अभी तो गर्मी का ट्रेलर है, असली फिल्म 25 मई से शुरू होगी… नौतपा में 9 दिन आसमान से बरसेगी आग

रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी की तस्वीर के साथ नौतपा और भीषण गर्मी पर आधारित हिंदी न्यूज़ फीचर इमेज, जिसमें तापमान, लू और हीटवेव का दृश्य दर्शाया गया है।

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कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

नई दिल्ली/लखनऊ। मई का महीना अभी खत्म भी नहीं हुआ है, लेकिन उत्तर भारत के अधिकांश राज्यों में सूरज ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। राजधानी दिल्ली से लेकर उत्तर प्रदेश, राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश और बिहार तक धरती तवे की तरह तप रही है। दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आने लगी हैं और गर्म हवाओं ने लोगों को घरों में कैद होने पर मजबूर कर दिया है।

इसी बीच मौसम विभाग ने आने वाले दिनों को लेकर और भी गंभीर चेतावनी जारी की है। मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि 25 मई से शुरू होने वाला ‘नौतपा’ इस बार बेहद खतरनाक साबित हो सकता है। अनुमान है कि 25 मई से 2 जून तक चलने वाले इन नौ दिनों में तापमान कई राज्यों में 45 से 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है। मौसम विभाग के अनुसार, यह दौर इस साल की सबसे भीषण गर्मी लेकर आएगा।

नौतपा क्या है और क्यों बढ़ जाती है गर्मी?

भारतीय पंचांग के अनुसार हर साल मई के अंतिम सप्ताह और जून की शुरुआत में नौतपा पड़ता है। यह वह समय होता है जब सूर्य रोहिणी नक्षत्र में प्रवेश करता है। धार्मिक मान्यताओं में इसे अत्यधिक गर्मी का काल माना जाता है, जबकि वैज्ञानिक दृष्टि से भी इस समय पृथ्वी और सूर्य की स्थिति गर्मी को चरम पर पहुंचा देती है।

वैज्ञानिकों के अनुसार पृथ्वी लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। मई के अंतिम दिनों में सूर्य कर्क रेखा के करीब पहुंच जाता है। इस कारण सूर्य की किरणें उत्तरी भारत के मैदानी इलाकों पर सीधी पड़ती हैं। सीधी किरणों की वजह से धरती तेजी से गर्म होती है और तापमान अचानक बढ़ने लगता है।

इसी दौरान दिन भी लंबे होने लगते हैं। सूरज सुबह जल्दी निकलता है और देर शाम तक तेज चमकता रहता है। लगातार कई घंटों तक पड़ने वाली धूप जमीन की ऊपरी सतह को इतना गर्म कर देती है कि रात में भी तापमान सामान्य नहीं हो पाता। यही कारण है कि नौतपा के दिनों में रातें भी गर्म महसूस होती हैं।

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कई राज्यों में अभी से टूट रहे रिकॉर्ड

इस बार नौतपा शुरू होने से पहले ही गर्मी ने कई पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। उत्तर प्रदेश के बांदा जिले में तापमान 48 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। वहीं दिल्ली में पारा 47 डिग्री के करीब दर्ज किया गया है। राजस्थान के कई शहरों में दोपहर के समय सड़कें सुनसान दिखाई देने लगी हैं।

मौसम विभाग के अनुसार अगले कुछ दिनों में उत्तर भारत के मैदानी इलाकों में हीटवेव और तेज हो सकती है। खासकर राजस्थान, पूर्वी उत्तर प्रदेश, बुंदेलखंड, मध्य प्रदेश और हरियाणा के इलाकों में लू का प्रकोप सबसे अधिक देखने को मिल सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि इस बार पश्चिमी विक्षोभ की सक्रियता कम रहने और बारिश न होने के कारण तापमान लगातार बढ़ रहा है। अगर अगले कुछ दिनों में मौसम में बदलाव नहीं हुआ तो गर्मी और विकराल रूप ले सकती है।

सूखी धरती और लू बना रही हालात भयावह

गर्मी के लगातार बढ़ने से जमीन की नमी लगभग खत्म हो चुकी है। सूखी मिट्टी तेजी से गर्म होती है और आसपास के वातावरण का तापमान भी बढ़ा देती है। पेड़-पौधों में भी नमी कम हो रही है, जिससे हवा और अधिक शुष्क होती जा रही है।

राजस्थान और रेगिस्तानी इलाकों से आने वाली गर्म पछुआ हवाएं उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों को झुलसा रही हैं। इन हवाओं को ही आम भाषा में ‘लू’ कहा जाता है। लू का असर इतना खतरनाक होता है कि कुछ मिनटों तक धूप में रहने से भी शरीर का तापमान तेजी से बढ़ सकता है।

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मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस समय ऊपरी वायुमंडल में हवा का दबाव नीचे की ओर बना रहता है। इससे बादलों का निर्माण नहीं हो पाता और बारिश की संभावना बेहद कम हो जाती है। यही वजह है कि नौतपा के दौरान आसमान साफ रहता है और धूप बेहद तीखी महसूस होती है।

गर्मी के साथ उमस भी बढ़ाएगी परेशानी

इस बार लोगों को केवल गर्मी ही नहीं बल्कि उमस भी परेशान करेगी। दरअसल, इसी समय दक्षिण-पश्चिम मानसून की गतिविधियां शुरू हो जाती हैं। बंगाल की खाड़ी और अरब सागर से नमी भरी हवाएं धीरे-धीरे उत्तर भारत की ओर बढ़ने लगती हैं।

हालांकि इन हवाओं से तुरंत बारिश नहीं होती, लेकिन वातावरण में नमी बढ़ जाती है। नमी अधिक होने के कारण शरीर से निकलने वाला पसीना जल्दी सूख नहीं पाता। इससे शरीर को और अधिक गर्मी महसूस होती है।

विशेषज्ञ इसे ‘हीट इंडेक्स’ कहते हैं। उदाहरण के तौर पर यदि तापमान 45 डिग्री हो और हवा में नमी 60 से 70 प्रतिशत तक पहुंच जाए, तो लोगों को वास्तविक तापमान 50 से 55 डिग्री सेल्सियस जैसा महसूस हो सकता है। यही कारण है कि नौतपा के दौरान लोग रात में भी बेचैनी और घुटन महसूस करते हैं।

हीट स्ट्रोक और डिहाइड्रेशन का बढ़ेगा खतरा

डॉक्टरों के अनुसार नौतपा के दौरान सबसे बड़ा खतरा हीट स्ट्रोक का होता है। लगातार धूप और गर्म हवाओं के संपर्क में रहने से शरीर का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर यह जानलेवा भी साबित हो सकता है।

अस्पतालों में डिहाइड्रेशन, चक्कर आना, सिरदर्द, उल्टी, कमजोरी और बेहोशी के मरीजों की संख्या बढ़ने लगी है। बच्चों, बुजुर्गों और पहले से बीमार लोगों को सबसे अधिक खतरा बताया जा रहा है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने लोगों को दिन में अधिक से अधिक पानी पीने, ओआरएस और नींबू पानी जैसे तरल पदार्थ लेने तथा धूप में निकलने से बचने की सलाह दी है। डॉक्टरों का कहना है कि दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक बाहर निकलना बेहद खतरनाक हो सकता है।

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प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग अलर्ट मोड पर

भीषण गर्मी को देखते हुए कई राज्यों में प्रशासन ने अलर्ट जारी कर दिया है। स्वास्थ्य विभाग ने अस्पतालों को तैयार रहने के निर्देश दिए हैं। कई जिलों में स्कूलों के समय में बदलाव किया गया है, जबकि कुछ जगहों पर दोपहर की बाहरी गतिविधियों को सीमित करने की सलाह दी गई है।

सरकारी एजेंसियां लोगों को लगातार जागरूक कर रही हैं कि धूप में निकलते समय सिर ढंककर रखें, हल्के सूती कपड़े पहनें और खाली पेट बाहर न जाएं। मौसम विभाग ने किसानों को भी खेतों में काम करते समय सावधानी बरतने की सलाह दी है।

नौतपा के बाद मानसून देगा राहत

मौसम विशेषज्ञों का मानना है कि नौतपा खत्म होने के बाद धीरे-धीरे मानसून की गतिविधियां तेज होंगी। सबसे पहले केरल में मानसून दस्तक देगा और फिर जून के मध्य तक उत्तर भारत की ओर बढ़ना शुरू करेगा।

मानसून की पहली बारिश के साथ तापमान में गिरावट आने लगेगी और लोगों को भीषण गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद है। हालांकि विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि तब तक लोगों को अत्यधिक सावधानी बरतनी होगी, क्योंकि आने वाले नौ दिन इस साल के सबसे गर्म दिन साबित हो सकते हैं।

धूप से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां

  • दोपहर 12 बजे से 4 बजे तक बाहर निकलने से बचें
  • ज्यादा से ज्यादा पानी और तरल पदार्थ पिएं
  • सिर पर गमछा, टोपी या छाता जरूर रखें
  • हल्के और सूती कपड़े पहनें
  • खाली पेट धूप में बाहर न जाएं
  • बच्चों और बुजुर्गों का विशेष ध्यान रखें
  • तेज धूप में ज्यादा देर तक काम करने से बचें
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Author: यायावर

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