बिजली के लिए हाहाकार, मंत्री जी बोले- ‘प्रदेश में रिकॉर्ड स्तर पर हो रही बिजली आपूर्ति’

ऊर्जा मंत्री के बयान, बिजली टावर और रिपोर्टर चुन्नीलाल प्रधान की तस्वीर के साथ उत्तर प्रदेश बिजली संकट पर बनाई गई फीचर इमेज

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चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में भीषण गर्मी के बीच बिजली संकट लगातार गहराता जा रहा है। एक तरफ गांवों से लेकर शहरों तक अघोषित बिजली कटौती को लेकर लोगों में भारी नाराजगी है, तो दूसरी ओर प्रदेश सरकार बिजली आपूर्ति के नए रिकॉर्ड गिनाकर अपनी उपलब्धियां बता रही है। बिजली गुल होने से आमजन का जनजीवन प्रभावित है। किसान सिंचाई को लेकर परेशान हैं, व्यापारी कारोबार पर असर की शिकायत कर रहे हैं और शहरी इलाकों में लोग रातभर जागने को मजबूर हैं।

इसी बीच प्रदेश के ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने दावा किया है कि उत्तर प्रदेश ने बिजली आपूर्ति के क्षेत्र में नया इतिहास रच दिया है। उन्होंने कहा कि राज्य में रिकॉर्ड स्तर पर बिजली सप्लाई की जा रही है और प्रदेश लगातार नए कीर्तिमान बना रहा है। हालांकि सरकार के इन दावों और जनता की जमीनी परेशानियों के बीच बड़ा विरोधाभास साफ दिखाई दे रहा है।

रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति का सरकार का दावा

ऊर्जा मंत्री एके शर्मा के अनुसार रविवार को प्रदेश में बिजली आपूर्ति ने नया रिकॉर्ड कायम किया। उन्होंने बताया कि रविवार सुबह 2 बजकर 33 मिनट पर प्रदेश की पीक बिजली आपूर्ति 31 हजार मेगावाट के पार पहुंच गई। इसके बाद रात 10 बजकर 1 मिनट पर उत्तर प्रदेश ने अपना ही पुराना रिकॉर्ड तोड़ते हुए 31,774 मेगावाट की पीक विद्युत आपूर्ति दर्ज की।

ऊर्जा मंत्री ने इसे प्रदेश के इतिहास की सबसे बड़ी बिजली आपूर्ति बताया। उनका कहना है कि यह उपलब्धि देश के सबसे बड़े बिजली वितरण राज्यों में उत्तर प्रदेश को शामिल करती है। उन्होंने कहा कि बिजली उत्पादन, ट्रांसमिशन और वितरण व्यवस्था में किए गए सुधारों का परिणाम है कि प्रदेश बढ़ती मांग के बावजूद रिकॉर्ड बिजली उपलब्ध करा पा रहा है।

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जमीनी हकीकत से परेशान जनता

सरकारी दावों के बावजूद प्रदेश के कई जिलों से लगातार बिजली कटौती की शिकायतें सामने आ रही हैं। ग्रामीण इलाकों में घंटों बिजली गायब रहने से लोग परेशान हैं। शहरों के बाहरी क्षेत्रों और कस्बों में भी बिजली व्यवस्था चरमराई हुई बताई जा रही है।

भीषण गर्मी के कारण तापमान लगातार 42 से 46 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। ऐसे में बिजली कटौती लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन गई है। कई जगहों पर ट्रांसफॉर्मर फुंकने और फीडर खराब होने की शिकायतें भी सामने आई हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में किसान सिंचाई के लिए रातभर बिजली आने का इंतजार करते देखे जा रहे हैं।

जनता का आरोप है कि शिकायत करने के बावजूद बिजली विभाग की ओर से समय पर समाधान नहीं किया जाता। कई जिलों में लोग सड़क पर उतरकर प्रदर्शन भी कर चुके हैं। सोशल मीडिया पर भी बिजली संकट को लेकर सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री योगी ने दिए सख्त निर्देश

बढ़ती शिकायतों और गर्मी के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी बिजली व्यवस्था की समीक्षा की। ऊर्जा मंत्री एके शर्मा और राज्य मंत्री कैलाश सिंह राजपूत की मौजूदगी में हुई बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को गांव और शहर दोनों क्षेत्रों में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि आमजन, किसान, व्यापारी और उद्योगों को बिजली संकट का सामना न करना पड़े, इसके लिए हर स्तर पर सतत निगरानी रखी जाए। उन्होंने ऊर्जा विभाग को पूरी संवेदनशीलता और तत्परता के साथ कार्य करने के निर्देश दिए।

सीएम योगी ने ट्रांसमिशन नेटवर्क को और मजबूत करने पर जोर देते हुए फीडरवार जवाबदेही तय करने के निर्देश दिए। साथ ही ट्रांसफॉर्मर और फीडर खराब होने पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा।

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उत्पादन क्षमता में 86 प्रतिशत वृद्धि का दावा

सरकार की ओर से जारी आधिकारिक बयान में बताया गया कि उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड की कुल विद्युत उत्पादन क्षमता अब बढ़कर 13,388 मेगावाट हो गई है।

सरकार का दावा है कि वर्ष 2022 की तुलना में 2026 तक उत्पादन क्षमता में करीब 86 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके अलावा गैर पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों से भी लगभग 10 हजार मेगावाट बिजली प्राप्त हो रही है।

अधिकारियों ने बैठक में जानकारी दी कि अप्रैल और मई महीने में तापमान बढ़ने के कारण बिजली की मांग तेजी से बढ़ी है। पहले जहां प्रतिदिन 501 मिलियन यूनिट बिजली की मांग थी, वहीं अब यह बढ़कर 561 मिलियन यूनिट प्रतिदिन तक पहुंच गई है।

12 राज्यों से पावर बैंकिंग की तैयारी

बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए मुख्यमंत्री ने 12 राज्यों से पावर बैंकिंग के जरिए बिजली आपूर्ति प्रबंधन करने के निर्देश दिए हैं। सरकार का मानना है कि इससे गर्मी के मौसम में अतिरिक्त बिजली उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।

बैठक में यह भी बताया गया कि उत्तर प्रदेश 20 से 22 मई के बीच देश में बिजली मांग पूरी करने के मामले में दूसरे स्थान पर रहा। सरकार इसे अपनी उपलब्धि के रूप में पेश कर रही है।

स्मार्ट मीटर को लेकर सरकार का नया फैसला

प्रदेश में स्मार्ट मीटर को लेकर भी सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारी दी है। अधिकारियों के मुताबिक अब तक प्रदेश में 89.23 लाख स्मार्ट मीटर लगाए जा चुके हैं। हालांकि स्मार्ट प्रीपेड मीटर को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतों को देखते हुए सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। अब सभी स्मार्ट प्रीपेड मीटर उपभोक्ताओं को पहले की तरह पोस्टपेड व्यवस्था में परिवर्तित कर दिया गया है।

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सरकार के अनुसार जून 2026 से स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं को हर महीने की 1 से 10 तारीख के बीच पोस्टपेड बिल जारी किए जाएंगे। बिल की सूचना एसएमएस, व्हाट्सऐप और ई-मेल के माध्यम से दी जाएगी।

शिकायत निस्तारण के लिए विशेष कैंप

ऊर्जा विभाग ने स्मार्ट मीटर संबंधी शिकायतों के समाधान के लिए 15 मई से 30 जून तक प्रदेशभर में विशेष कैंप लगाने की घोषणा की है। इन कैंपों में उपभोक्ताओं की समस्याओं का निस्तारण किया जा रहा है।

सरकार का कहना है कि बिजली व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और उपभोक्ता हितैषी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं। लेकिन जमीनी स्तर पर लगातार हो रही कटौती और खराब व्यवस्था सरकार के दावों पर सवाल खड़े कर रही है।

आंकड़ों और हकीकत के बीच फंसी जनता

प्रदेश सरकार रिकॉर्ड बिजली आपूर्ति और उत्पादन क्षमता बढ़ने के आंकड़े पेश कर रही है, लेकिन आम लोगों की परेशानी कम होती दिखाई नहीं दे रही। सवाल यह उठ रहा है कि जब रिकॉर्ड स्तर पर बिजली आपूर्ति हो रही है, तो फिर गांवों और कस्बों में घंटों कटौती क्यों हो रही है?

बढ़ती गर्मी में बिजली संकट अब केवल तकनीकी मुद्दा नहीं रह गया, बल्कि यह जनता के धैर्य और सरकार की जवाबदेही से जुड़ा बड़ा सवाल बन चुका है। आने वाले दिनों में गर्मी और बढ़ने की संभावना है। ऐसे में बिजली व्यवस्था सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनती जा रही है।

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Author: यायावर

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