गोमती का बढ़ता जलस्तर बना बड़ी चुनौती, पीपा पुल हटने से ग्रामीणों की बढ़ीं मुश्किलें
बारिश के मौसम में फिर सामने आई वर्षों पुरानी समस्या, स्थायी पुल निर्माण की मांग हुई तेज
मनोज कुमार की रिपोर्ट
लगातार हो रही बारिश और गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर ने एक बार फिर जौनपुर जिले के केराकत तहसील क्षेत्र के ग्रामीणों की परेशानी बढ़ा दी है। सुरक्षा कारणों को ध्यान में रखते हुए सरोज बड़ेवर गांव के पास गोमती नदी पर बनाए गए पीपा पुल को प्रशासन द्वारा हटा दिया गया है। पुल हटने के साथ ही आसपास के दर्जनों गांवों के लोगों का आवागमन प्रभावित हो गया है। जो दूरी पहले कुछ ही मिनटों में तय हो जाती थी, अब उसे पूरा करने के लिए कई किलोमीटर का अतिरिक्त सफर करना पड़ रहा है।
सुरक्षा के मद्देनज़र हटाया गया पीपा पुल
मानसून के दौरान लगातार हो रही बारिश से गोमती नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ रहा है। नदी के तेज बहाव को देखते हुए प्रशासन ने किसी भी संभावित दुर्घटना से बचाव के उद्देश्य से सरोज बड़ेवर गांव के निकट बने पीपा पुल को हटाने का निर्णय लिया। प्रशासन का कहना है कि नदी में जलस्तर बढ़ने के दौरान पीपा पुल पर आवागमन सुरक्षित नहीं रहता। ऐसे में जनहानि की आशंका को देखते हुए यह कदम उठाया गया है।
हालांकि सुरक्षा की दृष्टि से लिया गया यह निर्णय आवश्यक माना जा रहा है, लेकिन इसके चलते क्षेत्र के हजारों लोगों का दैनिक जीवन प्रभावित हो गया है।
कई गांवों के लोगों की बढ़ी परेशानी
पीपा पुल हटने के बाद सरोज बड़ेवर सहित आसपास के अनेक गांवों के लोगों को अब केराकत तहसील मुख्यालय और बाजार तक पहुंचने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ रहा है। पहले जहां ग्रामीण सीधे पीपा पुल से होकर कम समय में अपने गंतव्य तक पहुंच जाते थे, वहीं अब उन्हें कई किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है।
इसका सबसे अधिक असर उन लोगों पर पड़ रहा है जिन्हें रोजाना नौकरी, व्यापार, पढ़ाई या अन्य आवश्यक कार्यों के लिए शहर आना-जाना पड़ता है। अतिरिक्त दूरी तय करने से समय के साथ-साथ यात्रा का खर्च भी बढ़ गया है।
छात्रों की पढ़ाई पर भी पड़ रहा असर
ग्रामीण क्षेत्रों के अनेक छात्र प्रतिदिन केराकत और आसपास के शिक्षण संस्थानों में पढ़ाई करने जाते हैं। पुल हटने के कारण उन्हें अब पहले से काफी पहले घर से निकलना पड़ रहा है। कई छात्रों का कहना है कि लंबा रास्ता तय करने की वजह से समय पर विद्यालय और महाविद्यालय पहुंचना कठिन हो गया है।
अभिभावकों का भी कहना है कि बरसात के मौसम में बच्चों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ जाती है। लंबी दूरी और खराब सड़कों के कारण दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
किसानों और व्यापारियों पर आर्थिक बोझ
इस क्षेत्र की अर्थव्यवस्था मुख्य रूप से कृषि पर आधारित है। किसान अपनी उपज को स्थानीय मंडियों और बाजारों तक पहुंचाने के लिए इसी मार्ग का उपयोग करते थे। पीपा पुल हटने के बाद परिवहन की लागत बढ़ गई है, जिससे किसानों की चिंता भी बढ़ गई है।
इसी प्रकार छोटे व्यापारी और दुकानदार भी अतिरिक्त दूरी तय करने को मजबूर हैं। ईंधन की बढ़ती लागत और अधिक समय लगने से उनकी आय पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि हर वर्ष मानसून में यही स्थिति बनती है और इसका सीधा असर स्थानीय आर्थिक गतिविधियों पर दिखाई देता है।
दैनिक यात्रियों को झेलनी पड़ रही कठिनाई
सरकारी कर्मचारी, निजी संस्थानों में कार्यरत लोग, मरीज और अन्य दैनिक यात्री भी इस समस्या से प्रभावित हैं। पहले जहां पीपा पुल के माध्यम से कम समय में आवागमन संभव था, वहीं अब लंबा चक्कर लगाने के कारण लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई है।
कई ग्रामीणों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में भी देरी हो सकती है, जो गंभीर परिस्थितियों में बड़ी समस्या बन सकती है।
हर वर्ष दोहराई जाती है यही समस्या
क्षेत्रीय लोगों का कहना है कि यह कोई नई समस्या नहीं है। मानसून के दौरान गोमती नदी का जलस्तर बढ़ते ही हर वर्ष पीपा पुल हटा दिया जाता है और इसके बाद कई महीनों तक ग्रामीणों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
ग्रामीणों का कहना है कि वर्षों से वे इस समस्या को झेल रहे हैं, लेकिन अब तक इसका स्थायी समाधान नहीं निकल सका है। उनका मानना है कि अस्थायी व्यवस्था से कुछ समय के लिए राहत तो मिलती है, लेकिन हर साल यही स्थिति दोहराई जाती है।
स्थायी पक्के पुल की मांग तेज
पीपा पुल हटने के बाद एक बार फिर क्षेत्र में स्थायी पुल निर्माण की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि गोमती नदी पर एक मजबूत पक्का पुल बना दिया जाए तो वर्षभर निर्बाध आवागमन संभव हो सकेगा।
ग्रामीणों के अनुसार स्थायी पुल बनने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार, कृषि और रोजगार सहित सभी क्षेत्रों को लाभ मिलेगा। साथ ही बरसात के मौसम में लोगों को होने वाली परेशानियों से भी स्थायी रूप से राहत मिल जाएगी।
जनप्रतिनिधियों और प्रशासन से उम्मीद
क्षेत्र के लोगों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि इस समस्या को केवल मौसमी मुद्दा मानने के बजाय दीर्घकालिक समाधान की दिशा में ठोस पहल की जाए। उनका कहना है कि यदि स्थायी पुल का निर्माण हो जाता है तो न केवल हजारों ग्रामीणों का जीवन आसान होगा, बल्कि क्षेत्र के विकास को भी नई गति मिलेगी।
ग्रामीणों का मानना है कि बेहतर सड़क और पुल जैसी आधारभूत सुविधाएं किसी भी क्षेत्र के विकास की आधारशिला होती हैं। इसलिए इस मांग पर गंभीरता से विचार किया जाना चाहिए।
विकास के लिए स्थायी समाधान की जरूरत
गोमती नदी पर बना पीपा पुल वर्षों से स्थानीय लोगों की जीवनरेखा बना हुआ था, लेकिन मानसून के दौरान इसे हटाना मजबूरी बन जाता है। ऐसे में हर वर्ष आवागमन बाधित होने से शिक्षा, स्वास्थ्य, व्यापार और सामाजिक जीवन प्रभावित होता है। सुरक्षा के लिहाज से पीपा पुल हटाना आवश्यक कदम हो सकता है, लेकिन अब समय आ गया है कि इस अस्थायी व्यवस्था के स्थान पर स्थायी समाधान तलाशा जाए।
स्थानीय लोगों की उम्मीदें अब एक ऐसे पक्के पुल से जुड़ी हैं, जो केवल नदी के दो किनारों को ही नहीं, बल्कि क्षेत्र के विकास, सुविधाओं और बेहतर भविष्य को भी जोड़ सके। यदि इस दिशा में शीघ्र पहल होती है तो आने वाले वर्षों में हजारों ग्रामीणों को बरसात के मौसम में होने वाली कठिनाइयों से हमेशा के लिए राहत मिल सकती है।










