संजय सिंह राणा की रिपोर्ट
चित्रकूट। चित्रकूट की जीवनरेखा कही जाने वाली मंदाकिनी नदी में शनिवार को आई भीषण बाढ़ ने रामघाट सहित जिले के अनेक इलाकों में भारी तबाही मचा दी। अचानक बढ़े नदी के जलस्तर ने धार्मिक नगरी चित्रकूट के जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया। नदी का जलस्तर करीब 135 मीटर तक पहुंचने की जानकारी सामने आई, जबकि सामान्य जलस्तर लगभग 126 मीटर बताया गया है। इस तरह मंदाकिनी अपने सामान्य स्तर से करीब नौ मीटर ऊपर बहने लगी थी।
बाढ़ की इस भयावह स्थिति को स्थानीय लोग वर्षों में आई सबसे बड़ी आपदा के रूप में देख रहे हैं। बताया जा रहा है कि मंदाकिनी की इस बाढ़ ने करीब 23 वर्षों का रिकॉर्ड तोड़ दिया। नदी के उफान ने रामघाट, आसपास के बाजारों, मंदिरों और निचले इलाकों के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भी व्यापक असर डाला।
हालांकि रविवार को नदी का जलस्तर तेजी से नीचे आने पर लोगों ने कुछ राहत की सांस ली। प्रशासन के अनुसार जलस्तर में करीब आठ मीटर की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन इसके बावजूद नदी अभी भी खतरे के निशान से लगभग एक मीटर ऊपर बह रही थी। ऐसे में प्रशासन ने राहत कार्यों के साथ-साथ नदी और प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी जारी रखी।
रामघाट पर बाढ़ के बाद तबाही और गंदगी का मंजर
पानी उतरने के बाद चित्रकूट के प्रसिद्ध रामघाट और आसपास के क्षेत्रों में बाढ़ की तबाही साफ दिखाई देने लगी। जहां कुछ दिन पहले तक बाढ़ का तेज पानी बह रहा था, वहां अब सड़कों, दुकानों और गलियों में कीचड़, मलबा और गंदगी फैली हुई दिखाई दी।
दुकानदार अपने प्रतिष्ठानों में जमा कीचड़ और बर्बाद सामान को बाहर निकालकर सफाई करते नजर आए। कई दुकानों में रखा सामान पानी और मलबे के कारण खराब हो गया। दुकानदारों के सामने अब व्यापारिक गतिविधियों को दोबारा सामान्य करने की चुनौती खड़ी है।
नगर पालिका के सफाईकर्मी भी प्रभावित क्षेत्रों में सफाई अभियान चलाने में जुटे रहे। रामघाट और उसके आसपास के सार्वजनिक स्थलों से मलबा हटाने तथा गंदगी साफ करने का काम शुरू किया गया। बाढ़ का पानी उतरने के बाद संक्रामक बीमारियों की आशंका को देखते हुए सफाई और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था भी प्रशासन के लिए महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
घरों में घुसा पानी, धूप में सुखाया जा रहा अनाज
ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों में बाढ़ ने लोगों की गृहस्थी को प्रभावित किया है। पानी उतरने के बाद अब बड़ी संख्या में परिवार अपने घरों की सफाई में जुटे हुए हैं। मकानों के अंदर जमा कीचड़ और गंदगी को बाहर निकाला जा रहा है।
कई घरों में रखा अनाज और अन्य जरूरी सामान बाढ़ के पानी में भीग गया। नुकसान को कम करने के प्रयास में लोग अपने अनाज को घरों से बाहर निकालकर धूप में सुखाते दिखाई दिए। कपड़े, बिस्तर, घरेलू सामान और खाद्यान्न के खराब होने से अनेक परिवारों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
बाढ़ के बाद प्रभावित परिवारों के सामने अब घरों को फिर से व्यवस्थित करने और सामान्य जीवन की ओर लौटने की कठिन चुनौती है। जिन परिवारों के घरों को नुकसान पहुंचा है, उनके लिए स्थिति और अधिक गंभीर बनी हुई है।
ग्रामीण इलाकों तक पहुंचा मंदाकिनी का पानी
मंदाकिनी नदी का उफनता पानी यमुना की ओर जाने वाले मार्ग में पड़ने वाले ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुंच गया था। बरेठी, चौरा, कलवारा, पनौटी और कहेटा सहित कई गांवों और बस्तियों में बाढ़ का असर देखा गया।
स्थानीय स्तर पर बाढ़ की चपेट में बड़ी संख्या में गांवों के आने की जानकारी सामने आई है। वहीं जिला प्रशासन के अनुसार जिले में कुल 12 गांवों को बाढ़ से प्रभावित माना गया है, जिनमें कर्वी तहसील के सात और राजापुर तहसील के पांच गांव शामिल हैं। बाढ़ के व्यापक प्रभाव और प्रशासनिक रूप से चिन्हित गांवों की संख्या में अंतर स्थानीय स्तर पर नुकसान के अलग-अलग आकलन को भी दर्शाता है।
अचानक पानी बढ़ने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई। हजारों लोगों ने भय के बीच रात जागकर गुजारी। कई परिवारों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों की ओर जाना पड़ा। कुछ मकानों में पानी भर गया, जबकि कई स्थानों पर मकानों को नुकसान पहुंचने और ढहने की जानकारी भी सामने आई।
राहत शिविरों में ठहराए गए प्रभावित परिवार
बाढ़ प्रभावित लोगों की सुरक्षा के लिए प्रशासन की ओर से राहत शिविरों की व्यवस्था की गई। प्रशासन और राहत-बचाव दलों ने संवेदनशील क्षेत्रों में पहुंचकर लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने का काम किया।
बाढ़ में फंसे लोगों तक खाद्य सामग्री और अन्य जरूरी सहायता पहुंचाने के लिए स्टीमर तथा उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल किया गया। कई स्थानों पर पानी के तेज बहाव के कारण राहत और बचाव कार्य चुनौतीपूर्ण रहा।
प्रशासन की प्राथमिकता बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित बाहर निकालना और प्रभावित परिवारों को भोजन, पेयजल तथा आवश्यक सहायता उपलब्ध कराना रही। पानी घटने के बाद अब राहत कार्यों के साथ नुकसान का सर्वे और पुनर्वास संबंधी कार्रवाई पर भी जोर दिया जा रहा है।
एनडीआरएफ ने रेस्क्यू कर 72 लोगों को सुरक्षित निकाला
बाढ़ की गंभीर स्थिति को देखते हुए एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में तैनात किया गया। शनिवार को चलाए गए बचाव अभियान के दौरान करीब 72 लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला गया।
जिन स्थानों से लोगों के पानी में फंसे होने की सूचना मिली, वहां तत्काल राहत एवं बचाव दल भेजे गए। कई प्रभावित इलाकों तक पहुंचने के लिए स्टीमर का सहारा लिया गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कुछ स्थानों पर फंसे लोगों को सुरक्षित निकालने के लिए हेलीकॉप्टर की सहायता भी ली गई।
रेस्क्यू अभियान के दौरान राहत कर्मियों ने प्रभावित लोगों तक खाद्य सामग्री पहुंचाने का काम भी किया। अधिकारियों के अनुसार रात के समय भी जिन क्षेत्रों से लोगों के फंसे होने की सूचना मिली, वहां बचाव दलों को भेजकर राहत पहुंचाई गई।
डीएम और एसपी ने स्टीमर से किया प्रभावित क्षेत्रों का दौरा
जिलाधिकारी पुलकित गर्ग और पुलिस अधीक्षक अरुण कुमार सिंह ने भी बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने स्टीमर के माध्यम से प्रभावित इलाकों तक पहुंचकर वहां की स्थिति का जायजा लिया और लोगों से बातचीत की।
अधिकारियों ने बाढ़ प्रभावित परिवारों का हाल जाना तथा जरूरतमंद लोगों को लंच पैकेट और अन्य राहत सामग्री उपलब्ध कराई। प्रशासन की ओर से लगातार प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी की जा रही है।
जिलाधिकारी के अनुसार मंदाकिनी नदी का जलस्तर शनिवार को खतरे के निशान को पार करते हुए करीब 135 मीटर तक पहुंच गया था। रविवार को जलस्तर में लगभग आठ मीटर की गिरावट दर्ज की गई, लेकिन नदी का पानी अभी भी खतरे के स्तर से ऊपर होने के कारण प्रशासन पूरी तरह सतर्क बना रहा।
मुख्यमंत्री मोहन यादव भी पहुंचे चित्रकूट
मंदाकिनी नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी चित्रकूट पहुंचे। उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों और पीड़ित परिवारों की स्थिति का जायजा लिया।
मुख्यमंत्री ने प्रभावित लोगों से मुलाकात कर उनका हाल जाना और बाढ़ से हुई समस्याओं के संबंध में जानकारी ली। चित्रकूट का क्षेत्र उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश दोनों राज्यों से जुड़ा होने के कारण बाढ़ का प्रभाव व्यापक स्तर पर देखा गया।
बाढ़ के बाद लोगों की सबसे बड़ी चिंता अब सामान्य जीवन की बहाली, नुकसान का आकलन और प्रभावित परिवारों को समय पर राहत उपलब्ध कराना है।
बाढ़ से क्षतिग्रस्त हुआ 300 मीटर लंबा पुल
मंदाकिनी नदी में तेज बहाव के कारण बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुंचा। नदी पर बना करीब 300 मीटर लंबा पुल क्षतिग्रस्त होकर टूट गया, जिससे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश के बीच आवागमन प्रभावित हुआ।
इसके अलावा झांसी-मिर्जापुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर कर्वी-बेड़ी पुलिया मार्ग से जुड़े क्षेत्र में भी पानी के दबाव और मिट्टी के धंसाव के कारण अप्रोच रोड के एक हिस्से को नुकसान पहुंचने की जानकारी सामने आई।
सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने प्रभावित मार्ग पर भारी वाहनों के आवागमन पर तत्काल रोक लगा दी। एनएचएआई और जिला प्रशासन की टीमें मौके पर पहुंचकर पुल और मार्ग की तकनीकी स्थिति की जांच में जुटीं।
प्रशासन की कोशिश है कि आवश्यक मरम्मत कार्य पूरा होने के बाद आवागमन को सुरक्षित तरीके से सामान्य किया जा सके। तब तक लोगों से प्रतिबंधित मार्गों पर यात्रा न करने और प्रशासन तथा यातायात पुलिस के निर्देशों का पालन करने की अपील की गई है।
तहसील स्तर पर शुरू होगा नुकसान का सर्वे
बाढ़ से हुए नुकसान के आकलन के लिए प्रशासन ने सर्वे की प्रक्रिया शुरू करने की बात कही है। तहसील स्तर की टीमों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजकर मकानों, फसलों, घरेलू सामान और अन्य नुकसान का आकलन कराया जाएगा।
सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि बाढ़ प्रभावित लोगों को दैवी आपदा राहत के तहत किस प्रकार की आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जा सकती है।
प्रभावित परिवारों की मांग है कि सर्वे निष्पक्ष और तेजी से कराया जाए, ताकि जिन लोगों के घर, सामान और आजीविका को नुकसान पहुंचा है, उन्हें समय पर राहत मिल सके।
स्थानीय लोगों में अभी भी दहशत, दोबारा जलस्तर बढ़ने की चिंता
रामघाट और आसपास के इलाकों में पानी उतरने के बावजूद स्थानीय लोगों में भय पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। कई लोगों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में मंदाकिनी नदी की ऐसी विकराल बाढ़ पहले नहीं देखी।
कई घरों, मंदिरों और दुकानों को नुकसान पहुंचा है। दुकानदारों का सामान पानी और मलबे की चपेट में आकर खराब हो गया। कुछ स्थानीय लोगों ने बाढ़ के दौरान राहत और सहायता समय पर पर्याप्त मात्रा में नहीं मिलने की शिकायत भी की है।
अब लोगों को सबसे अधिक चिंता इस बात की है कि कहीं बारिश होने पर नदी का जलस्तर फिर से न बढ़ जाए। प्रशासन की ओर से लगातार निगरानी और सतर्कता बनाए रखने की जरूरत बनी हुई है।
राहत, सफाई और पुनर्वास अब सबसे बड़ी चुनौती
मंदाकिनी नदी का जलस्तर भले ही तेजी से नीचे आया हो, लेकिन बाढ़ का संकट अभी पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है। रामघाट और प्रभावित ग्रामीण क्षेत्रों में सफाई, पेयजल, राहत सामग्री, स्वास्थ्य सुरक्षा और बुनियादी सुविधाओं की बहाली सबसे महत्वपूर्ण चुनौती बनी हुई है।
प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में खाद्य सामग्री उपलब्ध कराने, पेयजल की व्यवस्था करने और सफाई अभियान चलाने का काम जारी है। दूसरी ओर, तहसील स्तर पर नुकसान का सर्वे कराकर प्रभावित परिवारों को आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
चित्रकूट में मंदाकिनी की इस महाबाढ़ ने एक बार फिर प्राकृतिक आपदा के सामने मानवीय व्यवस्थाओं की सीमाओं को उजागर किया है। नदी का पानी अब घट रहा है, लेकिन बाढ़ अपने पीछे तबाही, कीचड़, टूटी सड़कें, क्षतिग्रस्त पुल और हजारों लोगों की चिंता छोड़ गई है।
फिलहाल प्रशासन की नजर मंदाकिनी के जलस्तर पर बनी हुई है। प्रभावित लोगों की उम्मीद अब राहत, पुनर्वास और नुकसान की भरपाई से जुड़ी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक सरकारी सहायता कितनी तेजी और प्रभावी ढंग से पहुंचती है।

























