कानपुर

311 दिन तक छिपा रहा पति की हत्या का राज, बगीचे में दफन मिला शव; पत्नी और भांजा गिरफ्तार

चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

कानपुर में पति की गुमशुदगी से जुड़े एक मामले ने करीब 10 महीने बाद ऐसा मोड़ लिया, जिसने पुलिस और स्थानीय लोगों को भी हैरान कर दिया। सचेंडी थाना क्षेत्र के लालपुर में एक व्यक्ति के लंबे समय से लापता होने के मामले की जांच के दौरान उसकी पत्नी और रिश्ते के भांजे पर हत्या की साजिश रचने का आरोप सामने आया है। पुलिस के मुताबिक, जांच में सामने आया कि महिला के अपने रिश्ते के भांजे अमित के साथ कथित प्रेम संबंध थे और इसी वजह से दोनों ने महिला के पति शिवबीर सिंह को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

पुलिस का दावा है कि वारदात के बाद शव को घर से जुड़े बगीचे में गड्ढा खोदकर दफना दिया गया था। आरोप है कि शव के ऊपर करीब 12 किलो नमक भी डाला गया, ताकि शव जल्दी गल जाए और हत्या का सुराग आसानी से सामने न आ सके। करीब 311 दिन तक परिवार के सामने शिवबीर के कहीं बाहर जाने की कहानी चलती रही, लेकिन आखिरकार पुलिस जांच में गुमशुदगी का यह मामला कथित हत्या में बदल गया।

पति की चाय में नशीला पदार्थ मिलाने का आरोप

पुलिस की प्रारंभिक जांच के अनुसार घटना 30 अक्टूबर 2024 यानी छोटी दिवाली के दिन की बताई जा रही है। आरोप है कि उस दिन लक्ष्मी ने अपने पति शिवबीर सिंह को चाय में नशीला पदार्थ मिलाकर पिला दिया। चाय पीने के बाद शिवबीर के बेहोश हो जाने का दावा किया गया है।

इसके बाद पुलिस के मुताबिक, लक्ष्मी ने अपने रिश्ते के भांजे अमित के साथ मिलकर शिवबीर पर लोहे की रॉड से कथित तौर पर हमला किया। सिर पर गंभीर चोट लगने से उसकी मौत हो गई। हालांकि, हत्या की पूरी परिस्थितियों और वारदात में इस्तेमाल कथित हथियार समेत अन्य साक्ष्यों की पुष्टि पुलिस जांच और आगे की कानूनी प्रक्रिया से होगी।

बगीचे में गड्ढा खोदकर शव दफनाने का दावा

शिवबीर की कथित हत्या के बाद आरोपी दोनों ने शव को ठिकाने लगाने के लिए घर के बगीचे का इस्तेमाल किया। पुलिस के अनुसार, बगीचे में गड्ढा खोदकर शव को उसमें दफन कर दिया गया।

जांच में यह भी आरोप सामने आया कि शव के ऊपर करीब 12 किलो नमक डाला गया था। पुलिस का मानना है कि ऐसा शव को जल्दी नष्ट करने और संभावित साक्ष्यों को छिपाने के उद्देश्य से किया गया होगा। हालांकि, इस संबंध में वैज्ञानिक जांच और फोरेंसिक रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी।

घटना के अगले दिन जब बच्चों ने अपने पिता के बारे में पूछा तो उन्हें कथित तौर पर बताया गया कि शिवबीर गुजरात चले गए हैं। पुलिस के अनुसार, यही कहानी परिवार के सामने लंबे समय तक चलती रही और लगभग 311 दिनों तक शिवबीर की वास्तविक स्थिति छिपी रही।

सास को बहू पर था शक, पुलिस कमिश्नर से की शिकायत

मामले में मृतक की मां सावित्री देवी की भूमिका भी महत्वपूर्ण बताई जा रही है। पुलिस के अनुसार, उन्हें पहले से ही अपनी बहू लक्ष्मी पर संदेह था। उन्होंने कथित तौर पर कई बार पुलिस को शिवबीर के लापता होने और परिस्थितियों को लेकर जानकारी दी।

परिजनों की ओर से लगातार सवाल उठाए जाने के बावजूद जब लंबे समय तक शिवबीर का पता नहीं चला तो सावित्री देवी ने कानपुर पुलिस कमिश्नर से मुलाकात की। इसके बाद पुलिस ने 19 अगस्त को शिवबीर सिंह की गुमशुदगी का मामला दर्ज कर जांच शुरू की।

यहीं से करीब एक साल पुराने रहस्य की परतें खुलनी शुरू हुईं।

मोबाइल कॉल रिकॉर्ड ने बढ़ाया पुलिस का शक

पुलिस ने जांच को आगे बढ़ाते हुए शिवबीर के परिवार और उसके संपर्कों से जुड़ी परिस्थितियों की पड़ताल शुरू की। इसी दौरान लक्ष्मी के मोबाइल फोन रिकॉर्ड की जांच की गई।

पुलिस के मुताबिक, कॉल डिटेल रिकॉर्ड में लक्ष्मी की अपने पति की तुलना में अमित से लगातार बातचीत सामने आई। इसके बाद पुलिस का शक अमित की ओर बढ़ा। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की।

जांच के दौरान लक्ष्मी को भी पूछताछ के लिए थाने बुलाया गया। पुलिस का दावा है कि दोनों से पूछताछ के दौरान कथित हत्या की कहानी सामने आई। पुलिस के अनुसार, पूछताछ में दोनों ने शिवबीर की हत्या करने की बात स्वीकार की।

हालांकि, किसी भी आरोपी की स्वीकारोक्ति को अदालत में अपराध सिद्ध होने का अंतिम आधार नहीं माना जाता। मामले में पुलिस को अन्य भौतिक, वैज्ञानिक और परिस्थितिजन्य साक्ष्य भी न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत करने होंगे।

पुलिस ने बगीचे में खुदाई कर बरामद किए अवशेष

पूछताछ के बाद पुलिस ने आरोपियों की कथित निशानदेही पर उस स्थान की पहचान की, जहां शिवबीर को दफन किए जाने का दावा किया गया था। इसके बाद घर के बगीचे में खुदाई कराई गई।

पुलिस के अनुसार, खुदाई के दौरान मानव शरीर की हड्डियां और कपड़े बरामद हुए। इन बरामद अवशेषों को जांच के लिए भेजा गया है। शव की पहचान और मौत के कारण की वैज्ञानिक पुष्टि के लिए फोरेंसिक जांच तथा आवश्यक चिकित्सकीय परीक्षण महत्वपूर्ण होंगे।

पुलिस अब इस बात की भी जांच कर रही है कि हत्या की कथित साजिश कब और कैसे तैयार की गई, वारदात में कौन-कौन शामिल था और शव को छिपाने में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं।

प्रेम संबंध से हत्या की साजिश तक पहुंचा मामला

पुलिस के अनुसार, शुरुआती जांच में लक्ष्मी और अमित के बीच कथित प्रेम संबंध की बात सामने आई है। पुलिस का आरोप है कि इसी संबंध के कारण दोनों ने शिवबीर को रास्ते से हटाने की योजना बनाई।

सचेंडी के लालपुर में अमित का लक्ष्मी के घर आना-जाना बताया गया है। इसी दौरान दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने की बात पुलिस जांच में सामने आई। पुलिस का दावा है कि बाद में यही संबंध कथित तौर पर शिवबीर की हत्या की साजिश का कारण बना।

मामले की जांच में अब यह पता लगाया जा रहा है कि दोनों आरोपियों के बीच घटना से पहले किस तरह की बातचीत हुई थी और हत्या की योजना कब बनाई गई। इसके लिए मोबाइल फोन, कॉल डिटेल, लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की भी जांच की जा सकती है।

311 दिन तक परिवार के सामने चलता रहा कथित झूठ

इस मामले का सबसे चौंकाने वाला पहलू यह है कि शिवबीर की कथित हत्या के बाद भी उसके परिवार को लंबे समय तक उसके जीवित होने का विश्वास दिलाया जाता रहा। पुलिस के अनुसार, बच्चों को बताया गया कि उनके पिता गुजरात चले गए हैं।

करीब 311 दिनों तक परिवार को यही जानकारी दी जाती रही। इस दौरान शिवबीर के वापस न लौटने पर सवाल उठना स्वाभाविक था। उसकी मां सावित्री देवी को भी परिस्थितियां संदिग्ध लगती रहीं। अंततः उनकी शिकायत और पुलिस कमिश्नर से मुलाकात के बाद मामला औपचारिक जांच तक पहुंचा।

एसीपी ने क्या कहा?

पनकी एसीपी शेखर कुमार के अनुसार, पुलिस जांच में लक्ष्मी के अपने रिश्ते के भांजे अमित के साथ कथित अवैध संबंध की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि इसी वजह से शिवबीर की हत्या की गई और उसके शव को घर के बगीचे में दफन कर दिया गया।

एसीपी के मुताबिक, पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है और मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।

पुलिस जांच के बाद अब अदालत में तय होगा सच

कानपुर का यह मामला कई गंभीर सवाल खड़े करता है। एक व्यक्ति का लंबे समय तक लापता रहना, परिवार को उसके बाहर चले जाने की जानकारी देना, मोबाइल कॉल रिकॉर्ड से संदिग्ध संपर्कों का सामने आना और फिर घर के बगीचे से मानव अवशेष बरामद होने का दावा—इन सभी कड़ियों को पुलिस अब एक साथ जोड़कर देख रही है।

फिलहाल पुलिस ने लक्ष्मी और अमित को गिरफ्तार कर लिया है। मामले में हत्या की कथित वजह, वारदात की पूरी परिस्थितियां और बरामद अवशेषों की वैज्ञानिक जांच आगे की कार्रवाई में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आरोपियों पर लगाए गए आरोपों की अंतिम पुष्टि न्यायालय में साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगी।

कानपुर के सचेंडी क्षेत्र से सामने आया यह मामला इस बात की गंभीर याद दिलाता है कि किसी व्यक्ति के लंबे समय तक लापता रहने की सूचना को महज पारिवारिक विवाद या सामान्य गुमशुदगी मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। समय पर शिकायत, तकनीकी जांच और वैज्ञानिक साक्ष्यों के इस्तेमाल से ही ऐसे मामलों की वास्तविकता सामने लाई जा सकती है।

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