रिपोर्ट—इरफान अली लारी
बरहज। कलाई पर साजी राखी, आँखों में अपनापन और रिश्ते में विश्वास का भाव… जी.एम. अकादमी बरहज में रक्षाबंधन का उत्सव एक समारोह में नहीं आया, बल्कि भाई-बहन के पवित्र रिश्ते, भारतीय संस्कार और गुरु-शिष्य की आत्मीयता को एक साथ जोड़ा गया। स्कूल परिसर में जब तारा ने अपने छात्र-छात्राओं की कलाई पर दोस्ती की राखियां बांधीं तो पूरा सौहार्दपूर्ण माहौल से भर उठा लिया। इसके बाद जब मोराती ने स्कूल के सम्माननीय पोलिस डॉ. को बुलाया। मिश्रा की कलाई पर भी राखी बांधी, तो जश्न का यह माहौल राजवंश राजेश की व्यापकता और सम्मान कुमार की ऐसी तस्वीरें बन गईं, जिन्होंने पूरे समारोह को खास बना दिया। राखी के बैंड-बाजे में साकीत प्रेम, विश्वास और जिम्मेदारी के संदेश को छात्रों ने अपने अंदाज में जीवंत किया। कहीं बहन के चेहरे पर भाई के प्रति स्नेह था तो कहीं भाई की आंखों में बहन की सुरक्षा और सम्मान का संकल्प। रंग-बिरंगी राखियों से साजी कलाईयों और जोश से डूबते राखियों के बीच जी.एम. अकादमी बरहज का परिसर भारतीय संस्कृति के जीवंत रंगों में रंगा नजर आया।
इस आयोजन में यह भी कहा जा रहा है कि स्कूल ने रक्षाबंधन को केवल भाई-बहन के पारंपरिक उत्सव के रूप में नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास, सम्मान, संस्कार और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देने वाले सांस्कृतिक उत्सव के रूप में छात्रों को सामने रखा। यहाँ के छात्रों ने भाई-बहन के पवित्र भाई-बहन की सुंदर परंपरा को जीवंत किया, जहाँ के छात्रों ने अपनी दोस्ती की सुरक्षा, सम्मान और सहयोग का संकल्प लिया। विद्यार्थियों के उत्साह और उमंग ने कार्यक्रम को जीवंत बना दिया। स्कूल परिसर में पूरे कार्यक्रम के दौरान आत्मीयता और उल्लास का ऐसा माहौल रहा, जिसमें शिक्षा के साथ भारतीय संस्कृति और पारिवारिक विरासत की झलक भी साफ दिखाई दी।

प्रोग्राम का सबसे आकर्षक और मनमोहक आकर्षण उस समय सामने आया, जब पुतली ने स्कूल के डॉक्टर को बुलाया । कुमार मिश्रा ने अपने प्रति अपने स्नेह, सम्मान और आत्मीयता का परिचय दिया। इस पहल ने मित्रता की पारंपरिक भावना को गुरु-शिष्य संबंधों की गरिमा से जोड़ा। विद्यार्थियों ने भी छात्रों के स्नेह को आत्मीयता से स्वीकार करते हुए उन्हें मित्रता की शपथ दिलाई। उनके लिए यह उद्देश्य केवल राखी बांधने की भावना का प्रतीक नहीं है, बल्कि विद्यालय परिवार के बीच विश्वास, अपनत्व और सम्मान की भावना का प्रतीक है।
डॉक्टर डॉ. मिश्रा ने छात्रों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि रक्षाबंधन के बंधन में बंधने का राजेश पर्व नहीं, बल्कि प्रेम, विश्वास कुमार, सम्मान, जिम्मेदारी और मित्रवत सहयोग के अटूट बंधन का प्रतीक है। उन्होंने छात्रों से भारतीय संस्कृति एवं संस्कारों से जुड़े रहने का आग्रह करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल किताबी ज्ञान प्राप्त करना नहीं है। एक कार्यकर्ता का व्यक्तित्व वैसे ही पूर्ण होता है, जब उसके अंदर मानवीय संवेदनाएं, अच्छे संस्कार, सामाजिक उत्तरदायित्व और अधिकारियों के प्रति सम्मान की भावना भी विकसित होती है।
उन्होंने कहा कि भारतीय पर्वों का उद्देश्य यही है कि वे जीवन के महत्वपूर्ण मूल्यों को सहज रूप में नई पीढ़ी तक पहुंचाते हैं। मित्रता भाई-बहन के संबंधों को स्नेह और विश्वास से मजबूत करने के साथ हमें यह भी याद रखें कि रिश्ते अधिकार से नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और सम्मान से मजबूत होते हैं। ऐसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से बच्चों को अपने समूह से जोड़ना उनके सर्वांगीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
रक्षाबंधन उत्सव के दौरान छात्रों को विशेष उत्साह देखने को मिला। अभिनेत्रियों ने अपने प्रशिक्षकों के लिए राखीयां बांधीं और कलाकारों ने भी इस अवसर को आत्मीयता के साथ मनाया। कार्यक्रमों में दिखाई दिया उत्साह इस बात का प्रमाण है कि आधुनिक समय में भी भारतीय सांस्कृतिक उत्सव बच्चों के मन में गहरे ब्रह्मांड वाले स्थान होते हैं। स्कूल परिसर में साजी राखियां, हीरा माता और आत्मीय वातावरण ने पूरे समारोह को यादगार बनाया।

प्रतिष्ठित, भारतीय संस्कृति में केवल एक पर्व नहीं, बल्कि राष्ट्र की गरिमा को समझना और भूमिका निभाना का अवसर है। भाई-बहन के बचपन की यादों से लेकर जीवनभर का भरोसा शामिल होता है। राखी का धागा इसी विशेषता को अंकित रूप से मजबूत करता है। जी.एम. अकादमी बरहज में छात्रों ने समान भावना को अपने कार्यक्रम के माध्यम से सामने रखा। यहां राखी बांधने की परंपरा के साथ सुरक्षा, सम्मान, सहयोग और स्नेह का संदेश भी दिखाई दिया।
विद्यालय का यह आयोजन शिक्षा और संस्कार के बीच सुंदर संतुलन का उदाहरण बना। आज जब शिक्षा के ढांचे में तेजी से आधुनिक तकनीक, प्रतिस्पर्धा और रोजगारपरक ज्ञान की ओर वृद्धि हुई है, ऐसे में छात्रों को अपनी संस्कृति और विरासत से भी जोड़ना जरूरी है। रक्षाबंधन जैसे त्योहार बच्चों को बिना किसी पिज्जा के विस्फोट, संवेदनाओं और सामाजिक मूल्यों की समझ प्रदान करते हैं। यही कारण है कि जी.एम. अकादमी बरहज के इस आयोजन में केवल एक स्कूली कार्यक्रम और सांस्कृतिक और सांस्कृतिक अनुभव को बदल दिया गया।
पुरावशेषों को पुतली द्वारा राखी बांधने का प्रसंग भी इसी तरह व्यापक भावना को सामने लाता है। गुरु और शिष्य के बीच शिक्षा का संबंध तो होता है, लेकिन उनके साथ विश्वास, मार्गदर्शन और सम्मान के सिद्धांत भी जुड़े होते हैं। दोस्ती की ओर से दोस्ती का परिचय दिया गया इसी आत्मीय संबंध का प्रतीक बना। इस दृश्य में कार्यक्रम में उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध करने के साथ यह भी संदेश दिया गया कि विद्यालय एक ऐसी जगह है, जहां ज्ञान के साथ-साथ संबंधों और संवेदनाओं का भी निर्माण होता है।
रक्षाबंधन उत्सव के माध्यम से छात्रों ने यह संदेश दिया कि भारतीय संस्कृति की सुंदरता हमारे बीच में है, जो लोग एक-दूसरे से जुड़े हुए हैं। राखी का छोटा-सा धागा भाई-बहन के रिश्ते से आगे बढ़कर प्रेम, विश्वास, सुरक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी की बड़ी भावना का प्रतीक बन जाता है। विद्यार्थी ने पर्व में इसी भावना को प्रमाणित करते हुए कहा।
कार्यक्रम ने विद्यालय के महाविद्यालयों और विद्यार्थियों के बीच आपसी सहयोग की भावना को मजबूत किया। नियमित इंस्टीट्यूट और एसोसिएशन से अलग सांस्कृतिक वातावरण में इस उत्सव का आयोजन छात्रों के लिए आनंद के साथ सीखने का अवसर भी बना। इस दौरान उन्होंने कहा कि त्योहारों का वास्तविक उद्देश्य केवल उत्सव और मनोरंजन नहीं है, बल्कि जीवन में शामिल होना भी शामिल है।
जी.एम. अकादमी बरहज का मित्रवत उत्सव , अंतिम संस्कार और संस्कार—इन तीनों के सुंदर संगम के रूप में सामने आए। राखी बांधने से लेकर पुतली डॉक्टर तक। कुमार मिश्रा के प्रति स्नेह और सम्मान व्यक्त करने तक, कार्यक्रम के हर अवलोकन पर राजेश आत्मीयता। छात्रों के उत्साहवर्धन कार्यक्रम में नई ऊर्जा भरी, जबकि स्कूल की ओर से दिया गया संस्कार और संस्कृति का संदेश इसे जोड़ता रहा।
इस कार्यक्रम में एक बार फिर यह कहा गया है कि शिक्षा केवल पुस्तकालय और पर्यटन तक सीमित नहीं है। शिक्षा का वास्तविक उद्देश्य ऐसे व्यक्तित्व का निर्माण करना है, जो ज्ञानवान के साथ संस्कारवान और जिम्मेदार भी हो। जी.एम. अकादमी बरहज में आयोजित किया गया रक्षाबंधन उत्सव, ऐसी ही सोच की खूबसूरत अभिव्यक्ति। राखी के धागों में बंधा प्रेम, कलाई पर सजा विश्वास और मन में बसे संस्कारों ने इस आयोजन को लंबे समय तक याद रखने वाला सांस्कृतिक उत्सव बनाया।

























