‘देवरिया ने मुझे स्वयं से मिलवाया…’ गुलाबों की बारिश, भावुक संदेश और जनता का प्यार… यादगार बन गई दिव्या मित्तल की विदाई
इरफान अली लारी की रिपोर्ट
लखनऊ/देवरिया। उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा हाल ही में किए गए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में कई आईएएस अधिकारियों के तबादले हुए, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा जिस नाम को लेकर हुई, वह रहीं तेजतर्रार आईएएस अधिकारी दिव्या मित्तल। देवरिया की जिलाधिकारी रहीं दिव्या मित्तल को अब शासन में विशेष सचिव की जिम्मेदारी दी गई है। उनका तबादला भले प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा हो, लेकिन देवरिया में उनकी विदाई एक भावनात्मक अध्याय बन गई।
कड़क प्रशासनिक शैली, जनता से सीधा संवाद और विकास कार्यों के प्रति संवेदनशील सोच ने दिव्या मित्तल को आम लोगों के बीच बेहद लोकप्रिय बना दिया था। यही कारण है कि जब उनके तबादले की खबर सामने आई तो सोशल मीडिया से लेकर गांव-कस्बों तक चर्चा का माहौल बन गया।
देवरिया से जुड़ गया भावनात्मक रिश्ता
दिव्या मित्तल ने देवरिया छोड़ने के बाद सोशल मीडिया पर एक भावुक पोस्ट साझा की, जिसने लोगों के दिलों को छू लिया। परिवार की तस्वीर के साथ लिखे गए उनके शब्दों में प्रशासनिक अधिकारी नहीं, बल्कि एक संवेदनशील इंसान की आत्मीयता झलक रही थी।
उन्होंने लिखा— “देवरिया… तुम जनपद नहीं, मेरे लिए एक जीवंत अनुभूति हो। अबोध सी आई थी, तुम्हारी मिट्टी ने मुझे गढ़ा है। यहीं से मेरी साधना को मूर्त रूप मिला। संघर्ष हर कदम पर थे, पर उन्होंने सिखाया— झुकना नहीं, बस चलते रहना है।”
दिव्या मित्तल ने अपने संदेश में यह भी लिखा कि देवरिया ने उन्हें “स्वयं” से मिलवाया। उनके इस संदेश को हजारों लोगों ने साझा किया और भावुक प्रतिक्रियाएं दीं।
जब विदाई बनी जनभावनाओं का उत्सव
दिव्या मित्तल की लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जहां भी वह रहीं, लोगों ने उन्हें अपनेपन से विदाई दी। मिर्जापुर में उनके तबादले के समय ग्रामीणों ने उन पर गुलाब की पंखुड़ियां बरसाईं थीं। लोगों की आंखों में आंसू थे और जुबान पर सिर्फ एक ही बात— “ऐसी डीएम फिर कब मिलेगी?”
देवरिया में भी उनकी कार्यशैली ने लोगों का भरोसा जीता। आम जनता के बीच उनकी पहचान एक ऐसी अधिकारी की बनी, जो सिर्फ आदेश देने तक सीमित नहीं रहती थीं, बल्कि जमीन पर उतरकर समस्याओं का समाधान करती थीं।
पानी के संकट से जूझते गांव में पहुंचाई राहत
देवरिया से पहले दिव्या मित्तल मिर्जापुर की जिलाधिकारी थीं। वहां के लाहुरिया दाह गांव की कहानी आज भी उनके कामों की मिसाल के रूप में याद की जाती है।
यह गांव वर्षों से भीषण जल संकट का सामना कर रहा था। हालात इतने खराब थे कि लोगों को पीने के पानी के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती थी। गांव में पानी की कमी सामाजिक समस्याओं का कारण भी बन चुकी थी।
दिव्या मित्तल ने जल जीवन मिशन के तहत गांव तक पाइपलाइन से पानी पहुंचाने का अभियान शुरू कराया। अगस्त 2023 में पहली बार गांव के घरों तक शुद्ध पेयजल पहुंचा। ग्रामीणों के लिए यह किसी चमत्कार से कम नहीं था। आज भी गांव के लोग उन्हें दुआओं के साथ याद करते हैं।
सख्त प्रशासनिक छवि से बनी अलग पहचान
आईएएस दिव्या मित्तल अपनी कड़क कार्यशैली के लिए भी जानी जाती हैं। विकास कार्यों में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों को उन्होंने कई बार सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई।
तहसील दिवसों में शिकायतों की सुनवाई के दौरान वह अक्सर राजस्व कर्मचारियों और लेखपालों से सीधे सवाल करती दिखाई देती थीं। उनकी यही कार्यशैली प्रशासनिक मशीनरी को सक्रिय बनाए रखने में मददगार साबित हुई।
हालांकि सख्ती के पीछे उनकी मंशा हमेशा जनहित और पारदर्शिता रही। यही वजह रही कि जनता ने उनकी कठोरता को भी सकारात्मक रूप में स्वीकार किया।
लंदन की नौकरी छोड़ चुनी देश सेवा
दिव्या मित्तल की सफलता की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा भी है। हरियाणा के रेवाड़ी क्षेत्र से आने वाली दिव्या ने आईआईटी दिल्ली से बीटेक और आईआईएम बेंगलुरु से एमबीए किया।
पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने अपने सहपाठी गगनदीप सिंह से शादी की। दोनों को लंदन में लगभग 46 लाख रुपये सालाना पैकेज पर नौकरी मिली। लेकिन विदेश की चमक-दमक के बावजूद दोनों का मन वहां नहीं लगा। कुछ समय बाद दोनों भारत लौट आए और सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी। यह निर्णय उनके जीवन का सबसे बड़ा मोड़ साबित हुआ।
पहले आईपीएस बनीं, फिर हासिल की आईएएस की सफलता
दिव्या मित्तल ने 2012 में अपने पहले ही प्रयास में यूपीएससी परीक्षा पास कर ली थी। उस समय उनका चयन आईपीएस सेवा के लिए हुआ। लेकिन उन्होंने अपने लक्ष्य को यहीं नहीं रोका। ट्रेनिंग के दौरान ही उन्होंने दोबारा परीक्षा दी और 2013 में ऑल इंडिया 68वीं रैंक हासिल कर आईएएस अधिकारी बन गईं। उनके पति गगनदीप सिंह भी आईएएस अधिकारी हैं। दोनों की जोड़ी प्रशासनिक सेवा में मेहनत और समर्पण की मिसाल मानी जाती है।
कई अहम पदों पर दे चुकी हैं सेवाएं
दिव्या मित्तल ने अपने प्रशासनिक करियर में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं। देवरिया और मिर्जापुर की जिलाधिकारी बनने से पहले वह बरेली विकास प्राधिकरण की उपाध्यक्ष, यूपीएसआईडीए में संयुक्त प्रबंध निदेशक, गोंडा की मुख्य विकास अधिकारी और मेरठ के मवाना क्षेत्र में भी सेवाएं दे चुकी हैं।
नीति आयोग में सहायक सचिव के रूप में कार्य करते हुए उनकी प्रस्तुतियों को विशेष सराहना मिली थी। बताया जाता है कि प्रधानमंत्री के समक्ष दी गई उनकी पांच प्रस्तुतियों में से एक को विशेष रूप से चयनित किया गया था।
सोशल मीडिया पर भी बनीं लोगों की पसंद
दिव्या मित्तल सिर्फ प्रशासनिक कार्यों के कारण ही नहीं, बल्कि अपने सकारात्मक संवाद के कारण भी सोशल मीडिया पर बेहद लोकप्रिय हैं। उनके लाखों फॉलोअर्स हैं, जो उनके कार्यों और विचारों को पसंद करते हैं।
देवरिया से तबादले के बाद उनका भावुक संदेश तेजी से वायरल हुआ। लोगों ने लिखा कि “ऐसे अधिकारी बहुत कम होते हैं, जो जनता के दिलों में जगह बना पाते हैं।”
नई जिम्मेदारी, लेकिन यादें रहेंगी हमेशा
अब दिव्या मित्तल लखनऊ में शासन स्तर पर नई जिम्मेदारी निभाएंगी। लेकिन देवरिया और मिर्जापुर जैसे जिलों में उनके कार्यों की छाप लंबे समय तक याद की जाएगी।
उन्होंने अपने संदेश के अंत में लिखा— “संघर्ष पथ पर जो मिले, यह भी सही… वह भी सही…” यही पंक्तियां शायद उनके पूरे प्रशासनिक जीवन की सबसे बड़ी पहचान हैं— संघर्ष, संवेदनशीलता और निरंतर आगे बढ़ते रहने का साहस।







