कानपुर

असहनीय दर्द से हार गई जिंदगी, तीन पन्नों के सुसाइड नोट में छलका विवाहिता का दर्द

रीढ़ की गंभीर बीमारी से लंबे समय से जूझ रही 26 वर्षीय विवाहिता ने जहरीला पदार्थ खाकर जान दे दी

✍️ ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट

लंबे समय से असहनीय शारीरिक पीड़ा झेल रही एक 26 वर्षीय विवाहिता की जिंदगी आखिरकार दर्द के बोझ तले थम गई। उसने अपने जीवन के अंतिम क्षणों में तीन पन्नों का एक भावुक सुसाइड नोट लिखा, जिसमें बीमारी से टूट चुके मन की पीड़ा, अधूरे सपनों का दर्द और अपने परिवार के प्रति प्रेम साफ झलकता है। जहरीला पदार्थ खाने के बाद उसे अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। घटना ने पूरे इलाके को झकझोर दिया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और बरामद सुसाइड नोट की हैंडराइटिंग का भी परीक्षण कराया जाएगा।

बीमारी से लगातार लड़ रही थी जिंदगी

रावतपुर थाना क्षेत्र के सुरेंद्र नगर में रहने वाले शिवम शुक्ला भारतीय रेलवे में ग्रुप-डी कर्मचारी हैं और वर्तमान में भोपाल में कार्यरत हैं। लगभग तीन वर्ष पहले उनकी शादी कानपुर देहात के रसूलाबाद क्षेत्र स्थित असालतगंज निवासी वैष्णवी उर्फ निक्की से हुई थी।

परिजनों के अनुसार वैष्णवी शादी से पहले से ही रीढ़ की हड्डी से जुड़ी गंभीर गठिया (स्पाइनल आर्थराइटिस) की बीमारी से पीड़ित थी। इलाज लगातार चल रहा था, लेकिन अपेक्षित राहत नहीं मिल पा रही थी। धीरे-धीरे दर्द और शरीर की जकड़न बढ़ती गई, जिससे उसका सामान्य जीवन प्रभावित होने लगा। इसके बावजूद उसने कभी अपने दर्द को परिवार पर हावी नहीं होने दिया और हमेशा सामान्य रहने का प्रयास करती रही।

पढ़ाई में थी होनहार, बड़े सपने देखे थे

वैष्णवी केवल बीमारी से लड़ने वाली युवती ही नहीं, बल्कि एक मेधावी छात्रा भी थी। उसने उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (यूपी-टीईटी) उत्तीर्ण की थी। इसके अलावा हाल ही में दिल्ली पुलिस कांस्टेबल भर्ती की लिखित परीक्षा भी पास कर ली थी। कुछ ही दिनों में उसका मेडिकल परीक्षण होना था।

परिवार का कहना है कि उसे इस बात की चिंता लगातार सताने लगी थी कि कहीं उसकी बीमारी मेडिकल परीक्षण में बाधा न बन जाए और वर्षों की मेहनत पर पानी न फिर जाए। यही मानसिक दबाव धीरे-धीरे उसके भीतर गहराता चला गया।

तीन पन्नों के सुसाइड नोट में छलका दर्द

बुधवार सुबह जब शिवम भोपाल से घर पहुंचे तो पत्नी अचेत अवस्था में मिली। उसके पास तीन पन्नों का हस्तलिखित सुसाइड नोट रखा था। पड़ोसियों की सहायता से उसे तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, लेकिन डॉक्टर उसे बचा नहीं सके।

सुसाइड नोट में वैष्णवी ने लिखा कि वह किसी पर बोझ नहीं बनना चाहती। उसने उल्लेख किया कि उसका भी सपना था सामान्य और सुखी जीवन जीने का, लेकिन बीमारी ने उसकी सारी खुशियां छीन लीं। उसने अपने पति, माता-पिता और परिवार के अन्य सदस्यों से क्षमा मांगते हुए लिखा कि वह अब इस असहनीय दर्द को और सहन नहीं कर पा रही है।

पत्र में उसने अपने भाई अभय की शादी का भी जिक्र किया और पति से आग्रह किया कि उसकी ओर से भाई को जेवर और स्कूटर देने की इच्छा पूरी करने का प्रयास करें। उसके शब्दों में परिवार के प्रति गहरा स्नेह और अपने अधूरे सपनों का दर्द साफ दिखाई देता है।

पति और परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़

घटना के बाद परिवार में मातम पसरा हुआ है। जिस बेटी ने जीवन में आगे बढ़ने के लिए कठिन परिश्रम किया, वही बीमारी और मानसिक तनाव के आगे हार गई। परिजनों का कहना है कि उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वैष्णवी इतना बड़ा कदम उठा लेगी। वह हमेशा मुस्कुराने की कोशिश करती थी, लेकिन भीतर ही भीतर दर्द से टूट चुकी थी।

पुलिस ने शुरू की जांच

रावतपुर थाना प्रभारी कमलेश राय ने बताया कि प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि विवाहिता लंबे समय से बीमारी से परेशान थी। घटनास्थल से तीन पन्नों का सुसाइड नोट बरामद किया गया है, जिसे जांच के लिए सुरक्षित रखा गया है। इसकी हैंडराइटिंग का परीक्षण विशेषज्ञों से कराया जाएगा ताकि सभी तथ्यों की पुष्टि हो सके।

पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया है। पुलिस का कहना है कि मामले के प्रत्येक पहलू की निष्पक्ष जांच की जा रही है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

बीमारी और मानसिक संघर्ष को समझने की जरूरत

यह घटना केवल एक आत्महत्या की खबर नहीं, बल्कि गंभीर बीमारी से जूझ रहे लोगों के मानसिक संघर्ष की भी मार्मिक तस्वीर पेश करती है। लंबे समय तक चलने वाला असहनीय दर्द, भविष्य की अनिश्चितता और सपनों के टूटने का भय व्यक्ति को गहरे मानसिक अवसाद की ओर धकेल सकता है। ऐसे समय में परिवार, समाज और चिकित्सकीय परामर्श का सहयोग बेहद महत्वपूर्ण होता है।

(यदि आपके आसपास कोई व्यक्ति लंबे समय से मानसिक तनाव, निराशा या आत्महत्या जैसे विचारों से जूझता दिखाई दे, तो उसकी बात गंभीरता से सुनें, उसे अकेला न छोड़ें और तुरंत मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ या स्थानीय हेल्पलाइन से सहायता लेने के लिए प्रेरित करें। समय पर मिला सहयोग किसी की जिंदगी बचा सकता है।)

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