्ष जरूरतमंद लोगों की सहायता से जुड़ा रहा। परिवार और परिचितों के अनुसार वे गरीबों और असहाय लोगों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते थे। किसी व्यक्ति को आर्थिक, सामाजिक या किसी अन्य प्रकार की परेशानी होती तो अपनी सामर्थ्य के अनुसार उसकी मदद करने का प्रयास करते थे।
इसी व्यवहार के कारण क्षेत्र के लोगों के बीच उनके प्रति सम्मान लगातार बढ़ता गया। कई लोग उन्हें गरीबों का मसीहा कहकर भी संबोधित करते थे। हालांकि वे स्वयं किसी उपाधि या प्रशंसा की अपेक्षा नहीं रखते थे। उनका मानना था कि यदि किसी व्यक्ति की परेशानी में उसके काम आया जा सके तो यही जीवन की सार्थकता है।
उनके करीबी लोगों का कहना है कि ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे का स्वभाव सहज था। वे लोगों से बिना किसी भेदभाव के मिलते थे और अपने संपर्क में आने वाले लोगों की समस्याओं को ध्यान से सुनते थे। यही सहजता उनके व्यक्तित्व को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाती थी।
14 वर्षों तक कोर्ट-कचहरी के कार्यों से जुड़े रहे
ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे पिछले करीब 14 वर्षों से कोर्ट-कचहरी से जुड़े कार्यों में भी सक्रिय रहे। इस दौरान उन्हें विभिन्न लोगों से मिलने और उनकी समस्याओं को करीब से समझने का अवसर मिला। कानूनी और न्यायिक प्रक्रियाओं से जुड़े कार्यों के दौरान भी उनका संपर्क समाज के अलग-अलग वर्गों के लोगों से रहा।
परिवारजनों के अनुसार कोर्ट-कचहरी से जुड़े रहने के दौरान भी उन्होंने जरूरतमंद लोगों की मदद करने की अपनी आदत को नहीं छोड़ा। जिन लोगों को प्रक्रियाओं की जानकारी नहीं होती थी, उन्हें अपनी समझ और अनुभव के अनुसार सहयोग देने का प्रयास करते थे।
लंबे जीवन अनुभव और लोगों से निरंतर संपर्क ने उनके व्यक्तित्व में व्यवहारिक समझ को मजबूत किया। यही कारण था कि उम्र के अंतिम पड़ाव तक लोग उनसे सलाह और सहयोग लेने के लिए उनके पास पहुंचते रहे।
सरल स्वभाव और नेक दिल इंसान के रूप में बनी पहचान
ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे की सबसे बड़ी पहचान उनका सरल और नेक दिल स्वभाव माना जाता है। क्षेत्र के लोगों के अनुसार वे दिखावे से दूर रहने वाले व्यक्ति थे। किसी की मदद करने के बाद उसका प्रचार करना उनके स्वभाव में नहीं था।
उनके परिचित बताते हैं कि वे सामाजिक रिश्तों को महत्व देते थे और पुराने संबंधों को लंबे समय तक निभाते रहे। उनके व्यवहार में अपनापन होने के कारण अलग-अलग आयु वर्ग के लोगों से उनके आत्मीय संबंध थे।
उनका जीवन इस बात का उदाहरण रहा कि सामाजिक सम्मान केवल धन-संपत्ति से नहीं, बल्कि व्यक्ति के व्यवहार और दूसरों के प्रति उसके दृष्टिकोण से भी अर्जित होता है। उन्होंने अपने पीछे केवल पारिवारिक संपत्ति नहीं, बल्कि लोगों के बीच बनी वह स्मृति छोड़ी है जिसे उनके चाहने वाले लंबे समय तक याद रखेंगे।
भरा-पूरा परिवार छोड़ गए पीछे
परिवारजनों के अनुसार ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके पास मकान, दुकान, खेत, वाहन, बैंक में जमा धनराशि और अन्य संपत्तियां थीं। परिवार के अनुसार ईश्वर की कृपा से उन्होंने जीवन में अपने परिवार के लिए पर्याप्त साधन जुटाए और अपने परिजनों को व्यवस्थित जीवन देने का प्रयास किया।
लेकिन उनके शुभचिंतकों के लिए उनके जीवन की सबसे बड़ी विरासत उनकी संपत्ति नहीं, बल्कि लोगों के साथ उनके संबंध और जरूरतमंदों की मदद करने की उनकी भावना रही। किसी भी व्यक्ति के जाने के बाद उसके पीछे छूटने वाली सबसे महत्वपूर्ण चीज उसकी सामाजिक स्मृति होती है और ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे के मामले में यह स्मृति उनके सरल स्वभाव और सहयोगी व्यक्तित्व से जुड़ी हुई है।
निधन की खबर से क्षेत्र में शोक
उनके निधन की सूचना मिलते ही परखम चौराहा और आसपास के क्षेत्र में शोक की भावना फैल गई। उनके परिचित, रिश्तेदार, सामाजिक लोगों और शुभचिंतकों ने शोक व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।
लोगों ने कहा कि ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे जैसे व्यक्ति का चले जाना केवल परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए भी बड़ी क्षति है, जिनके साथ उनका वर्षों से आत्मीय संबंध रहा। उनके दरवाजे से सहायता की उम्मीद लेकर पहुंचने वाले अनेक लोगों के लिए अब उनका न होना एक खालीपन पैदा करेगा।
92 वर्ष की लंबी आयु में उन्होंने जीवन के अनेक दौर देखे। समय बदला, समाज बदला और परिस्थितियां बदलीं, लेकिन लोगों के प्रति उनके सहयोग और अपनत्व की भावना उनके व्यक्तित्व का हिस्सा बनी रही।
परखम चौराहा स्थित निज निवास पर श्रद्धांजलि
परिवार की ओर से बताया गया है कि ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे को श्रद्धांजलि देने के लिए परखम चौराहा, फरह स्थित उनके निज निवास पर श्रद्धांजलि स्थल रहेगा। यहां उनके परिचित, रिश्तेदार, शुभचिंतक और क्षेत्र के लोग पहुंचकर उन्हें अंतिम श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे।
उनके निधन पर परिवार में गहरा शोक है। वहीं, क्षेत्र के लोगों के बीच भी उनके सरल, सहयोगी और मिलनसार व्यक्तित्व की चर्चाएं हैं। उनके जीवन से जुड़े लोग उनके साथ बिताए समय और उनके सहयोग को याद कर रहे हैं।
ठाकुर गुलाब सिंह बौहरे का जीवन अब स्मृतियों का हिस्सा बन गया है। उन्होंने अपने पीछे एक ऐसा परिवार छोड़ा है, जिसे उनकी कमी हमेशा महसूस होगी और ऐसे अनेक लोग भी छोड़े हैं, जो उनके व्यवहार, सहयोग और आत्मीयता को याद करेंगे।
ईश्वर दिवंगत आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिवार को इस अपार दुःख को सहन करने की शक्ति प्रदान करें।
ॐ शांति। ॐ शांति। ॐ शांति।
























