कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट
उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां धीरे-धीरे तेज होती दिखाई दे रही हैं. इसी क्रम में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता शिवपाल सिंह यादव ने भारतीय जनता पार्टी और उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर कई गंभीर सवाल उठाए हैं. शिवपाल यादव ने धार्मिक ध्रुवीकरण, मुसलमानों के साथ कथित भेदभाव, प्रदेश पर बढ़ते कर्ज, भ्रष्टाचार, सरकारी खर्च और सरकारी स्कूलों के विलय जैसे मुद्दों को लेकर सरकार को घेरा.
शिवपाल यादव का कहना है कि चुनाव नजदीक आते ही भारतीय जनता पार्टी हिंदू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में लाने की कोशिश करती है. उन्होंने कहा कि देश की आजादी की लड़ाई में समाज के हर वर्ग और सभी धर्मों के लोगों ने योगदान दिया था. ऐसे में किसी एक समुदाय को राजनीतिक रूप से निशाना बनाना देश और संविधान की मूल भावना के अनुरूप नहीं है.
सपा नेता ने यह भी कहा कि भारत का संविधान प्रत्येक नागरिक को समान अधिकार देता है और सरकार की जिम्मेदारी है कि वह बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के साथ न्याय करे. उनके बयान से स्पष्ट है कि समाजवादी पार्टी आने वाले विधानसभा चुनाव में सामाजिक सौहार्द, संविधान, आर्थिक नीतियों और शिक्षा के सवालों को प्रमुख चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी कर रही है.
हिंदू-मुस्लिम मुद्दे पर बीजेपी को शिवपाल यादव की चुनौती
शिवपाल सिंह यादव ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि चुनावी राजनीति के दौरान हिंदू-मुस्लिम मुद्दे को बार-बार उछालकर समाज में ध्रुवीकरण का माहौल बनाया जाता है. उन्होंने कहा कि सरकार को सभी नागरिकों के साथ समान व्यवहार करना चाहिए और किसी समुदाय के भीतर भय या असुरक्षा की भावना पैदा नहीं होनी चाहिए.
शिवपाल यादव ने आजादी की लड़ाई का उल्लेख करते हुए कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में हिंदू, मुसलमान, सिख, ईसाई और अन्य समुदायों के लोगों ने मिलकर संघर्ष किया. उनके मुताबिक देश की आजादी किसी एक वर्ग के प्रयास का परिणाम नहीं थी, बल्कि करोड़ों भारतीयों के सामूहिक संघर्ष से हासिल हुई.
उन्होंने सवाल उठाया कि जब देश के सभी वर्गों ने स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान दिया तो आजादी के बाद किसी समुदाय को अलग नजर से देखने की राजनीति क्यों होनी चाहिए. उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि बाबा साहब डॉ. भीमराव आंबेडकर और संविधान निर्माताओं ने प्रत्येक नागरिक को अधिकार और सम्मान देने की व्यवस्था की.
‘किसी वर्ग का मनोबल नहीं टूटने देना चाहिए’
शिवपाल यादव ने अपने बयान में लोगों से भी अपील की कि किसी भी परिस्थिति में किसी समुदाय का मनोबल नहीं टूटना चाहिए. उन्होंने आरोप लगाया कि मौजूदा सरकार की नीतियों और राजनीतिक बयानों से एक वर्ग के भीतर असुरक्षा और निराशा पैदा करने का प्रयास किया जा रहा है.
उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में अंतिम निर्णय जनता का होता है. यदि जनता को लगता है कि सरकार किसी वर्ग के साथ अन्याय कर रही है तो चुनाव के माध्यम से सरकार बदलने का अधिकार जनता के पास है.
शिवपाल यादव ने इसी संदर्भ में कहा कि चुनावी वर्ष में जनता को हर मुद्दे पर विचार करना चाहिए और सरकार के कामकाज का मूल्यांकन करना चाहिए. उनके बयान को 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले समाजवादी पार्टी की राजनीतिक रणनीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
मस्जिद के मुद्दे पर संविधान और कानून की बात
मस्जिद से जुड़े सवाल पर शिवपाल यादव ने कहा कि यदि उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो किसी भी मामले में निर्णय संविधान और कानून के दायरे में लिया जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार बनने के बाद कानून सम्मत प्रक्रिया के आधार पर ही कार्रवाई होगी.
सपा नेता ने कहा कि यदि किसी व्यक्ति या समुदाय के साथ अन्याय हुआ है तो उसकी शिकायत और समस्या को कानून के अनुसार देखा जाना चाहिए. उन्होंने पीड़ित लोगों की हर संभव मदद करने की बात भी कही.
सहारनपुर में मस्जिद गिराए जाने की घटना के संदर्भ में पूछे गए सवाल पर भी शिवपाल यादव ने कानून के अनुसार कार्रवाई की बात दोहराई. उन्होंने संकेत दिया कि समाजवादी पार्टी सत्ता में आने पर धार्मिक स्थलों से जुड़े विवादों को राजनीतिक लाभ के बजाय संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से देखने का प्रयास करेगी.
मंदिर-मस्जिद की राजनीति पर भी निशाना
शिवपाल यादव ने कहा कि चुनाव के समय मंदिर और मस्जिद जैसे धार्मिक मुद्दे अचानक राजनीतिक बहस में प्रमुख हो जाते हैं. उन्होंने बीजेपी पर आरोप लगाया कि इन मुद्दों के माध्यम से मतदाताओं का ध्यान वास्तविक समस्याओं से हटाने की कोशिश की जाती है.
उनका कहना है कि जनता के सामने बेरोजगारी, महंगाई, शिक्षा, स्वास्थ्य, किसानों की स्थिति, सरकारी कर्ज और विकास जैसे मुद्दे भी उतने ही महत्वपूर्ण हैं. ऐसे में चुनावी राजनीति केवल धार्मिक मुद्दों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए.
शिवपाल यादव के बयान से संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी आगामी विधानसभा चुनाव में धार्मिक ध्रुवीकरण के मुकाबले सामाजिक और आर्थिक मुद्दों को आगे रखने की कोशिश करेगी.
ओम प्रकाश राजभर के बयान पर शिवपाल का तंज
शिवपाल यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार में मंत्री ओम प्रकाश राजभर के एक बयान पर भी प्रतिक्रिया दी. राजभर द्वारा विपक्ष की संभावित हार को लेकर दिए गए बयान पर शिवपाल ने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि उन्हें किसी अच्छे डॉक्टर की जरूरत है.
उन्होंने कहा कि यदि उन्हें अच्छा डॉक्टर नहीं मिल रहा है तो वह डॉक्टर की सलाह देने में मदद कर सकते हैं. शिवपाल की इस टिप्पणी को सत्तापक्ष पर उनके राजनीतिक कटाक्ष के रूप में देखा जा रहा है.
उत्तर प्रदेश की राजनीति में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच बयानबाजी लगातार तेज होती जा रही है. ऐसे में शिवपाल यादव का यह बयान भी चुनावी माहौल में राजनीतिक वार-पलटवार का हिस्सा माना जा रहा है.
यूपी के बढ़ते कर्ज पर सरकार से सवाल
शिवपाल यादव ने उत्तर प्रदेश सरकार की आर्थिक स्थिति और बढ़ते कर्ज को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार कर्ज ले रही है, जबकि दूसरी ओर जनता से विभिन्न माध्यमों से टैक्स भी वसूला जा रहा है.
सपा नेता ने कहा कि यदि सरकारी खर्च में फिजूलखर्ची पर नियंत्रण किया जाए और भ्रष्टाचार को रोका जाए तो सरकार को अत्यधिक कर्ज लेने की जरूरत कम हो सकती है.
उन्होंने सरकार की आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाते हुए कहा कि जनता यह जानना चाहती है कि प्रदेश पर बढ़ते कर्ज का इस्तेमाल किन योजनाओं और कार्यों में किया जा रहा है. उनके मुताबिक सरकार को खर्च और कर्ज के मामले में अधिक जवाबदेह और पारदर्शी होना चाहिए.
शिवपाल यादव ने दावा किया कि यदि समाजवादी पार्टी सत्ता में आती है तो फिजूलखर्ची और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की दिशा में काम किया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकारी संसाधनों का इस्तेमाल जनता के हित में होना चाहिए.
26 हजार सरकारी स्कूलों के विलय का मुद्दा
शिवपाल यादव ने उत्तर प्रदेश में सरकारी स्कूलों के विलय को लेकर भी सरकार पर हमला बोला. उन्होंने दावा किया कि प्रदेश में करीब 26 हजार सरकारी स्कूलों का विलय किया गया है.
उनका कहना है कि स्कूलों के विलय का सबसे अधिक असर गरीब, किसान और मजदूर परिवारों के बच्चों पर पड़ सकता है. ग्रामीण क्षेत्रों में सरकारी स्कूल बड़ी संख्या में ऐसे परिवारों के बच्चों की शिक्षा का आधार हैं, जिनके लिए निजी स्कूलों की फीस वहन करना आसान नहीं है.
शिवपाल यादव ने कहा कि यदि स्कूलों की संख्या कम होती है या बच्चों को अधिक दूरी तय करके विद्यालय जाना पड़ता है तो इसका सीधा असर उनकी शिक्षा पर पड़ सकता है. उन्होंने सरकार से शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण बच्चों की सुविधा को प्राथमिकता देने की मांग की.
सत्ता में आए तो स्कूलों में सुविधाएं बढ़ाने का दावा
शिवपाल यादव ने कहा कि यदि समाजवादी पार्टी की सरकार बनती है तो सरकारी स्कूलों को बेहतर ढंग से संचालित किया जाएगा. उन्होंने स्कूलों में मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता देने की बात कही.
उनके अनुसार विद्यालयों में पर्याप्त पानी, बिजली, पंखे और छात्र-छात्राओं के लिए अलग-अलग शौचालय जैसी सुविधाएं सुनिश्चित की जानी चाहिए. उनका कहना है कि गर्मी के मौसम में भी बच्चों को बेहतर वातावरण में पढ़ने का अवसर मिलना चाहिए.
उन्होंने यह भी कहा कि जब तक विद्यालयों में नियमित कक्षाएं संचालित होंगी, तब तक बिजली की व्यवस्था सुनिश्चित करने की दिशा में काम किया जाएगा. शिवपाल यादव के मुताबिक शिक्षा केवल स्कूल भवन उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है, बल्कि बच्चों के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक शैक्षणिक वातावरण भी जरूरी है.
शिक्षा और गरीब परिवारों का सवाल
सरकारी स्कूलों के विलय का मुद्दा उठाते हुए शिवपाल यादव ने इसे केवल शिक्षा विभाग का प्रशासनिक मामला नहीं बल्कि सामाजिक सरोकार से जुड़ा विषय बताया.
ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों के लिए नजदीकी सरकारी विद्यालय महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं. यदि विद्यालय दूर हो जाएं तो परिवहन, समय और सुरक्षा जैसी समस्याएं भी सामने आ सकती हैं. खासकर छात्राओं की शिक्षा पर इसका प्रभाव पड़ने की आशंका रहती है.
इसी वजह से शिवपाल यादव ने छात्र-छात्राओं के लिए अलग शौचालय और बिजली-पानी जैसी बुनियादी सुविधाओं को शिक्षा व्यवस्था का अनिवार्य हिस्सा बताया.
2027 से पहले तीन बड़े मुद्दों पर सपा का फोकस
शिवपाल यादव के ताजा बयान में तीन प्रमुख मुद्दे साफ तौर पर उभरकर सामने आए हैं. पहला मुद्दा धार्मिक ध्रुवीकरण का है. समाजवादी पार्टी बीजेपी पर आरोप लगा रही है कि चुनावी समय में हिंदू-मुस्लिम और मंदिर-मस्जिद जैसे मुद्दों के जरिए राजनीतिक ध्रुवीकरण किया जाता है.
दूसरा मुद्दा उत्तर प्रदेश की आर्थिक स्थिति और बढ़ता सरकारी कर्ज है. सपा नेता ने सरकार से खर्च, भ्रष्टाचार और कर्ज के इस्तेमाल को लेकर जवाब मांगा है.
तीसरा और महत्वपूर्ण मुद्दा सरकारी शिक्षा व्यवस्था का है. करीब 26 हजार स्कूलों के विलय का दावा करते हुए शिवपाल यादव ने इसे गरीब और ग्रामीण परिवारों के बच्चों की शिक्षा से जोड़ दिया है.
इन तीनों मुद्दों को मिलाकर देखें तो समाजवादी पार्टी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले अपनी राजनीतिक बहस को धार्मिक मुद्दों के साथ-साथ शिक्षा, आर्थिक स्थिति और सामाजिक न्याय के सवालों पर केंद्रित करने की कोशिश करती नजर आ रही है.
जनता के फैसले पर टिकी निगाहें
उत्तर प्रदेश में अगला विधानसभा चुनाव अभी दूर है, लेकिन राजनीतिक दलों की तैयारियां तेज होने लगी हैं. बीजेपी जहां अपनी सरकार के कामकाज और विकास योजनाओं को लेकर जनता के बीच जाने की तैयारी करेगी, वहीं विपक्षी दल सरकार की नीतियों और कथित कमियों को चुनावी मुद्दा बनाने की कोशिश करेंगे.
शिवपाल यादव का बयान इसी व्यापक राजनीतिक संघर्ष का हिस्सा है. उन्होंने धार्मिक ध्रुवीकरण से लेकर सरकारी कर्ज और स्कूलों के विलय तक कई मुद्दों को एक साथ उठाया है.
हालांकि इन आरोपों और दावों पर सरकार तथा बीजेपी का पक्ष अलग हो सकता है. चुनावी राजनीति में आरोप-प्रत्यारोप के बीच अंतिम फैसला जनता के हाथ में ही रहेगा. 2027 के विधानसभा चुनाव में मतदाता किस मुद्दे को सबसे अधिक महत्व देते हैं, यह आने वाले समय में स्पष्ट होगा.
फिलहाल शिवपाल सिंह यादव के बयान से इतना जरूर संकेत मिलता है कि समाजवादी पार्टी आने वाले चुनाव में संविधान, सामाजिक सौहार्द, शिक्षा, सरकारी खर्च, भ्रष्टाचार और कर्ज जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाने की तैयारी कर रही है.

























