आजमगढ़

शिक्षा, सेवा और संस्कारों की विरासत के प्रतीक थे पं. विश्वनाथ दुबे, 14वीं पुण्यतिथि पर उमड़ा जनसैलाब

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा — समाज के कमजोर वर्गों के लिए हमेशा खड़े रहे पं. विश्वनाथ दुबे

जगदंबा उपाध्याय की रिपोर्ट

आजमगढ़। शिक्षा, समाजसेवा, ज्योतिष और कर्मकांड के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान बनाने वाले पंडित विश्वनाथ दुबे की 14वीं पुण्यतिथि मंगलवार को श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाई गई। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में क्षेत्र के गणमान्य नागरिक, सामाजिक कार्यकर्ता, शिक्षाविद, राजनीतिक प्रतिनिधि और परिवारजन शामिल हुए। श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने पंडित विश्वनाथ दुबे के व्यक्तित्व और कृतित्व को याद करते हुए उन्हें समाज के लिए प्रेरणास्रोत बताया।

कार्यक्रम का आयोजन अत्यंत सादगी और गरिमामय वातावरण में किया गया, जहां श्रद्धालुओं ने उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। कार्यक्रम की अध्यक्षता समाजवादी पार्टी के महासचिव पं. हरिश प्रसाद दुबे ने की, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में रमाकांत तिवारी और उमाकांत तिवारी मौजूद रहे।

चित्रपट पूजन और माल्यार्पण के साथ कार्यक्रम की शुरुआत

कार्यक्रम की शुरुआत पंडित विश्वनाथ दुबे के चित्रपट पूजन एवं माल्यार्पण से हुई। उनके तीनों पुत्र चंद्रप्रकाश दुबे, सुशील दुबे और डॉ. अनिल कुमार द्विवेदी ने संयुक्त रूप से माल्यार्पण कर अपने पिता को श्रद्धासुमन अर्पित किए। इस दौरान पूरा वातावरण भावुक हो उठा और उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की।

श्रद्धांजलि सभा में वक्ताओं ने कहा कि पं. विश्वनाथ दुबे केवल एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा थे। उन्होंने अपने जीवनकाल में शिक्षा, समाजसेवा और धार्मिक गतिविधियों के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया। उनके जीवन का मूल उद्देश्य समाज के अंतिम व्यक्ति तक सहायता पहुंचाना था।

शिक्षा और समाजसेवा के क्षेत्र में विशेष पहचान

वक्ताओं ने अपने संबोधन में कहा कि पं. विश्वनाथ दुबे एक उत्कृष्ट शिक्षक, विद्वान ज्योतिषाचार्य, कर्मकांड विशेषज्ञ और संवेदनशील समाजसेवी थे। उन्होंने जीवनभर शिक्षा को समाज परिवर्तन का सबसे बड़ा माध्यम माना। क्षेत्र के अनेक विद्यार्थियों को उन्होंने न केवल शिक्षा के लिए प्रेरित किया बल्कि आर्थिक और सामाजिक रूप से भी सहयोग प्रदान किया।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि पं. दुबे का व्यक्तित्व अत्यंत सरल और विनम्र था। वे हमेशा गरीबों, जरूरतमंदों और निर्बल लोगों की मदद के लिए तत्पर रहते थे। यही कारण है कि आज भी लोग उन्हें श्रद्धा और सम्मान के साथ याद करते हैं।

परिवार की एकता बनी चर्चा का विषय

श्रद्धांजलि सभा में कई वक्ताओं ने दुबे परिवार की एकता को समाज के लिए मिसाल बताया। वक्ताओं ने कहा कि पं. विश्वनाथ दुबे के परिवार में आज भी लगभग 42 सदस्य एक साथ रहते हैं और एक ही रसोई का भोजन करते हैं। वर्तमान समय में जब संयुक्त परिवारों का स्वरूप तेजी से समाप्त हो रहा है, ऐसे में यह परिवार सामाजिक समरसता और पारिवारिक एकजुटता का उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।

लोगों ने कहा कि पं. विश्वनाथ दुबे ने अपने परिवार को केवल संस्कार ही नहीं दिए, बल्कि आपसी प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना भी दी। यही कारण है कि आज उनका पूरा परिवार सामाजिक और सांस्कृतिक मूल्यों को जीवंत बनाए हुए है।

48 वर्षों तक संभाली बेलहा दुबे वंश की जिम्मेदारी

कार्यक्रम में वक्ताओं ने बताया कि पं. विश्वनाथ दुबे लगभग 48 वर्षों तक बेलहा दुबे वंश के अध्यक्ष रहे। उन्होंने अपने कार्यकाल में समाज को संगठित रखने और सामाजिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वर्तमान में उनके भतीजे चंद्रदीप दुबे इस दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं।

वक्ताओं ने कहा कि पं. दुबे के नेतृत्व में समाज में भाईचारा और सामाजिक समन्वय की भावना लगातार मजबूत हुई। वे हर वर्ग और समुदाय के लोगों के बीच समान रूप से लोकप्रिय थे।

अभय तिवारी के संचालन ने बांधा समां

कार्यक्रम का संचालन पूर्वांचल के लोकप्रिय एंकर अभय तिवारी ने किया। उनके प्रभावशाली और भावनात्मक संचालन ने पूरे कार्यक्रम को विशेष गरिमा प्रदान की। उन्होंने पं. विश्वनाथ दुबे के जीवन से जुड़े कई प्रेरक प्रसंग साझा किए, जिन्हें सुनकर उपस्थित लोग भावुक हो उठे।

सभा को मुख्य रूप से अजीत तिवारी, सुरेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, महेश्वरी कांत पांडेय, सत्यप्रकाश सिंह और वरिष्ठ पत्रकार जगदंबा उपाध्याय ने संबोधित किया। सभी वक्ताओं ने एक स्वर में कहा कि पं. विश्वनाथ दुबे का जीवन समाज के लिए प्रेरणा है और आने वाली पीढ़ियों को उनके आदर्शों से सीख लेनी चाहिए।

डॉ. अनिल कुमार द्विवेदी ने जताया आभार

कार्यक्रम के अंत में कैरियर प्वाइंट आजमगढ़ के निदेशक एवं पं. विश्वनाथ दुबे के छोटे पुत्र डॉ. अनिल कुमार द्विवेदी ने श्रद्धांजलि सभा में शामिल हुए सभी लोगों के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि उनके पिता ने हमेशा समाज और शिक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी। परिवार उन्हीं मूल्यों और संस्कारों को आगे बढ़ाने का प्रयास कर रहा है।

उन्होंने कहा कि इतने बड़े स्तर पर लोगों का प्रेम और सम्मान यह साबित करता है कि पं. विश्वनाथ दुबे आज भी लोगों के दिलों में जीवित हैं। कार्यक्रम के समापन पर श्रद्धांजलि सभा में मौजूद लोगों ने उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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