अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद : चंपत राय का इस्तीफा, SIT रिपोर्ट और करोड़ों के गबन की पूरी इनसाइड स्टोरी
अयोध्या राम मंदिर चंदा विवाद अब एक बेहद संवेदनशील मोड़ पर पहुंच गया है, जिसके चलते ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का इस्तीफा सामने आया है। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद मंदिर के चढ़ावे और दानपात्रों से करोड़ों रुपये की चोरी के मामले में आठ मुख्य सेवादारों और कर्मचारियों पर एफआईआर (FIR) दर्ज कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। इस बड़े वित्तीय गबन और चंपत राय का इस्तीफा होने के बाद देश भर के राम भक्तों में भारी आक्रोश है, वहीं उत्तर प्रदेश से लेकर दिल्ली तक की सियासत में तीखे आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है।
अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट
अयोध्या, भारत: देश के सबसे चर्चित और आस्था के केंद्र श्रीराम जन्मभूमि मंदिर से इस वक्त की सबसे बड़ी प्रशासनिक और राजनीतिक खबर सामने आ रही है। राम मंदिर में श्रद्धालुओं द्वारा चढ़ाए गए दान और चढ़ावे में कथित हेराफेरी, चोरी और करोड़ों रुपये के गबन के गंभीर आरोपों के बीच, श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है।
लंबे समय से राम मंदिर आंदोलन का चेहरा रहे और ट्रस्ट के रोजमर्रा के कामकाज को संभालने वाले चंपत राय के साथ-साथ एक अन्य न्यासी अनिल मिश्रा का भी त्यागपत्र ट्रस्ट को प्राप्त हो चुका है। इस घटनाक्रम ने न केवल उत्तर प्रदेश की सियासत में उबाल ला दिया है, बल्कि देश भर के करोड़ों राम भक्तों को भी झकझोर कर रख दिया है।
आइए इस पूरे मामले को सिलसिलेवार तरीके से समझते हैं कि कैसे आस्था के केंद्र में सेंधमारी हुई, SIT की जांच में क्या खुलासे हुए और इस पर देश की सियासत किस तरह गरमा गई है।
इस्तीफे को लेकर सस्पेंस और ट्रस्ट की आधिकारिक पुष्टि
चंपत राय के इस्तीफे की अटकलें शुक्रवार से ही मुख्यधारा के मीडिया और सोशल मीडिया पर तैर रही थीं। हालांकि, शनिवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट द्वारा जारी एक आधिकारिक पत्र ने इन अटकलों पर विराम लगा दिया। Trust की ओर से जारी आधिकारिक वक्तव्य में कहा गया:
“श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र (न्यास) के महामंत्री श्री चंपतराय जी और न्यासी अनिल मिश्रा जी से त्यागपत्र प्राप्त हुआ है। न्यास अपनी आगामी बैठक में इस पर विचार करेगा।”
ट्रस्ट के भीतर विरोधाभास
दिलचस्प बात यह है कि इस इस्तीफे को लेकर ट्रस्ट के भीतर ही मतभेद और संशय की स्थिति देखी गई।
-
गोविंद देव गिरि (कोषाध्यक्ष): ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष स्वामी गोविंद देव गिरि ने इस विज्ञप्ति की आधिकारिक पुष्टि की और कहा कि दोनों पदाधिकारियों ने अपने पद छोड़ दिए हैं।
-
महंत दिनेंद्र दास (ट्रस्ट सदस्य): दूसरी तरफ, ट्रस्ट के एक अन्य महत्वपूर्ण सदस्य महंत दिनेंद्र दास ने समाचार एजेंसी पीटीआई से बात करते हुए इस खबर का खंडन किया था। उन्होंने कहा था, “ट्रस्ट से किसी ने इस्तीफा नहीं दिया है। हम हर तीन महीने में बैठक कर वित्तीय मामलों की समीक्षा करते हैं। इस्तीफे की खबरें पूरी तरह भ्रामक हैं।”
हालांकि, चंपत राय के करीबी सूत्रों का अब भी यही कहना है कि वे इस इस्तीफे को पूरी तरह सही या अंतिम नहीं मानते हैं। खुद चंपत राय ने इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक अपनी ओर से कोई आधिकारिक टिप्पणी या सार्वजनिक बयान जारी नहीं किया है।
SIT की शुरुआती रिपोर्ट और 8 लोगों पर FIR
चंपत राय का यह इस्तीफा ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) ने अपनी प्रारंभिक रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी। इस रिपोर्ट के आते ही प्रशासन तुरंत एक्शन मोड में आ गया और अयोध्या के कोतवाली थाने में आठ नामजद लोगों के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई।
यूपी के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने इस मामले पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा, “राम मंदिर के चढ़ावे में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। एफआईआर दर्ज हो चुकी है और कानून के मुताबिक बिल्कुल निष्पक्ष और सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
कैसे शुरू हुआ विवाद?
राम मंदिर के दानपात्रों से नकदी गायब होने का यह मामला पहली बार जून के पहले हफ्ते में सुर्खियों में आया था। 7 जून को समाजवादी पार्टी (सपा) के प्रमुख और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर एक पोस्ट के जरिए राम मंदिर के चढ़ावे से करोड़ों रुपये गायब होने का संगीन आरोप लगाया था।
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य सरकार ने तुरंत तीन सदस्यीय उच्च स्तरीय एसआईटी (SIT) का गठन किया था, जिसमें शामिल थे:
-
विजय विश्वास पंत (वरिष्ठ आईएएस अधिकारी)
-
किरण एस (वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी)
-
नील रतन (विशेष सचिव, वित्त विभाग)
कौन हैं वो 8 आरोपी? जिनके घरों से उगल रहा है कैश
SIT की जांच और पुलिस की कार्रवाई के बाद जिन आठ लोगों को इस महाघोटाले में नामजद और गिरफ्तार किया गया है, उनके पास मंदिर के भीतर बेहद संवेदनशील जिम्मेदारियां थीं। इनमें से कई लोगों ने चढ़ावे के पैसों से अयोध्या और उसके आसपास के इलाकों में करोड़ों की बेनामी संपत्तियां खड़ी कर ली हैं।
| आरोपी का नाम | मंदिर में जिम्मेदारी | SIT जांच के मुख्य आरोप और बरामदगी |
| 1. রামাশঙ্কর যাদব (টিঙ্কু यादव) | दानपात्रों की निगरानी और उन्हें सुरक्षित बेसमेंट तक पहुंचाना। | चंपत राय का पूर्व ड्राइवर। दानपात्रों से करोड़ों रुपये गायब करने और अयोध्या के आसपास जमीनें खरीदने का आरोप। |
| 2. लवकुश मिश्रा | मुख्य काउंटिंग रूम में चढ़ावे और नकदी की गिनती करना। | चढ़ावे की चोरी से करोड़ों की अवैध संपत्ति बनाई। घर पर छापे के दौरान 12 लाख रुपये नकद बरामद। |
| 3. अनुकल्प मिश्रा | काउंटिंग रूम में तैनात स्टाफ, नकदी की गिनती। | नोटों की गड्डियां चुराकर काउंटिंग रूम के बाथरूम में छिपाने का अनोखा तरीका अपनाया। लाखों की संपत्ति अर्जित की। |
| 4. सुभाष चंद्र श्रीवास्तव | कैश काउंटिंग स्टाफ के मुख्य प्रभारी (इंचार्ज)। | अपनी निगरानी में बड़े पैमाने पर लापरवाही बरतने और चोरी की गतिविधियों में संलिप्त रहने का आरोप। |
| 5. करुणेश पांडे | दान राशि को सुरक्षित तरीके से काउंटिंग रूम तक लाना और गिनना। | चढ़ावे की रकम में से मोटी कटिंग कर अयोध्या के प्राइम लोकेशनों पर अचल संपत्तियां खरीदीं। |
| 6. मनीष यादव | दानपात्रों से निकलने वाली नकदी की गिनती का काम। | बड़े पैमाने पर नकदी की हेराफेरी की। पुलिस ने इसके घर से 36 लाख रुपये नकद बरामद किए हैं। |
| 7. अविनाश शुक्ला | दान राशि का परिवहन और काउंटिंग रूम में गिनती। | श्रद्धालुओं की आस्था के पैसों की चोरी कर अपने और परिजनों के नाम पर बेनामी संपत्तियां बनाईं। |
| 8. रमाशंकर मिश्रा | दानपात्रों को तय स्थान से काउंटिंग रूम तक पहुंचाना और सुरक्षा। | अन्य सह-अभियुक्तों के साथ मिलकर योजनाबद्ध तरीके से चढ़ावे की रकम का गबन किया। |
चंपत राय: प्रोफेसर से राम मंदिर के ‘प्रधान प्रबंधक’ तक का सफर
इस पूरे विवाद के केंद्र में आए चंपत राय का इतिहास राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) और विश्व हिंदू परिषद (VHP) के साथ दशकों पुराना है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के रहने वाले चंपत राय के पिता शुरू से ही संघ के अनन्य भक्त थे। पिता की उंगली थामकर ही चंपत राय ने बचपन में संघ की शाखाओं में जाना शुरू किया था।
-
अध्यापन से पूर्णकालिक प्रचारक: चंपत राय बिजनौर के प्रसिद्ध आरएसएम (RSM) डिग्री कॉलेज में केमिस्ट्री (रसायन शास्त्र) के प्रोफेसर थे। लेकिन 1980 के दशक में जब राम मंदिर आंदोलन की सुगबुगाहट तेज हुई, तो उन्होंने अपनी प्रोफेसर की नौकरी छोड़ दी और संघ के पूर्णकालिक प्रचारक बन गए।
-
संगठन में विस्तार: विश्व हिंदू परिषद के वरिष्ठ नेता शरद शर्मा के अनुसार, “प्रचारक बनने के बाद चंपत राय जी ने आगरा, देहरादून, हरिद्वार समेत कई क्षेत्रों में संगठन को मजबूत किया। बाद में उन्हें वीएचपी में भेजा गया, जहां वे सह-क्षेत्रीय संगठन मंत्री बने और सीधे राम जन्मभूमि आंदोलन के रणनीतिकारों में शामिल हो गए।”
-
ट्रस्ट में केंद्रीय भूमिका: फरवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट के ऐतिहासिक फैसले के बाद जब केंद्र सरकार ने ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट’ का गठन किया, तो चंपत राय को इसका महासचिव बनाया गया। मंदिर निर्माण, डिजाइनिंग, धन संग्रह, विभिन्न सरकारी एजेंसियों से तालमेल और मीडिया से संवाद करने का पूरा जिम्मा उन्हीं के कंधों पर था। वे ट्रस्ट का सबसे बड़ा प्रशासनिक चेहरा थे।
राजनीतिक घमासान: विपक्ष के तीखे सवाल
इतने बड़े स्तर पर आस्था के धन के गबन और चंपत राय के इस्तीफे ने विपक्षी दलों को सरकार और संघ पर हमला करने का एक बड़ा मौका दे दिया है। अयोध्या से लेकर दिल्ली तक इस मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
समाजवादी पार्टी (सपा) की मांग
अयोध्या (फैजाबाद) संसदीय क्षेत्र से नवनिर्वाचित सपा सांसद अवधेश प्रसाद ने इस मामले पर कड़ा ऐतराज जताते हुए कहा कि उनकी पार्टी इस महाघोटाले को लेकर चुप नहीं बैठेगी। अवधेश प्रसाद ने कहा:
“हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव जी ने इस पूरे मामले की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। सुप्रीम कोर्ट को खुद इस गंभीर आर्थिक और धार्मिक घोटाले का संज्ञान लेना चाहिए और शीर्ष अदालत की निगरानी में एक विशेष जांच समिति बननी चाहिए।”
कांग्रेस का पीएमओ और आरएसएस पर सीधा हमला
कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा ने इस मुद्दे पर सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) को घेरा है। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कहा:
“यह पूरा प्रोजेक्ट आरएसएस और सीधे पीएमओ की देखरेख में शुरू हुआ था। प्रधानमंत्री के पूर्व प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा को इसका सदस्य बनाया गया और चंपत राय को प्रमुख। अब यह साफ हो गया है कि यह बड़ी लूट मंदिर के भीतर से ही चल रही थी। महिपाल सिंह नामक व्यक्ति ने सबसे पहले चंपत राय को इस चोरी से अवगत कराया था, लेकिन कार्रवाई करने के बजाय महिपाल सिंह को ही नौकरी से निकाल दिया गया। यह पैसों का नेटवर्क बहुत गहरा है।”
वहीं कांग्रेस के वरिष्ठ नेता राजीव शुक्ला ने इस्तीफे को नाकाफी बताते हुए कहा कि केवल चंपत राय का इस्तीफा लेकर इतने बड़े घोटाले पर पर्दा नहीं डाला जा सकता। शुक्ला ने कहा, “अगर हजारों करोड़ रुपये की आस्था के साथ विश्वासघात हुआ है, तो इसकी तह तक जाना जरूरी है। चंपत राय वहां के मुख्य प्रशासक थे, वे निश्चित रूप से जिम्मेदार हैं, लेकिन इतनी बड़ी रकम कोई अकेला व्यक्ति हजम नहीं कर सकता। इसमें शामिल हर सफेदपोश का चेहरा सामने आना चाहिए।”
अयोध्या राम मंदिर में हुआ यह कथित चंदा घोटाला सिर्फ एक वित्तीय अनियमितता नहीं है, बल्कि यह देश-विदेश के उन करोड़ों सनातनियों की आस्था पर चोट है जिन्होंने अपनी मेहनत की कमाई का अंश रामलला के चरणों में समर्पित किया था। हालांकि SIT की शुरुआती कार्रवाई में आठ लोग दबोचे जा चुके हैं और महासचिव चंपत राय का इस्तीफा हो चुका है, लेकिन राम भक्तों के मन में उठे सवालों के जवाब मिलना अभी बाकी है। देखना होगा कि योगी सरकार और कानून की कड़ियां इस घोटाले के मुख्य सूत्रधारों तक कब और कैसे पहुंचती हैं।








