हिंदी दिवस समारोह में विद्यार्थियों ने प्रस्तुत किए सांस्कृतिक कार्यक्रम, शिक्षकों का हुआ सम्मान
रिपोर्ट : इरफान अली लारी
सलेमपुर (देवरिया)। स्थानीय नगर में शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान रखने वाले जी.एम. एकेडमी के परिसर में हिंदी दिवस समारोह उत्साह, उमंग और सांस्कृतिक रंगों के बीच मनाया गया। हिंदी दिवस के अवसर पर विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने हिंदी भाषा के महत्व, उसकी उपयोगिता, संस्कृति से उसके संबंध और मातृभाषा के रूप में उसकी भूमिका को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। पूरे कार्यक्रम के दौरान विद्यालय परिसर हिंदी भाषा के सम्मान और गौरव के संदेश से सराबोर नजर आया।
कार्यक्रम का शुभारंभ विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने दीप प्रज्वलित कर किया। दीप प्रज्वलन के साथ ही समारोह का वातावरण सकारात्मक और उत्साहपूर्ण हो गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने स्वस्तिवाचन प्रस्तुत कर कार्यक्रम को मंगलमय शुरुआत प्रदान की। बच्चों की प्रस्तुति में अनुशासन, आत्मविश्वास और हिंदी के प्रति सम्मान की भावना स्पष्ट रूप से दिखाई दी।
स्वस्तिवाचन से शुरू हुआ समारोह, भजन पर मनमोहक नृत्य ने बांधा समां
हिंदी दिवस समारोह में विद्यार्थियों की विभिन्न सांस्कृतिक और रचनात्मक प्रस्तुतियों ने उपस्थित लोगों का ध्यान आकर्षित किया। शिवांग पांडेय सहित विद्यार्थियों ने स्वस्तिवाचन प्रस्तुत किया। इसके बाद जया शुक्ला ने सुंदर भजन पर मनोहारी नृत्य प्रस्तुत कर दर्शकों की खूब वाहवाही बटोरी। उनकी प्रस्तुति के दौरान विद्यालय परिसर तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा।
समारोह में विद्यार्थियों ने यह संदेश भी दिया कि हिंदी को केवल बातचीत या संवाद का माध्यम मानना उसके व्यापक स्वरूप को सीमित करना है। हिंदी भारतीय समाज की संस्कृति, परंपरा, संस्कार और भावनात्मक अभिव्यक्ति से गहराई से जुड़ी भाषा है। बच्चों ने अपने विचारों और प्रस्तुतियों के माध्यम से हिंदी के प्रति गौरव की भावना को सामने रखा।
नन्हे-मुन्नों ने बताया हिंदी का महत्व
हिंदी दिवस समारोह का सबसे आकर्षक पक्ष विद्यालय के नन्हे-मुन्ने विद्यार्थियों की सहभागिता रही। आदित्य यादव, शिवांगी यादव, महिमा, खुशी सिंह और प्रतिष्ठा द्विवेदी सहित अनेक विद्यार्थियों ने हिंदी भाषा के विकास और उसके महत्व पर अपने विचार व्यक्त किए।
बच्चों ने कहा कि हिंदी केवल शब्दों को एक-दूसरे तक पहुंचाने की भाषा नहीं है, बल्कि यह हमारी संस्कृति और जीवन मूल्यों की पहचान भी है। हिंदी के माध्यम से भावनाओं को सहजता से व्यक्त किया जा सकता है। विद्यार्थियों ने इस बात पर जोर दिया कि अपनी भाषा के प्रति सम्मान की भावना बचपन से ही विकसित होनी चाहिए।
बच्चों की प्रस्तुतियों से यह भी स्पष्ट हुआ कि हिंदी दिवस केवल एक दिन हिंदी को याद करने का अवसर नहीं है, बल्कि यह अपनी भाषा और सांस्कृतिक विरासत के प्रति जिम्मेदारी को समझने का अवसर है। विद्यार्थियों ने अपनी रचनात्मकता और आत्मविश्वास से समारोह को विशेष बना दिया।
हिंदी संस्कृति और संस्कारों की भाषा : ज्ञानेंद्र मिश्र
विद्यालय के हिंदी अध्यापक ज्ञानेंद्र मिश्र ने हिंदी को संस्कृति और संस्कारों की भाषा बताते हुए कहा कि हिंदी भारतीय परंपराओं और जीवन मूल्यों को एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचाने का सशक्त माध्यम है। उन्होंने विद्यार्थियों को हिंदी के साहित्यिक और सांस्कृतिक महत्व से परिचित कराते हुए अपनी भाषा के प्रति सम्मान बनाए रखने का संदेश दिया।
उन्होंने कहा कि भाषा केवल बोलने और लिखने का माध्यम नहीं होती, बल्कि उसके साथ समाज की स्मृतियां, परंपराएं और सांस्कृतिक अनुभव भी जुड़े होते हैं। इसलिए हिंदी को समझना अपनी सांस्कृतिक जड़ों को समझने के समान है।
दैनिक जीवन में हिंदी के प्रयोग पर दिया जोर
हिंदी अध्यापक धर्मेंद्र मिश्र ने हिंदी के सरल और सुबोध स्वरूप पर प्रकाश डालते हुए कहा कि हिंदी को जन-जन तक पहुंचाने के लिए इसके प्रयोग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भाषा तभी मजबूत होती है, जब उसका प्रयोग केवल विशेष अवसरों तक सीमित न रहकर सामान्य जीवन में भी निरंतर किया जाए।
उन्होंने विद्यार्थियों से आग्रह किया कि वे विद्यालय, घर और सामाजिक जीवन में हिंदी के सहज प्रयोग को बढ़ावा दें। हिंदी को लेकर आत्मविश्वास विकसित करना भी भाषा के विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
विद्यालय के अध्यापक एस.के. गुप्ता ने मातृभाषा के रूप में हिंदी की भूमिका पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि मातृभाषा व्यक्ति के विचारों और भावनाओं को सबसे सहज तरीके से अभिव्यक्त करने में मदद करती है। बच्चे अपनी मातृभाषा के माध्यम से आसपास के वातावरण, परिवार और समाज को अधिक आसानी से समझते हैं।
हिंदी के गौरवशाली इतिहास और वर्तमान उपयोगिता पर चर्चा
हिंदी दिवस समारोह में वक्ताओं ने हिंदी के गौरवशाली इतिहास, उसके सांस्कृतिक महत्व और बदलते समय में उसकी उपयोगिता पर भी चर्चा की। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में शिक्षा, तकनीक, संचार और डिजिटल माध्यमों में हिंदी का उपयोग लगातार बढ़ रहा है। ऐसे समय में विद्यार्थियों की जिम्मेदारी और भी महत्वपूर्ण हो जाती है कि वे हिंदी को आधुनिक संदर्भों से जोड़कर देखें।
कार्यक्रम में यह संदेश भी दिया गया कि किसी भी भाषा का सम्मान दूसरी भाषाओं के विरोध का आधार नहीं होना चाहिए। भारतीय भाषाओं के बीच संवाद और परस्पर सम्मान की भावना देश की भाषाई विविधता को और मजबूत करती है। हिंदी को आगे बढ़ाने का सबसे प्रभावी तरीका यही है कि इसे सरल, सहज और आधुनिक जीवन की जरूरतों के अनुरूप निरंतर प्रयोग में लाया जाए।
हिंदी अध्यापकों को अंगवस्त्रम् और पुष्पगुच्छ देकर किया सम्मानित
समारोह के अंत में विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने हिंदी अध्यापकों को अंगवस्त्रम् और पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया। सम्मान समारोह के दौरान शिक्षकों के प्रति विद्यार्थियों और विद्यालय परिवार की ओर से सम्मान की भावना दिखाई दी।
प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने कहा कि हिंदी हमारी पहचान और संस्कारों से जुड़ी भाषा है। इसके सम्मान और विकास के लिए केवल विद्यालय या शिक्षकों को ही नहीं, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति को अपनी भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों से अपनी मातृभाषा हिंदी के प्रति सदैव सम्मान बनाए रखने तथा अधिक से अधिक हिंदी का प्रयोग करने का आह्वान किया।
उन्होंने कहा कि मातृभाषा के सम्मान से ही समाज समृद्ध होगा। बच्चों को अपनी भाषा, संस्कृति और परंपराओं से जोड़ना शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि हिंदी के प्रति प्रेम और सम्मान को व्यवहार में उतारने की आवश्यकता है।
इस अवसर पर डी. मिश्रा, जी.के. मिश्र, प्रियंका, अनीता पांडेय, अंकिता मिश्रा, चंद्रप्रकाश और प्रीती सिंह सहित विद्यालय के हिंदी अध्यापक-अध्यापिकाओं को सम्मानित किया गया।
मेधा मिश्रा और संजना चौधरी ने किया प्रभावी संचालन
हिंदी दिवस समारोह का संचालन मेधा मिश्रा और संजना चौधरी ने संयुक्त रूप से किया। दोनों ने कार्यक्रम को प्रभावी ढंग से आगे बढ़ाते हुए विभिन्न प्रस्तुतियों और वक्ताओं को क्रमबद्ध तरीके से मंच प्रदान किया। उनके संचालन से समारोह व्यवस्थित और आकर्षक बना रहा।
कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ बड़ी संख्या में विद्यार्थियों की सहभागिता रही। बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में भाग लिया। शिक्षकों ने भी विद्यार्थियों का उत्साह बढ़ाते हुए उन्हें हिंदी भाषा के महत्व को समझने के लिए प्रेरित किया।
हिंदी दिवस बना ज्ञान, संस्कार और संस्कृति का संगम
जी.एम. एकेडमी में आयोजित हिंदी दिवस समारोह विद्यार्थियों के लिए केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं रहा, बल्कि यह ज्ञान, संस्कार और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का सुंदर संगम बन गया। पूरे कार्यक्रम के दौरान हिंदी भाषा के महत्व और उसके गौरव पर चर्चा होती रही।
प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने समारोह के समापन पर सभी शिक्षकों, विद्यार्थियों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने हिंदी भाषा की समृद्धि और विकास के लिए निरंतर प्रयास करने का संकल्प दिलाया।
समारोह में बच्चों की प्रतिभा और शिक्षकों के मार्गदर्शन का सुंदर समन्वय देखने को मिला। विद्यार्थियों ने अपनी प्रस्तुतियों से यह संदेश दिया कि हिंदी का सम्मान केवल मंचीय कार्यक्रमों तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि इसे अपने दैनिक व्यवहार और अभिव्यक्ति का हिस्सा बनाना चाहिए।
इस प्रकार जी.एम. एकेडमी का हिंदी दिवस समारोह उत्साहपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों में हिंदी के प्रति सम्मान, आत्मविश्वास और गौरव की भावना को मजबूत किया तथा यह संदेश दिया कि अपनी भाषा और संस्कृति से जुड़कर ही समाज अपनी जड़ों को मजबूत कर सकता है।

























