चाय की दुकान पर बनी खूनी साजिश! प्रयागराज में एक ही परिवार के 4 लोगों की हत्या, 11 घंटे तक सबूत मिटाता रहा आरोपी

प्रयागराज में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या मामले में पुलिस प्रेस कॉन्फ्रेंस और रिपोर्टर अंजनी कुमार त्रिपाठी की तस्वीर

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अंजनी कुमार त्रिपाठी की रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के प्रयागराज जिले के साउथ मलाका इलाके में एक ही परिवार के चार लोगों की निर्मम हत्या के मामले ने पूरे प्रदेश को झकझोर दिया है। इस सनसनीखेज हत्याकांड में पुलिस जांच के दौरान जो तथ्य सामने आए हैं, वे किसी अपराध आधारित फिल्म की पटकथा से कम नहीं हैं। पुलिस के अनुसार आरोपी ने न सिर्फ चार लोगों की हत्या की, बल्कि करीब 11 घंटे तक घटनास्थल पर रहकर सबूत मिटाने की कोशिश भी की।

पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपी शनी गुप्ता को गिरफ्तार कर लिया है। पूछताछ में आरोपी ने हत्या की पूरी साजिश और उसके बाद किए गए प्रयासों का खुलासा किया है। जांच में सामने आया कि हत्या की योजना एक चाय-नाश्ते की दुकान पर बैठकर बनाई गई थी और वारदात को अंजाम देने के बाद आरोपी ने बेहद सुनियोजित तरीके से सबूत मिटाने का प्रयास किया।

परिवार के भीतर चल रहे विवाद ने लिया खौफनाक रूप

पुलिस अधिकारियों के अनुसार मृतक परिवार के सदस्य वीरेंद्र वैश्य, उनकी पत्नी अनीता वैश्य, बेटी मीनाक्षी और पुत्र अभिषेक इस वारदात का शिकार बने। जांच में पता चला कि परिवार के भीतर लंबे समय से संपत्ति और आर्थिक मामलों को लेकर तनाव चल रहा था।

बताया जा रहा है कि वर्ष 2022 में वीरेंद्र वैश्य ने अपने बेटे अभिषेक को संपत्ति से अलग कर दिया था। इसके बाद से अभिषेक आर्थिक तंगी और कर्ज के बोझ से जूझ रहा था। इसी दौरान उसकी नजदीकियां शनी गुप्ता से बढ़ीं, जो उसी इलाके में समोसा-कचौड़ी की दुकान चलाता था। दोनों के बीच लगातार बातचीत होती थी और वे अक्सर साथ समय बिताते थे। पुलिस को मिली कॉल डिटेल रिकॉर्ड (CDR) से भी यह स्पष्ट हुआ कि घटना से पहले दोनों के बीच लगातार संपर्क बना हुआ था।

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चाय की दुकान पर रची गई हत्या की पूरी योजना

पुलिस जांच में सामने आया कि घटना वाले दिन दोपहर के समय अभिषेक और शनी गुप्ता ने साथ बैठकर नाश्ता किया और शराब भी पी। इसी दौरान दोनों ने परिवार के अन्य सदस्यों को रास्ते से हटाने और घर में मौजूद कीमती सामान पर कब्जा करने की योजना बनाई। पूर्व निर्धारित योजना के अनुसार शाम करीब पांच बजे मीनाक्षी रोजाना की तरह दुकान खोलने पहुंची। जैसे ही उसने दुकान का दरवाजा खोला, उस पर लोहे की रॉड से हमला कर दिया गया। हमले के बाद उसे अंदर खींच लिया गया और ऊपर ले जाया गया। गंभीर चोटों के कारण उसकी मौके पर ही मौत हो गई।

इसके बाद आरोपी घर के अंदर पहुंचे, जहां वीरेंद्र वैश्य और उनकी पत्नी अनीता अपने कमरे में मौजूद थे। दोनों पर भी जानलेवा हमला किया गया और उनकी हत्या कर दी गई। बाद में अभिषेक भी इस खूनी घटनाक्रम का शिकार बना। पुलिस अब पूरे घटनाक्रम के हर पहलू की गहन जांच कर रही है।

11 घंटे तक घर में रहकर मिटाता रहा सबूत

पुलिस पूछताछ में आरोपी ने स्वीकार किया कि हत्या करने के बाद वह रातभर घर के अंदर ही मौजूद रहा। उसने घटनास्थल से खून के निशान और अन्य साक्ष्य मिटाने के लिए कई तरह के रसायनों और घरेलू सफाई उत्पादों का इस्तेमाल किया।

जांच अधिकारियों के अनुसार आरोपी ने गर्म पानी, डिटर्जेंट पाउडर, हार्पिक, ब्लीचिंग पाउडर, हल्दी और सरसों के तेल का उपयोग कर खून के धब्बों को साफ करने की कोशिश की। उसने फर्श, दीवारों और आसपास के हिस्सों को कई बार धोया ताकि पुलिस को कोई ठोस सबूत न मिल सके। मौके से पुलिस को सफाई में इस्तेमाल किए गए कपड़े, आरोपी की शर्ट और अन्य सामान भी बरामद हुए हैं, जिन्हें फॉरेंसिक जांच के लिए भेजा गया है।

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दुर्गंध रोकने के लिए शवों को ढक दिया

जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी को डर था कि शवों से निकलने वाली दुर्गंध पड़ोसियों को शक पैदा कर सकती है। इसी वजह से उसने मृतकों के शवों को कंबल, रजाई और कपड़ों से ढक दिया।

घर की अलमारी में रखे गए अतिरिक्त कपड़े भी शवों के ऊपर डाल दिए गए ताकि बदबू बाहर न जा सके। वहीं एक शव को दुकान के हिस्से में बंद कर दिया गया था। आरोपी का उद्देश्य था कि घटना का खुलासा जितना संभव हो सके, उतना देर से हो।

सीसीटीवी फुटेज और कॉल डिटेल बनी पुलिस की सबसे बड़ी ताकत

इस जघन्य हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने में सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड ने अहम भूमिका निभाई। पुलिस को आसपास लगे कैमरों की जांच में एक व्यक्ति सुबह लगभग पांच बजे घर से निकलता दिखाई दिया।

जब स्थानीय लोगों से उसकी पहचान कराई गई तो पता चला कि वह शनी गुप्ता है। इसके बाद पुलिस ने उसका पूरा रिकॉर्ड खंगालना शुरू किया। मोबाइल कॉल डिटेल से यह भी सामने आया कि घटना से पहले अभिषेक और शनी गुप्ता के बीच कई बार बातचीत हुई थी। इन्हीं साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की, जहां उसने अपराध स्वीकार कर लिया।

आरोपी के कब्जे से बरामद हुआ भारी मात्रा में सामान

पुलिस आयुक्त योगेंद्र कुमार के अनुसार आरोपी की गिरफ्तारी के बाद उसके कब्जे से बड़ी मात्रा में कीमती सामान बरामद किया गया है। बरामदगी में लगभग एक किलोग्राम सोना, 360 ग्राम चांदी, नकदी और मकान की चाबियां शामिल हैं।

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पुलिस का मानना है कि हत्या के पीछे आर्थिक लाभ और संपत्ति से जुड़ा विवाद प्रमुख कारण हो सकता है। हालांकि मामले के सभी पहलुओं की जांच अभी जारी है और पुलिस अन्य संभावित कड़ियों की भी पड़ताल कर रही है।

पूरे शहर में दहशत, पुलिस कर रही विस्तृत जांच

एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या और उसके बाद सबूत मिटाने की कोशिश ने पूरे प्रयागराज को स्तब्ध कर दिया है। स्थानीय लोग इस घटना को हाल के वर्षों की सबसे भयावह वारदातों में से एक मान रहे हैं।

पुलिस अधिकारियों का कहना है कि फॉरेंसिक रिपोर्ट, डिजिटल साक्ष्य और बरामद सामग्री के आधार पर जल्द ही आरोप पत्र तैयार किया जाएगा। मामले की जांच तेजी से आगे बढ़ रही है ताकि अदालत में मजबूत साक्ष्यों के साथ दोषियों को कड़ी सजा दिलाई जा सके।

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Author: यायावर

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