जिला बदर बदमाशों का अजीब कारनामा : एक को पत्नी का प्यार खींच लाया, दूसरा बकरीद मनाने पहुंचा घर

लखनऊ में जिला बदर घोषित दो आरोपियों की गिरफ्तारी के मामले पर आधारित फीचर इमेज, जिसमें पुलिसकर्मी, आरोपी और रिपोर्टर कमलेश कुमार चौधरी दिखाई दे रहे हैं।

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कमलेश कुमार चौधरी की रिपोर्ट

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में जिला बदर घोषित किए गए दो व्यक्तियों का जिले की सीमा में दोबारा प्रवेश करना उन्हें भारी पड़ गया। प्रशासनिक आदेशों की अनदेखी कर चोरी-छिपे अपने गांव पहुंचे दोनों आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हैरानी की बात यह रही कि पूछताछ के दौरान दोनों ने जिले में आने के अलग-अलग कारण बताए। एक आरोपी अपनी पत्नी से मिलने आया था, जबकि दूसरा आगामी बकरीद पर्व अपने परिवार के साथ मनाने के लिए घर पहुंचा था।

पुलिस के अनुसार दोनों व्यक्तियों को पहले ही जिला बदर घोषित किया जा चुका था और उन्हें निर्धारित अवधि तक लखनऊ जनपद की सीमा में प्रवेश करने की अनुमति नहीं थी। बावजूद इसके दोनों आरोपी गुप्त रूप से अपने गांव पहुंच गए। सूचना मिलने पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें हिरासत में ले लिया।

संदिग्धों की तलाश में चल रही थी पुलिस जांच

जानकारी के अनुसार मोहनलालगंज थाना क्षेत्र में बुधवार रात पुलिस द्वारा विशेष चेकिंग अभियान चलाया जा रहा था। कनकहा मोड़ के आसपास संदिग्ध व्यक्तियों और वाहनों की गहन जांच की जा रही थी। इसी दौरान पुलिस को एक मुखबिर के माध्यम से महत्वपूर्ण सूचना प्राप्त हुई।

सूचना में बताया गया कि फत्तेखेड़ा गांव के रहने वाले मोहित कुमार और सारिख खान उर्फ शारिक, जिन्हें जिला बदर घोषित किया जा चुका है, चोरी-छिपे गांव में आते-जाते रहते हैं और इस समय अपने घर के आसपास मौजूद हैं। सूचना को गंभीरता से लेते हुए पुलिस ने तत्काल कार्रवाई की योजना बनाई।

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फत्तेखेड़ा गांव में की गई घेराबंदी

सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम तत्काल फत्तेखेड़ा गांव पहुंची। गांव में पहुंचकर पुलिस ने संबंधित स्थानों पर निगरानी बढ़ाई और घेराबंदी कर दी। कुछ ही देर बाद मोहित कुमार के घर के बाहर दोनों व्यक्ति दिखाई दिए।

पुलिस टीम ने बिना समय गंवाए दोनों को मौके पर ही पकड़ लिया। गिरफ्तारी के बाद उन्हें थाने लाया गया, जहां उनसे पूछताछ की गई। जांच के दौरान यह पुष्टि हुई कि दोनों आरोपियों के खिलाफ पहले से जिला बदर की कार्रवाई प्रभावी है।

पत्नी से मिलने आया था मोहित कुमार

पुलिस पूछताछ में मोहित कुमार ने बताया कि वह अपनी पत्नी से मिलने के उद्देश्य से गांव आया था। जिला बदर आदेश के कारण वह लंबे समय से अपने घर और परिवार से दूर रह रहा था। इसी वजह से वह बिना अनुमति लिए अपने गांव पहुंच गया।

हालांकि पुलिस अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि जिला बदर आदेश लागू रहने के दौरान किसी भी व्यक्ति को संबंधित जिले की सीमा में प्रवेश करने के लिए सक्षम अधिकारी से अनुमति लेना आवश्यक होता है। बिना अनुमति प्रवेश करना आदेश का उल्लंघन माना जाता है।

बकरीद मनाने घर पहुंचा था सारिख खान

दूसरे आरोपी सारिख खान उर्फ शारिक ने पूछताछ के दौरान बताया कि वह आगामी बकरीद पर्व अपने परिवार और रिश्तेदारों के साथ मनाने के लिए घर आया था। उसने स्वीकार किया कि उसे जिला बदर आदेश की जानकारी थी, लेकिन पारिवारिक और धार्मिक कारणों से वह गांव पहुंच गया।

पुलिस अधिकारियों के अनुसार त्योहार, पारिवारिक कार्यक्रम या अन्य व्यक्तिगत कारण जिला बदर आदेश के उल्लंघन का वैध आधार नहीं माने जाते। ऐसे मामलों में संबंधित व्यक्ति को पहले प्रशासन से अनुमति प्राप्त करनी होती है।

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गलती स्वीकार कर मांगी माफी

पूछताछ के दौरान दोनों आरोपियों ने पुलिस के सामने अपनी गलती स्वीकार कर ली। उन्होंने माना कि वे बिना किसी सक्षम अनुमति के जिले की सीमा में प्रवेश कर गए थे। दोनों ने अपने कृत्य पर खेद व्यक्त करते हुए माफी भी मांगी।

हालांकि पुलिस ने स्पष्ट किया कि कानून के उल्लंघन के मामलों में केवल माफी मांगना पर्याप्त नहीं होता। जिला बदर आदेश का उल्लंघन एक गंभीर मामला है और इसके लिए कानूनी कार्रवाई की जाती है।

कब जिला बदर घोषित किए गए थे दोनों आरोपी

पुलिस अभिलेखों के अनुसार सारिख खान उर्फ शारिक को उत्तर प्रदेश गुंडा नियंत्रण अधिनियम के तहत 13 मई 2026 को जारी आदेश के अंतर्गत छह माह के लिए जिला बदर घोषित किया गया था।

वहीं मोहित कुमार के खिलाफ भी प्रशासन द्वारा कार्रवाई की गई थी। उसे 17 दिसंबर 2025 को जारी आदेश के तहत जिला बदर किया गया था। दोनों को निर्धारित अवधि तक लखनऊ जिले की सीमा से बाहर रहने का निर्देश दिया गया था।

क्या होता है जिला बदर?

जिला बदर प्रशासन द्वारा अपनाई जाने वाली एक विशेष कानूनी प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और आपराधिक गतिविधियों पर नियंत्रण करना होता है। जिन व्यक्तियों पर लगातार आपराधिक गतिविधियों में शामिल होने या सार्वजनिक शांति भंग करने के आरोप होते हैं, उनके खिलाफ यह कार्रवाई की जाती है।

जिला बदर आदेश के तहत संबंधित व्यक्ति को एक निश्चित अवधि तक जिले की सीमा से बाहर रहने का निर्देश दिया जाता है। यदि वह बिना अनुमति जिले में प्रवेश करता है तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।

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कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए सख्त कार्रवाई

लखनऊ पुलिस का कहना है कि अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला बदर आदेशों का कड़ाई से पालन कराया जा रहा है। ऐसे व्यक्तियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि वे दोबारा किसी आपराधिक गतिविधि में शामिल न हो सकें।

पुलिस अधिकारियों ने कहा कि जिला बदर आदेश का उल्लंघन करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। चाहे कारण पारिवारिक हो, सामाजिक हो या धार्मिक, बिना अनुमति जिले की सीमा में प्रवेश करना कानून का उल्लंघन माना जाएगा।

पुलिस की सतर्कता से खुला मामला

इस पूरे घटनाक्रम में पुलिस की सतर्कता और मुखबिर तंत्र की सक्रियता महत्वपूर्ण साबित हुई। यदि समय रहते सूचना न मिलती तो दोनों आरोपी बिना किसी कार्रवाई के अपने घरों में रह सकते थे।

फिलहाल पुलिस ने दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है और प्रशासन यह सुनिश्चित करने में जुटा है कि जिला बदर आदेशों का प्रभावी अनुपालन हो सके।

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Author: यायावर

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