भोजली महोत्सव समिति तोरवा ने मनाया 21वां भव्य भोजली महोत्सव, छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति की दिखी अनूठी छटा

बिलासपुर के तोरवा में आयोजित 21वें भोजली महोत्सव में पारंपरिक वेशभूषा में भोजली लेकर मंच पर प्रस्तुति देती महिलाएं और बालिकाएं।

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कोटा विधायक अटल श्रीवास्तव सहित अनेक अतिथियों ने की सहभागिता, भोजली प्रतियोगिता में सुमन पटेल रहीं प्रथम

ब्यूरो रिपोर्ट | बिलासपुर। छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला, लोक संस्कृति, पारंपरिक लोकाचार और सामाजिक विरासत को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से भोजली महोत्सव समिति तोरवा, बिलासपुर द्वारा 21वें भोजली महोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बड़ी संख्या में महिलाओं, युवाओं, बच्चों और क्षेत्रवासियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। पारंपरिक भोजली गीतों, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों और भोजली विसर्जन ने पूरे आयोजन को छत्तीसगढ़ी संस्कृति के रंग में रंग दिया।

महोत्सव में लोक परंपरा और आधुनिक सामाजिक चेतना का सुंदर समन्वय देखने को मिला। आयोजन के दौरान महिलाओं और विभिन्न समूहों द्वारा सजाई गई भोजलियों ने लोगों का विशेष ध्यान आकर्षित किया। भोजली प्रतियोगिता के माध्यम से प्रतिभागियों ने अपनी कला, रचनात्मकता और छत्तीसगढ़ की पारंपरिक संस्कृति के प्रति गहरे लगाव का परिचय दिया।

मुख्य अतिथि अटल श्रीवास्तव ने लोक संस्कृति के संरक्षण पर दिया जोर

कार्यक्रम के मुख्य अतिथि कोटा विधायक एवं वरिष्ठ नेता श्री अटल श्रीवास्तव ने अपने संबोधन में छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति और पारंपरिक पर्वों के संरक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ की वास्तविक पहचान उसकी समृद्ध लोक कला, लोकगीत, लोकनृत्य, लोकपरंपराओं और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी हुई है।

उन्होंने कहा कि भोजली जैसे पारंपरिक आयोजन नई पीढ़ी को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं। आधुनिकता के दौर में जब पारंपरिक लोकाचार धीरे-धीरे बदलते जा रहे हैं, ऐसे सांस्कृतिक आयोजन अपनी पहचान और परंपराओं को सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

विधायक अटल श्रीवास्तव ने भोजली महोत्सव समिति तोरवा द्वारा लगातार किए जा रहे प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर आयोजित ऐसे महोत्सव समाज को एकजुट करने के साथ-साथ सांस्कृतिक चेतना को भी मजबूत बनाते हैं।

लोक कलाकारों की प्रस्तुति ने बांधा समां

भोजली महोत्सव के दौरान लोक कलाकार फूल भंवरा श्री चंदन यादव एवं बाल मुकुंद पटेल की सहभागिता और प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को विशेष आकर्षण प्रदान किया। छत्तीसगढ़ी लोक संस्कृति और लोक कलाओं से जुड़े कार्यक्रमों ने उपस्थित लोगों को अपनी पारंपरिक विरासत की समृद्धि का अनुभव कराया।

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लोकगीतों और पारंपरिक सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भोजली पर्व की महत्ता और उसकी लोकजीवन से जुड़ी परंपराओं को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने कलाकारों की प्रस्तुतियों का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।

किसान और मित्रता के भाव से जुड़ा है भोजली पर्व : शंकर यादव

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे शंकर यादव ने भोजली पर्व के सांस्कृतिक और सामाजिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ का लोक पर्व भोजली केवल एक धार्मिक अथवा सांस्कृतिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह किसान जीवन, प्रकृति और आपसी मित्रता के भाव से भी जुड़ा हुआ पर्व है।

उन्होंने कहा कि भोजली छत्तीसगढ़ के लोकजीवन की उस परंपरा का प्रतीक है, जिसमें प्रकृति के प्रति सम्मान, कृषि जीवन से जुड़ाव और सामाजिक संबंधों की आत्मीयता दिखाई देती है। इस प्रकार के पर्व हमारी लोक संस्कृति की समृद्ध परंपराओं को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का काम करते हैं।

तोरवा में व्यवस्थित भोजली घाट निर्माण की उठी मांग

कार्यक्रम में शामिल प्रसिद्ध समाजसेवी एवं उद्योगपति श्री प्रवीण झा ने तोरवा क्षेत्र में एक व्यवस्थित और सुविधाजनक भोजली घाट के निर्माण की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि क्षेत्र में भोजली पर्व के प्रति लोगों की गहरी आस्था और व्यापक सहभागिता को देखते हुए एक सुव्यवस्थित भोजली घाट का निर्माण किया जाना चाहिए।

उन्होंने इस संबंध में सरकार और संबंधित स्तरों पर चर्चा कर आवश्यक पहल किए जाने की बात कही। उनका मानना था कि यदि क्षेत्र में एक स्थायी और व्यवस्थित भोजली घाट का निर्माण होता है तो इससे पारंपरिक आयोजनों को बेहतर व्यवस्था मिलेगी और स्थानीय संस्कृति को भी प्रोत्साहन प्राप्त होगा।

संस्कृति से समाज में बढ़ती है एकता और भाईचारा : किरण सिंह

कार्यक्रम में उपस्थित समाजसेविका श्रीमती किरण सिंह ने भोजली महोत्सव की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे सांस्कृतिक आयोजन समाज में एकता, भाईचारा और अपनी परंपराओं के प्रति गर्व की भावना को मजबूत करते हैं।

उन्होंने कहा कि लोक पर्व और सांस्कृतिक आयोजन समाज के विभिन्न वर्गों को एक मंच पर लाते हैं। इससे सामाजिक सद्भाव मजबूत होता है और नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति को समझने तथा उससे जुड़ने का अवसर मिलता है।

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प्रमोद नायक और मोती गंगवानी सहित गणमान्य नागरिक रहे उपस्थित

भोजली महोत्सव में वरिष्ठ नेता श्री प्रमोद नायक एवं वार्ड पार्षद श्री मोती गंगवानी सहित अनेक गणमान्य नागरिकों ने सहभागिता की। उपस्थित अतिथियों ने आयोजक भोजली महोत्सव समिति तोरवा के प्रयासों की सराहना करते हुए कहा कि लगातार 21 वर्षों तक इस तरह के सांस्कृतिक आयोजन को जारी रखना अपने आप में महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

अतिथियों ने आयोजन से जुड़े सभी पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों को सफल आयोजन के लिए बधाई दी।

भोजली प्रतियोगिता में सुमन पटेल ने प्राप्त किया प्रथम पुरस्कार

भोजली महोत्सव के प्रमुख आकर्षणों में से एक भोजली प्रतियोगिता रही। प्रतियोगिता में बड़ी संख्या में प्रतिभागियों और समूहों ने हिस्सा लिया। प्रतिभागियों ने अपनी भोजली की सजावट, प्रस्तुति और पारंपरिक स्वरूप के माध्यम से छत्तीसगढ़ी संस्कृति की सुंदर झलक प्रस्तुत की।

प्रतियोगिता के निर्णायक मंडल में डॉ. अलका यादव, श्रीमती चित्रा जी एवं श्रीमती यशोदा सिंह उइके शामिल रहीं। निर्णायकों ने भोजली की सजावट, पारंपरिक स्वरूप, प्रस्तुति और सांस्कृतिक महत्व के विभिन्न पहलुओं को ध्यान में रखते हुए विजेताओं का चयन किया।

भोजली प्रतियोगिता के विजेता इस प्रकार रहे—

  • प्रथम पुरस्कार: सुमन पटेल, तोरवा
  • द्वितीय पुरस्कार: पूर्णिमा पटेल, तोरवा
  • तृतीय पुरस्कार: राधिका ग्रुप, देवरी खुर्द
  • चतुर्थ पुरस्कार: माया विश्वकर्मा

इसके अतिरिक्त सांस्कृतिक सहभागिता और उत्कृष्ट प्रस्तुति के लिए कई प्रतिभागियों एवं समूहों को सांत्वना पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया।

सांत्वना पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रतिभागी—

  • संतोषी भोई, देवरी खुर्द
  • रामप्यारी पटेल, तोरवा
  • स्वाति, तोरवा
  • महादेव ग्रुप, तोरवा
  • उमा रजक ग्रुप, तोरवा

प्रतियोगिता में शामिल सभी प्रतिभागियों ने पारंपरिक भोजली संस्कृति के संरक्षण के प्रति उत्साह और समर्पण का परिचय दिया।

महेंद्र सिंह ध्रुव ने किया प्रभावी मंच संचालन

कार्यक्रम का सफल, रोचक और प्रभावी मंच संचालन महेंद्र सिंह ध्रुव ने किया। उन्होंने छत्तीसगढ़ी लोक परंपराओं, भोजली पर्व के महत्व और आयोजन की सांस्कृतिक विशेषताओं को अपने संचालन के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया।

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उन्होंने अतिथियों का स्वागत करने के साथ-साथ पूरे कार्यक्रम को गरिमापूर्ण और व्यवस्थित रूप से आगे बढ़ाया। मंच संचालन के दौरान भोजली की परंपरा और छत्तीसगढ़ी संस्कृति से जुड़े विभिन्न पक्षों को भी उपस्थित लोगों के सामने रखा गया।

बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं और क्षेत्रवासियों की रही सहभागिता

भोजली महोत्सव को सफल बनाने में स्थानीय नागरिकों और आयोजक समिति के सदस्यों की महत्वपूर्ण भूमिका रही। कार्यक्रम में प्रमुख रूप से गंगेश्वर सिंह, सुनील भोई, नंदकिशोर यादव, ब्रजभूषण सरवन, सुरेश दास, सहदेव केवट, दीपक यादव, छहुरा यादव, बसंत पटेल, रामचरण रजक, कन्हैया पटेल, मनीष यादव, प्रवीण तरुण, श्रीमती रामबाई सैनिक, यशोदा उइके, संतोषी भोई, सुखमत केवट और रामप्यारी पटेल सहित अनेक लोग उपस्थित रहे।

सभी कार्यकर्ताओं और सहयोगियों ने आयोजन को सफल बनाने में सक्रिय भूमिका निभाई।

आने वाले वर्षों में और भव्य होगा भोजली महोत्सव

भोजली महोत्सव समिति तोरवा, बिलासपुर ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी अतिथियों, प्रतिभागियों, कलाकारों, निर्णायकों, सहयोगियों और क्षेत्रवासियों के प्रति आभार व्यक्त किया। समिति ने कहा कि आने वाले वर्षों में भोजली महोत्सव को और अधिक भव्य एवं व्यापक स्वरूप प्रदान करने का प्रयास किया जाएगा।

समिति ने यह भी कहा कि छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, पारंपरिक पर्वों और लोकाचार को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए ऐसे आयोजनों को निरंतर आगे बढ़ाया जाएगा। 21 वर्षों की इस सांस्कृतिक यात्रा को आगे भी समाज के सहयोग से जारी रखने का संकल्प व्यक्त किया गया।

तोरवा में आयोजित यह भोजली महोत्सव केवल एक सांस्कृतिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि छत्तीसगढ़ की लोक परंपराओं, सामाजिक एकता, किसान जीवन और सांस्कृतिक गौरव का उत्सव बनकर सामने आया। महिलाओं, युवाओं और स्थानीय नागरिकों की सक्रिय भागीदारी ने यह संदेश दिया कि अपनी जड़ों और लोक संस्कृति से जुड़ाव आज भी समाज में उतना ही महत्वपूर्ण है।

भोजली महोत्सव समिति तोरवा द्वारा आयोजित 21वें भोजली महोत्सव ने एक बार फिर यह सिद्ध किया कि लोक संस्कृति के संरक्षण के लिए सामूहिक प्रयास और जनभागीदारी सबसे बड़ी शक्ति हैं।

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Author: यायावर

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