चित्रकूट

मोहना नदी के पुनर्जीवन की बड़ी पहल : 74 लाख की लागत से शुरू हुआ जीर्णोद्धार, जनप्रतिनिधियों और ग्रामीणों ने किया श्रमदान

जल संरक्षण और पर्यावरण बचाने की दिशा में चित्रकूट में शुरू हुई महत्वपूर्ण मुहिम

संजय सिंह राणा की रिपोर्ट

चित्रकूट। जल संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और प्राकृतिक संसाधनों के पुनर्जीवन की दिशा में चित्रकूट जनपद में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। ग्राम पंचायत कोटवा के चचोखर मजरा स्थित मोहना नदी के जीर्णोद्धार कार्य का विधिवत शुभारंभ जनप्रतिनिधियों, प्रशासनिक अधिकारियों और स्थानीय ग्रामीणों की मौजूदगी में किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने केवल औपचारिक उद्घाटन ही नहीं किया, बल्कि स्वयं श्रमदान कर लोगों को जल संरक्षण और जनभागीदारी का संदेश भी दिया।

इस अवसर पर क्षेत्रीय विधायक अविनाश द्विवेदी और जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में ग्रामीणों, किसानों और विभिन्न विभागों के अधिकारियों ने भाग लेकर नदी संरक्षण अभियान को जनआंदोलन का स्वरूप देने का संकल्प लिया।

74 लाख रुपये की लागत से होगा मोहना नदी का कायाकल्प

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए विधायक अविनाश द्विवेदी ने कहा कि मोहना नदी के जीर्णोद्धार का कार्य जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) की लगभग 74 लाख रुपये की लागत से कराया जा रहा है। उनका कहना था कि नदियां केवल जल स्रोत नहीं बल्कि ग्रामीण अर्थव्यवस्था और पर्यावरण की जीवनरेखा हैं। यदि नदियों का संरक्षण किया जाएगा तो आने वाली पीढ़ियों को भी पर्याप्त जल संसाधन उपलब्ध रहेंगे।

उन्होंने कहा कि वर्तमान समय में जल संकट को देखते हुए नदियों का पुनर्जीवन बेहद आवश्यक हो गया है। प्रशासन इस दिशा में गंभीरता से कार्य कर रहा है और स्थानीय लोगों का सहयोग इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत है।

ग्रामीणों की भागीदारी से बनेगा अभियान सफल

विधायक ने कहा कि नदी संरक्षण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित नहीं रह सकता। जब तक आम नागरिक और किसान इसमें सक्रिय भागीदारी नहीं निभाएंगे, तब तक स्थायी परिणाम संभव नहीं हैं। उन्होंने सभी ग्रामीणों से अपील की कि वे नदी की स्वच्छता बनाए रखने और जल संरक्षण से जुड़े प्रयासों में लगातार सहयोग करें।

उन्होंने यह भी बताया कि गोइयां खुर्द क्षेत्र की नदी के जीर्णोद्धार को लेकर भी प्रशासन के साथ चर्चा की गई है और आवश्यक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है। आने वाले समय में उस क्षेत्र में भी नदी पुनर्जीवन का कार्य शुरू कराया जाएगा।

चेक डैम बनाकर रोका जाएगा वर्षा जल

विधायक अविनाश द्विवेदी ने बताया कि जिन स्थानों पर नदी में प्राकृतिक रूप से गहरे जलाशय मौजूद हैं, वहां चेक डैम का निर्माण कराया जाएगा। इससे वर्षा का पानी लंबे समय तक सुरक्षित रहेगा और भूजल स्तर में भी सुधार आएगा।

उन्होंने कहा कि इससे किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलेगा और खेती की लागत कम होने के साथ उत्पादन बढ़ाने में भी मदद मिलेगी।

15 किलोमीटर लंबी नदी को मिलेगा नया जीवन

जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कहा कि निरीक्षण के दौरान यह जानकारी मिली थी कि मोहना नदी की कई वर्षों से सफाई नहीं हुई थी। लगातार उपेक्षा के कारण नदी का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त होने की स्थिति में पहुंच गया था। इसी को देखते हुए प्रशासन ने इसे प्राथमिकता में शामिल करते हुए जीर्णोद्धार का निर्णय लिया।

उन्होंने बताया कि करीब 15 किलोमीटर लंबी इस नदी की सफाई, गहरीकरण और पुनर्जीवन का कार्य चरणबद्ध तरीके से कराया जाएगा। यह परियोजना न केवल नदी को नया जीवन देगी बल्कि आसपास के गांवों में जल उपलब्धता भी बढ़ाएगी।

मुख्यमंत्री के निर्देशों के अनुरूप चल रहा अभियान

जिलाधिकारी ने बताया कि प्रदेश सरकार के निर्देशानुसार जनपद की नदियों, तालाबों और अन्य जल स्रोतों के संरक्षण पर विशेष जोर दिया जा रहा है। प्रशासन का प्रयास है कि हर प्राकृतिक जल स्रोत को पुनर्जीवित कर जल संकट का स्थायी समाधान तैयार किया जाए।

उन्होंने कहा कि जल संरक्षण केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि सामाजिक दायित्व भी है। यदि सभी लोग मिलकर कार्य करें तो आने वाले वर्षों में जल संकट पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है।

किसानों को मुफ्त मिल रही खुदाई की मिट्टी

नदी की खुदाई के दौरान निकलने वाली मिट्टी किसानों के लिए उपयोगी साबित हो रही है। जिलाधिकारी ने बताया कि यह मिट्टी किसानों को पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध कराई जा रही है ताकि वे अपने खेतों के समतलीकरण और उर्वरता बढ़ाने के लिए इसका उपयोग कर सकें।

उन्होंने बताया कि अब तक बड़ी संख्या में किसान इस सुविधा का लाभ उठा चुके हैं। कार्यक्रम के दौरान किसान राजेश कुमार ने बताया कि उन्होंने लगभग 30 ट्रॉली मिट्टी अपने खेतों में डलवाई है, जिससे खेतों की गुणवत्ता में सुधार हुआ है। प्रशासन ने अन्य किसानों से भी इस योजना का अधिक से अधिक लाभ उठाने की अपील की।

100 से अधिक किसानों ने किया सहयोग

मोहना नदी जीर्णोद्धार अभियान में स्थानीय किसानों की सक्रिय भागीदारी देखने को मिली। अधिकारियों के अनुसार अब तक 100 से अधिक किसान लगभग 80 हजार घनमीटर मिट्टी का उपयोग कर चुके हैं। इससे एक ओर नदी की सफाई का कार्य तेज हुआ है तो दूसरी ओर किसानों को भी सीधा लाभ मिल रहा है।

इस अवसर पर उल्लेखनीय सहयोग देने वाले किसानों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मानित होने वालों में राजेश कुमार, पुष्पराज यादव, अमित द्विवेदी, अजयपाल, ब्रजेश पाण्डेय और टीकू द्विवेदी प्रमुख रहे।

वृक्षारोपण और श्रमदान से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

कार्यक्रम के दौरान जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों ने वृक्षारोपण किया तथा स्वयं श्रमदान कर लोगों को पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी का संदेश दिया। अधिकारियों ने कहा कि जल संरक्षण और वृक्षारोपण एक-दूसरे के पूरक हैं। यदि अधिक से अधिक पौधे लगाए जाएंगे तो वर्षा जल का संरक्षण भी बेहतर तरीके से हो सकेगा।

ग्रामीणों ने भी इस अभियान में उत्साहपूर्वक भाग लिया और भविष्य में नदी संरक्षण के लिए निरंतर सहयोग देने का संकल्प व्यक्त किया।

जल जीवन मिशन से जुड़ी योजनाओं पर भी दिया जोर

जिलाधिकारी पुलकित गर्ग ने कहा कि जल जीवन मिशन के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक घर तक स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का कार्य तेजी से चल रहा है। इसके साथ ही तालाबों के संरक्षण, वर्षा जल संचयन और जल स्रोतों के पुनर्जीवन पर भी विशेष ध्यान दिया जा रहा है।

उन्होंने ग्रामीणों से अपील की कि जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाएं, तालाबों और नदियों की स्वच्छता बनाए रखें तथा प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने में सक्रिय भूमिका निभाएं।

स्मृति चिन्ह देकर किया गया सम्मान

कार्यक्रम के अंत में ग्राम प्रधान अमित कुमार पाण्डेय एवं शैलेश शुक्ला ने मुख्य अतिथि विधायक अविनाश द्विवेदी और जिलाधिकारी पुलकित गर्ग को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

इस अवसर पर उपजिलाधिकारी मऊ आर.आर. रमन, अधिशासी अभियंता सिंचाई पी.के. मिश्रा, प्रभारी विकास खंड अधिकारी संजय पाण्डेय सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी, जनप्रतिनिधि, कर्मचारी तथा बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

मोहना नदी के जीर्णोद्धार की यह पहल केवल एक विकास परियोजना नहीं बल्कि जल संरक्षण, पर्यावरण सुरक्षा और ग्रामीण विकास को जोड़ने वाला व्यापक अभियान है। जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और ग्रामीणों की संयुक्त भागीदारी से यह प्रयास भविष्य में जल संकट कम करने, भूजल स्तर सुधारने और किसानों को स्थायी लाभ पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। यदि इसी तरह सामूहिक सहभागिता बनी रही तो मोहना नदी एक बार फिर अपने पुराने स्वरूप में लौटकर क्षेत्र की जीवनरेखा बन सकती है।

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