डराती गंगा चेतावनी बिंदु के बेहद करीब ; वरुणा के पलट प्रवाह से निचले इलाकों में बढ़ी मुश्किल

वाराणसी में बढ़ते गंगा जलस्तर और बाढ़ के खतरे को दर्शाती तस्वीर, रिपोर्टर दुर्गा प्रसाद शुक्ला के साथ

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दुर्गा प्रसाद शुक्ला की रिपोर्ट

वाराणसी। मानसून की सक्रियता के बीच वाराणसी में एक बार फिर गंगा का जलस्तर तेजी से बढ़ने लगा है। पहाड़ी और मैदानी क्षेत्रों में लगातार हो रही बारिश तथा सहायक नदियों में बढ़ते जलप्रवाह का असर अब काशी के नदी किनारे बसे इलाकों में साफ दिखाई देने लगा है। गंगा के बढ़ते पानी ने वाराणसी के प्रसिद्ध घाटों को अपनी चपेट में ले लिया है, जबकि वरुणा नदी में गंगा के पलट प्रवाह से तटवर्ती और निचले इलाकों में जलभराव की स्थिति गंभीर होती जा रही है।

सोमवार को गंगा के जलस्तर में लगातार वृद्धि दर्ज की गई। केंद्रीय जल आयोग के आंकड़ों के अनुसार जलस्तर चेतावनी बिंदु की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उपलब्ध शाम के आंकड़ों में वाराणसी में गंगा के बढ़ने की रफ्तार करीब 2 सेंटीमीटर प्रति घंटे दर्ज की गई, जबकि प्रयागराज में भी तेजी से बढ़ाव जारी रहा। इस प्रवृत्ति को देखते हुए प्रशासन ने तटवर्ती क्षेत्रों में निगरानी और राहत तैयारियों को और तेज कर दिया है। ताजा रिपोर्टों में भी गंगा के चेतावनी स्तर के करीब पहुंचने और निचले इलाकों में लोगों के सुरक्षित स्थानों की ओर जाने की जानकारी सामने आई है।

चेतावनी बिंदु की ओर तेजी से बढ़ रही गंगा

वाराणसी में गंगा के जलस्तर को लेकर इस समय सबसे बड़ी चिंता उसकी लगातार बढ़ती रफ्तार है। आपके द्वारा उपलब्ध कराए गए केंद्रीय जल आयोग के शाम छह बजे के आंकड़ों के अनुसार गंगा का जलस्तर 70.10 मीटर दर्ज किया गया। वाराणसी में चेतावनी बिंदु 70.262 मीटर, जबकि खतरे का निशान 71.262 मीटर निर्धारित है।

इस लिहाज से गंगा चेतावनी बिंदु से महज कुछ सेंटीमीटर नीचे और खतरे के निशान से लगभग 1.16 मीटर नीचे थी। जलस्तर में दो सेंटीमीटर प्रति घंटे की गति से वृद्धि जारी रहने पर चेतावनी स्तर पार होने की आशंका स्वाभाविक रूप से बढ़ गई है।

हालांकि, जलस्तर में नदी के ऊपरी हिस्सों से आने वाले पानी, बारिश और बैराजों से होने वाले डिस्चार्ज का प्रभाव भी पड़ता है। इसलिए प्रशासन और केंद्रीय जल आयोग द्वारा लगातार निगरानी की जा रही है। सोमवार को प्रकाशित विभिन्न ताजा रिपोर्टों में भी गंगा के तेजी से चेतावनी स्तर की तरफ बढ़ने की पुष्टि हुई है।

84 घाटों पर बढ़ा बाढ़ का असर

गंगा के बढ़ते जलस्तर का सबसे प्रत्यक्ष प्रभाव वाराणसी के घाटों पर दिखाई दे रहा है। काशी के नदी किनारे बसे प्रसिद्ध घाट, जहां सामान्य दिनों में श्रद्धालुओं, पर्यटकों, नाविकों और स्थानीय लोगों की भारी भीड़ रहती है, अब बढ़ते पानी की वजह से प्रभावित हैं।

ताजा रिपोर्टों के अनुसार वाराणसी के सभी 84 घाटों पर बाढ़ के पानी का असर पहुंच चुका है। कई घाटों का संपर्क आसपास के रास्तों से प्रभावित हुआ है। नमो घाट सहित कई स्थानों पर पानी लगातार ऊपर चढ़ रहा है।

गंगा का पानी बढ़ने से नाव संचालन भी प्रभावित हुआ है। नाविकों की रोजमर्रा की आय पर इसका सीधा असर पड़ा है। घाटों पर छोटी दुकानें चलाने वाले दुकानदार, पंडा-पुरोहित, फूल-माला विक्रेता, धार्मिक सामग्री बेचने वाले लोग और पर्यटन आधारित दूसरे व्यवसाय भी बाढ़ की स्थिति से प्रभावित हो रहे हैं।

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काशी की अर्थव्यवस्था का एक बड़ा हिस्सा गंगा और घाटों से जुड़े धार्मिक एवं पर्यटन कारोबार पर निर्भर है। ऐसे में नदी का बढ़ता पानी केवल बाढ़ का खतरा ही नहीं बढ़ाता, बल्कि हजारों लोगों की आजीविका को भी प्रभावित करता है।

वरुणा में पलट प्रवाह ने बढ़ाई चिंता

गंगा के बढ़ते जलस्तर के साथ वाराणसी में वरुणा नदी भी उफान पर है। गंगा का पानी बढ़ने के कारण वरुणा में पलट प्रवाह की स्थिति पैदा हो रही है। इसका असर नदी किनारे बसे निचले इलाकों में दिखाई दे रहा है।

वरुणा किनारे के कई मोहल्लों में जलभराव की स्थिति उत्पन्न हुई है और लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर जाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। ताजा रिपोर्टों में भी वरुणा के आसपास के निचले इलाकों में पानी पहुंचने और लोगों के विस्थापन की जानकारी सामने आई है।

स्थिति इसलिए भी गंभीर है क्योंकि गंगा और वरुणा दोनों नदियों का जलस्तर एक साथ बढ़ने से निचले क्षेत्रों से पानी की निकासी प्रभावित हो सकती है। ऐसे में लगातार बारिश होने पर जलभराव का दायरा और बढ़ने की आशंका बनी हुई है।

कोनिया से सामने घाट तक बढ़ा खतरा

गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर से वाराणसी के कई निचले इलाके संवेदनशील हो गए हैं। कोनिया, सामने घाट, रमना, कैवल्य धाम, नगवा सहित नदी किनारे के कई क्षेत्रों में लोगों की चिंता बढ़ गई है।

इन क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों ने पानी बढ़ने की आशंका के बीच सुरक्षित स्थानों का रुख करना शुरू कर दिया है। कुछ परिवार राहत शिविरों में पहुंचे हैं, जबकि कई लोगों ने अपने रिश्तेदारों या परिचितों के घरों में अस्थायी शरण ली है।

प्रशासन की प्राथमिकता फिलहाल ऐसे परिवारों को समय रहते सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाना है, ताकि जलस्तर में अचानक वृद्धि की स्थिति में किसी तरह की जनहानि न हो।

राहत शिविरों में पहुंचे प्रभावित परिवार

बाढ़ की आशंका को देखते हुए वाराणसी जिला प्रशासन ने पहले से ही राहत शिविरों की व्यवस्था शुरू कर दी है। सोमवार की रिपोर्टों के अनुसार प्रभावित परिवारों को राहत शिविरों में पहुंचाया जा रहा है। कुछ इलाकों से परिवारों के सुरक्षित स्थानों पर जाने की प्रक्रिया भी जारी रही।

प्रशासन ने जिले में कुल 61 बाढ़ राहत शिविरों को चिह्नित किया है। इन शिविरों में प्रभावित लोगों के लिए भोजन, पेयजल, प्रकाश, स्वच्छता, प्राथमिक चिकित्सा और दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने की तैयारी की गई है।

इसके अलावा बाढ़ की स्थिति पर स्थानीय स्तर से नजर रखने के लिए 21 बाढ़ चौकियां स्थापित की गई हैं। इन चौकियों के माध्यम से जलस्तर, आवागमन, सुरक्षा और संभावित जलभराव वाले इलाकों की निगरानी की जा रही है।

198 नावें राहत और बचाव के लिए तैयार

संभावित बाढ़ को देखते हुए प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य के लिए 198 नावों की व्यवस्था की है। आवश्यकता पड़ने पर इन नावों का उपयोग लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने, राहत सामग्री वितरित करने और बचाव अभियान चलाने के लिए किया जाएगा।

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प्रशासन ने नाव संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया है। प्रशिक्षित नाविकों और संबंधित टीमों की मदद से संवेदनशील इलाकों में राहत एवं बचाव अभियान चलाने की तैयारी है।

इसके साथ ही एनडीआरएफ, जल पुलिस और पीएसी की टीमें भी जरूरत पड़ने पर तत्काल कार्रवाई के लिए तैयार रखी गई हैं। इससे स्पष्ट है कि प्रशासन संभावित बाढ़ को केवल जलस्तर की समस्या मानकर नहीं चल रहा, बल्कि इसे बहुआयामी आपदा की तरह लेकर तैयारी कर रहा है।

डीएम सत्येंद्र कुमार ने राहत शिविरों का किया निरीक्षण

गंगा और वरुणा के बढ़ते जलस्तर के बीच जिलाधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बाढ़ राहत शिविरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। उन्होंने प्राथमिक विद्यालय सरैंया तथा यूनाइटेड पब्लिक स्कूल में बनाए गए राहत शिविरों का औचक निरीक्षण किया।

डीएम ने शिविर में मौजूद लोगों से बातचीत कर भोजन, पेयजल, प्रकाश, शौचालय, साफ-सफाई और दूसरी आवश्यक सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। उन्होंने मौके पर मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों से भी क्षेत्र की स्थिति के संबंध में जानकारी प्राप्त की।

जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राहत शिविरों में आने वाले किसी भी व्यक्ति को मूलभूत सुविधाओं की कमी नहीं होनी चाहिए। प्रशासन का उद्देश्य केवल लोगों को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना नहीं, बल्कि वहां उनके रहने की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित करना भी है।

प्राथमिक विद्यालय सरैंया में बढ़ेंगी सुविधाएं

निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने प्राथमिक विद्यालय सरैंया के परिसर में जरूरत के अनुसार टेंट लगवाने का निर्देश दिया। साथ ही शिविर में शौचालयों की संख्या बढ़ाने के निर्देश भी दिए गए।

स्थानीय स्तर से नावों की आवश्यकता बताए जाने पर पर्याप्त नावों की व्यवस्था कराने को कहा गया। प्रशासन को यह भी निर्देश दिया गया कि बाढ़ प्रभावित परिवारों तक राहत सामग्री और जरूरी सेवाएं समय से पहुंचें।

डीएम ने बच्चों की शिक्षा को लेकर भी विशेष निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि बाढ़ की वजह से बच्चों की पढ़ाई बाधित नहीं होनी चाहिए। राहत शिविरों में रह रहे बच्चों के लिए भी शैक्षणिक गतिविधियां जारी रखने की व्यवस्था सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया।

कम्युनिटी किचन से मिलेगा पौष्टिक भोजन

बाढ़ राहत शिविरों में रहने वाले लोगों के भोजन की व्यवस्था के लिए प्रशासन ने कम्युनिटी किचन को सक्रिय रखने के निर्देश दिए हैं। जिलाधिकारी ने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित परिवारों को प्रतिदिन पौष्टिक और गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराया जाए।

राहत शिविरों में साफ पेयजल, बिजली और प्रकाश की व्यवस्था के साथ स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है। प्रशासन का मानना है कि लंबे समय तक जलभराव रहने की स्थिति में संक्रमण और संक्रामक बीमारियों का खतरा भी बढ़ सकता है। इसलिए स्वास्थ्य एवं स्वच्छता व्यवस्था को बाढ़ प्रबंधन का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है।

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स्वास्थ्य और पशुधन पर भी प्रशासन की नजर

संभावित बाढ़ को देखते हुए चिकित्सा विभाग को आवश्यक दवाओं और प्राथमिक उपचार की व्यवस्था के निर्देश दिए गए हैं। राहत शिविरों में रहने वाले लोगों के स्वास्थ्य पर निगरानी रखने की तैयारी है।

इसी तरह पशुपालन विभाग को भी संवेदनशील इलाकों में पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा गया है। बाढ़ की स्थिति में इंसानों के साथ-साथ पशुधन को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना भी प्रशासन की प्राथमिकता में है।

पशुओं के लिए चारा और पेयजल की व्यवस्था पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जरूरत पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी की गई है।

61 राहत शिविरों को जरूरत के अनुसार किया जाएगा सक्रिय

प्रशासन ने स्थिति के अनुसार अतिरिक्त राहत शिविरों को सक्रिय करने की तैयारी भी रखी है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि जलस्तर में वृद्धि की स्थिति में निचले इलाकों के लोगों को अंतिम समय का इंतजार किए बिना सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।

बाढ़ चौकियों को स्थानीय परिस्थितियों की निरंतर जानकारी रखने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व, नगर निगम, चिकित्सा, पशुपालन और अन्य संबंधित विभागों के अधिकारियों को आपसी समन्वय के साथ काम करने को कहा गया है।

इससे पहले भी संभावित बाढ़ को देखते हुए वाराणसी प्रशासन ने गंगा और वरुणा के तटवर्ती क्षेत्रों का निरीक्षण कर संवेदनशील स्थानों की पहचान और राहत-बचाव व्यवस्था को मजबूत करने के निर्देश दिए थे।

काशी के लिए अगले कुछ घंटे बेहद अहम

वाराणसी में गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के करीब पहुंचने के बाद आने वाले घंटे प्रशासन और नदी किनारे रहने वाले लोगों के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। जलस्तर में लगातार बढ़ोतरी होने पर निचले इलाकों में पानी और तेजी से फैल सकता है।

गंगा के साथ वरुणा में पलट प्रवाह की स्थिति पहले से चिंता बढ़ा रही है। ऐसे में नदी किनारे बसे लोगों को प्रशासन की चेतावनियों को गंभीरता से लेने और आवश्यकता पड़ने पर तत्काल सुरक्षित स्थानों पर जाने की सलाह दी जा रही है।

फिलहाल प्रशासन की नजर केंद्रीय जल आयोग के हर नए अपडेट पर है। राहत शिविर, बाढ़ चौकियां, नावें, बचाव दल और विभागीय टीमें तैयार रखी गई हैं। दूसरी ओर घाटों और निचले इलाकों में बढ़ता पानी काशीवासियों के लिए मानसून की एक और बड़ी चुनौती का संकेत दे रहा है।

गंगा के जलस्तर में वृद्धि यदि इसी गति से जारी रहती है तो चेतावनी बिंदु पार होने के बाद प्रशासन को और अधिक इलाकों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की जरूरत पड़ सकती है। इसलिए इस समय सबसे जरूरी है कि तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोग सतर्क रहें, अफवाहों से बचें और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का पालन करें।

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Author: यायावर

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