दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट
मथुरा। यौन उत्पीड़न मामले में अदालत से बरी होने के बाद पूर्व भारतीय कुश्ती महासंघ अध्यक्ष और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह सबसे पहले मथुरा के वृंदावन स्थित आध्यात्मिक गुरु सद्गुरु रितेश्वर महाराज के आश्रम पहुंचे। न्यायालय के निर्णय के बाद यह उनकी पहली सार्वजनिक धार्मिक यात्रा रही, जहां उन्होंने सद्गुरु का आशीर्वाद लिया और कुछ समय तक उनसे व्यक्तिगत चर्चा भी की। इस दौरान आश्रम परिसर में बड़ी संख्या में श्रद्धालु और समर्थक मौजूद रहे।
सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने अदालत के फैसले पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए इसे सत्य, धैर्य और न्याय की विजय बताया। उन्होंने कहा कि किसी भी व्यक्ति को कठिन परिस्थितियों में संयम बनाए रखना चाहिए, क्योंकि यदि वह सत्य के मार्ग पर चलता है तो अंततः न्याय अवश्य मिलता है। उन्होंने भारतीय न्यायपालिका पर विश्वास जताते हुए कहा कि देश की न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा मजबूत होना चाहिए।
सद्गुरु बोले- धैर्य रखने वालों के साथ न्याय अवश्य होता है
सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने कहा कि जीवन में कई बार ऐसे अवसर आते हैं, जब व्यक्ति को बिना किसी गलती के भी कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे समय में धैर्य और सत्य का साथ नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि न्यायपालिका ने अपने निर्णय के माध्यम से यह संदेश दिया है कि कानून के दायरे में हर व्यक्ति को निष्पक्ष सुनवाई का अधिकार प्राप्त है।
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि एक पिता के समान उन्हें आज विशेष संतोष और प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है। उनके अनुसार बृजभूषण शरण सिंह अब पूरी तरह सम्मानपूर्वक और बेदाग होकर समाज के बीच लौटे हैं। उन्होंने विश्वास जताया कि भविष्य में वे पहले से अधिक उत्साह और समर्पण के साथ राष्ट्र निर्माण तथा सनातन संस्कृति के संरक्षण से जुड़े कार्यों में अपनी भूमिका निभाएंगे।
बृजभूषण शरण सिंह ने फैसले का किया स्वागत
आश्रम परिसर में पत्रकारों से बातचीत करते हुए बृजभूषण शरण सिंह ने अदालत के फैसले का स्वागत किया और कहा कि उन्हें शुरू से ही न्यायपालिका पर पूरा भरोसा था। उन्होंने कहा कि उन्होंने पहले दिन से स्वयं को निर्दोष बताया था और अब अदालत के निर्णय ने उनके पक्ष को स्वीकार किया है।
उन्होंने कहा कि यदि उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों में एक भी आरोप सिद्ध हो जाता, तो वह स्वयं कठोर से कठोर दंड स्वीकार करने के लिए तैयार थे। उनका कहना था कि उन्होंने अपने सार्वजनिक जीवन में हमेशा इस बात को दोहराया कि सत्य अंततः सामने आएगा और अब न्यायालय के निर्णय ने उनकी इस बात को प्रमाणित कर दिया है।
पूरे प्रकरण को बताया सुनियोजित षड्यंत्र
बृजभूषण शरण सिंह ने पूरे घटनाक्रम को अपने विरुद्ध रचा गया एक बड़ा षड्यंत्र बताया। उन्होंने दावा किया कि इस पूरे आंदोलन के पीछे केवल देश के भीतर की राजनीतिक शक्तियां ही नहीं थीं, बल्कि विदेशों तक फैला एक नेटवर्क भी सक्रिय था। उन्होंने आरोप लगाया कि कनाडा और अमेरिका तक जुड़े कुछ तत्वों ने इस पूरे मामले को प्रभावित करने का प्रयास किया।
इसके साथ ही उन्होंने कुछ राजनीतिक दलों का नाम लेते हुए आरोप लगाया कि उनके खिलाफ माहौल बनाने में कई विपक्षी दलों ने भी भूमिका निभाई। हालांकि उन्होंने अपने इन आरोपों के समर्थन में कोई नया साक्ष्य सार्वजनिक रूप से प्रस्तुत नहीं किया।
राम मंदिर और राजनीति पर भी दिए जवाब
पत्रकारों ने जब उनसे अन्य राजनीतिक विषयों और राम मंदिर से जुड़े मुद्दों पर प्रतिक्रिया जाननी चाही तो बृजभूषण शरण सिंह ने सीधे राजनीतिक टिप्पणी करने के बजाय धार्मिक संदर्भ का सहारा लिया। उन्होंने गोस्वामी तुलसीदास की प्रसिद्ध चौपाई “होइहि वही जो राम रचि राखा” का उल्लेख करते हुए कहा कि मनुष्य केवल अपना कर्म कर सकता है, जबकि अंतिम निर्णय ईश्वर की इच्छा से ही होता है।
उन्होंने कहा कि जिस प्रकार आज उनका वृंदावन आना और मीडिया से संवाद करना भी ईश्वर की इच्छा का परिणाम है, उसी प्रकार भविष्य में भी वही होगा जो भगवान ने पहले से निर्धारित कर रखा है। उन्होंने कहा कि वह अपने जीवन में आस्था और विश्वास को सर्वोच्च स्थान देते हैं।
समर्थकों में दिखा उत्साह
न्यायालय के फैसले के बाद बृजभूषण शरण सिंह के समर्थकों में उत्साह का माहौल दिखाई दिया। आश्रम परिसर में मौजूद लोगों ने उनका स्वागत किया और सद्गुरु रितेश्वर महाराज का आशीर्वाद लेने के बाद उन्होंने समर्थकों का अभिवादन भी स्वीकार किया। कई समर्थकों ने इस फैसले को न्यायपालिका में अपने विश्वास की जीत बताया।
आश्रम में आध्यात्मिक वातावरण के बीच हुई इस मुलाकात को बृजभूषण शरण सिंह के सार्वजनिक जीवन की महत्वपूर्ण घटनाओं में देखा जा रहा है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में भी इस मुलाकात को लेकर विभिन्न तरह की चर्चाएं जारी हैं।
न्यायिक फैसले के बाद नई शुरुआत का संकेत
वृंदावन दौरे के दौरान दिए गए वक्तव्यों से यह संकेत भी मिला कि बृजभूषण शरण सिंह आने वाले समय में सामाजिक, धार्मिक और सार्वजनिक गतिविधियों में पहले की तरह सक्रिय भूमिका निभाने की तैयारी कर रहे हैं। सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने भी विश्वास जताया कि वे समाज और राष्ट्रहित के कार्यों में नई ऊर्जा के साथ योगदान देंगे।
फिलहाल अदालत के फैसले के बाद उनकी यह पहली सार्वजनिक उपस्थिति रही, जिसने राजनीतिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है। आने वाले दिनों में उनके अगले कदमों पर भी लोगों और राजनीतिक विश्लेषकों की नजर बनी रहेगी।













