इरफान अली लारी की रिपोर्ट
सलेमपुर (देवरिया)। रक्षाबंधन केवल भाई की कलाई पर राखी बांधने का पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, स्नेह, जिम्मेदारी और पारिवारिक रिश्तों की उस आत्मीय परंपरा का उत्सव है, जो भारतीय संस्कृति की संवेदनशीलता को पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाती है। इसी भावभूमि को जीवंत करते हुए नगर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थान जी एम एकेडमी सीनियर सेकेंडरी स्कूल, सलेमपुर में रक्षाबंधन के अवसर पर राखी निर्माण प्रतियोगिता और विविध सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भव्य आयोजन किया गया।

विद्यालय परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में परंपरा और आधुनिक रचनात्मकता का सुंदर संगम देखने को मिला। विद्यार्थियों ने अपने हाथों से राखियां तैयार कर जहां अपनी कला और कल्पनाशीलता का परिचय दिया, वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से भाई-बहन के रिश्ते की भावनात्मक गहराई को भी मंच पर साकार किया। पूरे आयोजन के दौरान विद्यालय परिसर उल्लास, उमंग और आत्मीयता से सराबोर रहा।
रंग-बिरंगे धागों में विद्यार्थियों ने पिरोईं भावनाओं की डोर
राखी निर्माण प्रतियोगिता में कक्षा पहली से लेकर बारहवीं तक के छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने विभिन्न रंगों के धागों, मोतियों, सितारों, सजावटी वस्तुओं और अन्य रचनात्मक सामग्रियों का इस्तेमाल करते हुए आकर्षक राखियां तैयार कीं।
किसी राखी में रंगों का मनोहारी संयोजन दिखाई दिया तो किसी में सादगी के साथ कलात्मकता की झलक मिली। बच्चों ने अपनी कल्पना को आकार देते हुए पारंपरिक राखी को नए रूप और आकर्षक डिजाइन के साथ प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता ने विद्यार्थियों को यह अवसर दिया कि वे केवल बाजार से खरीदी गई वस्तु तक सीमित न रहें, बल्कि अपने हाथों से पर्व की खुशियों को रचें।

विद्यालय के वातावरण में उस समय एक अलग ही दृश्य बन गया, जब विद्यार्थी उत्साहपूर्वक अपनी बनाई राखियों को एक-दूसरे को दिखाते हुए उनकी विशेषताओं पर चर्चा करते नजर आए। इस गतिविधि ने बच्चों में रचनात्मक सोच के साथ-साथ धैर्य, एकाग्रता और श्रम के प्रति सम्मान की भावना को भी मजबूत किया।
जब अपनी बनाई राखियों से सजीं भाई की कलाइयां
राखी निर्माण प्रतियोगिता के बाद अनेक छात्राओं ने अपने हाथों से तैयार की गई राखियां छात्रों की कलाइयों पर बांधीं। इस दौरान भाई-बहन के बीच स्नेह, विश्वास और शुभकामनाओं का आत्मीय वातावरण दिखाई दिया।
राखी बांधते हुए बहनों ने भाइयों के सुखद, स्वस्थ और उज्ज्वल भविष्य की कामना की। वहीं भाइयों ने भी बहनों के प्रति सम्मान और स्नेह व्यक्त किया। विद्यालय परिसर में सजी राखियों की रंगीन दुनिया के बीच रिश्तों की भावनात्मक गर्माहट ने पूरे आयोजन को यादगार बना दिया।
यह आयोजन विद्यार्थियों के लिए महज प्रतियोगिता नहीं रहा, बल्कि भारतीय पारिवारिक मूल्यों को समझने और उन्हें व्यवहार में अनुभव करने का अवसर भी बना।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने बांधा समां
रक्षाबंधन समारोह में नर्सरी से कक्षा पांचवीं तक के विद्यार्थियों ने मनमोहक सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर कार्यक्रम में चार चांद लगा दिए। नन्हे विद्यार्थियों की प्रस्तुतियों ने जहां दर्शकों के चेहरे पर मुस्कान बिखेरी, वहीं भाई-बहन के रिश्ते पर आधारित गीतों और कविताओं ने कार्यक्रम को भावनात्मक गहराई प्रदान की।

कार्यक्रम का शुभारंभ कुंजल एवं समूह द्वारा प्रस्तुत सरस्वती वंदना से हुआ। सुर और भाव से सजी इस प्रस्तुति ने वातावरण को आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक रंग प्रदान किया।
इसके बाद नर्सरी और एलकेजी की जाह्नवी एवं समूह ने ‘फूलों का तारों का सबका कहना है’ गीत पर मनमोहक समूह नृत्य प्रस्तुत किया। नन्हे कलाकारों की मासूम अदाओं और आत्मविश्वासपूर्ण प्रस्तुति ने उपस्थित लोगों का मन मोह लिया।
यूकेजी की चैत्राली एवं समूह ने भी आकर्षक नृत्य प्रस्तुत कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। छोटे-छोटे कदमों और तालबद्ध प्रस्तुतियों ने दर्शकों को खूब आनंदित किया।
गीतों में झलका भाई-बहन के रिश्ते का स्नेह
कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए शिल्पी एवं समूह तथा जिया एवं समूह ने ‘धागों से बांधा’ गीत पर शानदार नृत्य प्रस्तुत किया। प्रस्तुति में राखी के धागे को केवल एक सजावटी वस्तु के रूप में नहीं, बल्कि भाई-बहन के अटूट प्रेम और विश्वास की प्रतीकात्मक डोर के रूप में प्रस्तुत किया गया।
मंच पर कलाकारों की भावभंगिमाओं और तालमेल ने भाई-बहन के रिश्ते की आत्मीयता को प्रभावशाली ढंग से सामने रखा। दर्शकों ने तालियों के साथ बच्चों का उत्साह बढ़ाया।
भाषण और कविता ने बढ़ाई कार्यक्रम की साहित्यिक गरिमा
सांस्कृतिक कार्यक्रम में मनोरंजन के साथ विचार और साहित्य का सुंदर समावेश भी देखने को मिला। कक्षा तीसरी और चौथी के शिवांश तिवारी तथा शगुफ्ता अंबर ने रक्षाबंधन के महत्व पर प्रभावशाली भाषण प्रस्तुत किया।
विद्यार्थियों ने अपने संबोधन में रक्षाबंधन को भारतीय संस्कृति और पारिवारिक मूल्यों से जोड़ते हुए भाई-बहन के बीच प्रेम, सम्मान और जिम्मेदारी की भावना पर प्रकाश डाला। उनकी प्रस्तुति से यह संदेश उभरा कि त्योहार केवल उत्सव मनाने का अवसर नहीं होते, बल्कि वे हमारी सामाजिक और सांस्कृतिक स्मृतियों को भी जीवित रखते हैं।

वहीं कक्षा चौथी की सान्वी पांडेय एवं आराध्या मिश्रा ने भाई-बहन के रिश्ते पर सुंदर हिंदी कविता प्रस्तुत की। कविता की भावपूर्ण प्रस्तुति ने समारोह में साहित्यिक रंग घोल दिया और उपस्थित लोगों को भाई-बहन के रिश्ते की संवेदनशीलता से जोड़ दिया।
प्रधानाचार्य ने सराही विद्यार्थियों की रचनात्मकता
कार्यक्रम के दौरान विद्यालय के प्रधानाचार्य मोहन द्विवेदी ने विभिन्न कक्षाओं का निरीक्षण किया और विद्यार्थियों द्वारा तैयार की गई राखियों को देखा। उन्होंने बच्चों की मेहनत, कल्पनाशीलता और उत्साह की सराहना की।
इस अवसर पर उन्होंने विद्यार्थियों को रक्षाबंधन की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रक्षाबंधन भाई और बहन के पवित्र प्रेम का पर्व है। यह पर्व हमें मर्यादा, अनुशासन और आपसी सम्मान के साथ एक-दूसरे के प्रति जिम्मेदारी निभाने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि विद्यालयों में भारतीय पर्वों और परंपराओं से जुड़े ऐसे आयोजन विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस प्रकार की गतिविधियों से बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास, सहयोग की भावना और अपनी संस्कृति एवं परंपराओं के प्रति सम्मान विकसित होता है।
उत्सव से मिला सीख और संस्कार का संदेश
जी एम एकेडमी में आयोजित रक्षाबंधन समारोह ने यह संदेश भी दिया कि शिक्षा केवल पुस्तकों और कक्षाओं तक सीमित नहीं है। जब बच्चे अपनी संस्कृति से जुड़े पर्वों को रचनात्मक गतिविधियों और सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के माध्यम से समझते हैं, तो उनके भीतर संस्कार और सामाजिक मूल्यों की समझ अधिक सहजता से विकसित होती है।
राखी निर्माण प्रतियोगिता ने जहां बच्चों के हुनर को मंच दिया, वहीं सांस्कृतिक कार्यक्रमों ने उन्हें अपनी प्रतिभा अभिव्यक्त करने का अवसर प्रदान किया। गीत, नृत्य, भाषण और कविता के माध्यम से विद्यार्थियों ने रक्षाबंधन के अलग-अलग भावों को सामने रखा।
प्रेम, परंपरा और उल्लास से यादगार बना आयोजन
समारोह के समापन तक विद्यालय परिसर में रक्षाबंधन की खुशियां बनी रहीं। विद्यालय के छात्र-छात्राओं, शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने एक-दूसरे को रक्षाबंधन की बधाई एवं शुभकामनाएं दीं। हर ओर उत्साह और उमंग का वातावरण दिखाई दिया।
जी एम एकेडमी का यह आयोजन इस मायने में भी महत्वपूर्ण रहा कि इसमें भारतीय संस्कृति, पारिवारिक मूल्यों, रचनात्मक शिक्षा और साहित्यिक अभिव्यक्ति को एक ही मंच पर स्थान मिला। विद्यार्थियों की बनाई राखियों में जहां उनकी कल्पना के रंग दिखाई दिए, वहीं सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में रिश्तों की मिठास और परंपरा की सुगंध महसूस हुई।
रक्षाबंधन का यह समारोह बच्चों के लिए केवल एक दिन का उत्सव नहीं, बल्कि प्रेम, सृजन, सहयोग, सम्मान और संस्कारों को समझने का अनुभव बन गया। राखी के नाजुक धागों ने विद्यालय परिसर में रिश्तों की मजबूत डोर का एहसास कराया और यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति की सुंदरता उसके त्योहारों में ही नहीं, बल्कि उन भावनाओं में भी बसती है जिन्हें ये त्योहार पीढ़ियों तक जीवित रखते हैं।


























One Response
बहुत अच्छी प्रतियोगिता
बच्चों की प्रस्तुति बहुत शानदार