शंकराचार्य का सरकार पर तीखा हमला, गोसंरक्षण से लेकर राम मंदिर ट्रस्ट तक उठाए कई सवाल

गोंडा के मेहनौन में आयोजित कार्यक्रम में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती मंच से संबोधित करते हुए, साथ में रिपोर्टर दुर्गा प्रसाद शुक्ला की फोटो।

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रिपोर्ट: दुर्गा प्रसाद शुक्ला

उत्तर प्रदेश के गोंडा जिले के मेहनौन विधानसभा क्षेत्र में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने प्रदेश और केंद्र सरकार से जुड़े कई मुद्दों पर खुलकर अपनी राय रखी। अपने संबोधन और बाद में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने गोसंरक्षण, राम मंदिर ट्रस्ट, अयोध्या से जुड़े विवाद और प्रदेश की राजनीति पर बेबाक टिप्पणी की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पहले दिए गए अपने चर्चित “कालनेमि” वाले बयान को भी उन्होंने दोहराया और कहा कि वह आज भी अपने उस कथन पर कायम हैं।

‘कालनेमि’ वाले बयान पर कायम रहे शंकराचार्य

शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के बारे में जो टिप्पणी पहले की थी, उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति बाहर से संत या योगी का स्वरूप धारण करे, लेकिन उसके कार्य और व्यवहार उस स्वरूप के अनुरूप न हों, तो समाज उसे उसी आधार पर परखेगा।

उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष का अपमान करना नहीं, बल्कि आचरण और व्यवहार के आधार पर मूल्यांकन करने की बात कहना है। उनके अनुसार, किसी भी सार्वजनिक पद पर बैठे व्यक्ति के कार्य ही उसकी वास्तविक पहचान बनते हैं।

गोहत्या और तस्करी पर सरकार को घेरा

अपने संबोधन में शंकराचार्य ने प्रदेश में गोसंरक्षण के मुद्दे को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने कहा कि सरकार सार्वजनिक रूप से गाय को माता का दर्जा देने की बात करती है, लेकिन दूसरी ओर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों से गोहत्या, गोतस्करी और अवैध मांस कारोबार की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं।

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उन्होंने कहा कि यदि सरकार इन गतिविधियों पर पूरी तरह रोक लगाने में सफल नहीं हो पा रही है, तो यह गंभीर चिंता का विषय है। उनका मानना है कि केवल घोषणाएं पर्याप्त नहीं होतीं, बल्कि धरातल पर प्रभावी कार्रवाई दिखाई देनी चाहिए। उन्होंने गोसंरक्षण को लेकर प्रशासनिक व्यवस्था को और अधिक सख्त बनाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

राम मंदिर ट्रस्ट को लेकर निष्पक्ष जांच की मांग

शंकराचार्य ने अयोध्या स्थित राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंदिर निर्माण और दान से जुड़े विषयों पर समय-समय पर जो सवाल उठते रहे हैं, उनकी निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होनी चाहिए।

उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम लेते हुए कहा कि यदि किसी भी स्तर पर अनियमितता या विवाद की शिकायत सामने आती है तो संबंधित मामलों की स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए। उनका कहना था कि धार्मिक संस्थानों की विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए पारदर्शिता सबसे महत्वपूर्ण है और यदि कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई होनी चाहिए।

धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री के बयान पर भी दी प्रतिक्रिया

बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री से जुड़े सवाल पर भी शंकराचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि अयोध्या से जुड़े विवादित विषयों पर धीरेंद्र कृष्ण शास्त्री ने अब तक खुलकर कोई स्पष्ट टिप्पणी नहीं की है।

शंकराचार्य का कहना था कि इस पूरे मामले में कई प्रभावशाली लोगों के नाम सामने आने की संभावना जताई जाती रही है। उनके अनुसार, यही कारण हो सकता है कि कुछ लोग इस विषय पर सार्वजनिक रूप से बोलने से बच रहे हैं। हालांकि उन्होंने किसी व्यक्ति पर प्रत्यक्ष आरोप लगाने से परहेज किया।

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अखिलेश यादव के साथ मतभेद समाप्त होने का दावा

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को लेकर पूछे गए प्रश्न पर शंकराचार्य ने कहा कि पहले जो मतभेद थे, अब वे समाप्त हो चुके हैं।

उन्होंने बताया कि अखिलेश यादव ने पूर्व में हुई कुछ बातों पर खेद व्यक्त किया है और धार्मिक आयोजनों में भी सहयोग दिया है। इसलिए अब वह पुराने विवादों को आगे बढ़ाने के पक्ष में नहीं हैं। उनके अनुसार, समाज और धर्म के व्यापक हितों को ध्यान में रखते हुए संवाद और सहयोग की भावना अधिक महत्वपूर्ण है।

डिप्टी सीएम की टिप्पणी पर भी रखा पक्ष

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री बृजेश पाठक के हालिया बयान को लेकर पूछे गए सवाल पर भी शंकराचार्य ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार उपमुख्यमंत्री की टिप्पणी उनके लिए नहीं थी, बल्कि उसका संदर्भ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से जुड़ा हुआ था।

उन्होंने कहा कि वह अपने विचारों को लेकर पूरी तरह स्पष्ट हैं और भविष्य में भी सार्वजनिक मंचों पर अपनी बात रखते रहेंगे। उनके अनुसार, लोकतांत्रिक व्यवस्था में सभी को अपनी राय रखने का अधिकार है और वह उसी अधिकार का प्रयोग कर रहे हैं।

धार्मिक मंच से राजनीतिक मुद्दों पर भी चर्चा

कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य के वक्तव्यों में धार्मिक विषयों के साथ-साथ राजनीतिक और प्रशासनिक मुद्दों की भी चर्चा प्रमुखता से रही। उन्होंने कई विषयों पर सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाए और पारदर्शिता, जवाबदेही तथा प्रभावी प्रशासन की आवश्यकता पर बल दिया।

उनके बयानों के बाद राजनीतिक हलकों में भी चर्चा तेज हो गई है। विशेष रूप से गोसंरक्षण, राम मंदिर ट्रस्ट और मुख्यमंत्री को लेकर दोहराए गए उनके बयान आने वाले दिनों में राजनीतिक बहस का विषय बन सकते हैं।

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गोंडा के मेहनौन में आयोजित कार्यक्रम के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कई संवेदनशील विषयों पर खुलकर अपनी राय रखी। उन्होंने गोसंरक्षण की स्थिति, राम मंदिर ट्रस्ट की कार्यप्रणाली, अयोध्या से जुड़े विवाद, प्रदेश सरकार की नीतियों और राजनीतिक संबंधों पर अपने विचार सामने रखे। हालांकि उनके कई बयान राजनीतिक रूप से तीखे रहे, लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि वे अपने विचारों पर कायम हैं और आगे भी जनता के सामने अपनी बात रखते रहेंगे। उनके वक्तव्यों के बाद प्रदेश की राजनीतिक और धार्मिक दोनों ही क्षेत्रों में नई बहस छिड़ने की संभावना है।

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Author: यायावर

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