चित्रकूट

20 वर्षों की सेवा के बाद भी नहीं मिला अधिकार : नियमितीकरण की मांग को लेकर ग्राम रोजगार सेवकों का प्रदर्शन

मुख्यमंत्री के नाम सीडीओ को सौंपा ज्ञापन, 10 सूत्रीय मांगों पर जल्द निर्णय की मांग

चित्रकूट में ग्राम रोजगार सेवकों ने नियमितीकरण, राज्य कर्मचारी का दर्जा, एचआर पॉलिसी लागू करने और मानदेय वृद्धि समेत 10 सूत्रीय मांगों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। ग्राम रोजगार सेवक पंचायत मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के नेतृत्व में सैकड़ों रोजगार सेवकों ने विकास भवन पहुंचकर मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। रोजगार सेवकों का कहना है कि वे पिछले लगभग 20 वर्षों से मनरेगा और ग्रामीण विकास योजनाओं के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं, लेकिन अब तक उन्हें स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिला है। मांगें पूरी न होने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी भी दी गई।

रिपोर्ट: संजय सिंह राणा

चित्रकूट उत्तर प्रदेश में संविदा पर कार्यरत लगभग 36 हजार ग्राम रोजगार सेवकों ने अपनी विभिन्न लंबित मांगों को लेकर सोमवार को जोरदार प्रदर्शन किया। नियमितीकरण, राज्य कर्मचारी का दर्जा, मानव संसाधन नीति (एचआर पॉलिसी) लागू करने तथा मानदेय वृद्धि सहित 10 सूत्रीय मांगों को लेकर ग्राम रोजगार सेवकों ने मुख्यमंत्री के नाम संबोधित ज्ञापन मुख्य विकास अधिकारी (सीडीओ) को सौंपा।

विकास भवन पहुंचे सैकड़ों रोजगार सेवक

ग्राम रोजगार सेवक पंचायत मित्र वेलफेयर एसोसिएशन के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में चित्रकूट जिले के विभिन्न विकासखंडों से करीब दो सौ ग्राम रोजगार सेवक विकास भवन पहुंचे। प्रदर्शन के दौरान रोजगार सेवकों ने अपनी मांगों के समर्थन में नारे लगाए और सरकार से शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने की अपील की।

संगठन के जिला अध्यक्ष गौरीशंकर यादव ने कहा कि ग्राम रोजगार सेवक लंबे समय से सरकार और प्रशासन के बीच ग्रामीण विकास योजनाओं को धरातल पर उतारने का काम कर रहे हैं। इसके बावजूद उनकी समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है।

मनरेगा की सफलता में ग्राम रोजगार सेवकों की अहम भूमिका

गौरीशंकर यादव ने बताया कि ग्राम रोजगार सेवक पिछले लगभग 20 वर्षों से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के संचालन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। श्रमिकों के पंजीकरण, जॉब कार्ड संबंधी कार्य, विकास परियोजनाओं की निगरानी तथा योजनाओं के क्रियान्वयन में उनकी जिम्मेदारी अत्यंत महत्वपूर्ण है।

उन्होंने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार उपलब्ध कराने और विकास कार्यों को गति देने में ग्राम रोजगार सेवकों का योगदान किसी से छिपा नहीं है। इसके बावजूद उन्हें आज तक नियमित कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल पाया है।

सरकारी आश्वासनों के बावजूद नहीं हुआ समाधान

जिला अध्यक्ष ने कहा कि मुख्यमंत्री द्वारा पूर्व में ग्राम रोजगार सेवकों का मानदेय बढ़ाने, एचआर पॉलिसी लागू करने और सेवा संबंधी समस्याओं का समाधान करने का आश्वासन दिया गया था। लेकिन अब तक इन आश्वासनों को अमल में नहीं लाया गया है।

इसी कारण प्रदेशभर के ग्राम रोजगार सेवकों में असंतोष बढ़ रहा है। उनका कहना है कि वर्षों से सेवा देने के बाद भी उन्हें नौकरी की सुरक्षा और सम्मानजनक वेतन नहीं मिल रहा है।

नियमितीकरण और राज्य कर्मचारी का दर्जा प्रमुख मांग

प्रदर्शनकारी रोजगार सेवकों ने कहा कि उनकी प्रमुख मांगों में नियमितीकरण, राज्य कर्मचारी का दर्जा, एचआर पॉलिसी लागू करना, मानदेय में वृद्धि, सेवा सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा लाभ शामिल हैं।

उन्होंने कहा कि संविदा कर्मी होने के कारण उनके भविष्य को लेकर हमेशा असमंजस बना रहता है। कई रोजगार सेवक वर्षों से एक ही पद पर कार्य कर रहे हैं, लेकिन उन्हें स्थायी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलतीं।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो तेज होगा आंदोलन

मुख्यमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में रोजगार सेवकों ने मांग की कि उनकी समस्याओं का जल्द समाधान किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने सकारात्मक निर्णय नहीं लिया तो आंदोलन को प्रदेशव्यापी स्तर पर और अधिक तेज किया जाएगा।

रोजगार सेवकों ने कहा कि वे अपने अधिकारों के लिए लोकतांत्रिक तरीके से संघर्ष कर रहे हैं और जब तक उनकी मांगें पूरी नहीं होंगी, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। प्रदर्शन के बाद प्रतिनिधिमंडल ने मुख्य विकास अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर मुख्यमंत्री तक अपनी बात पहुंचाने का अनुरोध किया।

प्रदेश के हजारों ग्राम रोजगार सेवकों की निगाहें अब सरकार के निर्णय पर टिकी हैं। यदि उनकी मांगों पर सकारात्मक पहल होती है तो इससे न केवल रोजगार सेवकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि ग्रामीण विकास योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को भी मजबूती मिलेगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button