छात्रों की मांगों के समर्थन में सड़क पर उतरे कांग्रेस और दिव्यांग एकता मंच के कार्यकर्ता, राष्ट्रपति के नाम सौंपा ज्ञापन
छात्र आंदोलन के समर्थन में सरकार से कार्रवाई की मांग, जिम्मेदारों के इस्तीफे और मांगें पूरी करने को लेकर उठाई आवाज
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
सलेमपुर (देवरिया)। दिल्ली में चल रहे छात्र आंदोलन के समर्थन में शुक्रवार को सलेमपुर तहसील परिसर में कांग्रेस और दिव्यांग एकता मंच के कार्यकर्ताओं ने संयुक्त रूप से प्रदर्शन किया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए छात्रों की मांगों को शीघ्र स्वीकार करने की मांग उठाई। इसके बाद राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी (एसडीएम) सलेमपुर को सौंपा गया।
कार्यक्रम का नेतृत्व कांग्रेस पंचायती राज विभाग के प्रदेश महासचिव चंद्र भूषण पांडे तथा दिव्यांग एकता मंच के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने किया। दोनों नेताओं ने कहा कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में छात्रों की आवाज को गंभीरता से सुना जाना चाहिए और उनकी समस्याओं का समाधान संवाद के माध्यम से किया जाना चाहिए।
तहसील परिसर में जुटे कार्यकर्ता, लगाए नारे
पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के तहत कांग्रेस और दिव्यांग एकता मंच से जुड़े कार्यकर्ता तहसील परिसर में एकत्र हुए। यहां उन्होंने छात्रों के समर्थन में नारे लगाए और केंद्र सरकार से छात्र हितों की रक्षा करने की मांग की। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने विभिन्न मुद्दों पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए सरकार से त्वरित हस्तक्षेप की अपेक्षा जताई।
प्रदर्शनकारियों का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित की जानी चाहिए। उनका मानना था कि छात्रों की समस्याओं की अनदेखी लोकतांत्रिक मूल्यों के अनुरूप नहीं है।
ज्ञापन के माध्यम से उठाई कई मांगें
प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने महामहिम राष्ट्रपति के नाम संबोधित ज्ञापन उपजिलाधिकारी सलेमपुर को सौंपा। ज्ञापन में छात्रों की मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की गई। साथ ही शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मामलों में निष्पक्ष जांच और जिम्मेदार लोगों के विरुद्ध उचित कार्रवाई की मांग भी रखी गई।
ज्ञापन में यह भी कहा गया कि यदि छात्र समुदाय की उचित मांगों पर समय रहते विचार नहीं किया गया तो व्यापक जनसमर्थन के साथ आंदोलन को आगे बढ़ाया जाएगा।
वक्ताओं ने सरकार से की जवाबदेही तय करने की मांग
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि देश का भविष्य छात्रों के हाथों में है और उनकी समस्याओं को नजरअंदाज करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी भी स्तर पर लापरवाही हुई है तो संबंधित जिम्मेदार अधिकारियों और पदाधिकारियों की जवाबदेही तय की जानी चाहिए।
वक्ताओं ने यह भी कहा कि लोकतंत्र में विरोध प्रदर्शन नागरिकों का संवैधानिक अधिकार है और सरकार को आंदोलनकारी छात्रों के साथ संवाद स्थापित कर समाधान निकालना चाहिए। उनका कहना था कि केवल आश्वासन देने के बजाय ठोस कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि छात्रों में विश्वास कायम हो सके।
आंदोलन तेज करने की दी चेतावनी
कार्यक्रम के दौरान नेताओं ने कहा कि यदि छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक स्वरूप दिया जाएगा। उन्होंने दावा किया कि विभिन्न सामाजिक संगठनों और आम नागरिकों का भी इस मुद्दे पर समर्थन मिल रहा है। वक्ताओं ने कहा कि छात्र हितों से जुड़े विषयों पर किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।
इन नेताओं और कार्यकर्ताओं की रही मौजूदगी
प्रदर्शन और ज्ञापन कार्यक्रम में युवा कांग्रेस प्रदेश आउटरीच प्रकोष्ठ के महासचिव पंडित अखिलेश मिश्रा, आनंद गुप्ता, शिवसागर पांडे, लालू प्रसाद, मुन्ना राजभर, रमाकांत यादव, राम दशरथ गोंड, प्रदीप कुमार, विजय कुमार, रमेश यादव, लल्लन मिश्रा, उपेंद्र कुमार शर्मा, रमेश प्रसाद सहित कांग्रेस और दिव्यांग एकता मंच के अनेक पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता मौजूद रहे।
लोकतांत्रिक तरीके से समाधान की मांग
प्रदर्शन के समापन पर नेताओं ने कहा कि छात्रों के हित सर्वोपरि हैं और सरकार को उनकी समस्याओं का समाधान लोकतांत्रिक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण से करना चाहिए। उन्होंने उम्मीद जताई कि ज्ञापन के माध्यम से उठाई गई मांगों पर संबंधित स्तर पर गंभीरता से विचार किया जाएगा और छात्र समुदाय की चिंताओं का शीघ्र समाधान निकलेगा।










