साहित्य सरोवर मंच का स्थापना दिवस बना साहित्य, कविता और कला का जीवंत उत्सव

मुंबई में साहित्य सरोवर मंच के स्थापना दिवस समारोह में साहित्यकारों और कवियों का सम्मान

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मुंबई से शामी एम. इरफ़ान की रिपोर्ट

मुंबई। साहित्य, कविता, कला और सांस्कृतिक अनूठे के विविध रंगों से साजी एक ऐतिहासिक वैज्ञानिक साहित्य में साहित्य सागर मंच का स्थापना दिवस उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया। सुप्रसिद्ध बौद्ध मठ देवमणि पेंडेस की ओर से आयोजित इस समारोह में देश के विभिन्न देशों के विद्वानों, काव्यकार, कवि, कला और साहित्यप्रेमियों ने इस समारोह में व्यापक वैज्ञानिक आयाम प्रस्तुत किए समारोहों में रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से साहित्य के प्रति अपनी अभिव्यक्ति के साथ-साथ सामाजिक सिद्धांतों, मानवीय संवेदनाओं और सांस्कृतिक सिद्धांतों को भी स्वर दिया।

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि नवीन सी. चौधरी रहे। डॉ. के रूप में विशिष्ट वयोवृद्ध लाभ ममता शशि झा, के. जी. डॉयचे ‘खुशदिल’, मंजरीश्री, हरिप्रकाश गुप्ता ‘सरल’ और संतोष झा , जो मैथिली फिल्म लेखक, निर्माता और निर्देशक के रूप में अपनी पहचान रखते हैं, जिनमें कई वैज्ञानिक और सांस्कृतिक व्यक्तित्व शामिल हैं। समारोह में साहित्य एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान वाले रचनाकारों एवं साहित्य जगत की संस्था की ओर से भी सम्मान किया गया।

स्थापना दिवस पर साहित्य एवं संस्कृति का संगम

केवल एक संस्था के स्थापना दिवस का आयोजन नहीं हो रहा है, बल्कि यह शास्त्रीय अभिव्यक्ति और सांस्कृतिक संवाद का ऐसा अवसर बना है, जिसमें रचनाकारों ने अपनी रचनात्मक ऊर्जा के साथ प्रशंसा की है। समारोह के दौरान मंच पर कविता, संवेदना, विचार, हास्य और सामाजिक व्यक्तिगत के कई स्वर दिए गए हैं।

शास्त्रीय शास्त्रीय भूमिका केवल कवि सम्मेलनों या शास्त्रीय आयोजनों तक सीमित नहीं है। वे रचनाकारों को संवाद का मंच उपलब्ध कराने के साथ समाज और संस्कृति के बीच जीवंत संबंध बनाने का कार्य भी करते हैं। साहित्य सागर मंच का यह स्थापना दिवस इसी दृष्टि से उल्लेखनीय है। विभिन्न पुस्तकालयों से आए रचनाकारों ने अपनी रचनाओं के माध्यम से यह भावना व्यक्त की है कि साहित्य आज भी सामाजिक संवेदनाओं को अभिव्यक्त करने का प्रभावशाली माध्यम है।

40 से अधिक किसानों ने बांधा वैज्ञानिक समां

समारोह का प्रमुख आकर्षण काव्य-पाठ रहा। 40 से अधिक काव्य-काव्यत्रियों ने अपने मित्रों के माध्यम से प्रेम, संवेदना, सामाजिक मुद्दे, हास्य-व्यंग्य और जीवन के विशिष्ट को अभिव्यक्त किया। किसी भी रचना में डूबे हुए भाई-बहनों पर नजर। हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियों ने वातावरण और आनंदपूर्णता को प्रभावित किया, जबकि हास्य-व्यंग्य की प्रस्तुतियों ने वातावरण और आनंदपूर्णता को प्रभावित किया।

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काव्य-पाठ के दौरान वैज्ञानिक एकाग्रता और आत्मीयता का माहौल बना रहता है। अल्पावधि में सुपरमार्केट ने तालियों से बर्तनों का उत्साहवर्धन किया। कॉमिक के दौरान ठहाकों से पर्यावरण जीवंत हो उठाओ। इस तरह समारोह में साहित्य की शोभा और मनोरंजन की सहजता का सुंदर संतुलन देखने को मिला।

शिक्षक दिवस को समर्पित डेडलिफ्ट मन

स्थापना दिवस समारोह का एक महत्वपूर्ण पक्ष यह भी है कि समारोह शिक्षक दिवस के सन्दर्भ में आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर संस्थान ने गुरु-शिष्य परंपरा, शिक्षक के महत्व और समाज निर्माण में संप्रदाय की भूमिका को दर्शाया।

शिक्षक केवल पाठ्यक्रम का ज्ञान देने वाला व्यक्ति नहीं, बल्कि शिक्षकों के व्यक्तित्व और दृष्टिकोण को आकार देने वाली महत्वपूर्ण सामाजिक शक्ति भी है। समारोह में प्रस्तुतिकरण में इसी व्यापक भूमिका को दर्शाया गया। गुरु के प्रति सम्मान, शिक्षा के संस्कार और शिक्षक के योगदान को मठ ने नष्ट कर दिया।

मदरसे में शिक्षक की प्रति कृतज्ञता के साथ उस परंपरा की स्मृति भी दिखाई देती है, जिसमें गुरु को ज्ञान और संस्कार का मार्गदर्शक माना जाता है। साहित्य के माध्यम से शिक्षक दिवस पर आयोजित समारोह में एक अतिरिक्त सांस्कृतिक अर्थ प्रस्तुत किया गया।

रचनाकारों की विविध प्रस्तुतियों ने मन जीत लिया

काव्य-पाठ में गुलशन मदान, पारमिता षडंगी, किरण निर्मल कुमार, नीयन पायनियर ‘क्रांति’, कमर हाजीपुरी, अनामिका शर्मा, ओम प्रकाश तिवारी, लक्ष्मी पाहुजा, कुसुम तिवारी, रासबिहारी पांडे, नूतन राय, प्रेरणा झा, अहिल्या शर्मा, जयमाला राय, राम सिंह, वर्षा गर्ग, अनुपम वर्मा और रेनू शर्मा सहित कई रचनाकारों ने अपनी प्रस्तुति दी।

इन रचनाकारों की सामान्य कृतियों में साहित्य की विविध विधाएँ और संवेदनात्मक अध्ययन की झलक दिखाई देती है। प्रेम और रिश्ते की भावना से लेकर सामाजिक आदर्श तक, जीवन की सहजता के अंशों से लेकर हास्य-व्यंग्य तक, काव्य-पाठ ने उत्सव को बहुरंगी बना दिया।

साहित्य की सुंदरता यही है कि एक ही मंच पर अलग-अलग अंश, काव्य और संवेदनाओं के रचनाकार-अपनी भाषा में जीवन को देखने का नजरिया पेश करते हैं। साहित्य सागर मंच का यह आयोजन समान विविधता का परिचय दे रहा है।

सम्मान ने शोरूम का महत्व

कार्यक्रम में साहित्य एवं कला के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले साहित्य एवं रचनाकारों की संस्था की ओर से सम्मानित किया गया। सम्मान समारोह में उपस्थित रचनाकारों की प्रति कृतिज्ञता और शास्त्रज्ञ योगदान की अभिव्यक्ति को सार्वजनिक रूप से दिया गया।

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वैज्ञानिक सम्मान किसी भी रचनाकार के लिए केवल पूर्णता या स्मृति-श्रृंग तक सीमित नहीं होता है। वह अपने संप्रदाय के प्रति समाज और वैज्ञानिक समुदाय की विचारधारा का प्रतीक भी बनता है। इस दृष्टि से मंच की ओर से साहित्य और कला से जुड़े लोग प्रतिष्ठित जन समारोह की महत्वपूर्ण प्रस्तुति में शामिल हो रहे हैं।

ऑपरेशन ने बांधे रखे गए वैज्ञानिक माहौल

कार्यक्रम का कुशल एवं प्रभावशाली संचालन मधुबाला शुक्ल ने किया। उन्होंने विभिन्न स्टेजों को सहजता और प्रवाह के साथ आगे बढ़ाया। वैज्ञानिक कार्यक्रम संचालन की भूमिका विशेष महत्वपूर्ण रचना है, क्योंकि मंच पर उपस्थित अनेक रचनाकारों और प्रस्तुतियों को एक सूत्र में पिरोने का दायित्व धारक के पास होता है। मधुबाला शुक्ल के संचालन में समारोह की गति और वैज्ञानिक वातावरण को बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

समारोह की सफलता में सामूहिक योगदान

समारोह को सफल बनाने में संरक्षक के. जी. द्विवेदी ‘खुशदिल’, संयोजिका मंजरी श्रीवास्तव, अध्यक्ष देवमणि पांडेय तथा साहित्य सरोवर मंच से जुड़े सदस्यों का महत्वपूर्ण योगदान रहा। किसी भी साहित्यिक आयोजन की सफलता उसके मंच पर दिखाई देने वाली प्रस्तुतियों के साथ-साथ पर्दे के पीछे सक्रिय उन लोगों की मेहनत से भी जुड़ी होती है, जो आयोजन की पूरी व्यवस्था को आकार देते हैं।

संस्थापिका अम्बिका झा ने समारोह में उपस्थित सभी अतिथियों, साहित्यकारों, कवियों, कलाकारों और साहित्यप्रेमियों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने साहित्य की इस निरंतर यात्रा को आगे भी अधिक समृद्ध और व्यापक बनाने का संकल्प व्यक्त किया।

साहित्य और सिनेमा की उपस्थिति

समारोह में साहित्य जगत के साथ कला और सिनेमा से जुड़े लोगों की उपस्थिति ने आयोजन के सांस्कृतिक स्वरूप को और व्यापक बनाया। फिल्म अभिनेत्री शाइस्ता खान, मैथिली फिल्म लेखक, निर्माता एवं निर्देशक संतोष झा सहित विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े व्यक्तित्व समारोह में मौजूद रहे।

इसके अलावा अमर त्रिपाठी, ओम प्रकाश तिवारी, कुसुम तिवारी, रासबिहारी पांडेय, नाजनीन, हेमंत शर्मा, जयमाला राय, श्याम किशोर झा, राम सिंह, कमर हाजीपुरी, वर्षा गर्ग, अनुज वर्मा, विशू, जवाहर लाल ‘निर्झर’, पारमिता षड़ंगी, रश्मि निर्मल, सोनू पाहुजा, अनामिका शर्मा, नीतू पांडेय ‘क्रांति’, नूतन राय तथा पत्रकार शामी एम. इरफ़ान सहित अनेक साहित्यप्रेमी, कलाकार और गणमान्यजन उपस्थित रहे।

साहित्य नई पीढ़ी को संस्कारों से जोड़ने का माध्यम

साहित्य सरोवर मंच का स्थापना दिवस इस बात का भी प्रमाण बना कि साहित्यिक गतिविधियां आज के समय में सामाजिक और सांस्कृतिक संवाद के लिए कितनी महत्वपूर्ण हैं। साहित्य समाज की संवेदनाओं को शब्द देता है, प्रश्नों को अभिव्यक्ति देता है और अनुभवों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाता है।

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विशेष रूप से शिक्षक दिवस के अवसर पर आयोजित काव्य-पाठ ने शिक्षा, संस्कार और मानवीय मूल्यों के बीच संबंध को रेखांकित किया। शिक्षक के प्रति सम्मान को कविता के माध्यम से व्यक्त करना इस बात का संकेत है कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक स्मृति और सांस्कृतिक चेतना का भी माध्यम है।

समारोह में प्रस्तुत रचनाओं ने यह संदेश दिया कि कविता मनुष्य के भीतर मौजूद संवेदना को जगाने का काम करती है। हास्य-व्यंग्य सामाजिक विसंगतियों पर दृष्टि डालता है, प्रेम मनुष्य को जोड़ता है और सामाजिक सरोकार साहित्य को अपने समय से संवाद करने की शक्ति प्रदान करते हैं।

साहित्यिक यात्रा को आगे बढ़ाने का संकल्प

साहित्य सरोवर मंच का स्थापना दिवस समारोह अपने पीछे अनेक साहित्यिक स्मृतियां छोड़ गया। मंच पर उपस्थित रचनाकारों की विविध प्रस्तुतियां, वरिष्ठ साहित्यकारों का मार्गदर्शन, साहित्य एवं कला से जुड़े व्यक्तित्वों की सहभागिता और शिक्षक दिवस के प्रति सम्मान की भावना ने आयोजन को विशिष्ट स्वरूप दिया।

यह आयोजन इस विश्वास को मजबूत करता है कि शास्त्रीय मंचों की सार्थकता तब भी बनी रहती है, जब वे रचनाकार अपनी प्रस्तुति का अवसर देने के साथ-साथ साहित्य और मंचों के बीच साहित्य की प्रति रुचि भी विकसित करते हैं। साहित्य सागर मंच ने अपने स्थापना दिवस के माध्यम से साहित्य प्रवचन की परंपरा को आगे बढ़ाने का संदेश दिया।

मुंबई की वैज्ञानिक-सांस्कृतिक भूमि पर इस समारोह में साहित्य, कविता और कला की प्रतिकृति का आयोजन किया गया। स्थापना दिवस के अवसर पर साझीवालों और साहित्यप्रेमियों ने मिलकर न केवल उपस्थिति दर्ज कराई, बल्कि यह भी कहा कि आंशिक समय में साहित्य की कमी बनी है।

समारोह का समापन इसी व्यापक भाव के साथ हुआ कि साहित्य की यात्रा किसी समारोह, संस्था या पीढ़ी तक सीमित नहीं है। यह निरंतर प्रवाह वाला ऐसा ‘साहित्य सरोवर’ है, जिसमें नई रचनाएँ, नई संवेदनाएँ और नए विचार समय-समय पर जुड़ते रहते हैं। साहित्य सागर मंच का स्थापना दिवस इसी सतत वैज्ञानिक यात्रा के विस्तार की ओर आगे बढ़ाने का सार्थक अवसर साबित हुआ।

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