पेपर लीक के विरोध में युवाओं का उबाल, मानव श्रृंखला बनाकर पारदर्शी परीक्षा प्रणाली की उठाई मांग
छात्रों, युवाओं और सामाजिक संगठनों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर प्रतियोगी परीक्षाओं में निष्पक्षता, जवाबदेही और दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की
रिपोर्ट: रीतेश कुमार गुप्ता
देशभर में प्रतियोगी परीक्षाओं में लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर युवाओं का आक्रोश थमने का नाम नहीं ले रहा है। इसी क्रम में शुक्रवार को सीतापुर में छात्रों, युवाओं और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की मांग उठाई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि यदि प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता लगातार प्रभावित होती रही तो इससे केवल छात्रों का भविष्य ही नहीं, बल्कि देश की प्रतिभा और विकास भी प्रभावित होगा।
अंबेडकर पार्क के निकट आयोजित इस प्रदर्शन में बड़ी संख्या में छात्र-युवा शामिल हुए। कार्यक्रम के दौरान प्रतिभागियों ने मानव श्रृंखला बनाकर अपनी एकजुटता का परिचय दिया और प्रतियोगी परीक्षाओं को पूरी तरह पारदर्शी एवं निष्पक्ष बनाने की मांग दोहराई। प्रदर्शन शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जिसमें शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने तथा पेपर लीक के दोषियों के विरुद्ध कठोर कार्रवाई की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई।
दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में जुटे युवा
प्रदर्शनकारियों ने बताया कि यह कार्यक्रम राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर छात्रों एवं युवाओं द्वारा चलाए जा रहे आंदोलन के समर्थन में आयोजित किया गया। उनका कहना था कि देशभर के छात्र लंबे समय से प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही अनियमितताओं के खिलाफ आवाज उठा रहे हैं और अब यह आंदोलन केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि पूरे शिक्षा तंत्र में सुधार की मांग का स्वर बन चुका है।
प्रतिभागियों ने कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले लाखों छात्र वर्षों तक कठिन परिश्रम करते हैं। ऐसे में यदि परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक हो जाता है या उसकी निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं तो छात्रों की मेहनत और भविष्य दोनों प्रभावित होते हैं। इसलिए सरकार को इस विषय को सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ लेना चाहिए।
छात्र नेताओं ने व्यवस्था में स्थायी सुधार की मांग उठाई
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए छात्र नेता रामजीवन ने कहा कि पेपर लीक जैसे मामलों में केवल गिरफ्तारी या जांच पर्याप्त नहीं है। आवश्यकता इस बात की है कि ऐसी प्रभावी व्यवस्था विकसित की जाए, जिससे भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति ही न हो। उन्होंने कहा कि जब तक छात्रों की प्रमुख मांगों पर ठोस और प्रभावी निर्णय नहीं लिया जाएगा, तब तक लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन जारी रहेगा।
छात्र प्रतिनिधि शिवम ने भी परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि केवल घोषणाएं करने से छात्रों का विश्वास वापस नहीं आएगा। परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और आधुनिक सुरक्षा व्यवस्था लागू करना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है। उनका कहना था कि मेहनत करने वाले प्रत्येक अभ्यर्थी को निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए और किसी भी प्रकार की धांधली के लिए जिम्मेदार लोगों को कठोर दंड दिया जाना चाहिए।
सामाजिक और राजनीतिक प्रतिनिधियों ने भी जताया समर्थन
प्रदर्शन में शामिल नगरपालिका के पूर्व चेयरमैन आशीष मिश्रा ने कहा कि सरकार द्वारा जांच एजेंसियों को सक्रिय करना और फास्ट-ट्रैक न्यायालय जैसी व्यवस्थाओं की घोषणा स्वागत योग्य कदम हैं, लेकिन अब केवल घोषणाओं से काम नहीं चलेगा। उन्होंने कहा कि छात्र और युवा ठोस सुधारात्मक कदम चाहते हैं, जिससे भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बनी रहे।
युवा नेता हरिओम मिश्रा ने कहा कि सरकार को छात्रों की भावनाओं को गंभीरता से समझना चाहिए। उनका कहना था कि युवाओं का विश्वास बनाए रखना किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए आवश्यक है और शिक्षा प्रणाली में भरोसा बहाल करने के लिए शीघ्र प्रभावी निर्णय लिए जाने चाहिए।
कांग्रेस नेता संतोष भार्गव ने भी छात्रों के आंदोलन का समर्थन करते हुए कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं से जुड़े मामलों का समयबद्ध और पारदर्शी समाधान होना चाहिए। उन्होंने कहा कि युवाओं के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।
वीडियो संदेश के माध्यम से मिला समर्थन
कार्यक्रम के दौरान लखनऊ विश्वविद्यालय छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष सरोज तिवारी ने वीडियो संदेश भेजकर प्रदर्शनकारियों का उत्साह बढ़ाया। उन्होंने छात्रों द्वारा लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांग रखने की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करना समय की मांग है। उन्होंने युवाओं से शांतिपूर्ण और संवैधानिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने का आह्वान भी किया।
मानव श्रृंखला बनाकर दिया एकजुटता का संदेश
प्रदर्शन के समापन पर सभी प्रतिभागियों ने अंबेडकर पार्क के निकट लंबी मानव श्रृंखला बनाई। इस दौरान युवाओं ने प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता लागू करने, पेपर लीक के दोषियों को कड़ी सजा दिलाने और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने संबंधी नारे लगाए। लगभग दो घंटे तक चले इस कार्यक्रम में अनुशासन और शांति का विशेष ध्यान रखा गया।
मानव श्रृंखला के माध्यम से प्रदर्शनकारियों ने यह संदेश देने का प्रयास किया कि छात्र समुदाय अब अपने भविष्य से जुड़े मुद्दों पर संगठित होकर आवाज उठा रहा है और वह निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली से किसी प्रकार का समझौता नहीं करेगा।
बड़ी संख्या में छात्र-युवा रहे मौजूद
इस प्रदर्शन में छात्र प्रतिनिधि शिवम, रामजीवन, रोहित, कुलदीप, आशुतोष, राहुल, अक्षय, पूर्व चेयरमैन आशीष मिश्रा, हरिओम मिश्रा, कांग्रेस नेता संतोष भार्गव, विनीत दीक्षित, रमेश निषाद, दिनेश जायसवाल (दिन्नू), राकेश राजवंशी, माहिर रिज़वी, इज़हार अहमद सहित अनेक छात्र, युवा और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
प्रतिभागियों ने एक स्वर में कहा कि प्रतियोगी परीक्षाओं की पवित्रता बनाए रखना सरकार और संबंधित संस्थाओं की जिम्मेदारी है। यदि समय रहते प्रभावी सुधार लागू नहीं किए गए तो देश के लाखों युवाओं का भरोसा शिक्षा व्यवस्था से उठ सकता है। उन्होंने सरकार से मांग की कि पेपर लीक रोकने के लिए सशक्त कानूनी व्यवस्था, आधुनिक तकनीकी सुरक्षा, पारदर्शी परीक्षा प्रणाली और दोषियों के विरुद्ध त्वरित न्याय सुनिश्चित किया जाए, ताकि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का अन्याय न हो।










