इरफान अली लारी की रिपोर्ट
सलेमपुर। अंतरिक्ष विज्ञान और आधुनिक तकनीक के क्षेत्र में भारत की बढ़ती उपलब्धियों के बीच विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और अनुसंधान की भावना विकसित करने की दिशा में सेंट जेवियर्स स्कूल, सलेमपुर में विशेष आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े विभिन्न मॉडल और परियोजनाओं का अवलोकन किया गया। इनमें स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 मिशन तथा पृथ्वी की कक्षा में उसके मिशन आगमन से संबंधित मॉडल विशेष आकर्षण का केंद्र रहे। विद्यार्थियों की रचनात्मकता, वैज्ञानिक समझ और अंतरिक्ष अभियानों के प्रति उनकी जिज्ञासा ने अतिथियों और शिक्षकों को प्रभावित किया।
कार्यक्रम में विद्यार्थियों ने जिस उत्साह के साथ रॉकेट तकनीक, अंतरिक्ष मिशन और पृथ्वी की कक्षा से संबंधित विषयों को मॉडल के माध्यम से प्रस्तुत किया, उससे यह स्पष्ट हुआ कि छोटे शहरों और कस्बों के विद्यालयों में भी वैज्ञानिक प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। आवश्यकता केवल उन्हें उचित मंच, मार्गदर्शन और आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराने की है।
विद्यार्थियों में भविष्य के वैज्ञानिक बनने की क्षमता
विद्यार्थियों द्वारा तैयार परियोजनाओं और मॉडलों का अवलोकन करने के बाद अभिषेक सिंह ने कहा कि सेंट जेवियर्स स्कूल सलेमपुर के विद्यार्थियों में भविष्य के वैज्ञानिक बनने की अपार क्षमता दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि यदि बच्चों को सही दिशा में मार्गदर्शन और पर्याप्त अवसर मिलें तो वे आने वाले समय में देश के अंतरिक्ष अभियान को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
अभिषेक सिंह ने विद्यार्थियों की वैज्ञानिक सोच की सराहना करते हुए कहा कि अंतरिक्ष विज्ञान जैसे विषयों में रुचि केवल पाठ्यक्रम तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। बच्चों को प्रयोग, मॉडल निर्माण, अनुसंधान और वैज्ञानिक गतिविधियों के माध्यम से सीखने का अवसर मिलना चाहिए। इससे उनमें समस्या को समझने, उसका वैज्ञानिक समाधान खोजने और नई तकनीक विकसित करने की क्षमता मजबूत होती है।
उन्होंने विद्यार्थियों को लगातार सवाल पूछने, नई चीजों को समझने और असफलताओं से सीखने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम में प्रस्तुत परियोजनाओं को इसी वैज्ञानिक दृष्टिकोण का परिणाम बताया गया।
पूर्वांचल के चार विद्यार्थियों का यंग एस्ट्रोनॉट्स ट्रेनिंग के लिए चयन
नमस्कार फाउंडेशन के संस्थापक उत्कर्ष मिश्रा ने कार्यक्रम के दौरान विद्यालय की वैज्ञानिक गतिविधियों से जुड़ी एक महत्वपूर्ण उपलब्धि का उल्लेख किया। उन्होंने बताया कि इससे पहले भारतीय अंतरिक्ष यात्री शुभांशु शुक्ला के मार्गदर्शन में आयोजित यंग एस्ट्रोनॉट्स ट्रेनिंग के लिए पूरे पूर्वांचल से चार विद्यार्थियों का चयन किया गया था और विशेष बात यह रही कि चयनित चारों विद्यार्थी सेंट जेवियर्स स्कूल, सलेमपुर के छात्र रहे हैं।
उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि विद्यालय में विकसित हो रही वैज्ञानिक संस्कृति को दर्शाती है। किसी विद्यालय के विद्यार्थियों का अंतरिक्ष विज्ञान और एस्ट्रोनॉट ट्रेनिंग जैसी गतिविधियों में लगातार आगे आना इस बात का संकेत है कि वहां बच्चों को पारंपरिक शिक्षा के साथ-साथ विज्ञान, तकनीक और नवाचार के लिए भी प्रेरित किया जा रहा है।
उत्कर्ष मिश्रा ने कहा कि विद्यार्थियों के भीतर छिपी प्रतिभा को पहचानना और उसे उचित मंच प्रदान करना समय की आवश्यकता है। यदि स्कूली स्तर पर ही बच्चों को अंतरिक्ष विज्ञान, खगोल विज्ञान, रोबोटिक्स और आधुनिक तकनीक के प्रयोगात्मक ज्ञान से जोड़ा जाए तो भविष्य में देश को बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली वैज्ञानिक और तकनीकी विशेषज्ञ मिल सकते हैं।
जल्द स्थापित होगा आधुनिक स्पेस नॉलेज सेंटर
विद्यालय के प्रधानाचार्य विजयेन्द्र कुमार शुक्ल ने विद्यार्थियों में अंतरिक्ष विज्ञान के प्रति बढ़ते उत्साह को देखते हुए एक महत्वपूर्ण घोषणा की। उन्होंने बताया कि विद्यालय में शीघ्र ही एक आधुनिक स्पेस नॉलेज सेंटर स्थापित किया जाएगा।
इस केंद्र का उद्देश्य विद्यार्थियों को अंतरिक्ष विज्ञान के सिद्धांतों को केवल किताबों में पढ़ने के बजाय उन्हें व्यावहारिक रूप से समझने का अवसर देना होगा। यहां बच्चे अंतरिक्ष अभियानों, रॉकेट तकनीक, उपग्रहों, पृथ्वी की कक्षा, अंतरिक्ष अनुसंधान और भविष्य की संभावनाओं से जुड़े विषयों को मॉडल, प्रयोग और अन्य शैक्षिक गतिविधियों के माध्यम से समझ सकेंगे।
प्रधानाचार्य ने कहा कि वर्तमान समय में विज्ञान की शिक्षा का स्वरूप तेजी से बदल रहा है। बच्चों में जिज्ञासा और प्रयोग करने की प्रवृत्ति को प्रोत्साहित करना आवश्यक है। प्रस्तावित स्पेस नॉलेज सेंटर इसी दिशा में विद्यालय की एक महत्वपूर्ण पहल होगी।
उन्होंने कहा कि विद्यालय का प्रयास रहेगा कि विद्यार्थियों को ऐसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं, जिनसे वे अंतरिक्ष विज्ञान को नजदीक से समझ सकें और अपने भविष्य के लिए वैज्ञानिक एवं तकनीकी क्षेत्रों में संभावनाओं को पहचान सकें।
विक्रम-1 मिशन का मॉडल बना आकर्षण
कार्यक्रम में विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए स्काईरूट एयरोस्पेस के विक्रम-1 मिशन से संबंधित मॉडल ने विशेष ध्यान आकर्षित किया। विद्यार्थियों ने अपने मॉडल के माध्यम से रॉकेट मिशन और पृथ्वी की कक्षा से संबंधित अवधारणाओं को समझाने का प्रयास किया।
मॉडल तैयार करने की प्रक्रिया में विद्यार्थियों को न केवल रॉकेट के बारे में जानकारी जुटानी पड़ी, बल्कि उन्हें अंतरिक्ष मिशन की कार्यप्रणाली, पृथ्वी की कक्षा और प्रक्षेपण से जुड़ी वैज्ञानिक अवधारणाओं को भी समझना पड़ा। इस तरह की परियोजनाएं विद्यार्थियों में टीमवर्क, शोध, प्रस्तुतीकरण और तार्किक सोच विकसित करने में मदद करती हैं।
कार्यक्रम में मौजूद अतिथियों ने विद्यार्थियों से उनके मॉडल के बारे में सवाल पूछे। बच्चों ने अपनी समझ के अनुसार जवाब देकर अपनी वैज्ञानिक जिज्ञासा और आत्मविश्वास का परिचय दिया।
इसरो वैज्ञानिक से विद्यार्थियों ने पूछे सवाल
आयोजन का सबसे रोचक पक्ष विद्यार्थियों और शिक्षकों का इसरो वैज्ञानिक के साथ संवाद रहा। बच्चों ने अंतरिक्ष अभियानों, उपग्रहों, रॉकेट प्रौद्योगिकी और वैज्ञानिक जीवन से जुड़े अनेक सवाल पूछे।
विद्यार्थियों की जिज्ञासाओं का वैज्ञानिक ने सहज और प्रेरक शैली में उत्तर दिया। इस संवाद के दौरान बच्चों को यह समझने का अवसर मिला कि अंतरिक्ष विज्ञान केवल कल्पना या फिल्मों का विषय नहीं है, बल्कि इसके पीछे वर्षों का अध्ययन, अनुसंधान, परीक्षण, गणना और वैज्ञानिकों की अथक मेहनत होती है।
विद्यार्थियों ने रॉकेट के प्रक्षेपण, उपग्रहों की भूमिका, अंतरिक्ष अभियानों की चुनौतियों और वैज्ञानिक बनने की प्रक्रिया जैसे विषयों को लेकर अपनी जिज्ञासा व्यक्त की। सवाल-जवाब के इस सत्र ने बच्चों को विज्ञान के प्रति और अधिक गंभीरता से सोचने के लिए प्रेरित किया।
वैज्ञानिक सोच को बढ़ावा देने की जरूरत
कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए स्कूली स्तर से ही वैज्ञानिक प्रतिभाओं को तैयार करना जरूरी है। महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों और कस्बों के विद्यार्थियों को भी समान अवसर और संसाधन मिलने चाहिए।
सेंट जेवियर्स स्कूल सलेमपुर में प्रस्तावित स्पेस नॉलेज सेंटर इसी दिशा में एक उपयोगी पहल साबित हो सकता है। यदि विद्यार्थियों को नियमित रूप से विशेषज्ञों से संवाद, वैज्ञानिक मॉडल तैयार करने, प्रयोग करने और अनुसंधान आधारित गतिविधियों में हिस्सा लेने का अवसर मिलता है, तो उनकी प्रतिभा को नई दिशा मिल सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बच्चों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने के लिए उन्हें केवल परीक्षाओं के लिए तैयार करना पर्याप्त नहीं है। उन्हें सवाल पूछने, तथ्यों की जांच करने, प्रयोग करने और अपने निष्कर्ष तक पहुंचने की स्वतंत्रता भी देनी होगी।
अंतरिक्ष के सपनों से जुड़ते विद्यार्थी
सेंट जेवियर्स स्कूल सलेमपुर में आयोजित यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के लिए केवल एक शैक्षिक गतिविधि नहीं रहा, बल्कि उनके भीतर अंतरिक्ष और विज्ञान के प्रति नई ऊर्जा पैदा करने वाला अवसर भी बना। विक्रम-1 मिशन के मॉडल से लेकर इसरो वैज्ञानिक के साथ संवाद तक, पूरे आयोजन में बच्चों की उत्सुकता साफ दिखाई दी।
कार्यक्रम के अंत में विद्यालय के विद्यार्थियों और शिक्षकों में विज्ञान, अनुसंधान और अंतरिक्ष क्षेत्र को लेकर नया उत्साह देखने को मिला। विद्यार्थियों ने अंतरिक्ष विज्ञान को लेकर अपने सपनों और संभावनाओं को समझने का प्रयास किया।
सेंट जेवियर्स स्कूल सलेमपुर के विद्यार्थियों की उपलब्धियों, यंग एस्ट्रोनॉट्स ट्रेनिंग में चयन और प्रस्तावित स्पेस नॉलेज सेंटर की योजना को देखते हुए यह कहा जा सकता है कि विद्यालय में वैज्ञानिक संस्कृति को लगातार मजबूत करने का प्रयास हो रहा है। उचित मार्गदर्शन, आधुनिक सुविधाओं और अवसरों के साथ यहां के विद्यार्थी भविष्य में देश के वैज्ञानिक एवं अंतरिक्ष अभियानों में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
भारत जब अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में लगातार नए लक्ष्य निर्धारित कर रहा है, ऐसे समय में विद्यालय स्तर पर बच्चों को इस क्षेत्र से जोड़ना बेहद महत्वपूर्ण है। सलेमपुर जैसे क्षेत्र से निकलने वाली वैज्ञानिक प्रतिभाएं आने वाले वर्षों में देश के अंतरिक्ष स्वप्न को नई दिशा देने में योगदान कर सकती हैं। कार्यक्रम ने विद्यार्थियों को यही विश्वास दिलाया कि बड़े सपने देखने और उन्हें वैज्ञानिक मेहनत के साथ पूरा करने की कोई सीमा नहीं होती।

























