खोई सियासी ज़मीन वापस पाने की जंग में राहुल गांधी का नया दांव, दलित वोटबैंक पर खास फोकस
वीरा पासी की विरासत के सहारे रायबरेली-अमेठी में कांग्रेस को दोबारा मजबूत करने की कोशिश
ठाकुर बख्श सिंह की रिपोर्ट
रायबरेली। उत्तर प्रदेश की राजनीति में कभी कांग्रेस का अभेद्य किला माने जाने वाले रायबरेली और अमेठी में अब पार्टी अपनी खोई हुई ज़मीन वापस पाने के लिए नई रणनीति पर काम कर रही है। कांग्रेस सांसद और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष Rahul Gandhi ने अपने दो दिवसीय रायबरेली दौरे के दौरान जिस तरह दलित समाज और सामाजिक न्याय के मुद्दों को केंद्र में रखा, उससे साफ संकेत मिला कि आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए कांग्रेस अब दलित वोटबैंक पर विशेष ध्यान दे रही है।
इस दौरे में राहुल गांधी ने 1857 की क्रांति के नायक महाबली वीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण किया और भाजपा सरकार पर संविधान, सामाजिक न्याय और गरीब वर्गों की अनदेखी का आरोप लगाया। राजनीतिक जानकारों की मानें तो यह केवल सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि कांग्रेस की एक सोची-समझी सामाजिक और चुनावी रणनीति का हिस्सा था।
रायबरेली-अमेठी में कमजोर हुई कांग्रेस की पकड़
एक समय था जब रायबरेली और अमेठी को कांग्रेस का राजनीतिक गढ़ माना जाता था। दशकों तक यहां कांग्रेस का दबदबा कायम रहा, लेकिन समय के साथ विधानसभा स्तर पर पार्टी की पकड़ कमजोर होती चली गई।
आज स्थिति यह है कि रायबरेली लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली किसी भी विधानसभा सीट पर कांग्रेस का कब्जा नहीं है। यही कारण है कि राहुल गांधी लगातार क्षेत्रीय दौरे कर संगठन को दोबारा मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं।
लोकसभा चुनाव जीतने के बाद राहुल गांधी का यह सातवां रायबरेली दौरा था। हर दौरे में वे अलग-अलग सामाजिक समूहों के बीच पहुंचकर संवाद स्थापित करने का प्रयास कर रहे हैं। इस बार उनका पूरा फोकस दलित और पिछड़े वर्ग पर दिखाई दिया।
वीरा पासी के जरिए दलित समाज को संदेश
राहुल गांधी ने अपने संबोधन में कहा कि संविधान केवल एक किताब नहीं बल्कि एक विचारधारा है, जिसे बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर, महात्मा गांधी और वीरा पासी जैसे महापुरुषों ने अपने संघर्ष और बलिदान से मजबूत किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान समय में संविधान और सामाजिक न्याय की विचारधारा पर लगातार हमला हो रहा है। राहुल गांधी ने कहा कि देश में गरीब, किसान और कमजोर वर्ग आर्थिक संकट की ओर बढ़ रहे हैं, जबकि सरकार केवल बड़े-बड़े दावे कर रही है।
उन्होंने प्रधानमंत्री Narendra Modi पर निशाना साधते हुए कहा कि जनता को विदेश यात्रा, महंगाई और रोजमर्रा की जरूरतों पर उपदेश देने वाली सरकार खुद जनता की असली समस्याओं से दूर है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राहुल गांधी ने वीरा पासी की प्रतिमा का अनावरण कर दलित समाज को यह संदेश देने की कोशिश की कि कांग्रेस उनकी सामाजिक विरासत और सम्मान की राजनीति को आगे बढ़ाना चाहती है।
क्यों अहम हैं दलित वोटर?
रायबरेली और अमेठी की कई विधानसभा सीटों पर दलित वोटरों की संख्या निर्णायक मानी जाती है। यही वजह है कि समाजवादी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और कांग्रेस सभी दलित समुदाय को अपने पक्ष में करने के लिए लगातार प्रयास करती रही हैं।
रायबरेली लोकसभा क्षेत्र की बछरावां विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित है और यहां दलित वोटरों का बड़ा प्रभाव माना जाता है। इसके अलावा सदर, हरचंदपुर, ऊंचाहार और सरेनी विधानसभा क्षेत्रों में भी दलित मतदाता चुनावी नतीजों को प्रभावित करने की स्थिति में रहते हैं।
वहीं अमेठी लोकसभा क्षेत्र की सलोन और जगदीशपुर विधानसभा सीटों पर भी दलित वोटबैंक बेहद अहम भूमिका निभाता है। यही वजह है कि राहुल गांधी का यह पूरा दौरा सामाजिक समीकरणों को साधने की दिशा में एक बड़ा राजनीतिक संकेत माना जा रहा है।
कांग्रेस की नई सामाजिक रणनीति
बीते कुछ वर्षों में कांग्रेस उत्तर प्रदेश की राजनीति में लगातार कमजोर हुई है। दलित और पिछड़े वर्ग का बड़ा हिस्सा या तो समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी की ओर गया या फिर भाजपा ने अपने सामाजिक विस्तार के जरिए इन वर्गों में मजबूत पकड़ बनाई।
ऐसे में राहुल गांधी अब कांग्रेस को केवल परंपरागत सवर्ण और मुस्लिम वोट तक सीमित नहीं रखना चाहते। उनकी कोशिश है कि दलित, पिछड़ा और गरीब वर्ग दोबारा कांग्रेस के साथ खड़ा हो।
रायबरेली दौरे के दौरान जिस तरह संविधान, सामाजिक न्याय, महंगाई, किसान और दलित सम्मान जैसे मुद्दों को प्रमुखता दी गई, उससे यह स्पष्ट हो गया कि कांग्रेस अब “सामाजिक न्याय बनाम सत्ता” की राजनीतिक लाइन पर आगे बढ़ना चाहती है।
भाजपा और सपा-बसपा के लिए चुनौती?
राहुल गांधी की इस रणनीति का असर कितना होगा, यह आने वाले विधानसभा चुनाव में साफ होगा। लेकिन इतना जरूर है कि कांग्रेस अब केवल प्रतीकात्मक राजनीति नहीं बल्कि सामाजिक समीकरणों को नए सिरे से गढ़ने की कोशिश कर रही है।
यदि कांग्रेस दलित और पिछड़े वर्ग के बीच अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने में सफल होती है तो इसका सीधा असर समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी दोनों पर पड़ सकता है। वहीं भाजपा के लिए भी रायबरेली और अमेठी जैसे क्षेत्रों में चुनौती बढ़ सकती है।
हालांकि राजनीतिक विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि केवल प्रतिमा अनावरण और भाषणों से चुनावी जमीन मजबूत नहीं होती। इसके लिए संगठन, बूथ स्तर की सक्रियता और लगातार जनसंपर्क की जरूरत होती है।
क्या कांग्रेस को मिलेगा राजनीतिक फायदा?
राहुल गांधी लगातार यह संदेश देने की कोशिश कर रहे हैं कि कांग्रेस सामाजिक न्याय और संविधान बचाने की लड़ाई लड़ रही है। लेकिन सवाल यह है कि क्या यह संदेश गांव और बूथ स्तर तक प्रभावी तरीके से पहुंच पाएगा?
रायबरेली और अमेठी में कांग्रेस का पुराना जनाधार जरूर रहा है, लेकिन पिछले कई चुनावों में पार्टी को विधानसभा स्तर पर अपेक्षित सफलता नहीं मिली। ऐसे में राहुल गांधी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि वे भावनात्मक और सामाजिक जुड़ाव को वोट में कैसे बदलते हैं।
फिलहाल इतना तय है कि कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन वापस पाने के लिए नई सामाजिक और चुनावी रणनीति पर काम शुरू कर दिया है। वीरा पासी की विरासत और दलित सम्मान की राजनीति उसी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है। आने वाले दिनों में यह प्रयोग कितना सफल होता है, इस पर पूरे प्रदेश की राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।








