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बिजली संकट बना आफत ; तपती गर्मी में लखनऊ की जनता बेहाल, सड़कों पर फूटा गुस्सा

चुन्नीलाल प्रधान की रिपोर्ट

लखनऊ। उत्तर भारत समेत पूरे उत्तर प्रदेश में इस समय भीषण गर्मी ने जनजीवन को संकट में डाल दिया है। राजधानी लखनऊ में तापमान 42 से 45 डिग्री सेल्सियस के बीच पहुंच चुका है। ऐसे हालात में बिजली व्यवस्था के चरमराने से लोगों की मुश्किलें कई गुना बढ़ गई हैं। राजधानी के फैजुल्लागंज, पारा, सआदतगंज, जानकीपुरम, चिनहट, नीलमथा, राजाजीपुरम और सरोजनी नगर समेत दर्जनों इलाकों में पिछले कई दिनों से अघोषित बिजली कटौती का सिलसिला जारी है। कहीं 10 घंटे तो कहीं 24 से 36 घंटे तक बिजली गुल रहने से लोग सड़कों पर उतरने को मजबूर हो गए हैं।

भीषण गर्मी और उमस के बीच बिजली संकट ने राजधानी की व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। हालात इतने खराब हो चुके हैं कि कई इलाकों में लोगों ने बिजली विभाग के खिलाफ उग्र प्रदर्शन शुरू कर दिए। कहीं पावर हाउस का घेराव हुआ तो कहीं अधिकारियों को बंधक बना लिया गया। कुछ स्थानों पर जेई की गाड़ी के टायर तक पंक्चर कर दिए गए। लगातार बिगड़ते हालात को देखते हुए विभाग को दूसरे जिलों से अतिरिक्त अभियंताओं की तैनाती करनी पड़ी है, लेकिन अब तक राहत के कोई ठोस संकेत नहीं दिखाई दे रहे।

फैजुल्लागंज में फूटा जनता का गुस्सा

राजधानी के फैजुल्लागंज और श्याम विहार कॉलोनी में शनिवार को फिर भारी विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। स्थानीय लोगों का आरोप है कि बीते दो-तीन दिनों में मुश्किल से चार से पांच घंटे ही बिजली सप्लाई मिली। गर्मी से परेशान महिलाएं देर रात तक सड़कों पर बैठकर प्रदर्शन करती रहीं।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बिजली न रहने से पानी की सप्लाई पूरी तरह ठप हो चुकी है। इनवर्टर जवाब दे चुके हैं और छोटे बच्चे, बुजुर्ग तथा बीमार लोग सबसे अधिक परेशान हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि बिजली विभाग के अधिकारियों को फोन करने पर या तो फोन नहीं उठता या फिर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।

स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि फैजुल्लागंज पावर हाउस के बाहर पुलिस बल तैनात करना पड़ा। बीते बुधवार, गुरुवार और शनिवार को यहां कई बार हंगामा हुआ। प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक भी हुई।

पारा में जेई को बंधक बनाने तक पहुंचा मामला

पारा क्षेत्र के बद्धेश्वर चौराहे पर बिजली संकट को लेकर लोगों का गुस्सा चरम पर पहुंच गया। स्थानीय लोगों ने बिजली विभाग के जूनियर इंजीनियर की गाड़ी रोक ली और उसके टायर पंक्चर कर दिए। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक इलाके में बिजली नहीं आएगी, अधिकारी को जाने नहीं दिया जाएगा।

इस दौरान काफी देर तक सड़क पर हंगामा चलता रहा। बाद में किसी तरह अधिकारियों और पुलिस ने स्थिति को संभाला। यह घटना साफ संकेत देती है कि लगातार बिजली कटौती से लोगों का धैर्य टूटता जा रहा है।

सआदतगंज और अंबरगंज में अंधेरे में गुजरी रातें

सआदतगंज थाना क्षेत्र के रामप्रसाद बिस्मिल नगर और अंबरगंज इलाके में 21 मई की रात से बिजली व्यवस्था बुरी तरह प्रभावित रही। ओवरहेड तार बार-बार टूटते रहे, जिससे मरम्मत के कुछ ही देर बाद सप्लाई दोबारा बाधित हो जाती थी।

हालात इतने खराब हो गए कि कई जगह स्थानीय लोग खुद ही टूटे तारों को सड़क से ऊपर बांधने लगे ताकि आवागमन बाधित न हो। लोगों का कहना है कि विभाग की टीमें देर से पहुंचती हैं और स्थायी समाधान के बजाय अस्थायी मरम्मत कर लौट जाती हैं।

ट्रांसफार्मर फुंकने और आग लगने की घटनाएं बढ़ीं

नीलमथा की शाही नूर कॉलोनी में ट्रांसफार्मर खराब होने से करीब 500 से अधिक घर 26 घंटे तक अंधेरे में डूबे रहे। बिजली न होने से जलापूर्ति भी प्रभावित हुई और लोगों को पानी के लिए भटकना पड़ा।

चिनहट के अशरफ विहार इलाके में नौ घंटे तक बिजली सप्लाई बाधित रही। वहीं ओवरब्रिज के नीचे लगे 100 केवीए ट्रांसफार्मर में अचानक आग लग गई। लालबाग और चौक क्षेत्र में केबल और तार जलकर सड़क पर गिर पड़े। अकबरी गेट जैसे व्यस्त इलाके में बड़ा हादसा होते-होते बच गया।

इन घटनाओं ने राजधानी की जर्जर बिजली व्यवस्था की पोल खोल दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि बढ़ते लोड के मुकाबले बिजली ढांचा बेहद कमजोर पड़ चुका है।

हादसों में कर्मचारी भी झुलसे, संविदा लाइनमैन की मौत

बिजली व्यवस्था सुधारने के दौरान कई कर्मचारी भी हादसों का शिकार हो रहे हैं। जानकीपुरम क्षेत्र में लाइनमैन कमलेश और गुड्डू फ्लैशओवर की चपेट में आकर गंभीर रूप से झुलस गए।

सबसे दुखद घटना फैजुल्लागंज उपकेंद्र में सामने आई, जहां संविदा लाइनमैन उदय राज की 11 केवी लाइन पर काम करते समय करंट लगने से मौत हो गई। इस घटना ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली और सुरक्षा इंतजामों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

पहली गर्मी में ही फेल हुई वर्टिकल व्यवस्था

लखनऊ में हाल ही में लागू की गई वर्टिकल बिजली व्यवस्था पर भी अब सवाल उठने लगे हैं। दावा किया गया था कि इस नई व्यवस्था से बिजली सप्लाई बेहतर होगी और फाल्ट की समस्याएं कम होंगी, लेकिन पहली ही भीषण गर्मी में पूरी प्रणाली लड़खड़ाती नजर आ रही है।

बिजली विभाग के अधिकारियों का कहना है कि लगातार बढ़ते लोड, पुरानी लाइनें और कम क्षमता वाले ट्रांसफार्मर मुख्य समस्या हैं। कई इलाकों में बिजली की मांग अचानक बढ़ने से सिस्टम ओवरलोड हो गया है।

स्थिति संभालने के लिए मध्यांचल विद्युत वितरण निगम ने शाहजहांपुर, बरेली, बदायूं, पीलीभीत और सीतापुर जैसे जिलों से 44 अभियंताओं को लखनऊ बुलाया है। इंद्रलोक कॉलोनी समेत कई इलाकों में बड़े ट्रांसफार्मर लगाने का प्रस्ताव भी भेजा गया है, लेकिन इसका फायदा मिलने में अभी समय लग सकता है।

छतों और पार्कों में रात गुजारने को मजबूर लोग

भीषण गर्मी और बिजली संकट के कारण लोगों का जीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। रात में घरों के भीतर रहना मुश्किल हो गया है। बड़ी संख्या में लोग छतों, बालकनियों और पार्कों में रात गुजारने को मजबूर हैं।

इनवर्टर लगातार बिजली न आने से चार्ज नहीं हो पा रहे। पानी की सप्लाई बाधित होने से घरेलू कामकाज भी प्रभावित हैं। सबसे अधिक परेशानी बुजुर्गों, छोटे बच्चों और मरीजों को उठानी पड़ रही है।

जलकल विभाग कई इलाकों में पानी के टैंकर भेज रहा है, लेकिन बढ़ती मांग के मुकाबले यह व्यवस्था नाकाफी साबित हो रही है।

राजनीति भी गर्माई, अखिलेश यादव ने सरकार को घेरा

बिजली संकट को लेकर प्रदेश की राजनीति भी तेज हो गई है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री Akhilesh Yadav ने इसे “महा विद्युत आपदा” करार दिया है। उन्होंने राज्य सरकार, बिजली मंत्री और ठेकेदारों को जिम्मेदार ठहराते हुए कहा कि भ्रष्टाचार और खराब प्रबंधन के कारण जनता भीषण संकट झेल रही है।

उन्होंने स्मार्ट मीटर योजना पर भी सवाल उठाते हुए इसे “महाभ्रष्टाचार” बताया। विपक्ष लगातार सरकार पर बिजली व्यवस्था को लेकर हमलावर है, जबकि सरकार का दावा है कि हालात सुधारने के लिए युद्धस्तर पर काम किया जा रहा है।

बढ़ती गर्मी के बीच बड़ी चुनौती

मौसम विभाग पहले ही आने वाले दिनों में और अधिक गर्मी पड़ने की चेतावनी दे चुका है। ऐसे में बिजली व्यवस्था को पटरी पर लाना सरकार और विभाग के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है।

यदि जल्द स्थायी समाधान नहीं निकाला गया तो राजधानी समेत पूरे प्रदेश में जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है। फिलहाल लोग यही उम्मीद कर रहे हैं कि भीषण गर्मी के इस दौर में उन्हें कम से कम नियमित बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं मिल सकें।

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