ब्यूरो रिपोर्ट
मथुरा से प्राप्त जानकारी के अनुसार, श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण में मंगलवार को हुई तीसरी समझौता वार्ता भी बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई। हिंदू पक्षकार मौजूद रहे, जबकि मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति के कारण वार्ता की कार्यवाही आगे नहीं बढ़ सकी। मामले में अगली प्रस्तावित वार्ता 21, 22 या 23 अगस्त में से किसी एक दिन सुप्रीम कोर्ट में होने की बात कही गई है।
श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद प्रकरण में समझौते की कोशिश एक बार फिर आगे नहीं बढ़ सकी। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के तहत मंगलवार को विशेष लोक अदालत में इस मामले को लेकर तीसरी बार समझौता वार्ता आयोजित की गई। अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनिल कुमार यादव (द्वितीय) की लोक अदालत में हुई कार्यवाही के दौरान हिंदू पक्षकार उपस्थित रहे, लेकिन मुस्लिम पक्ष की ओर से कोई प्रतिनिधि मौजूद नहीं हुआ। मुस्लिम पक्ष की अनुपस्थिति के कारण समझौता वार्ता की पत्रावली का निस्तारण कर दिया गया।
मामले की अगली समझौता वार्ता 21, 22 या 23 अगस्त में से किसी एक तारीख को सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित बताई गई है। ऐसे में अब सभी की निगाहें आगामी न्यायिक प्रक्रिया और दोनों पक्षों के रुख पर टिकी हैं।
तीसरी वार्ता में मुस्लिम पक्ष की गैरमौजूदगी पर हिंदू पक्ष ने जताई आपत्ति
समझौता वार्ता समाप्त होने के बाद हिंदू पक्षकार एवं अधिवक्ता महेंद्र प्रताप सिंह ने मुस्लिम पक्ष के लगातार अनुपस्थित रहने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि विवादित भूमि को लेकर हिंदू पक्ष का रुख पहले से स्पष्ट है और वह किसी वैकल्पिक स्थान के बदले श्रीकृष्ण जन्मभूमि की भूमि को छोड़ने के पक्ष में नहीं है।
महेंद्र प्रताप सिंह के अनुसार, हिंदू पक्ष विवादित करीब ढाई एकड़ भूमि को श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित मानता है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि जिस भूमि को हिंदू पक्ष भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि मानता है, उसके बदले किसी अन्य स्थान पर भूमि स्वीकार करने का प्रश्न ही नहीं उठता।
उन्होंने कहा, “जमीन हमारी है, इसलिए एक इंच भूमि भी नहीं देंगे।” उनके मुताबिक यह केवल संपत्ति या भूमि का विवाद नहीं है, बल्कि हिंदू पक्ष की आस्था और श्रीकृष्ण जन्मभूमि से जुड़ा विषय है।
वैकल्पिक जमीन के प्रस्ताव को लेकर हिंदू पक्ष का स्पष्ट रुख
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि पूर्व में हुई समझौता वार्ताओं के दौरान कुछ हिंदू पक्षकारों और अन्य लोगों की ओर से शाही ईदगाह मस्जिद को किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित करने तथा उसके लिए वैकल्पिक भूमि उपलब्ध कराने की बात सामने आई थी। हालांकि, उनका कहना है कि वह इस प्रकार के समाधान से सहमत नहीं हैं।
उनके अनुसार, विवादित भूमि के बदले किसी अन्य स्थान की जमीन स्वीकार करना हिंदू पक्ष के अधिकार और धार्मिक आस्था के अनुरूप नहीं होगा। उनका तर्क है कि यदि किसी पक्ष द्वारा अतिक्रमण का दावा किया जा रहा है, तो उसका समाधान मूल भूमि से जुड़े विवाद के न्यायिक निर्धारण के आधार पर होना चाहिए, न कि किसी दूसरी जमीन के विकल्प के माध्यम से।
उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष समझौते के खिलाफ नहीं है, लेकिन समझौता न्याय और अधिकार के आधार पर होना चाहिए। श्रीकृष्ण जन्मभूमि से संबंधित भूमि को किसी दूसरी जगह की भूमि से बदलना उनके अनुसार स्वीकार्य विकल्प नहीं है।
पहली वार्ता में भी नहीं पहुंचा था मुस्लिम पक्ष
हिंदू पक्षकार महेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि समझौता प्रक्रिया के दौरान यह तीसरा प्रयास था। उनके अनुसार, पहली लोक अदालत में मुस्लिम पक्ष उपस्थित नहीं हुआ था। दूसरी बार दोनों पक्ष कार्यवाही में पहुंचे थे, लेकिन बातचीत के बावजूद किसी सहमति पर पहुंचना संभव नहीं हुआ।
मंगलवार को तीसरी बार आयोजित वार्ता में भी मुस्लिम पक्ष की गैरमौजूदगी रही। हिंदू पक्ष ने इस स्थिति पर आपत्ति जताते हुए कहा कि बार-बार वार्ता में अनुपस्थिति से मामला अनावश्यक रूप से लंबा खिंच सकता है।
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि हिंदू पक्ष चाहता है कि इस प्रकरण का जल्द से जल्द न्यायिक निस्तारण हो और विवाद को लेकर स्पष्ट फैसला सामने आए।
1670 और औरंगजेब काल से जोड़कर बताया विवाद का इतिहास
हिंदू पक्षकार ने अपने बयान में श्रीकृष्ण जन्मभूमि विवाद को ऐतिहासिक घटनाओं से भी जोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि विदेशी आक्रांताओं के दौर में देश के कई मंदिरों और धार्मिक स्थलों को नुकसान पहुंचाया गया। उनके अनुसार मथुरा का यह विवाद भी इसी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ा हुआ है।
महेंद्र प्रताप सिंह ने दावा किया कि वर्ष 1670 में औरंगजेब के शासनकाल के दौरान श्रीकृष्ण जन्मभूमि स्थित मंदिर को क्षति पहुंचाई गई और उसके स्थान पर ईदगाह का निर्माण कराया गया। हालांकि, इस तरह के ऐतिहासिक दावों को लेकर अलग-अलग पक्षों के अपने-अपने दृष्टिकोण और दावे रहे हैं तथा मौजूदा विवाद का कानूनी निर्धारण न्यायालय की प्रक्रिया के माध्यम से होना है।
हिंदू पक्षकार ने कहा कि इसी कथित अतिक्रमण को हटाने की मांग को लेकर उनका पक्ष लंबे समय से न्यायालय में संघर्ष कर रहा है।
“यह केवल भवन का विवाद नहीं”
महेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि के मूल गर्भगृह के ऊपर मौजूद वर्तमान निर्माण को हिंदू पक्ष केवल भवन या संपत्ति के विवाद के रूप में नहीं देखता। उनके अनुसार यह भगवान श्रीकृष्ण की जन्मभूमि से जुड़ा धार्मिक और आस्था का विषय है।
उन्होंने कहा कि हिंदू पक्ष का प्रयास न्यायालय के माध्यम से इस विवाद का समाधान कराने का है और वह अपने दावे को कानूनी प्रक्रिया के तहत मजबूती से प्रस्तुत करेगा।
उनका कहना है कि यदि अतिक्रमित भूमि के बदले दूसरी भूमि देने का सिद्धांत स्वीकार कर लिया जाता है तो भविष्य में इसी तरह के दूसरे विवादों में भी मूल भूमि के स्थान पर वैकल्पिक भूमि देने का रास्ता खुल सकता है। हिंदू पक्ष इस सिद्धांत को स्वीकार करने के पक्ष में नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित अगली वार्ता पर नजर
तीसरी समझौता वार्ता के बाद अब आगामी प्रक्रिया सुप्रीम कोर्ट में प्रस्तावित वार्ता पर निर्भर करेगी। 21, 22 या 23 अगस्त में से किसी एक दिन अगली समझौता वार्ता प्रस्तावित बताई गई है।
इस बीच मथुरा के श्रीकृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह प्रकरण में न्यायिक प्रक्रिया जारी है। मंगलवार की कार्यवाही में हिंदू पक्षकारों ने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं और यह स्पष्ट किया कि वे विवादित भूमि के बदले किसी अन्य स्थान पर जमीन लेने के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करेंगे।
हिंदू पक्ष का कहना है कि वह समझौते का सैद्धांतिक रूप से विरोधी नहीं है, लेकिन किसी भी समझौते की आधारशिला न्याय, अधिकार और न्यायिक प्रक्रिया होनी चाहिए। वहीं, मुस्लिम पक्ष की मंगलवार की वार्ता में अनुपस्थिति के कारण समझौते की दिशा में कोई नई सहमति सामने नहीं आ सकी।
हिंदू पक्ष के कई अधिवक्ता और पक्षकार रहे मौजूद
लोक अदालत में हुई कार्यवाही के दौरान हिंदू पक्ष की ओर से अधिवक्ता अजय प्रताप सिंह, दिनेश फलाहारी, महेश खंडेलवाल, कपिल शर्मा, विजय बहादुर सिंह, हरेराम त्रिपाठी, प्रदीप श्रीवास्तव सहित अन्य पक्षकार और अधिवक्ता उपस्थित रहे।
फिलहाल, तीसरी वार्ता भी बिना किसी सहमति के समाप्त हो गई है। अब प्रस्तावित अगली कार्यवाही में दोनों पक्षों की मौजूदगी और उनके रुख से यह स्पष्ट होगा कि समझौते की कोशिश आगे बढ़ती है या मामला न्यायालय में अपने कानूनी रास्ते पर आगे जारी रहता है।

























